दशहरा (विजयादशमी) 2026 में 20 अक्टूबर, मंगलवार को है। यह आश्विन शुक्ल दशमी को, नवरात्रि के बाद मनाया जाता है। परंपरा में यह श्रीराम की रावण पर और देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय का दिन है। शमी पूजा, अपराजिता पूजा और सीमोल्लंघन अपराह्न काल में किए जाते हैं।
एक नज़र में
- तिथि
- आश्विन शुक्ल दशमी
- अन्य नाम
- विजयादशमी, दशहरा, दसरा
- पूजा का समय
- अपराह्न काल; विजय मुहूर्त सबसे शुभ माना जाता है
- मुख्य कर्म
- शमी पूजन, अपराजिता पूजन, सीमोल्लंघन, शस्त्र पूजन
- कथाएँ
- श्रीराम की रावण पर और देवी की महिषासुर पर विजय
- उत्तर भारत
- रामलीला का समापन और रावण दहन
- बंगाल
- दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन
दो विजयों का पर्व
श्रीराम की रावण पर विजय
वाल्मीकि रामायण के युद्ध कांड में श्रीराम लंका में युद्ध करके रावण का वध करते हैं। उत्तर भारत की परंपरा में यह विजय दशमी से जोड़ी जाती है; इसी से रामलीला और रावण दहन की प्रथा है।
वाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड; लोक परंपरादेवी की महिषासुर पर विजय
दुर्गा सप्तशती के मध्यम चरित्र में देवी महिषासुर का वध करती हैं। नवरात्रि की नौ दिन की उपासना के बाद दशमी विजय का दिन माना जाता है; बंगाल में इस दिन दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन होता है।
दुर्गा सप्तशती, अध्याय 2–3अपराह्न काल और विजय मुहूर्त
हिंदू काल-गणना में सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन के पाँच भाग होते हैं; इनमें चौथा भाग अपराह्न कहलाता है। दशहरे का शमी पूजन, अपराजिता पूजन और सीमोल्लंघन इसी समय किया जाता है, और दशहरा उसी दिन मनाया जाता है जिस दिन अपराह्न में दशमी तिथि हो। प्रचलित पंचांगों में दिन के 15 मुहूर्तों में से ग्यारहवें को विजय मुहूर्त लिखा जाता है; नया काम शुरू करने के लिए इसे शुभ माना जाता है।
शमी और अपराजिता
दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा की परंपरा है, जो महाभारत की कथा से जुड़ी है (नीचे देखें)। अपराजिता देवी की पूजा विजय की कामना से की जाती है, और कई क्षेत्रों में गाँव या नगर की सीमा पार जाकर लौटने (सीमोल्लंघन) की प्रथा है।
पूजा विधि
- चरण 1
सुबह की तैयारी
स्नान के बाद घर, वाहन और औज़ारों की सफ़ाई।
- चरण 2
अपराजिता पूजा
अपराह्न में अपराजिता देवी की पूजा, विजय और रक्षा की कामना से।
- चरण 3
शमी पूजन
शमी वृक्ष की पूजा और परिक्रमा।
- चरण 4
शस्त्र और वाहन पूजन
कई क्षेत्रों में इस दिन शस्त्र, औज़ार और वाहन की पूजा होती है।
- चरण 5
रावण दहन
उत्तर भारत में शाम को रामलीला के समापन पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन।

शमी वृक्ष और पांडवों के अस्त्र
महाभारत के विराट पर्व के अनुसार बारह वर्ष का वनवास पूरा करके अज्ञातवास शुरू करने से पहले पांडवों ने अपने धनुष और अस्त्र विराट नगर के पास एक शमी वृक्ष पर छिपा दिए थे। एक वर्ष बाद, जब कौरव सेना ने विराट की गायें घेरीं, अर्जुन ने उसी शमी वृक्ष से गांडीव उतारा और कौरवों को लौटाया। इसी कथा से दशहरे पर शमी पूजा की परंपरा जोड़ी जाती है।
महाभारत, विराट पर्वज्ञान-ग्राफ़ में विजयादशमी
- आराध्यदुर्गापरंपरा
- पहले के नौ दिनशारदीय नवरात्रिपरंपरा
- आराध्यश्रीरामउत्तर भारतीय परंपरापरंपरा
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दशहरा 2026 कब है?
20 अक्टूबर, मंगलवार को।
विजय मुहूर्त क्या है?
प्रचलित पंचांगों में दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) को 15 मुहूर्तों में बाँटने पर ग्यारहवाँ मुहूर्त। यह लगभग 45 मिनट का होता है और ऊपर अपने शहर के लिए दिया गया है।
दशहरा और विजयादशमी में क्या अंतर है?
कोई अंतर नहीं। आश्विन शुक्ल दशमी के एक ही पर्व के दो नाम हैं।
दशहरा किस दिन मनाया जाता है, अगर दशमी दो दिन हो?
जिस दिन अपराह्न काल में दशमी तिथि हो। इसी कारण कभी-कभी बंगाल की विजयादशमी अगले दिन पड़ती है।
रावण दहन किस समय होता है?
परंपरा से सूर्यास्त के बाद। समय स्थानीय आयोजन पर निर्भर है।
स्रोत
- वाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड
- दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण, अध्याय 81–93)
- महाभारत, विराट पर्व
- धर्मसिन्धु (विजयादशमी का निर्णय)
- मुहूर्त और चंद्रोदय: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang (नई दिल्ली, 2026–27) से मिलान
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