व्रत और पर्व

छठ पूजा 2026 कब है: 15 नवंबर

रविवार, 15 नवंबर 2026

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी; मुख्य दिन षष्ठी

39 दिन बाद
छठ पूजा की भोर: नदी में खड़ी व्रती महिलाएँ फल और ठेकुआ से भरे सूप लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य देती हुईं
चित्र: AI से बनाया गया

अर्घ्य का समय

संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त)छठ का मुख्य दिन
5:28 PM
उषा अर्घ्य (सूर्योदय)अगली सुबह, इसके बाद पारण
6:44 AM (16 नव॰)
नहाय-खायपहला दिन, सूर्योदय
6:42 AM (13 नव॰)
खरनादूसरा दिन, सूर्यास्त के बाद प्रसाद
5:28 PM (14 नव॰)
षष्ठी तिथि
11:25 PM (14 नव॰) से 2:02 AM (16 नव॰) तक

घाट पर सूर्य क्षितिज से ऊपर दिखने में कुछ मिनट और लग सकते हैं।

रविवार, 15 नवंबर 2026 के लिए, भारतीय मानक समय में, चुने हुए शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रह-स्थिति से। अलग-अलग पंचांगों में 1–2 मिनट का अंतर सामान्य है। गणना कैसे होती है

संक्षेप में

छठ पूजा 2026 में संध्या अर्घ्य 15 नवंबर, रविवार को है और अगली सुबह उषा अर्घ्य के साथ व्रत पूरा होता है। यह कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक चार दिन का व्रत है, जिसमें व्रती डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और छठी मैया की पूजा करते हैं। अपने शहर का सूर्यास्त और सूर्योदय नीचे देखें।

छठ पूजा 2026: नहाय-खाय शुक्रवार 13 नवंबर, खरना शनिवार 14 नवंबर, संध्या अर्घ्य रविवार 15 नवंबर (पटना 5:01 PM, नई दिल्ली 5:28 PM) और उषा अर्घ्य सोमवार 16 नवंबर (पटना 6:07 AM, नई दिल्ली 6:44 AM)।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 7 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

शहर-वार समय: संध्या अर्घ्य

अपने शहर पर क्लिक करके उसका पूरा मुहूर्त, पास के शहर और प्रश्न देखें।

एक नज़र में

तिथि
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी
मुख्य दिन
षष्ठी: डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य
चार दिन
नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य, उषा अर्घ्य
आराध्य
सूर्य और छठी मैया (षष्ठी देवी)
व्रत
खरना के बाद लगभग 36 घंटे, परंपरा से निर्जल
मुख्य प्रसाद
ठेकुआ, गुड़ की खीर (रसियाव), मौसमी फल
विशेष रूप से
बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, नेपाल का तराई क्षेत्र
साल में
दो बार: कार्तिक की छठ और चैती छठ (चैत्र शुक्ल षष्ठी)

चार दिन का व्रत

छठ का व्रत चार दिनों में पूरा होता है। हर दिन की तारीख ऊपर समय के बॉक्स में दी गई है; विधि क्षेत्र और परिवार के अनुसार थोड़ी बदलती है।

पहला दिन: नहाय-खाय

चतुर्थी को व्रती नदी, तालाब या घर पर स्नान करके घर की शुद्धि करते हैं और एक बार सात्विक भोजन करते हैं; परंपरा से कद्दू (लौकी) की सब्ज़ी, चने की दाल और चावल, सेंधा नमक में।

लोक परंपरा

दूसरा दिन: खरना

पंचमी को दिन भर उपवास के बाद शाम को पूजा करके गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसे लोहंडा भी कहते हैं। इसके बाद निर्जल व्रत शुरू होता है।

लोक परंपरा

तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य

षष्ठी को ठेकुआ और फलों से सूप और दउरा सजाकर परिवार घाट पर जाता है। व्रती जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

लोक परंपरा

चौथा दिन: उषा अर्घ्य

सप्तमी को सूर्योदय से पहले घाट पर पहुँचकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण होता है।

लोक परंपरा

छठी मैया और सूर्य

छठ में सूर्य और छठी मैया की साथ-साथ पूजा होती है। लोक मान्यता में छठी मैया सूर्य की बहन हैं, और उन्हें षष्ठी देवी माना जाता है।

षष्ठी देवी

ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खंड में षष्ठी देवी को मूल प्रकृति का छठा अंश, देवसेना नाम वाली और बच्चों की रक्षा करने वाली देवी बताया गया है। इसी से संतान के सुख और रक्षा की कामना से छठ व्रत रखा जाता है।

ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंड; लोक परंपरा

सविता की उपासना

वेदों में सूर्य की सविता के रूप में स्तुति है; गायत्री मंत्र सविता की ही प्रार्थना है। छठ का अर्घ्य इसी प्रत्यक्ष देवता की उपासना है।

ऋग्वेद 3.62.10

महाभारत में सूर्य उपासना

महाभारत के वन पर्व के अनुसार वनवास के आरंभ में पुरोहित धौम्य के कहने पर युधिष्ठिर ने सूर्य की उपासना की, और सूर्य ने उन्हें अक्षय पात्र दिया, जिससे वन में सबके लिए भोजन मिलता रहा। लोक परंपरा में द्रौपदी और सूर्यपुत्र कर्ण को भी छठ से जोड़ा जाता है।

महाभारत, वन पर्व; लोक परंपरा

शुद्धता और लोक परंपरा

छठ को शुद्धता का व्रत माना जाता है। प्रसाद परंपरा से मिट्टी के चूल्हे पर, आम की लकड़ी से बनाया जाता है, और प्याज़-लहसुन का प्रयोग नहीं होता। पूजा में बाँस के सूप और दउरे का प्रयोग होता है। सामान्यतः इसमें पुरोहित की आवश्यकता नहीं होती; व्रती स्वयं अर्घ्य देते हैं और घाट पर छठ के लोकगीत गाए जाते हैं। मन्नत पूरी होने पर कई परिवार संध्या अर्घ्य की रात गन्नों से कोसी भरते हैं। स्त्री और पुरुष दोनों यह व्रत रखते हैं।

पूजा विधि

  1. चरण 1

    नहाय-खाय

    स्नान करके घर और रसोई की सफ़ाई करें, और एक बार सात्विक भोजन करें।

  2. चरण 2

    खरना

    दिन भर उपवास के बाद शाम को पूजा करके गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करें और बाँटें। इसके बाद निर्जल व्रत शुरू होता है; गर्भावस्था, बीमारी या दवा चलने पर स्वास्थ्य के अनुसार निर्णय लें।

  3. चरण 3

    प्रसाद और दउरा

    षष्ठी को ठेकुआ बनाएँ और सूप-दउरे में फल, गन्ना, नारियल और दीपक सजाएँ।

  4. चरण 4

    संध्या अर्घ्य

    सूर्यास्त से पहले घाट पर जल में खड़े होकर, सूप लेकर डूबते सूर्य को दूध और जल का अर्घ्य दें।

  5. चरण 5

    उषा अर्घ्य

    सप्तमी को सूर्योदय से पहले घाट पर पहुँचें और उगते सूर्य को अर्घ्य दें; छठी मैया से परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

  6. चरण 6

    पारण

    अर्घ्य के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें; प्रसाद घाट पर और घर-पड़ोस में बाँटा जाता है।

कथा

राजा प्रियव्रत और षष्ठी देवी

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार स्वायंभुव मनु के पुत्र राजा प्रियव्रत को बहुत समय तक संतान नहीं हुई। लंबी प्रतीक्षा के बाद रानी ने पुत्र को जन्म दिया, पर वह मृत पैदा हुआ। शोक में डूबे राजा के सामने तब एक दिव्य देवी प्रकट हुईं। उन्होंने स्वयं को देवसेना, षष्ठी देवी बताया और बालक को जीवित कर दिया। तब राजा ने षष्ठी देवी की पूजा की और उनकी पूजा का प्रचार किया। लोक परंपरा में छठ व्रत और शिशु के जन्म के छठे दिन की "छठी" इन्हीं षष्ठी देवी से जोड़ी जाती है।

ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंड; लोक परंपरापूरी कथा पढ़ें

श्लोक

तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि।धियो यो नः प्रचोदयात्॥
हम सविता देव (सूर्य) के उस श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को प्रेरित करे।ऋग्वेद 3.62.10 (गायत्री मंत्र)
जपाकुसुमसङ्काशं काश्यपेयं महाद्युतिम्।तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥
जपा (गुड़हल) के फूल जैसी लाल आभा वाले, कश्यप के पुत्र, महान तेज वाले, अंधकार के शत्रु और सब पापों का नाश करने वाले दिवाकर (सूर्य) को मैं प्रणाम करता हूँ।नवग्रह स्तोत्र, श्लोक 1 (परंपरा से वेदव्यास रचित)

छठ पूजा के रिश्ते

ज्ञान-ग्राफ़ में देखें

देवता, पात्र और ऋषि 2

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छठ पूजा 2026 कब है?

संध्या अर्घ्य 15 नवंबर, रविवार को है और उषा अर्घ्य अगली सुबह। नहाय-खाय और खरना इससे पहले के दो दिन होते हैं; चारों दिनों की तारीखें ऊपर देखें।

नहाय-खाय 2026 कब है?

शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 को, छठ का पहला दिन (नई दिल्ली में सूर्योदय 6:42 AM, पटना में 6:05 AM)। इसके बाद 14 नवंबर को खरना, 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य और 16 नवंबर को उषा अर्घ्य है।

खरना 2026 कब है?

शनिवार, 14 नवंबर 2026 को, छठ का दूसरा दिन। दिन भर उपवास के बाद शाम को सूर्यास्त के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है; सूर्यास्त नई दिल्ली में 5:28 PM, पटना में 5:01 PM।

15 और 16 नवंबर को छठ का अर्घ्य किस समय है?

संध्या अर्घ्य रविवार, 15 नवंबर 2026 को डूबते सूर्य को दिया जाता है; सूर्यास्त: पटना 5:01 PM, नई दिल्ली 5:28 PM, लखनऊ 5:16 PM, कोलकाता 4:53 PM, मुंबई 6:00 PM, बेंगलुरु 5:50 PM। उषा अर्घ्य सोमवार, 16 नवंबर 2026 को उगते सूर्य को; सूर्योदय: पटना 6:07 AM, नई दिल्ली 6:44 AM, लखनऊ 6:26 AM, कोलकाता 5:50 AM, मुंबई 6:46 AM, बेंगलुरु 6:19 AM। बाकी शहर ऊपर की सूची में।

छठी मैया कौन हैं?

छठी मैया को षष्ठी देवी माना जाता है, जिन्हें ब्रह्मवैवर्त पुराण में बच्चों की रक्षा करने वाली देवी कहा गया है। लोक मान्यता में वे सूर्य की बहन हैं।

खरना क्या है?

छठ का दूसरा दिन। दिन भर उपवास के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाता है, जिसके बाद निर्जल व्रत शुरू होता है।

क्या छठ साल में दो बार होती है?

हाँ। कार्तिक शुक्ल षष्ठी की छठ सबसे बड़ी है; चैत्र शुक्ल षष्ठी को चैती छठ भी मनाई जाती है।

स्रोत

  1. ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंड (षष्ठी देवी और राजा प्रियव्रत)
  2. देवी भागवत पुराण, स्कंध 9 (षष्ठी देवी)
  3. ऋग्वेद 3.62.10 (गायत्री मंत्र)
  4. महाभारत, वन पर्व (युधिष्ठिर की सूर्य उपासना)
  5. नवग्रह स्तोत्र
  6. लोक परंपरा
  7. मुहूर्त और चंद्रोदय: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang (नई दिल्ली, 2026–27) से मिलान

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