भाई दूज 2026 में 11 नवंबर, बुधवार को है। यह कार्तिक शुक्ल द्वितीया को, पाँच दिन के दीपोत्सव के अंतिम दिन मनाया जाता है; इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। बहनें भाई को तिलक लगाकर उसकी लंबी आयु की कामना करती हैं और उसे भोजन कराती हैं। तिलक परंपरा से अपराह्न काल में होता है; अपने शहर का समय नीचे देखें।
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दीपोत्सव 2026: धनतेरस 6 नवंबर से भाई दूज 11 नवंबर तक
| तारीख | पर्व | समय (नई दिल्ली) |
|---|---|---|
| 6 नवंबर शुक्रवार | धनतेरस | 6:03–7:58 PM पूजा मुहूर्त |
| 7 नवंबर शनिवार, रात | काली चौदस | 11:39 PM–12:31 AM निशीथ काल |
| 8 नवंबर रविवार, भोर | नरक चतुर्दशी | 5:41–6:38 AM अभ्यंग स्नान |
| 8 नवंबर रविवार, शाम | दीपावली | 5:55–7:51 PM लक्ष्मी पूजा |
| 10 नवंबर मंगलवार | गोवर्धन पूजा | 6:40–8:50 AM प्रातःकाल |
| 11 नवंबर बुधवार | भाई दूज | 1:10–3:20 PM तिलक (अपराह्न) |
समय नई दिल्ली के, हमारी गणना से (Drik Panchang से मिलान); अपने शहर का समय हर पर्व के पन्ने पर। 9 नवंबर को 12:33 PM तक अमावस्या है, इसलिए गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को।
एक नज़र में
- तिथि
- कार्तिक शुक्ल द्वितीया
- अन्य नाम
- यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया, भाऊबीज, भाई फोंटा, भाई टीका
- तिलक का समय
- अपराह्न काल, द्वितीया तिथि रहते
- मुख्य कर्म
- बहन द्वारा भाई को तिलक, आरती और भोजन
- कथा
- बहन यमुना के घर यमराज का भोजन
- उसी दिन
- चित्रगुप्त पूजा (कायस्थ परंपरा), मथुरा में यमुना स्नान
- दीपोत्सव
- पाँच दिन के पर्व का अंतिम दिन
एक पर्व, कई नाम
सूर्य की संतानों में यम और यमी भाई-बहन हैं, और परंपरा में यमी ही यमुना नदी मानी जाती हैं। इसी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया का एक नाम यम द्वितीया है। भाई-बहन के स्नेह का यह पर्व पूरे भारत और नेपाल में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।
उत्तर भारत: भाई दूज, भैया दूज
बहनें रोली और अक्षत से भाई को तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं और भोजन कराती हैं; भाई बहन को उपहार देता है।
लोक परंपरामहाराष्ट्र और गुजरात: भाऊबीज, भाई बीज
"बीज" द्वितीया तिथि को कहते हैं। बहनें भाई की आरती उतारकर उसे भोजन कराती हैं।
लोक परंपराबंगाल: भाई फोंटा
बहनें भाई के माथे पर फोंटा (तिलक) लगाती हैं और लोकगीत में कामना करती हैं कि यम के द्वार पर काँटे पड़ें, यानी भाई पर मृत्यु का संकट न आए।
लोक परंपरानेपाल: भाई टीका
तिहार पर्व का पाँचवाँ और अंतिम दिन। बहनें भाई को रंगीन टीका लगाकर उसकी लंबी आयु की कामना करती हैं।
लोक परंपरातिलक अपराह्न में क्यों
हिंदू काल-गणना में सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन के पाँच भाग होते हैं; इनमें चौथा भाग अपराह्न कहलाता है। प्रचलित पंचांगों में भाई दूज उस दिन रखा जाता है जिस दिन अपराह्न काल में द्वितीया तिथि हो, और तिलक और भोजन का समय भी यही अपराह्न काल बताया जाता है। फिर भी कई परिवारों में तिलक सुबह ही कर लिया जाता है; अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।
चित्रगुप्त पूजा और यमुना स्नान
चित्रगुप्त पूजा
परंपरा में चित्रगुप्त यमराज के यहाँ प्राणियों के कर्मों का लेखा रखते हैं। यम द्वितीया को कायस्थ समाज में चित्रगुप्त की पूजा होती है, जिसमें कलम और दवात की पूजा भी की जाती है।
कायस्थ परंपरामथुरा में यमुना स्नान
मथुरा के विश्राम घाट पर इस दिन भाई-बहन साथ में यमुना में स्नान करते हैं। मान्यता है कि यम द्वितीया को यमुना स्नान से यम का भय दूर होता है।
लोक परंपरापूजा विधि
- चरण 1
थाली की तैयारी
बहन पूजा की थाली सजाए: रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, मिठाई और कलावा; कई क्षेत्रों में सूखा नारियल (गोला) भी।
- चरण 2
भाई का आसन
भाई को आसन या पीढ़े पर बिठाएँ; कई परिवारों में आटे या चावल से चौक पूरा जाता है।
- चरण 3
तिलक और आरती
अपराह्न काल में भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएँ, कलावा बाँधें और दीपक से आरती उतारें।
- चरण 4
भोजन
भाई को अपने हाथ से मिठाई खिलाएँ और भोजन कराएँ; कथा के अनुसार बहन के घर भोजन ही इस पर्व का मुख्य कर्म है।
- चरण 5
उपहार
भाई बहन को उपहार देता है, और दोनों एक-दूसरे के सुख और लंबी आयु की कामना करते हैं।
यमुना के घर यमराज
प्रचलित कथा के अनुसार सूर्य की पुत्री यमुना अपने भाई यमराज से बहुत स्नेह करती थीं और बार-बार उन्हें अपने घर भोजन के लिए बुलाती थीं। अपने कार्य में व्यस्त यमराज टालते रहे। अंत में कार्तिक शुक्ल द्वितीया को वे यमुना के घर पहुँचे। यमुना ने उनका स्वागत किया, तिलक लगाया और प्रेम से भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वर माँगने को कहा। यमुना ने माँगा कि इस दिन जो भाई बहन के घर जाकर उसका आदर-सत्कार स्वीकार करे, उसे यम का भय न हो। यमराज ने यह वर दिया; इसी से यह दिन यम द्वितीया कहलाया। कथा के कई रूप प्रचलित हैं।
लोक व्रत-कथापूरी कथा पढ़ेंभाई दूज के रिश्ते
ज्ञान-ग्राफ़ में देखेंदेवता, पात्र और ऋषि 3
- यमराज · आराध्यलोक परंपरा
- यमुना · आराध्यलोक परंपरा
- चित्रगुप्त · आराध्यकायस्थ परंपरा
पर्व 1
- दीपावली · मुख्य पर्वपरंपरा
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाई दूज 2026 कब है?
11 नवंबर, बुधवार को।
भाई दूज 10 नवंबर को है या 11 नवंबर को?
11 नवंबर (बुधवार) को। द्वितीया तिथि 10 नवंबर 2:01 PM से 11 नवंबर 3:55 PM तक है; 11 नवंबर का पूरा अपराह्न (नई दिल्ली 1:10–3:20 PM) द्वितीया में है, जबकि 10 नवंबर को द्वितीया अपराह्न के दौरान शुरू होती है, इसलिए उस दिन अपराह्न का केवल एक भाग द्वितीया में है। Drik Panchang भी 11 नवंबर लिखता है।
11 नवंबर को भाई दूज पर तिलक का शुभ समय क्या है?
परंपरा से अपराह्न काल में, जब द्वितीया तिथि चल रही हो। बुधवार, 11 नवंबर 2026 को: नई दिल्ली 1:10–3:20 PM, लखनऊ 12:56–3:07 PM, जयपुर 1:16–3:27 PM, पटना 12:39–2:51 PM, चंडीगढ़ 1:11–3:19 PM, इंदौर 1:17–3:31 PM, मुंबई 1:30–3:46 PM, कोलकाता 12:27–2:41 PM, बेंगलुरु 1:13–3:32 PM। अपने शहर का समय ऊपर के बॉक्स में शहर चुनकर देखें।
भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?
कथा के अनुसार इसी तिथि को यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे और उन्होंने वर दिया था।
भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या अंतर है?
रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को होता है, जिसमें बहन भाई को राखी बाँधती है। भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को होता है, जिसमें बहन भाई को तिलक लगाकर भोजन कराती है।
भाई दूज पर चित्रगुप्त पूजा क्यों होती है?
परंपरा में चित्रगुप्त यमराज के यहाँ कर्मों का लेखा रखते हैं, इसलिए यम द्वितीया को, विशेषकर कायस्थ समाज में, उनकी पूजा होती है।
दिवाली 2026 के पाँचों दिन कब हैं?
धनतेरस 6 नवंबर (शुक्रवार), नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की भोर और दीपावली 8 नवंबर (रविवार) की शाम, गोवर्धन पूजा 10 नवंबर (मंगलवार) और भाई दूज 11 नवंबर (बुधवार)। काली चौदस की रात्रि पूजा 7 नवंबर को है (Drik Panchang)।
स्रोत
- विष्णु पुराण, अंश 3, अध्याय 2 (सूर्य की संतानें: मनु, यम और यमी)
- लोक परंपरा और यम द्वितीया की व्रत-कथा
- कायस्थ परंपरा (चित्रगुप्त पूजा)
- मुहूर्त और चंद्रोदय: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang (नई दिल्ली, 2026–27) से मिलान
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