एकादशी व्रत के नियम: क्या खाएँ, क्या न खाएँ

दशमी से द्वादशी तक के नियम, फलाहार और पारण; हर नियम के साथ लिखा है कि वह ग्रंथ से है या परंपरा से।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 8 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
एकादशी की सुबह शेषनाग की छाया में विष्णु प्रतिमा, तुलसी, फल, साबूदाना और मखाने का भोग
चित्र: AI से बनाया गया
संक्षेप में

एकादशी का व्रत दशमी की दोपहर के एक भोजन से शुरू होकर द्वादशी के पारण तक चलता है। नारद पुराण दोनों पक्षों की एकादशी को भोजन न करने को कहता है, और धर्मसिन्धु पूरा उपवास न कर सकने वाले के लिए केवल जल, दूध, फल या एक समय भोजन का विकल्प देता है। प्रचलित फलाहार में फल, दूध, मेवे, साबूदाना, सिंघाड़ा और आलू सेंधा नमक के साथ लिए जाते हैं; अन्न, खासकर चावल, नहीं। पारण द्वादशी को हरि वासर बीतने के बाद, द्वादशी रहते होता है।

अगली एकादशी

पापांकुशा एकादशी, गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026। पारण 23 अक्टूबर, 6:27–8:42 AM (नई दिल्ली)।

शास्त्र किसी ग्रंथ में पढ़ा गया नियम, ग्रंथ और स्थान के साथ। परंपरा लोक प्रथा, जैसा स्रोत बताते हैं; अपने परिवार की रीति से मिलाएँ।

व्रत के नियम

क्या खाएँ (फलाहार)

ग्रंथ एकादशी पर भोजन न करने को कहते हैं और असमर्थ के लिए जल, दूध या फल का विकल्प देते हैं। आज फलाहार में जो चीज़ें खाई जाती हैं, वे प्रचलित रीति हैं।

क्या न खाएँ

पारण: व्रत कैसे खोलें

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं?

जो पूरा उपवास न कर सकें, उनके लिए ग्रंथ जल, दूध, फल या एक समय भोजन का विकल्प देते हैं। प्रचलित फलाहार में फल, दूध, मेवे, और एक समय के भोजन में साबूदाना, सिंघाड़ा, शकरकंद, आलू और मूँगफली, सेंधा नमक के साथ।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

नारद पुराण (उत्तरभाग 3.17) एकादशी पर भोजन ही न करने को कहता है; चावल न खाना इसी नियम की सबसे प्रचलित पहचान बन गया है। चावल से जुड़ी जो कथाएँ सुनाई जाती हैं, वे हमें किसी ग्रंथ में नहीं मिलीं।

एकादशी का पारण कब करें?

अगले दिन द्वादशी को, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई) बीतने के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। हर एकादशी का पारण समय एकादशी की सूची में है।

दशमी के दिन क्या नियम है?

धर्मसिन्धु के अनुसार दशमी को दोपहर में एक ही बार भोजन करें, उसके बाद भोजन न करें, और रात भूमि पर सोएँ। काँसे के बर्तन, मसूर, चना, शहद, तेल और शाक से बचें।

बीमार या बुज़ुर्ग एकादशी कैसे रखें?

धर्मसिन्धु असमर्थ व्यक्ति के लिए केवल जल, केवल दूध, केवल फल या एक समय भोजन का संकल्प बताता है। डॉक्टर की सलाह से वही नियम लें जो स्वास्थ्य के लिए ठीक हो।

स्रोत

  1. नारद पुराण, उत्तरभाग 3.17 और 3.29 (एकादशी), संस्कृत विकिस्रोत
  2. नारदीय महापुराण (संस्कृत), नाग पब्लिशर्स संस्करण
  3. धर्मसिन्धु (काशीनाथ उपाध्याय), खेमराज श्रीकृष्णदास, बम्बई 1907: परिच्छेद 1 (एकादशी, पृ. 15–17), परिच्छेद 2 (नवरात्र, पृ. 78–81)
  4. धर्मसिन्धु, वसिष्ठदत्त मिश्र की हिंदी व्याख्या सहित, चौखम्बा संस्कृत सीरीज़, वाराणसी
  5. गीता प्रेस, व्रत-परिचय, पृ. 49–52 (एकादशी व्रत) और 96–97 (निर्जला)
  6. Drik Panchang: एकादशी व्रत आहार
  7. वेबदुनिया, एकादशी पर चावल क्यों नहीं, 10 जुलाई 2019
  8. तारीखें और समय: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang से मिलान (नई दिल्ली)

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