दिवाली पूजा विधि 2026: लक्ष्मी-गणेश पूजन

रविवार, 8 नवंबर 2026 की शाम, प्रदोष काल में। हर चरण, जाँचे हुए मंत्र अर्थ सहित, और सामग्री की सूची।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 4 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
दिवाली की लक्ष्मी पूजा: फूलों से सजी लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमाएँ, जलते दीये, रंगोली और सिक्कों-मिठाई की थाली
चित्र: AI से बनाया गया
संक्षेप में

दिवाली 2026 की लक्ष्मी-गणेश पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 की शाम है; नई दिल्ली में मुहूर्त 5:55–7:51 PM, जब प्रदोष काल, स्थिर (वृषभ) लग्न और अमावस्या तिथि साथ हों। गीता प्रेस की ‘नित्यकर्म-पूजाप्रकाश’ और Drik Panchang के अनुसार क्रम: पवित्रीकरण और संकल्प, पहले गणेश की पूजा, फिर लक्ष्मी की षोडशोपचार पूजा, फिर कुबेर और बही-खाते की पूजा, दीपमालिका, आरती, क्षमा-प्रार्थना और विसर्जन। नीचे हर चरण है, साथ में वे मंत्र जिनके शब्द दोनों स्रोतों में एक जैसे मिले, और सामग्री की सूची जिसे प्रिंट कर सकते हैं।

नई दिल्ली: लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, 8 नवंबर

लक्ष्मी पूजा मुहूर्तप्रदोष काल + वृषभ लग्न + तिथि
5:55–7:51 PM
प्रदोष कालरात्रि का पहला पाँचवाँ भाग
5:31–8:09 PM
वृषभ कालस्थिर लग्न
5:55–7:51 PM
निशीथ कालरात्रि का आठवाँ मुहूर्त
11:39 PM–12:31 AM (9 नव॰)
अमावस्या तिथि
11:29 AM से 12:33 PM (9 नव॰) तक

भारतीय मानक समय में, SanatanBodh पंचांग गणना; Drik Panchang से मिलान। अपने शहर का मुहूर्त

1 तैयारी: शाम से पहले

घर और पूजा का स्थान साफ़ करें, ख़ुद स्नान करके पवित्र हों; गीता प्रेस की विधि के अनुसार यह पूजा सायंकाल में श्रद्धा से की जाती है। चौकी पर या कपड़े के पवित्र आसन पर लक्ष्मी और गणेश की नई प्रतिमा या चित्र रखें; गीता प्रेस के अनुसार लक्ष्मी जी गणेश जी के दाहिने भाग में रहें।

प्रतिमा के पास किसी पवित्र पात्र में केसर मिले चंदन से आठ पंखुड़ियों वाला कमल बनाएँ और उस पर ‘द्रव्य-लक्ष्मी’ (रुपये या सिक्के) रखें; दोनों की पूजा साथ होती है (गीता प्रेस)। सामग्री पहले से अपनी जगह रख लें; पूरी सूची नीचे है।

पूजा पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठकर करें; यह गीता प्रेस और Drik Panchang दोनों में है। Drik Panchang के अनुसार इस दिन अपनी क्षमता से उपवास (निर्जल, फलाहार या केवल दूध) रखा जाता है।

2 पवित्रीकरण और आचमन

गीता प्रेस के क्रम में पहले आचमन, पवित्री धारण, मार्जन और प्राणायाम, फिर नीचे का मंत्र पढ़ते हुए अपने ऊपर और पूजा की सामग्री पर जल छिड़कें। Drik Panchang की आत्म-शोधन विधि में भी यही मंत्र है, उसके बाद तीन बार आचमन। आचमन के मंत्र दोनों स्रोतों में अलग हैं; अपने घर की पुस्तक या पुरोहित के अनुसार लें।

पवित्रीकरण मंत्रअपने ऊपर और पूजा की सामग्री पर जल छिड़कते समय
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
कोई अपवित्र हो या पवित्र, किसी भी दशा में हो, जो कमल जैसे नेत्रों वाले भगवान (पुण्डरीकाक्ष, विष्णु) को याद करता है, वह बाहर और भीतर दोनों से शुद्ध हो जाता है।गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश पृ. 243; Drik Panchang, आत्म-शोधन विधि

3 संकल्प

दाहिने हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प बोलें: स्थान, संवत, कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष, अमावस्या तिथि, वार, अपना गोत्र और नाम, और पूजा का उद्देश्य। गीता प्रेस के संकल्प-वाक्य में उद्देश्य है: स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति और महालक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए महालक्ष्मी-पूजन, कुबेर आदि का पूजन, और उसके अंग के रूप में गौरी-गणपति आदि का पूजन। फिर जल गणेश जी के पास छोड़ दें।

पूरा संस्कृत संकल्प-वाक्य गीता प्रेस (पृ. 243–244) और Drik Panchang के संकल्प पृष्ठ पर है; दोनों के शब्द अलग हैं (Drik के वाक्य में व्यापार के लिए अलग अंश जुड़े हैं), इसलिए यहाँ नहीं छापा। परिवार अपने पुरोहित वाला रूप लेते हैं।

4 पहले गणेश पूजा

दोनों स्रोतों में लक्ष्मी से पहले गणेश की पूजा है। नई प्रतिमा हो तो गीता प्रेस पहले उसकी प्राण-प्रतिष्ठा बताता है (वैदिक मंत्र, पुरोहित से), फिर षोडशोपचार पूजा, उसी तरह जैसे नीचे लक्ष्मी की। हर उपचार के साथ नाम-मंत्र बोला जाता है: Drik Panchang में ‘ॐ गणपतये नमः’ (जैसे ‘ॐ गणपतये नमः पुष्पं समर्पयामि’); गीता प्रेस में गणेश और गौरी की पूजा साथ होती है, इसलिए वहाँ ‘ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः’। गणेश जी को दूर्वा भी चढ़ाई जाती है (गीता प्रेस)।

पूरी शास्त्रीय विधि में इसके बाद नवग्रह, षोडश मातृका और कलश की पूजा होती है (गीता प्रेस और Drik Panchang दोनों में); घर की पूजा में बहुत से परिवार यह भाग पुरोहित से कराते हैं।

गणेश वंदनागणेश पूजा के आरंभ में
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
हे मुड़ी हुई सूँड और विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेज वाले देव, मेरे सब कामों को सदा विघ्न से मुक्त रखिए।पाठभेद: गीता प्रेस (नित्यकर्म-पूजाप्रकाश पृ. 170, मंगल-पाठ) में पहली पंक्ति ‘वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ’ है: शब्द वही, क्रम उलटा, अर्थ वही।पाठ और स्रोत: हमारा वक्रतुण्ड महाकाय पृष्ठ

5 लक्ष्मी पूजा (षोडशोपचार)

षोडशोपचार यानी सोलह उपचारों (सेवाओं) से पूजा। गीता प्रेस और Drik Panchang दोनों की सूचियाँ लंबी हैं, क्योंकि उनमें अलग-अलग स्नान, अंग-पूजा, अष्टसिद्धि और अष्टलक्ष्मी की पूजा जैसे उप-चरण भी हैं; Drik में 34 चरण गिने गए हैं। नीचे मुख्य उपचार उसी क्रम में हैं जिसमें गीता प्रेस में आते हैं, हर एक के साथ बोला जाने वाला छोटा वाक्य।

हर वाक्य से पहले नाम-मंत्र बोलें: गीता प्रेस में ‘ॐ महालक्ष्म्यै नमः’, Drik Panchang में ‘श्रीलक्ष्मी-देव्यै नमः’। जो वस्तु पास न हो, गीता प्रेस के अनुसार उसे मन से कल्पना करके अर्पित करने की बात कही जाती है; Drik Panchang की सामग्री सूची के अनुसार उसकी जगह अक्षत चढ़ाया जा सकता है।

  1. ध्यानहाथ में फूल लेकर ध्यान, फिर फूल चढ़ाएँध्यानार्थे पुष्पाणि समर्पयामि
  2. आवाहनआने का निमंत्रण, फूल चढ़ाकरमहालक्ष्मीमावाहयामि, आवाहनार्थे पुष्पाणि समर्पयामिDrik Panchang: श्रीलक्ष्मी-देवीम् आवाहयामि
  3. आसनआसन के लिए कमल या दूसरे फूलआसनं समर्पयामि
  4. पाद्यचरण धोने के लिए चंदन-फूल मिला जलपादयोः पाद्यं समर्पयामिDrik Panchang: पाद्यं समर्पयामि
  5. अर्घ्यसुगंधित जल, अर्घ्य-पात्र सेहस्तयोरर्घ्यं समर्पयामिDrik Panchang: अर्घ्यं समर्पयामि
  6. आचमनपीने के लिए जलआचमनीयं जलं समर्पयामि
  7. स्नानजल, फिर दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (अलग-अलग या पंचामृत बनाकर), फिर चंदन मिला जल और शुद्ध जलपञ्चामृतस्नानं समर्पयामि। शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि
  8. वस्त्रवस्त्र या मौलीवस्त्रं समर्पयामि
  9. आभूषणगहनेआभूषणानि समर्पयामि
  10. गंधअनामिका से केसर मिला चंदन, फिर लाल चंदन, सिंदूर, कुमकुमगन्धं समर्पयामिDrik Panchang: चन्दनं समर्पयामि
  11. अक्षतकुमकुम लगे साबुत चावलअक्षतान् समर्पयामि
  12. पुष्पफूल और माला; हो सके तो लाल कमलपुष्पं पुष्पमालां च समर्पयामिDrik Panchang: पुष्पं समर्पयामि
  13. धूपधूप दिखाएँधूपमाघ्रापयामिDrik Panchang: धूपं समर्पयामि
  14. दीपघी का दीपक दिखाएँ, फिर हाथ धो लेंदीपं दर्शयामिDrik Panchang: दीपं समर्पयामि
  15. नैवेद्यभोग, फिर पीने और हाथ-मुँह धोने के लिए जल; उसके बाद ऋतुफलनैवेद्यं निवेदयामिDrik Panchang: नैवेद्यं समर्पयामि
  16. ताम्बूलइलायची, लौंग, सुपारी के साथ पानमुखवासार्थे ताम्बूलं समर्पयामि
  17. दक्षिणादक्षिणा (सिक्के या धन)दक्षिणां समर्पयामि
  18. नीराजन (आरती)आरती, फिर जल छोड़ें और हाथ धो लेंनीराजनं समर्पयामि
  19. प्रदक्षिणापरिक्रमाप्रदक्षिणां समर्पयामि
  20. मंत्र-पुष्पांजलिदोनों हाथों में फूल लेकर मंत्र पढ़ें, फिर चढ़ाएँमन्त्रपुष्पाञ्जलिं समर्पयामि
लक्ष्मी का ध्यानहाथ में फूल लेकर, लक्ष्मी पूजा के आरंभ में
या सा पद्मासनस्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षीगम्भीरावर्तनाभिस्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया।या लक्ष्मीर्दिव्यरूपैर्मणिगणखचितैः स्नापिता हेमकुम्भैःसा नित्यं पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमाङ्गल्ययुक्ता॥
जो कमल के आसन पर विराजमान हैं, जिनकी कटि चौड़ी और आँखें कमल की पंखुड़ी जैसी लंबी हैं, जिनकी नाभि गहरी भँवर जैसी है, जो वक्ष के भार से कुछ झुकी हुई हैं और श्वेत वस्त्र व उत्तरीय पहने हैं; जिन्हें मणियों से जड़े दिव्य सोने के कलशों से स्नान कराया जाता है, वे हाथ में कमल लिए लक्ष्मी सब मंगलों के साथ सदा मेरे घर में निवास करें।पाठभेद: Drik Panchang के श्रीसूक्त पृष्ठ पर तीसरी पंक्ति ‘लक्ष्मीर्दिव्यैर्गजेन्द्रैर्मणिगणखचितैः’ से है: वहाँ लक्ष्मी को दिव्य हाथी (गजेन्द्र) स्नान कराते हैं, जैसा गजलक्ष्मी के चित्रों में दिखता है।गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश पृ. 244; Drik Panchang, लक्ष्मी पूजा विधि (ध्यान)
श्रीसूक्त का पहला मंत्रध्यान के बाद; गीता प्रेस की विधि में हर उपचार के साथ श्रीसूक्त का एक मंत्र आता है
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
हे अग्निदेव (जातवेद), सोने जैसी आभा वाली, हिरणी जैसी चपल, सोने-चाँदी की मालाएँ पहने, चंद्रमा जैसी प्रसन्न और स्वर्णमयी लक्ष्मी को मेरे पास बुला लाइए।पाठभेद: गीता प्रेस में ‘म आ वह’ अलग-अलग छपा है; शब्द वही हैं।श्रीसूक्त 1 (ऋग्वेद खिल सूक्त); गीता प्रेस पृ. 245; Drik Panchang, श्रीसूक्त
धूप दिखाने का मंत्रधूप दिखाते समय
वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यः सुमनोहरः।आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥
वनस्पतियों के रस से बनी, सुगंध से भरी, अत्यंत मनोहर और सब देवताओं के सूँघने योग्य यह धूप स्वीकार कीजिए।गीता प्रेस पृ. 252; Drik Panchang, लक्ष्मी पूजा विधि (धूप)

परंपरा: देशाचार: गीता प्रेस के अनुसार कहीं-कहीं लक्ष्मी जी को अक्षत की जगह हल्दी या धनिया चढ़ाया जाता है और भोग में गुड़ का प्रसाद दिया जाता है।

6 कुबेर, बही-खाता और कलम-दवात

लक्ष्मी पूजा के बाद गीता प्रेस इनकी पूजा बताता है: दुकान आदि की दीवारों पर सिंदूर से लिखे ‘शुभ-लाभ’, स्वस्तिक और ‘श्रीगणेशाय नमः’ की पूजा (देहलीविनायक); स्याही की दवात में महाकाली; कलम (लेखनी) पर मौली बाँधकर उसकी पूजा; बही, बसने (बही लपेटने का कपड़ा) और थैली पर रोली या केसर-चंदन से स्वस्तिक बनाकर सरस्वती की पूजा; तिजोरी या धन के संदूक पर स्वस्तिक बनाकर कुबेर का आवाहन और पूजा; और तराजू-बाट (तुला-मान) की पूजा। Drik Panchang में भी कलम-दवात पर महाकाली, बही-खाते पर सरस्वती और तिजोरी पर कुबेर की पूजा है; कुबेर की मूर्ति न हो तो तिजोरी या गहनों के डिब्बे को ही कुबेर मानकर, उस पर सिंदूर से स्वस्तिक बनाकर और मौली बाँधकर।

गीता प्रेस के अनुसार थैली में पाँच हल्दी की गाँठें, धनिया, कमलगट्टा, अक्षत, दूर्वा और धन रखकर पूजा होती है, और कुबेर की प्रार्थना के बाद यह थैली तिजोरी में रख दी जाती है। कुबेर का नाम-मंत्र: ‘ॐ कुबेराय नमः’ (गीता प्रेस), ‘ॐ श्रीकुबेराय नमः’ (Drik Panchang)।

कुबेर का आवाहनतिजोरी या धन रखने के संदूक पर, कुबेर पूजा के आरंभ में
आवाहयामि देव त्वामिहायाहि कृपां कुरु।कोशं वर्द्धय नित्यं त्वं परिरक्ष सुरेश्वर॥
हे देव, मैं आपका आवाहन करता हूँ; यहाँ पधारिए और कृपा कीजिए। हे सुरेश्वर, मेरे कोष को सदा बढ़ाइए और उसकी रक्षा कीजिए।गीता प्रेस पृ. 256; Drik Panchang, कुबेर पूजा विधि

परंपरा: यह भाग मुख्यतः व्यापारी परिवारों की परंपरा है। Drik Panchang के अनुसार गुजरात में दिवाली की लक्ष्मी पूजा को चोपड़ा पूजन भी कहते हैं, जिसमें नई बहियों की पूजा होती है; यह राजस्थान और महाराष्ट्र में भी होता है।

7 दीपमालिका पूजा और दीपदान

गीता प्रेस के अनुसार ग्यारह, इक्कीस या उससे अधिक दीपक एक पात्र में जलाकर महालक्ष्मी के पास रखें और दीप-ज्योति की पूजा करें। फिर अपने आचार के अनुसार संतरा, ईख, पानीफल (सिंघाड़ा) और धान का लावा (खील) चढ़ाएँ; खील गणेश, महालक्ष्मी और सब देवताओं को अर्पित करें। अंत में बाकी सब दीपक जलाकर पूरे घर को सजाएँ।

Drik Panchang की दीपमालिका विधि में बीच में सरसों के तेल का एक बड़ा दीपक और चारों ओर ग्यारह, इक्कीस, इक्यावन या अधिक छोटे दीपक एक परात में सजाए जाते हैं; पूजा के बाद धान का लावा, ईख, नारियल, फल और मिठाई चढ़ाई जाती है। Drik Panchang के अनुसार दिवाली पूजा में जलाया गया दीपक रात भर जलता रहना चाहिए।

8 आरती

सब पूजा के बाद मुख्य आरती: थाली में स्वस्तिक बनाकर, अक्षत और फूल के आसन पर घी की बत्ती और अलग पात्र में कपूर जलाकर, परिवार के साथ खड़े होकर, घंटी बजाते हुए (गीता प्रेस)। गीता प्रेस इसी पूजा में ‘ॐ जय लक्ष्मी माता’ आरती छापता है। Drik Panchang के अनुसार पूजा के बाद श्रीसूक्त, लक्ष्मी सूक्त और लक्ष्मी की दूसरी स्तुतियों का पाठ किया जाता है, और हो सके तो जागरण।

9 मंत्र-पुष्पांजलि, प्रदक्षिणा और क्षमा-प्रार्थना

दोनों हाथों में फूल लेकर मंत्र-पुष्पांजलि दें, प्रदक्षिणा करके साष्टांग प्रणाम करें, फिर हाथ जोड़कर क्षमा-प्रार्थना (गीता प्रेस)। उसके बाद पूजा महालक्ष्मी को अर्पित करने का वाक्य बोलकर जल छोड़ें, बड़ों को प्रणाम करें और चरणामृत व प्रसाद बाँटें (गीता प्रेस)। Drik Panchang में भी अंत में पूजा देवी को अर्पित की जाती है; दोनों के वाक्य अलग हैं।

लक्ष्मी गायत्रीमंत्र-पुष्पांजलि में, दोनों हाथों में फूल लेकर
महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि।तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
हम महालक्ष्मी को जानें, विष्णु की पत्नी का ध्यान करें; वे लक्ष्मी हमें प्रेरणा दें।पाठभेद: Drik Panchang में आरंभ में ‘ॐ श्री’ और अंत में ‘ॐ’ जुड़ा है।गीता प्रेस पृ. 259; Drik Panchang, लक्ष्मी मन्त्र
क्षमा-प्रार्थनाआरती और प्रदक्षिणा के बाद, हाथ जोड़कर
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि॥मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥
मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न पूजा की विधि; हे परमेश्वरी, क्षमा कीजिए। हे सुरेश्वरी, मंत्र, क्रिया या भक्ति में जो कमी रह गई, उसके साथ मैंने जो पूजा की है, हे देवी, वह मेरे लिए पूर्ण हो।पाठभेद: Drik Panchang की लक्ष्मी पूजा विधि में ‘पूजा-कर्म न जानामि’ और ‘मया यत्पूजितं देवि’ है; दुर्गा सप्तशती की क्षमा-प्रार्थना में ‘क्षम्यतां परमेश्वरि’।गीता प्रेस पृ. 259–260; Drik Panchang, लक्ष्मी पूजा विधि और दुर्गा सप्तशती की क्षमा-प्रार्थना

10 विसर्जन

अंत में हाथ में अक्षत लेकर आवाहित देवताओं का विसर्जन करें। गीता प्रेस के अनुसार नई गणेश और महालक्ष्मी प्रतिमा का विसर्जन नहीं होता; बाकी सब आवाहित, प्रतिष्ठित और पूजित देवताओं को अक्षत छोड़ते हुए विदा किया जाता है। Drik Panchang में विसर्जन से पहले सब लोग हाथ में फूल लेकर गणेश, महालक्ष्मी, महाकाली, महासरस्वती और कुबेर की जय बोलकर प्रणाम करते हैं।

विसर्जन मंत्रअंत में, हाथ में अक्षत लेकर
यान्तु देवगणाः सर्वे पूजामादाय मामकीम्।इष्टकामसमृद्ध्यर्थं पुनरागमनाय च॥
सब देवगण मेरी पूजा स्वीकार करके जाएँ, और मनोकामनाएँ पूरी करने के लिए फिर पधारें।गीता प्रेस पृ. 260; Drik Panchang, विसर्जन विधि

दिवाली पूजा सामग्री (लक्ष्मी पूजा की लिस्ट)

परंपरा के अनुसार; अपने परिवार की रीति से मिलाएँ। लक्ष्मी-गणेश पूजा के लिए घरों में आम तौर पर रखी जाने वाली सामग्री। कुल 31 चीज़ें; खरीदते समय निशान लगाते चलें।

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पूजा की चौकी

पूजा की थाली

दीपक

भोग और प्रसाद

बही-खाता और धन

घर और क्षेत्र के अनुसार अंतर

  • पुरोहित से पूरी शास्त्रीय विधि कराने पर सप्तमृत्तिका (सात स्थानों की मिट्टी), सर्वौषधि, पंच-पल्लव, सप्तधान्य और पंचरत्न भी लगते हैं; Drik Panchang और वेबदुनिया की बड़ी सूचियों में ये हैं।
  • Drik Panchang के अनुसार कोई चीज़ न मिले तो उसके स्थान पर अक्षत चढ़ाया जा सकता है।
  • कई परिवारों में इसी पूजा में कुबेर, सरस्वती और महाकाली की पूजा भी होती है। बंगाल में इस रात काली पूजा होती है; यह सूची लक्ष्मी-गणेश पूजा की है।
दिवाली पूजा सामग्री (लक्ष्मी पूजा की लिस्ट): 5 भागों में 31 चीज़ें, जैसे लकड़ी की चौकी, रोली या कुमकुम, पूजा का बड़ा दीपक, खील-बताशे
सामग्री की लिस्ट तस्वीर में सेव करें और बाज़ार जाते समय साथ रखें या WhatsApp पर भेजें।

सूची इन स्रोतों से मिलाकर हमारे शब्दों में बनाई गई; वही चीज़ें ली गईं जो कम से कम दो स्रोतों में हैं: Drik Panchang: लक्ष्मी पूजा सामग्री; Drik Panchang: दिवाली पूजा विधि; वेबदुनिया: दिवाली पूजन-सामग्री की सूची; वेबदुनिया: लक्ष्मी पूजन की विधि; टाइम्स नाउ हिंदी: दिवाली पूजा सामग्री (2025)

क्षेत्र और परिवार के अनुसार अंतर

  • बंगाल में दिवाली की रात काली पूजा होती है (Drik Panchang का दिवाली कैलेंडर 2026: 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजा के साथ काली पूजा), और वहाँ लक्ष्मी पूजा कोजागरी पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) को होती है।
  • कई परंपराओं में निशीथ काल (आधी रात के आसपास) में भी महालक्ष्मी की पूजा होती है; उसका समय ऊपर मुहूर्त में है।
  • गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में व्यापारी परिवार नई बहियों का चोपड़ा पूजन करते हैं और उसके लिए चौघड़िया मुहूर्त देखते हैं (Drik Panchang)।
  • कहीं-कहीं लक्ष्मी जी को अक्षत की जगह हल्दी या धनिया और भोग में गुड़ (गीता प्रेस); बहुत से घरों में हर साल लक्ष्मी-गणेश की नई प्रतिमा लाई जाती है, और दोनों स्रोत नई प्रतिमा की पूजा बताते हैं।

अपने घर की रीति और अपने पुरोहित की विधि को प्राथमिकता दें; यह पन्ना दो लिखित स्रोतों की विधि बताता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवाली 2026 में लक्ष्मी पूजा कब है?

रविवार, 8 नवंबर 2026 की शाम। नई दिल्ली में मुहूर्त 5:55–7:51 PM है (प्रदोष काल, वृषभ लग्न और अमावस्या साथ)। दूसरे शहरों का समय दीपावली के पन्ने पर है। Drik Panchang के अनुसार पूरी पूजा में समय लगता है, इसलिए उसे मुहूर्त से पहले शुरू कर सकते हैं, ताकि लक्ष्मी पूजा मुहूर्त में हो।

दिवाली पर पहले गणेश की पूजा होती है या लक्ष्मी की?

पहले गणेश की। गीता प्रेस और Drik Panchang दोनों में संकल्प के बाद पहले गणेश पूजा, फिर लक्ष्मी पूजा है।

लक्ष्मी जी की प्रतिमा गणेश जी के किस ओर रखें?

गीता प्रेस की विधि के अनुसार गणेश जी के दाहिने भाग में।

संस्कृत मंत्र न आते हों तो पूजा कैसे करें?

हर उपचार के साथ एक छोटा वाक्य बोला जाता है, जैसे ‘ॐ महालक्ष्म्यै नमः, पुष्पं समर्पयामि’ (गीता प्रेस); ये वाक्य ऊपर हर चरण के साथ दिए हैं। जो वस्तु पास न हो, गीता प्रेस के अनुसार उसे मन से अर्पित करें; Drik Panchang के अनुसार उसकी जगह अक्षत चढ़ा सकते हैं। पूरी शास्त्रीय विधि के लिए अपने पुरोहित से पूछें।

क्या लक्ष्मी-गणेश की नई प्रतिमा का विसर्जन होता है?

गीता प्रेस की विधि में नहीं: अंत में नई गणेश और महालक्ष्मी प्रतिमा को छोड़कर बाकी सब आवाहित देवताओं का विसर्जन होता है।

लक्ष्मी पूजा के बाद क्या करें?

गीता प्रेस के अनुसार दीपक जलाकर पूरे घर को सजाएँ और प्रसाद बाँटें। Drik Panchang के अनुसार पूजा का दीपक रात भर जले, और श्रीसूक्त, लक्ष्मी सूक्त या लक्ष्मी की दूसरी स्तुतियों का पाठ करें।

स्रोत

  1. गीता प्रेस, गोरखपुर: नित्यकर्म-पूजाप्रकाश (पं. रामभवन मिश्र, लालबिहारी मिश्र), सं. 2066 का पचासवाँ पुनर्मुद्रण: श्रीमहालक्ष्मी-पूजन पृ. 243–260, मंगल-पाठ पृ. 170; सं. 2070 के साठवें पुनर्मुद्रण से मिलान
  2. Drik Panchang: दीवाली पूजा विधि, लक्ष्मी पूजा विधि, आत्म-शोधन, सङ्कल्प, गणेश पूजा विधि, कुबेर पूजा विधि, दीपमालिका पूजा विधि, विसर्जन, लक्ष्मी मन्त्र, श्रीसूक्त, दुर्गा सप्तशती क्षमा-प्रार्थना
  3. श्रीसूक्त (ऋग्वेद खिल सूक्त)
  4. मुहूर्त: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang (नई दिल्ली, 2026) से मिलान

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मंत्रों के अर्थ, स्रोत और शहर के अनुसार मुहूर्त: sanatanbodh.in/tyohar/diwali/puja-vidhi/