आरतीकुबेर

कुबेर जी की आरती: ॐ जय यक्ष कुबेर हरे

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 3 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
कुबेर पूजा: सिक्कों से भरी लकड़ी की पेटी, पीतल की कुबेर प्रतिमा, कलश और दीया
चित्र: AI से बनाया गया
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  1. पद 1

    ॐ जै यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे। शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे॥

    हे यक्षों के स्वामी कुबेर, आपकी जय हो (‘जै’ यानी जय)। जो भक्त आपकी शरण में आते हैं, कुबेर उनके भंडार भर देते हैं।

  2. पद 2

    शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े, स्वामी भक्त कुबेर बड़े। दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े॥

    शिव के भक्तों में कुबेर बहुत बड़े भक्त हैं। आरती कहती है कि उन्होंने दैत्यों, दानवों और मनुष्यों से अनेक युद्ध लड़े।

  3. पद 3

    स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे, स्वामी सिर पर छत्र फिरे। योगिनी मंगल गावैं, सब जय जय कार करैं॥

    आप सोने के सिंहासन पर बैठे हैं और सिर पर छत्र डुलाया जाता है। योगिनियाँ मंगल गीत गाती हैं और सब आपकी जय-जयकार करते हैं।

  4. पद 4

    गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे। दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करें॥

    आपके हाथों में गदा, त्रिशूल और बहुत से शस्त्र हैं। दुख, भय और संकट से छुड़ाने वाले आप धनुष की टंकार करते हैं।

  5. पद 5

    भाँति भाँति के व्यंजन बहुत बने, स्वामी व्यंजन बहुत बने। मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने॥

    आपके लिए तरह-तरह के बहुत से व्यंजन बने हैं। आपको मोहनभोग के साथ उड़द और चने का भोग लगाया जाता है।

  6. पद 6

    बल बुद्धि विद्या दाता, हम तेरी शरण पड़े, स्वामी हम तेरी शरण पड़े। अपने भक्त जनों के, सारे काम संवारे॥

    हे बल, बुद्धि और विद्या देने वाले, हम आपकी शरण में आए हैं। आप अपने भक्तों के सारे काम सँवारते हैं।

  7. पद 7

    मुकुट मणी की शोभा, मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले। अगर कपूर की बाती, घी की जोत जले॥

    आपके मुकुट में मणि शोभित है और गले में मोतियों का हार है। (आरती में) अगर और कपूर की बाती और घी का दीपक जल रहा है।

  8. पद 8

    यक्ष कुबेर जी की आरती, जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे। कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे॥

    प्रेमपाल स्वामी कहते हैं कि जो कोई यक्षराज कुबेर जी की यह आरती गाता है, वह मनचाहा फल पाता है।

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/kuber-aarti/

संक्षेप में

“ॐ जय यक्ष कुबेर हरे” धन के स्वामी और यक्षों के राजा कुबेर की आरती है। इसमें कुबेर को शिव का बड़ा भक्त, शरण में आए भक्तों के भंडार भरने वाला और बल, बुद्धि और विद्या देने वाला कहा गया है। धनतेरस की शाम और दीपावली के लक्ष्मी पूजन में लक्ष्मी और गणेश के साथ कुबेर की पूजा के बाद यह आरती गाई जाती है।

यह पाठ कई स्रोतों में एक जैसा मिलता है। ‘जै’ ‘जय’ का ही लोक रूप है, और कई जगह ‘ॐ’ की जगह ‘ऊँ’ छपा मिलता है। इसकी लय और टेक का ढाँचा “ॐ जय जगदीश हरे” जैसा है। अंतिम पद में ‘प्रेमपाल स्वामी’ का नाम (छाप) आता है, पर उनके बारे में प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती। कुबेर जी की एक और आरती “जय कुबेर स्वामी, प्रभु जय कुबेर स्वामी” भी गाई जाती है, जो इससे अलग है। गाते समय पहला पद (टेक) हर पद के बाद दोहराया जाता है।

आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुबेर जी की आरती कब गाई जाती है?

धनतेरस की शाम को लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की पूजा के बाद, और दीपावली के लक्ष्मी पूजन में। इसे कुबेर जी की किसी भी पूजा में गाया जा सकता है।

कुबेर कौन हैं?

कुबेर धन के स्वामी, यक्षों के राजा और उत्तर दिशा के दिक्पाल माने जाते हैं। वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड के अनुसार वे ऋषि विश्रवा के पुत्र और रावण के बड़े सौतेले भाई थे। लंका और पुष्पक विमान पहले उन्हीं के थे, जिन्हें रावण ने छीन लिया; तब वे कैलाश चले गए।

आरती में कुबेर को शिव का भक्त क्यों कहा गया है?

परंपरा में कुबेर शिव के भक्त और सखा माने जाते हैं। अमरकोश में कुबेर का एक नाम ‘त्र्यम्बकसख’ (शिव के सखा) दिया गया है, और वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड में शिव के उन्हें सखा बनाने का प्रसंग है।

इस आरती के रचयिता कौन हैं?

अंतिम पद में ‘कहत प्रेमपाल स्वामी’ आता है। उनके बारे में प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती।

क्या कुबेर जी की कोई और आरती भी है?

हाँ, “जय कुबेर स्वामी, प्रभु जय कुबेर स्वामी” से शुरू होने वाली एक और आरती भी गाई जाती है। यहाँ “ॐ जय यक्ष कुबेर हरे” दी गई है, जो सबसे अधिक छपी मिलती है।

स्रोत

  1. परंपरागत आरती पाठ
  2. कुबेर का परिचय: वाल्मीकि रामायण, उत्तर कांड
  3. कुबेर का नाम ‘त्र्यम्बकसख’: अमरकोश

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