छठ पूजा 2026 चार दिन की है: नहाय-खाय 13 नवंबर, खरना 14 नवंबर, संध्या अर्घ्य 15 नवंबर और उषा अर्घ्य 16 नवंबर। नहाय-खाय को एक बार सात्विक भोजन (लौकी, चने की दाल और अरवा चावल, सेंधा नमक में), खरना की शाम गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद, और उसके बाद उषा अर्घ्य के पारण तक लगभग 36 घंटे का निर्जल व्रत होता है। संध्या अर्घ्य का सूर्यास्त नई दिल्ली में 5:28 PM और पटना में 5:01 PM पर है; उषा अर्घ्य का सूर्योदय 6:44 AM और 6:07 AM पर। ये नियम लोक परंपरा से हैं; प्याज़-लहसुन नहीं पड़ता।
चारों दिन, नई दिल्ली और पटना
| दिन | क्या | नई दिल्ली | पटना |
|---|---|---|---|
| 13 नवंबरपहला दिन | नहाय-खाय (सूर्योदय) | 6:42 AM | 6:05 AM |
| 14 नवंबरदूसरा दिन | खरना (सूर्यास्त के बाद प्रसाद) | 5:28 PM | 5:01 PM |
| 15 नवंबरतीसरा दिन | संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त) | 5:28 PM | 5:01 PM |
| 16 नवंबरचौथा दिन | उषा अर्घ्य (सूर्योदय), फिर पारण | 6:44 AM | 6:07 AM |
भारतीय मानक समय में, SanatanBodh पंचांग गणना; Drik Panchang से मिलान। घाट पर सूर्य क्षितिज से ऊपर दिखने में कुछ मिनट और लग सकते हैं। अपने शहर का समय
शास्त्र किसी ग्रंथ में पढ़ा गया नियम, ग्रंथ और स्थान के साथ। परंपरा लोक प्रथा, जैसा स्रोत बताते हैं; अपने परिवार की रीति से मिलाएँ।
चार दिन के नियम
छठ के चार दिनों के नियम किसी पुराण से नहीं, लोक परंपरा से चले आ रहे हैं; इसलिए यहाँ हर नियम ‘परंपरा’ है, और क्षेत्र व परिवार के अनुसार थोड़ा बदलता है।
पहला दिन, नहाय-खाय: स्नान और एक बार सात्विक भोजन परंपरा
व्रती घर और रसोई की सफ़ाई करके नदी, तालाब या घर पर स्नान करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं। इस दिन एक ही बार भोजन होता है: लौकी या कद्दू की सब्ज़ी, चने की दाल और अरवा चावल, सेंधा नमक और घी में। भोजन पहले व्रती करते हैं, फिर परिवार।
स्रोत: वेबदुनिया, छठ पूजा का नहाय-खाय, 25 अक्टूबर 2025; वेबदुनिया, नहाय-खाय में क्या होता है, 17 नवंबर 2023; विकिपीडिया: छठ पूजा
दूसरा दिन, खरना (लोहंडा): दिन भर उपवास, शाम को प्रसाद परंपरा
दिन भर बिना जल के उपवास रहता है। शाम को पूजा के बाद गुड़ की खीर और घी लगी रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाता है, जो परिवार और पड़ोस में भी बँटता है। खीर परंपरा से नए मिट्टी के चूल्हे पर, आम की लकड़ी से बनती है।
स्रोत: वेबदुनिया, छठ खरना कैसे होता है, 29 अक्टूबर 2022; वेबदुनिया, छठ पूजा के 4 दिन, 25 अक्टूबर 2025; विकिपीडिया: छठ पूजा; Drik Panchang: छठ पूजा 2026
खरना के बाद लगभग 36 घंटे निर्जल परंपरा
खरना का प्रसाद लेने के बाद से उषा अर्घ्य के बाद पारण तक व्रती न अन्न लेते हैं, न जल; यही छठ का कठिन ‘निर्जला’ व्रत है, जो लगभग 36 घंटे का होता है। नई दिल्ली में 2026 में खरना की शाम से उषा अर्घ्य के सूर्योदय तक का समय लगभग 37 घंटे है।
स्रोत: वेबदुनिया, छठ खरना कैसे होता है, 29 अक्टूबर 2022; विकिपीडिया: छठ पूजा; तारीखें और समय: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang से मिलान (नई दिल्ली)
तीसरा दिन, संध्या अर्घ्य: डूबते सूर्य को परंपरा
षष्ठी को बाँस के सूप और दउरे में ठेकुआ, चावल के लड्डू (कसार) और फल सजाकर परिवार घाट पर जाता है। व्रती जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को जल और दूध का अर्घ्य देते हैं, और रात में छठ के गीत गाए जाते हैं।
स्रोत: वेबदुनिया, छठ पूजा के 4 दिन, 25 अक्टूबर 2025; विकिपीडिया: छठ पूजा
चौथा दिन, उषा अर्घ्य: उगते सूर्य को परंपरा
सप्तमी को सूर्योदय से पहले घाट पहुँचकर पूर्व की ओर मुख करके उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद प्रसाद बाँटकर व्रत का पारण होता है।
स्रोत: विकिपीडिया: छठ पूजा; वेबदुनिया, छठ पूजा के 4 दिन, 25 अक्टूबर 2025; Drik Panchang: छठ पूजा 2026
शुद्धता और कौन रखता है परंपरा
छठ को शुद्धता का व्रत माना जाता है: प्रसाद परंपरा से मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनता है और उसमें प्याज़-लहसुन नहीं पड़ता। व्रत ज़्यादातर स्त्रियाँ रखती हैं, पर बहुत से पुरुष भी रखते हैं।
स्रोत: विकिपीडिया: छठ पूजा; वेबदुनिया, छठ खरना कैसे होता है, 29 अक्टूबर 2022; वेबदुनिया, छठ पूजा का नहाय-खाय, 25 अक्टूबर 2025
स्वास्थ्य पहले
लगभग 36 घंटे बिना जल का व्रत बहुत कठिन है। गर्भावस्था, बीमारी, बढ़ती उम्र या नियमित दवा हो तो डॉक्टर और परिवार के बड़ों से पूछकर ही निर्जल व्रत रखें।
क्या खाते हैं: दिन के अनुसार
नहाय-खाय का भोजन परंपरा
लौकी या कद्दू की सब्ज़ी, चने की दाल और अरवा (कच्चा) चावल, सेंधा नमक और देसी घी में; दिन में एक ही बार।
स्रोत: वेबदुनिया, छठ पूजा का नहाय-खाय, 25 अक्टूबर 2025; वेबदुनिया, नहाय-खाय में क्या होता है, 17 नवंबर 2023; विकिपीडिया: छठ पूजा
खरना का प्रसाद परंपरा
गुड़ और चावल की खीर (कई जगह रसियाव कहते हैं) और घी लगी रोटी; कई घरों में साथ में फल। यही प्रसाद परिवार और पड़ोस को दिया जाता है।
स्रोत: वेबदुनिया, छठ खरना कैसे होता है, 29 अक्टूबर 2022; वेबदुनिया, छठ पूजा के 4 दिन, 25 अक्टूबर 2025; विकिपीडिया: छठ पूजा
अर्घ्य का प्रसाद परंपरा
गेहूँ के आटे और गुड़ से बना ठेकुआ, चावल के लड्डू (कसार) और मौसमी फल सूप में सजते हैं; पारण के बाद यही प्रसाद बाँटा जाता है।
स्रोत: विकिपीडिया: छठ पूजा; वेबदुनिया, छठ पूजा के 4 दिन, 25 अक्टूबर 2025
क्या न खाएँ
प्याज़, लहसुन और मांसाहार परंपरा
नहाय-खाय से ही घर में तामसिक भोजन (प्याज़, लहसुन, मांसाहार) नहीं बनता; परिवार भी शुद्ध शाकाहारी भोजन करता है।
स्रोत: वेबदुनिया, छठ पूजा का नहाय-खाय, 25 अक्टूबर 2025; वेबदुनिया, नहाय-खाय में क्या होता है, 17 नवंबर 2023; विकिपीडिया: छठ पूजा
साधारण नमक परंपरा
नहाय-खाय का भोजन सेंधा नमक में बनता है, साधारण नमक में नहीं।
स्रोत: वेबदुनिया, छठ पूजा का नहाय-खाय, 25 अक्टूबर 2025; वेबदुनिया, नहाय-खाय में क्या होता है, 17 नवंबर 2023; विकिपीडिया: छठ पूजा
खरना के बाद कुछ भी नहीं परंपरा
खरना के प्रसाद के बाद से उषा अर्घ्य तक व्रती न कुछ खाते हैं, न पानी पीते हैं।
स्रोत: वेबदुनिया, छठ खरना कैसे होता है, 29 अक्टूबर 2022; विकिपीडिया: छठ पूजा
पारण: व्रत कैसे खोलें
उषा अर्घ्य के बाद, प्रसाद से परंपरा
सप्तमी की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मैया से परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें, फिर प्रसाद लेकर व्रत खोलें। विकिपीडिया के अनुसार कई घरों में कच्चे दूध के शरबत और थोड़े प्रसाद से पारण होता है। प्रसाद घाट पर और घर-पड़ोस में बाँटा जाता है।
स्रोत: विकिपीडिया: छठ पूजा; वेबदुनिया, छठ पूजा के 4 दिन, 25 अक्टूबर 2025; Drik Panchang: छठ पूजा 2026
आगे पढ़ें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
छठ पूजा 2026 की चारों तारीखें क्या हैं?
नहाय-खाय शुक्रवार, 13 नवंबर 2026, खरना शनिवार, 14 नवंबर 2026, संध्या अर्घ्य रविवार, 15 नवंबर 2026 और उषा अर्घ्य व पारण सोमवार, 16 नवंबर 2026।
नहाय-खाय में क्या खाते हैं?
परंपरा से लौकी या कद्दू की सब्ज़ी, चने की दाल और अरवा चावल, सेंधा नमक और घी में, दिन में एक बार। पहले व्रती खाते हैं, फिर परिवार।
खरना का प्रसाद क्या होता है?
गुड़ की खीर और घी लगी रोटी, कई घरों में फल भी। दिन भर उपवास के बाद शाम की पूजा में यह प्रसाद लिया जाता है, और इसके बाद निर्जल व्रत शुरू होता है।
छठ का 36 घंटे का निर्जला व्रत कब से कब तक है?
खरना की शाम प्रसाद लेने के बाद से उषा अर्घ्य के बाद पारण तक। 2026 में खरना 14 नवंबर की शाम और उषा अर्घ्य 16 नवंबर की सुबह है।
क्या छठ का व्रत पुरुष भी रखते हैं?
हाँ। व्रत ज़्यादातर स्त्रियाँ रखती हैं, पर बहुत से पुरुष भी रखते हैं।
क्या छठ के नियम किसी ग्रंथ में लिखे हैं?
चार दिनों के नियम लोक परंपरा से हैं। षष्ठी देवी की कथा ब्रह्मवैवर्त पुराण में है, पर वह ग्रंथ नहाय-खाय, खरना या अर्घ्य के नियम नहीं देता।
स्रोत
- विकिपीडिया: छठ पूजा
- वेबदुनिया, छठ पूजा का नहाय-खाय, 25 अक्टूबर 2025
- वेबदुनिया, नहाय-खाय में क्या होता है, 17 नवंबर 2023
- वेबदुनिया, छठ खरना कैसे होता है, 29 अक्टूबर 2022
- वेबदुनिया, छठ पूजा के 4 दिन, 25 अक्टूबर 2025
- Drik Panchang: छठ पूजा 2026
- तारीखें और समय: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang से मिलान (नई दिल्ली)
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ
