गरुड पुराण का एक श्लोक सात पुरियों को मोक्ष देने वाली कहता है: अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी (वाराणसी), कांची (कांचीपुरम), अवंतिका (उज्जैन) और द्वारावती (द्वारका)।
| # | नाम | आज का नाम | राज्य |
|---|---|---|---|
| 1 | अयोध्या | अयोध्या | उत्तर प्रदेश |
| 2 | मथुरा | मथुरा | उत्तर प्रदेश |
| 3 | मायामायापुरी | हरिद्वार | उत्तराखंड |
| 4 | काशी | वाराणसी | उत्तर प्रदेश |
| 5 | कांची | कांचीपुरम | तमिलनाडु |
| 6 | अवंतिकाअवंती, उज्जयिनी | उज्जैन | मध्य प्रदेश |
| 7 | द्वारावतीद्वारका पुरी | द्वारका | गुजरात |
इन तीर्थों को नक्शे पर देखेंहर नाम पर उसका अपना पन्ना है: स्थान, देवता, कथा और स्रोत
श्लोक और उसका स्रोत
"अयोध्या मथुरा माया काशी काञ्ची अवन्तिका। पुरी द्वारावती ज्ञेया सप्तैता मोक्षदायिकाः॥" अर्थ: अयोध्या, मथुरा, माया, काशी, कांची, अवंतिका और द्वारावती पुरी, इन सात को मोक्ष देने वाली जानो।
यह श्लोक गरुड पुराण के उत्तरखंड (धर्मकांड, प्रेतकल्प) में दो बार मिला: अध्याय 38, श्लोक 5-6 में और अध्याय 49, श्लोक 114 में (वेंकटेश्वर प्रेस संस्करण का पाठ, जो GRETIL पर उपलब्ध है)। दोनों जगह संदर्भ यह है कि किन स्थानों में देह छूटने से मोक्ष मिलता है। लोक में यह "पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिकाः" रूप में भी बोला जाता है।
स्कंद पुराण में सात पुरियाँ
स्कंद पुराण के काशीखंड (पूर्वार्ध, अध्याय 7) में मथुरा का ब्राह्मण शिवशर्मा सात पुरियों की यात्रा का निश्चय करता है (श्लोक 42-43) और क्रम से अयोध्या, प्रयाग, काशी, उज्जयिनी (महाकाल), कांची, द्वारावती और मायापुरी (हरिद्वार) जाता है। मोतीलाल बनारसीदास के अंग्रेज़ी अनुवाद की टिप्पणी सात मोक्षदायिनी पुरियों के नाम देती है और माया को हरिद्वार बताती है।
स्रोतों में अंतर
- गरुड पुराण (संक्षिप्त) का अर्नेस्ट वुड और एस. वी. सुब्रह्मण्यम का 1911 का अंग्रेज़ी अनुवाद (अध्याय 16, श्लोक 114) तीसरे नाम के स्थान पर "माया" नहीं, "गया" पढ़ता है; GRETIL का संस्कृत पाठ दोनों जगह "माया" पढ़ता है।
- स्कंद पुराण (वैष्णवखंड, अयोध्या-माहात्म्य) के अंग्रेज़ी अनुवाद की भूमिका "पुरी" को जगन्नाथ पुरी मानकर अलग गिनती है। पर श्लोक "सप्तैता" (ये सात) कहता है, इसलिए "पुरी द्वारावती" को एक ही नगर, द्वारका पुरी, पढ़ना श्लोक से मेल खाता है।
- यह श्लोक अक्सर केवल "गरुड पुराण" के नाम से उद्धृत होता है, बिना अध्याय के। ऊपर दिए दो स्थान वे हैं जहाँ हमने इसे पाठ में देखा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सप्तपुरी कौन-कौन सी हैं?
अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी (वाराणसी), कांची (कांचीपुरम), अवंतिका (उज्जैन) और द्वारावती (द्वारका)।
"अयोध्या मथुरा माया काशी काञ्ची अवन्तिका" श्लोक किस ग्रंथ में है?
गरुड पुराण के उत्तरखंड (प्रेतकल्प) में, अध्याय 38 (श्लोक 5-6) और अध्याय 49 (श्लोक 114) में।
माया नगरी आज कौन सी है?
माया या मायापुरी आज का हरिद्वार (उत्तराखंड) है।
अवंतिका आज कहाँ है?
अवंतिका (अवंती, उज्जयिनी) आज का उज्जैन (मध्य प्रदेश) है, जहाँ महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग है।
स्रोत
- गरुड पुराण, उत्तरखंड (धर्मकांड, प्रेतकल्प) 38.5-6 और 49.114, वेंकटेश्वर प्रेस संस्करण का पाठ (GRETIL)
- गरुड पुराण (संक्षिप्त), अनु. अर्नेस्ट वुड और एस. वी. सुब्रह्मण्यम, 1911, अध्याय 16 (wisdomlib.org)
- स्कंद पुराण, काशीखंड पूर्वार्ध अध्याय 7, और वैष्णवखंड अयोध्या-माहात्म्य, मोतीलाल बनारसीदास का अंग्रेज़ी अनुवाद (wisdomlib.org)
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