धनतेरस 2026 में 6 नवंबर, शुक्रवार को है। यह कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (पूर्णिमांत) को, दीपावली से दो दिन पहले मनाई जाती है, और इस त्रयोदशी को आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि की जयंती भी माना जाता है। शाम को प्रदोष काल में, वृषभ लग्न रहते लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की पूजा और यमराज के लिए दीपदान किया जाता है।
एक नज़र में
- तिथि
- कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (पूर्णिमांत)
- अन्य नाम
- धनत्रयोदशी, धन्वंतरि त्रयोदशी
- पूजा का समय
- प्रदोष काल में वृषभ लग्न, त्रयोदशी रहते
- आराध्य
- धन्वंतरि, लक्ष्मी, कुबेर
- शाम को
- यमराज के लिए दक्षिण दिशा में दीपदान
- लोक प्रथा
- नए बर्तन, सोना-चाँदी खरीदना
- दीपोत्सव
- पाँच दिन के पर्व का पहला दिन
धन्वंतरि: समुद्र मंथन से प्रकट
भागवत पुराण के अनुसार समुद्र मंथन के अंत में धन्वंतरि हाथ में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए। उन्हें भगवान विष्णु का अंशावतार और आयुर्वेद का प्रवर्तक कहा गया है। परंपरा में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी उनकी जयंती है, इसलिए इस दिन अच्छे स्वास्थ्य की कामना से उनकी पूजा होती है।
भागवत पुराण 8.8.34
धन्वंतरि को भगवान विष्णु के अंश का अंश और आयुर्वेद का ज्ञाता बताया गया है।
भागवत पुराण 8.8.31–35यम दीपदान
धनतेरस की शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज के लिए दीपक जलाने की परंपरा है। स्कंद पुराण के नाम से उद्धृत एक श्लोक (नीचे) के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की संध्या को घर के बाहर यम के लिए दीप देने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
धनतेरस पर खरीदारी
इस दिन नए बर्तन, सोना-चाँदी या घर के लिए उपयोगी वस्तुएँ खरीदने की लोक-परंपरा है। इसे शुभ माना जाता है, पर यह किसी ग्रंथ की विधि नहीं, लोक प्रथा है।
पूजा विधि
- चरण 1
शाम से पहले तैयारी
घर की सफ़ाई, मुख्य द्वार पर रंगोली और दीपक।
- चरण 2
प्रदोष काल में पूजा
वृषभ लग्न रहते धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर की पूजा।
- चरण 3
यम दीपदान
घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक दीपक रखें।
- चरण 4
नई वस्तु का पूजन
इस दिन खरीदी गई वस्तु को पूजा में रखें (लोक परंपरा)।

राजा हिम के पुत्र की कथा
प्रचलित कथा के अनुसार राजा हिम के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से मृत्यु लिखी थी। उस रात उसकी पत्नी ने कमरे के द्वार पर गहनों और सिक्कों का ढेर लगाकर चारों ओर दीपक जला दिए और रात भर कथाएँ और गीत सुनाती रही। सर्प के रूप में आए यमराज दीपों की चमक से ढेर पर ही बैठे रह गए और सुबह लौट गए। इसी से धनतेरस की रात यम के लिए दीपदान की प्रथा जोड़ी जाती है।
लोक कथाश्लोक
कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां निशामुखे।
यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनश्यति॥ज्ञान-ग्राफ़ में धनतेरस
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धनतेरस 2026 कब है?
6 नवंबर, शुक्रवार को।
धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
जब प्रदोष काल और वृषभ लग्न एक साथ हों और त्रयोदशी तिथि चल रही हो। ऊपर अपने शहर का समय देखें।
धनतेरस पर किसकी पूजा होती है?
धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर की; शाम को यमराज के लिए दीपदान किया जाता है।
यम का दीपक किस दिशा में रखें?
घर के बाहर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके।
स्रोत
- भागवत पुराण 8.8.31–35 (धन्वंतरि का प्राकट्य)
- स्कंद पुराण के नाम से उद्धृत यम दीपदान श्लोक
- लोक परंपरा
- मुहूर्त और चंद्रोदय: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang (नई दिल्ली, 2026–27) से मिलान
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