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भगवान धन्वंतरि की आरती: जय धन्वंतरि देवा PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/dhanvantari-aarti/
“जय धन्वंतरि देवा” आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि की आरती है। भागवत पुराण के अनुसार धन्वंतरि समुद्र मंथन में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे, और आरती इसी प्रसंग को याद करती है। यह धनतेरस पर, जिसे धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं, धन्वंतरि पूजा के अंत में गाई जाती है। इसके रचयिता का नाम ज्ञात नहीं है।
यह पाठ कई स्रोतों में लगभग एक जैसा मिलता है। कहीं ‘धन्वंतरि’ को ‘धन्वन्तरि’ और ‘सुंदर’ को ‘सुन्दर’ लिखा जाता है, और एक संस्करण में पद 4 की दूसरी पंक्ति ‘आयुर्वेद वनस्पति से, है शोभा भारी’ मिलती है। कुछ जगह टेक ‘जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि देवा’ के रूप में गाई जाती है। गाते समय पहला पद (टेक) हर पद के बाद दोहराया जाता है।
आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धन्वंतरि जी की आरती कब गाई जाती है?
धनतेरस (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी) पर, जो धन्वंतरि जयंती भी है, धन्वंतरि पूजा के अंत में। इसे धन्वंतरि जी की किसी भी पूजा में गाया जा सकता है।
भगवान धन्वंतरि कौन हैं?
वे आयुर्वेद के देवता और विष्णु के अंशावतार माने जाते हैं। भागवत पुराण (8.8) के अनुसार वे समुद्र मंथन में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए। परंपरा में धनतेरस को उनके प्रकट होने का दिन माना जाता है।
क्या यह आरती रोग का इलाज है?
नहीं। आरती भक्ति की रचना है और रोग दूर होने की बात भक्त के विश्वास के रूप में कहती है। बीमारी में योग्य चिकित्सक की सलाह और उपचार ज़रूरी है।
इस आरती के रचयिता कौन हैं?
रचयिता ज्ञात नहीं है; अंतिम पद में किसी कवि का नाम नहीं आता।
स्रोत
- परंपरागत आरती पाठ
- समुद्र मंथन से धन्वंतरि का प्रकट होना: भागवत पुराण, स्कंध 8, अध्याय 8
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पाठ का मिलान: drikpanchang.com, hindi.webdunia.com, hindi.news24online.com, bhaktvatsal.com
