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कुबेर जी की आरती: ॐ जय यक्ष कुबेर हरे PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/kuber-aarti/
“ॐ जय यक्ष कुबेर हरे” धन के स्वामी और यक्षों के राजा कुबेर की आरती है। इसमें कुबेर को शिव का बड़ा भक्त, शरण में आए भक्तों के भंडार भरने वाला और बल, बुद्धि और विद्या देने वाला कहा गया है। धनतेरस की शाम और दीपावली के लक्ष्मी पूजन में लक्ष्मी और गणेश के साथ कुबेर की पूजा के बाद यह आरती गाई जाती है।
यह पाठ कई स्रोतों में एक जैसा मिलता है। ‘जै’ ‘जय’ का ही लोक रूप है, और कई जगह ‘ॐ’ की जगह ‘ऊँ’ छपा मिलता है। इसकी लय और टेक का ढाँचा “ॐ जय जगदीश हरे” जैसा है। अंतिम पद में ‘प्रेमपाल स्वामी’ का नाम (छाप) आता है, पर उनके बारे में प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती। कुबेर जी की एक और आरती “जय कुबेर स्वामी, प्रभु जय कुबेर स्वामी” भी गाई जाती है, जो इससे अलग है। गाते समय पहला पद (टेक) हर पद के बाद दोहराया जाता है।
आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कुबेर जी की आरती कब गाई जाती है?
धनतेरस की शाम को लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की पूजा के बाद, और दीपावली के लक्ष्मी पूजन में। इसे कुबेर जी की किसी भी पूजा में गाया जा सकता है।
कुबेर कौन हैं?
कुबेर धन के स्वामी, यक्षों के राजा और उत्तर दिशा के दिक्पाल माने जाते हैं। वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड के अनुसार वे ऋषि विश्रवा के पुत्र और रावण के बड़े सौतेले भाई थे। लंका और पुष्पक विमान पहले उन्हीं के थे, जिन्हें रावण ने छीन लिया; तब वे कैलाश चले गए।
आरती में कुबेर को शिव का भक्त क्यों कहा गया है?
परंपरा में कुबेर शिव के भक्त और सखा माने जाते हैं। अमरकोश में कुबेर का एक नाम ‘त्र्यम्बकसख’ (शिव के सखा) दिया गया है, और वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड में शिव के उन्हें सखा बनाने का प्रसंग है।
इस आरती के रचयिता कौन हैं?
अंतिम पद में ‘कहत प्रेमपाल स्वामी’ आता है। उनके बारे में प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती।
क्या कुबेर जी की कोई और आरती भी है?
हाँ, “जय कुबेर स्वामी, प्रभु जय कुबेर स्वामी” से शुरू होने वाली एक और आरती भी गाई जाती है। यहाँ “ॐ जय यक्ष कुबेर हरे” दी गई है, जो सबसे अधिक छपी मिलती है।
स्रोत
- परंपरागत आरती पाठ
- कुबेर का परिचय: वाल्मीकि रामायण, उत्तर कांड
- कुबेर का नाम ‘त्र्यम्बकसख’: अमरकोश
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पाठ का मिलान: drikpanchang.com, bhaktibharat.com, srimandir.com, poojaaarti.com
