नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) 2026 में 8 नवंबर, रविवार को है। यह कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (पूर्णिमांत) को, दीपोत्सव के दूसरे दिन मनाई जाती है। परंपरा में यह श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की स्मृति का दिन है। मुख्य कर्म सूर्योदय से पहले तेल और उबटन से अभ्यंग स्नान है; इसका मुहूर्त अपने शहर के लिए नीचे देखें।
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दीपोत्सव 2026: धनतेरस 6 नवंबर से भाई दूज 11 नवंबर तक
| तारीख | पर्व | समय (नई दिल्ली) |
|---|---|---|
| 6 नवंबर शुक्रवार | धनतेरस | 6:03–7:58 PM पूजा मुहूर्त |
| 7 नवंबर शनिवार, रात | काली चौदस | 11:39 PM–12:31 AM निशीथ काल |
| 8 नवंबर रविवार, भोर | नरक चतुर्दशी | 5:41–6:38 AM अभ्यंग स्नान |
| 8 नवंबर रविवार, शाम | दीपावली | 5:55–7:51 PM लक्ष्मी पूजा |
| 10 नवंबर मंगलवार | गोवर्धन पूजा | 6:40–8:50 AM प्रातःकाल |
| 11 नवंबर बुधवार | भाई दूज | 1:10–3:20 PM तिलक (अपराह्न) |
समय नई दिल्ली के, हमारी गणना से (Drik Panchang से मिलान); अपने शहर का समय हर पर्व के पन्ने पर। 9 नवंबर को 12:33 PM तक अमावस्या है, इसलिए गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को।
एक नज़र में
- तिथि
- कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (पूर्णिमांत)
- अन्य नाम
- छोटी दिवाली, रूप चौदस, नरक चौदस
- मुख्य कर्म
- सूर्योदय से पहले अभ्यंग (तेल-उबटन) स्नान
- स्नान का समय
- चंद्रोदय के बाद, सूर्योदय से पहले, चतुर्दशी रहते
- कथा
- श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर का वध (भागवत पुराण 10.59)
- शाम को
- दीप जलाना; कई परिवारों में यम के लिए दीपक
- गुजरात
- काली चौदस, जो कभी-कभी एक दिन पहले पड़ती है
- दीपोत्सव
- पाँच दिन के पर्व का दूसरा दिन
अभ्यंग स्नान
इस दिन का मुख्य कर्म सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल लगाकर और उबटन से स्नान करना है, जिसे अभ्यंग स्नान कहते हैं। पंचांगों में इसका मुहूर्त चंद्रोदय से सूर्योदय के बीच का वह समय माना जाता है जब चतुर्दशी तिथि हो। मान्यता है कि इस स्नान से नरक का भय दूर होता है; एक प्रचलित मान्यता यह भी है कि इस दिन तेल में लक्ष्मी और जल में गंगा का वास होता है। रूप चौदस नाम इसी स्नान और उबटन से जुड़ा है।
एक पर्व, कई रूप
उत्तर भारत: छोटी दिवाली और रूप चौदस
दीपावली से पहले की शाम घर में दीप जलाए जाते हैं। राजस्थान, गुजरात और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इसे रूप चौदस कहते हैं, और उबटन से स्नान का विशेष महत्व है। कई परिवारों में शाम को यम के लिए दक्षिण दिशा में दीपक रखा जाता है।
लोक परंपरागुजरात: काली चौदस
गुजरात में इस पर्व को काली चौदस कहते हैं, और रात में महाकाली की पूजा होती है; कई परिवार हनुमान की भी पूजा करते हैं। काली चौदस उस दिन मनाई जाती है जब मध्यरात्रि में चतुर्दशी हो, इसलिए कभी-कभी यह नरक चतुर्दशी से एक दिन पहले पड़ती है।
परंपराबंगाल: भूत चतुर्दशी
बंगाल में काली पूजा से पहले की चतुर्दशी को भूत चतुर्दशी कहते हैं; घर में चौदह दीपक जलाने और चौदह प्रकार के साग खाने की प्रथा है।
लोक परंपरादक्षिण भारत और गोवा
तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के कई हिस्सों में दीपावली इसी सुबह, तेल-स्नान के साथ मनाई जाती है। गोवा में भोर से पहले नरकासुर के पुतले जलाए जाते हैं।
लोक परंपराहनुमान जयंती (कुछ परंपराओं में)
अयोध्या सहित कुछ परंपराओं में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमान जयंती मनाई जाती है। अधिक प्रचलित हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को होती है।
परंपरादीपावली से संबंध
नरक चतुर्दशी पाँच दिन के दीपोत्सव का दूसरा दिन है; इससे पहले धनतेरस और बाद में दीपावली आती है। तिथियों के घटने-बढ़ने से कुछ वर्षों में नरक चतुर्दशी और दीपावली एक ही दिन पड़ती हैं: सुबह चतुर्दशी में अभ्यंग स्नान होता है और शाम को अमावस्या में लक्ष्मी पूजा।
पूजा विधि
- चरण 1
सूर्योदय से पहले उठना
अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले होता है; ऊपर अपने शहर का समय देखें।
- चरण 2
तेल और उबटन
शरीर पर तिल का तेल लगाएँ और उबटन से स्नान करें। कुछ परंपराओं में स्नान के समय अपामार्ग (चिरचिटा) की टहनी सिर के चारों ओर घुमाई जाती है।
- चरण 3
पूजा
स्नान के बाद अपनी परंपरा के अनुसार श्रीकृष्ण, हनुमान या महाकाली की पूजा करें।
- चरण 4
शाम को दीप
शाम को घर, आँगन और द्वार पर दीप जलाएँ।
- चरण 5
यम के लिए दीपक
कई परिवारों में घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यम के लिए दीपक रखा जाता है; कुछ परिवार यह धनतेरस को करते हैं।
नरकासुर का वध
भागवत पुराण के अनुसार भूमि (पृथ्वी) का पुत्र नरक, जिसे भौमासुर भी कहते हैं, प्राग्ज्योतिषपुर का राजा था। उसने वरुण का छत्र और देवमाता अदिति के कुंडल छीन लिए थे, और अनेक राजाओं की कन्याओं को बंदी बना रखा था। इंद्र से यह सब सुनकर श्रीकृष्ण सत्यभामा के साथ गरुड़ पर बैठकर प्राग्ज्योतिषपुर पहुँचे, नगर की किलेबंदी तोड़ी, पाँच सिर वाले मुर असुर का वध किया, और अंत में सुदर्शन चक्र से नरकासुर का सिर काट दिया। तब भूमि देवी ने अदिति के कुंडल लौटाए और श्रीकृष्ण की स्तुति की। श्रीकृष्ण ने बंदी सोलह हज़ार राजकुमारियों को मुक्त किया। परंपरा में इस विजय की स्मृति कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी से जोड़ी जाती है।
भागवत पुराण 10.59पूरी कथा पढ़ेंश्लोक
नमस्ते देवदेवेश शङ्खचक्रगदाधर।भक्तेच्छोपात्तरूपाय परमात्मन् नमोऽस्तु ते॥नरक चतुर्दशी के रिश्ते
ज्ञान-ग्राफ़ में देखेंदेवता, पात्र और ऋषि 5
ग्रंथ और मंत्र 1
- भागवत पुराण · कथा-स्रोत (नरकासुर वध)भागवत पुराण 10.59
पर्व 1
- दीपावली · मुख्य पर्वपरंपरा
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नरक चतुर्दशी 2026 कब है?
8 नवंबर, रविवार को।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) 2026: 7 नवंबर को या 8 नवंबर को?
चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर 10:49 AM से 8 नवंबर 11:29 AM तक है। नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले चतुर्दशी में होता है, इसलिए रविवार, 8 नवंबर की भोर में (नई दिल्ली 5:41–6:38 AM), और उसी शाम दिवाली है। काली चौदस की रात्रि पूजा मध्यरात्रि (निशीथ काल) में चतुर्दशी रहते होती है: 7 नवंबर की रात, 11:39 PM–12:31 AM (Drik Panchang)।
8 नवंबर को अभ्यंग स्नान किस समय करें?
सूर्योदय से पहले, चंद्रोदय के बाद, जब चतुर्दशी तिथि हो। रविवार, 8 नवंबर 2026 को: नई दिल्ली 5:41–6:38 AM, लखनऊ 5:23–6:21 AM, जयपुर 5:44–6:41 AM, पटना 5:03–6:02 AM, चंडीगढ़ 5:46–6:43 AM, इंदौर 5:38–6:35 AM, मुंबई 5:45–6:42 AM, कोलकाता 4:45–5:45 AM, बेंगलुरु 5:17–6:15 AM। अपने शहर का समय ऊपर के बॉक्स में शहर चुनकर देखें।
क्या छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी एक ही हैं?
हाँ। उत्तर भारत में नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली और रूप चौदस भी कहते हैं।
काली चौदस और नरक चतुर्दशी में क्या अंतर है?
दोनों कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के पर्व हैं। काली चौदस (गुजरात) उस दिन होती है जब मध्यरात्रि में चतुर्दशी हो, और नरक चतुर्दशी उस दिन जब सूर्योदय से पहले चतुर्दशी हो; इसलिए कभी-कभी काली चौदस एक दिन पहले पड़ती है।
नरकासुर का वध किसने किया?
भागवत पुराण (10.59) के अनुसार श्रीकृष्ण ने, सुदर्शन चक्र से। दक्षिण भारत की कुछ लोक परंपराओं में यह वध सत्यभामा के हाथों बताया जाता है।
दिवाली 2026 के पाँचों दिन कब हैं?
धनतेरस 6 नवंबर (शुक्रवार), नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की भोर और दीपावली 8 नवंबर (रविवार) की शाम, गोवर्धन पूजा 10 नवंबर (मंगलवार) और भाई दूज 11 नवंबर (बुधवार)। काली चौदस की रात्रि पूजा 7 नवंबर को है (Drik Panchang)।
स्रोत
- भागवत पुराण 10.59 (नरकासुर वध और भूमि देवी की स्तुति)
- धर्मसिन्धु (नरक चतुर्दशी का निर्णय)
- लोक परंपरा
- मुहूर्त और चंद्रोदय: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang (नई दिल्ली, 2026–27) से मिलान
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