धनतेरस 2026 पर क्या खरीदें

शुक्रवार, 6 नवंबर 2026: परंपरा की चीज़ें, हर एक के स्रोत के साथ, और पूजा व खरीदारी का समय।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 8 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
धनतेरस की शाम दहलीज़ पर पीतल-ताँबे के नए बर्तन, चाँदी के सिक्के, चार बत्ती वाला दीया, रंगोली और दरवाज़े पर गेंदे का तोरण
चित्र: AI से बनाया गया
संक्षेप में

धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है। परंपरा के अनुसार इस दिन नए बर्तन, चाँदी या सोना, झाड़ू, साबुत धनिया और दीये खरीदे जाते हैं, और दिवाली के लिए लक्ष्मी-गणेश की नई प्रतिमा व पूजा की सामग्री भी। यह लोक प्रथा है, किसी ग्रंथ की विधि नहीं: गीता प्रेस की ‘व्रत-परिचय’ इस दिन के लिए यम दीपदान और द्वार पर रात भर जलने वाला दीपक बताती है। नई दिल्ली में पूजा का मुहूर्त 6:03–7:58 PM है।

परंपरा से क्या खरीदा जाता है

हर चीज़ लोक परंपरा है, किसी ग्रंथ का नियम नहीं; वही चीज़ें ली गई हैं जिन्हें कम से कम दो स्रोत बताते हैं। अपने परिवार की रीति से मिलाएँ।

  1. नए बर्तन परंपरा

    धनतेरस पर घर के लिए नया बर्तन लाना सबसे प्रचलित परंपरा है: पीतल, ताँबे, चाँदी या स्टील का, जैसा घर में चलता हो। भारतकोश के अनुसार इस दिन पुराने बर्तन बदलना और नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

    स्रोत: भारतकोश: धनतेरस; अमर उजाला (आगरा), 21 अक्टूबर 2022; पत्रिका, 2 अक्टूबर 2025

  2. चाँदी या सोना परंपरा

    चाँदी का सिक्का, बर्तन या कोई छोटा गहना, या सोना, अपनी सामर्थ्य के अनुसार। भारतकोश चाँदी के बर्तन को इस दिन विशेष मानता है। कई परिवार दिवाली की पूजा में चाँदी के सिक्के रखते हैं; गीता प्रेस की विधि में लक्ष्मी पूजा के साथ ‘द्रव्य-लक्ष्मी’ (रुपये या सिक्के) की पूजा होती है।

    स्रोत: भारतकोश: धनतेरस; अमर उजाला (आगरा), 21 अक्टूबर 2022; गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, पृ. 243, 250, 256–257

  3. झाड़ू परंपरा

    बहुत से घरों में धनतेरस पर नई झाड़ू लाई जाती है। इन लेखों में इसे घर की सफ़ाई और लक्ष्मी के स्वागत से जोड़ा गया है। कुछ लेख इसे किसी पुराण से जोड़ते हैं; वह हम जाँच नहीं पाए, इसलिए नहीं लिखा।

    स्रोत: अमर उजाला (आगरा), 21 अक्टूबर 2022; पत्रिका, 2 अक्टूबर 2025

  4. साबुत धनिया परंपरा

    थोड़ा साबुत धनिया खरीदकर लक्ष्मी पूजा में चढ़ाया जाता है; कई घर बाद में इसे तिजोरी में रखते हैं या बाद में बो देते हैं, और गाँवों में धनिया-गुड़ का भोग लगता है। गीता प्रेस की दिवाली पूजा में भी धनिया है: कहीं-कहीं लक्ष्मी जी को अक्षत की जगह धनिया या हल्दी, और बही की थैली में हल्दी, कमलगट्टे के साथ धनिया।

    स्रोत: डीएनए हिंदी, 15 अक्टूबर 2022; पत्रिका, 2 अक्टूबर 2025; गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, पृ. 243, 250, 256–257

  5. मिट्टी के दीये, तेल और बत्ती परंपरा

    धनतेरस की शाम के दीयों के लिए: यम दीपदान और द्वार का दीपक (नीचे), और दिवाली के दीये। व्रत-परिचय में यम दीपदान के लिए मिट्टी के दीये, तिल का तेल और नई रुई की बत्ती बताई गई है; भारतकोश के अनुसार यम के लिए आटे का दीपक मुख्य द्वार पर रखा जाता है, और अमर उजाला के लेख में द्वार पर चार बत्ती का दीपक।

    स्रोत: गीता प्रेस, व्रत-परिचय (पं. हनूमान शर्मा), पृ. 155; भारतकोश: धनतेरस; अमर उजाला (आगरा), 21 अक्टूबर 2022

  6. लक्ष्मी-गणेश की नई प्रतिमा परंपरा

    दिवाली की पूजा के लिए लक्ष्मी-गणेश की नई प्रतिमा या चित्र बहुत से लोग धनतेरस पर ही लाते हैं। गीता प्रेस और Drik Panchang दोनों दिवाली पर नई प्रतिमाओं की पूजा बताते हैं।

    स्रोत: भारतकोश: धनतेरस; पत्रिका, 2 अक्टूबर 2025; Drik Panchang: लक्ष्मी पूजा विधि

  7. खील-बताशे और पूजा की सामग्री परंपरा

    भारतकोश के अनुसार धनतेरस पर दीपावली पूजन की चीज़ें, जैसे खील-बताशे, भी खरीदी जाती हैं। गीता प्रेस की विधि में दिवाली पर धान का लावा (खील) गणेश, लक्ष्मी और सब देवताओं को चढ़ाया जाता है। पूरी सूची दिवाली पूजा विधि के पन्ने पर है।

    स्रोत: भारतकोश: धनतेरस; गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, पृ. 243, 250, 256–257

यह पन्ना भाव, निवेश या दुकानों की सलाह नहीं देता। कुछ लेखों में ‘क्या न खरीदें’ की सूचियाँ और भाग्य के दावे भी मिलते हैं; उनका कोई लिखित स्रोत हमें नहीं मिला, इसलिए वे यहाँ नहीं हैं।

ग्रंथ में इस दिन का विधान

यम दीपदान

व्रत-परिचय (स्कन्द पुराण के नाम से) के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की शाम मिट्टी के दीयों में तिल का तेल और नई रुई की बत्ती डालकर, जलाकर, गंध आदि से पूजकर, दक्षिण की ओर मुँह करके यमराज के लिए दीपदान किया जाता है। यह प्रदोष काल में होता है।

द्वार पर दीपक

व्रत-परिचय के धनत्रयोदशी व्रत में शाम को तेल से भरा एक दीपक जलाकर, पूजकर, घर के द्वार पर अन्न की ढेरी पर रखा जाता है, और वह रात भर जलता रहना चाहिए।

धन्वंतरि पूजा

इस त्रयोदशी को धन्वंतरि जयंती भी मानी जाती है। Drik Panchang की धन्वंतरि पूजा विधि में घी का दीपक, चंदन, फूल, धूप, नैवेद्य और पान से पूजा है, और ध्यान घी के दीपक की लौ में किया जाता है।

नई दिल्ली: धनतेरस पूजा मुहूर्त, 6 नवंबर

धनतेरस पूजा मुहूर्तप्रदोष काल + वृषभ लग्न + तिथि
6:03–7:58 PM
प्रदोष कालरात्रि का पहला पाँचवाँ भाग
5:33–8:10 PM
वृषभ कालस्थिर लग्न
6:03–7:58 PM
यम दीपदानसूर्यास्त के बाद, प्रदोष काल में
5:33–8:10 PM
त्रयोदशी तिथि
10:32 AM से 10:49 AM (7 नव॰) तक

भारतीय मानक समय में, SanatanBodh पंचांग गणना; Drik Panchang से मिलान। अपने शहर का मुहूर्त

नई दिल्ली में धनतेरस 2026 चौघड़िया मुहूर्त (खरीदारी)

धनतेरस पर नए बर्तन और सोना-चाँदी खरीदने की लोक-परंपरा है। Drik Panchang धनतेरस पर सोना खरीदने के लिए त्रयोदशी तिथि रहते पड़ने वाले शुभ चौघड़िया (अमृत, शुभ, लाभ और चर) देता है; शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 के, और त्रयोदशी अगली सुबह तक रहती है तो उस सुबह के, वे समय नीचे हैं। धनतेरस की पूजा का मुहूर्त प्रदोष काल और वृषभ लग्न से तय होता है, जो ऊपर दिया है।

शुक्रवार, 6 नवंबर 2026नई दिल्ली

मुहूर्तसमयचौघड़िया
प्रातः सुबह10:32–10:43 AMअमृत वार वेला
अपराह्न दोपहर12:05–1:27 PMशुभ
अपराह्न दोपहर4:11–5:33 PMचर
रात्रि रात8:49–10:27 PMलाभ काल रात्रि
रात्रि रात12:05–4:59 AM7 नवंबरशुभ 12:05–1:43 AMअमृत 1:43–3:21 AMचर 3:21–4:59 AM
प्रातः सुबह7:59–9:21 AM7 नवंबरशुभ

त्रयोदशी: 10:32 AM, 6 नवंबर से 10:49 AM, 7 नवंबर तक (नई दिल्ली)। वार वेला, काल वेला और काल रात्रि में पंचांग सामान्य दिनों में शुभ काम शुरू न करने की सलाह देते हैं; Drik Panchang ने इस पर्व की सूची में ये चौघड़िया भी रखे हैं, इसलिए यहाँ वे चिह्नित करके दिखाए गए हैं।

स्रोत: Drik Panchang, धनतेरस पर सोना खरीदने का शुभ समय (drikpanchang.com); समय SanatanBodh की गणना से, नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और जयपुर के लिए Drik Panchang से मिलान (2 मिनट के भीतर)।

पूजा के लिए

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनतेरस 2026 कब है?

शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को। उस दिन शाम को प्रदोष काल में पूजा और यम दीपदान होता है।

धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए?

परंपरा के अनुसार नए बर्तन (पीतल, ताँबा, चाँदी या स्टील), चाँदी या सोना अपनी सामर्थ्य से, झाड़ू, थोड़ा साबुत धनिया, मिट्टी के दीये, और दिवाली के लिए लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, खील-बताशे व पूजा की सामग्री। ये लोक प्रथाएँ हैं; अपने परिवार की रीति से मिलाएँ।

क्या धनतेरस पर खरीदारी ज़रूरी है?

खरीदारी लोक प्रथा है। गीता प्रेस की ‘व्रत-परिचय’ में इस दिन के लिए यम दीपदान और द्वार पर दीपक का विधान है, खरीदारी का नहीं। धनतेरस को धन्वंतरि जयंती भी मानी जाती है।

धनतेरस पर धनिया क्यों खरीदते हैं?

यह लोक प्रथा है: थोड़ा साबुत धनिया लक्ष्मी पूजा में चढ़ाया जाता है, फिर कई घरों में तिजोरी में रखा या बोया जाता है। गीता प्रेस की दिवाली पूजा में भी कहीं-कहीं लक्ष्मी जी को अक्षत की जगह धनिया चढ़ता है और बही की थैली में धनिया रखा जाता है।

खरीदारी का शुभ समय क्या है?

Drik Panchang धनतेरस पर खरीदारी के लिए त्रयोदशी रहते पड़ने वाले शुभ चौघड़िया देता है; नई दिल्ली के समय इसी पन्ने पर हैं, दूसरे शहरों के धनतेरस पृष्ठ पर। पूजा का मुहूर्त प्रदोष काल और वृषभ लग्न से तय होता है।

स्रोत

  1. गीता प्रेस, व्रत-परिचय (पं. हनूमान शर्मा), पृ. 155
  2. गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश, पृ. 243, 250, 256–257
  3. Drik Panchang: धन्वन्तरि पूजा विधि
  4. Drik Panchang: लक्ष्मी पूजा विधि
  5. भारतकोश: धनतेरस
  6. अमर उजाला (आगरा), 21 अक्टूबर 2022
  7. पत्रिका, 2 अक्टूबर 2025
  8. डीएनए हिंदी, 15 अक्टूबर 2022

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