करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है। व्रत सूर्योदय (नई दिल्ली में 6:31 AM) से चंद्रोदय (8:17 PM) तक रखा जाता है, और प्रचलित रीति निर्जल व्रत की है। सूर्योदय से पहले सरगी खाई जाती है, जो परंपरा से सास देती है: फेनी, फल, मेवे और नारियल। शाम को पूजा का मुहूर्त 5:39–6:56 PM है; चाँद निकलने पर करवे से अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है, जैसा नारद पुराण का करक व्रत बताता है।
नई दिल्ली: करवा चौथ, 29 अक्टूबर
- सूर्योदयसरगी इससे पहले
- 6:31 AM
- चंद्रोदयइसके बाद अर्घ्य और व्रत खोलना
- 8:17 PM
- पूजा मुहूर्तसूर्यास्त के बाद
- 5:39–6:56 PM
- व्रत का समयसूर्योदय से चंद्रोदय
- 6:31 AM–8:17 PM
- चतुर्थी तिथि
- 10:11 PM तक
चाँद बादल, इमारतों या पहाड़ों के कारण कुछ मिनट बाद दिख सकता है।
अपने शहर का चंद्रोदयशास्त्र किसी ग्रंथ में पढ़ा गया नियम, ग्रंथ और स्थान के साथ। परंपरा लोक प्रथा, जैसा स्रोत बताते हैं; अपने परिवार की रीति से मिलाएँ।
व्रत के नियम
ग्रंथ में करवा चौथ: नारद पुराण का करक व्रत शास्त्र
नारद पुराण (पूर्वभाग, अध्याय 113, श्लोक 43–50) कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के ‘करक’ व्रत का विधान देता है। स्त्री स्नान और शृंगार करके गणेश जी की पूजा करे, उनके आगे पकवान से भरे दस करवे रखकर अर्पित करे, फिर उन्हें सुहागिनों और ब्राह्मणों को दे। रात में चंद्रोदय होने पर विधि से अर्घ्य देकर मीठा भोजन करे। ग्रंथ इस व्रत का अधिकार स्त्रियों को देता है, और इसे बारह या सोलह वर्ष रखकर उद्यापन करने, या जीवन भर रखने की बात कहता है।
स्रोत: नारद पुराण, पूर्वभाग 113.43–50 (करक व्रत), संस्कृत विकिस्रोत; नारदीय महापुराण (संस्कृत), नाग पब्लिशर्स संस्करण; The Narada Purana, भाग 4 (अंग्रेज़ी अनुवाद), मोतीलाल बनारसीदास
कौन सी चतुर्थी, किसकी पूजा, कौन रखता है शास्त्र
गीता प्रेस की ‘व्रत-परिचय’ के अनुसार व्रत उस कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को होता है जो चंद्रोदय के समय रहे। पूजा शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय और चंद्रमा की होती है; Drik Panchang गणेश जी को भी जोड़ता है और पहले पार्वती जी की पूजा बताता है। यह व्रत विशेषकर सुहागिन स्त्रियाँ रखती हैं, और ‘व्रत-परिचय’ उसी वर्ष ब्याही लड़कियों का भी नाम लेता है।
स्रोत: गीता प्रेस, व्रत-परिचय (पं. हनूमान शर्मा), पृ. 152–153 (करकचतुर्थी); Drik Panchang: करवा चौथ पूजा विधि
सूर्योदय से चंद्रोदय तक, बिना अन्न-जल परंपरा
प्रचलित रीति में व्रत सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक बिना अन्न और जल के रखा जाता है; Drik Panchang के बताए संकल्प में भी यही कहा जाता है। नारद पुराण ‘निर्जल’ शब्द नहीं कहता; वह चंद्रोदय पर अर्घ्य के बाद भोजन करने को कहता है। इसलिए निर्जल रहना यहाँ प्रचलित नियम के रूप में लिखा है।
स्रोत: Drik Panchang: करवा चौथ 2026, नई दिल्ली; Drik Panchang: करवा चौथ पूजा विधि; वेबदुनिया, करवा चौथ की सरगी और करवा, 6 अक्टूबर 2025; Wikipedia (अंग्रेज़ी): Karva Chauth
शाम को पूजा और कथा शास्त्र
पूजा सूर्यास्त के बाद, शाम के मुहूर्त में होती है; स्त्रियाँ प्रायः मिलकर पूजा करती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती-सुनाती हैं। ‘व्रत-परिचय’ के अनुसार नैवेद्य में करवे या घी में सिके आटे-खाँड के लड्डू चढ़ते हैं।
स्रोत: गीता प्रेस, व्रत-परिचय (पं. हनूमान शर्मा), पृ. 152–153 (करकचतुर्थी); Drik Panchang: करवा चौथ पूजा विधि
स्वास्थ्य पहले
गर्भावस्था, बीमारी, बढ़ती उम्र या नियमित दवा हो तो कठिन या निर्जल व्रत अपने डॉक्टर और परिवार के बड़ों से पूछकर ही रखें। व्रत भाव से होता है; सामर्थ्य के अनुसार हल्का नियम लेना भी व्रत ही है।
सरगी में क्या खाएँ
सरगी किसी ग्रंथ का नियम नहीं, लोक परंपरा है।
सरगी क्या है परंपरा
सरगी वह भोजन है जो व्रत शुरू होने से पहले, सूर्योदय से पहले खाया जाता है। परंपरा से सास इसे बहू के लिए बनाती या भेजती है; यह रस्म खासकर पंजाब में है, और उत्तर प्रदेश व बिहार में रीति कुछ अलग है।
स्रोत: Wikipedia (अंग्रेज़ी): Karva Chauth; वेबदुनिया, करवा चौथ की सरगी और करवा, 6 अक्टूबर 2025; वेबदुनिया, करवा क्या होता है, किसे कहते हैं सरगी, 4 नवंबर 2020
सरगी की थाली में क्या होता है परंपरा
प्रचलित रीति में सरगी में फेनी (दूध में भिगोई जाने वाली महीन सेवइयाँ), फल, सूखे मेवे और नारियल होते हैं; साथ में सुहाग की चीज़ें और कपड़े भी रखे जाते हैं। उत्तर प्रदेश में कई घरों में एक शाम पहले दूध-चीनी के साथ सूत फेनी खाई जाती है।
स्रोत: वेबदुनिया, करवा चौथ की सरगी और करवा, 6 अक्टूबर 2025; Wikipedia (अंग्रेज़ी): Karva Chauth
सरगी सूर्योदय से पहले पूरी करें
व्रत का समय सूर्योदय से गिना जाता है, इसलिए सरगी उससे पहले खा-पी लें। नई दिल्ली का सूर्योदय ऊपर समय के बॉक्स में है।
क्या न खाएँ
चंद्रोदय से पहले भोजन नहीं शास्त्र
नारद पुराण चंद्रोदय पर अर्घ्य देने के बाद भोजन करने को कहता है, और ‘व्रत-परिचय’ में दी करवा चौथ की कथा का नियम भी यही है कि भोजन चंद्रोदय के बाद हो। कथा में वीरवती भाई के दिखाए नकली चाँद को देखकर पहले भोजन कर लेती है; इसलिए चाँद को स्वयं देखकर ही अर्घ्य दें।
स्रोत: नारद पुराण, पूर्वभाग 113.43–50 (करक व्रत), संस्कृत विकिस्रोत; नारदीय महापुराण (संस्कृत), नाग पब्लिशर्स संस्करण; गीता प्रेस, व्रत-परिचय (पं. हनूमान शर्मा), पृ. 152–153 (करकचतुर्थी)
दिन में न अन्न, न जल परंपरा
प्रचलित निर्जल रीति में सरगी के बाद चंद्र दर्शन तक कुछ खाया-पिया नहीं जाता। जिन घरों में स्वास्थ्य के कारण दूसरी रीति है, वे अपने परिवार के बड़ों या पुरोहित से पूछकर चलें।
स्रोत: Drik Panchang: करवा चौथ पूजा विधि; वेबदुनिया, करवा क्या होता है, किसे कहते हैं सरगी, 4 नवंबर 2020; Wikipedia (अंग्रेज़ी): Karva Chauth
व्रत कैसे खोलें
चंद्रमा को अर्घ्य, फिर भोजन शास्त्र
चाँद निकलने पर उसकी पूजा करके करवे से अर्घ्य दें, फिर व्रत खोलें। ‘व्रत-परिचय’ के अनुसार नैवेद्य का पकवान (करवे) और दक्षिणा ब्राह्मण को देकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और फिर भोजन होता है; नारद पुराण मीठा भोजन कहता है।
स्रोत: गीता प्रेस, व्रत-परिचय (पं. हनूमान शर्मा), पृ. 152–153 (करकचतुर्थी); नारद पुराण, पूर्वभाग 113.43–50 (करक व्रत), संस्कृत विकिस्रोत; Drik Panchang: करवा चौथ पूजा विधि
छलनी से दर्शन और पति के हाथ से जल परंपरा
प्रचलित रीति में स्त्री छलनी (या दुपट्टे) से चाँद को और फिर पति को देखती है, और पति के हाथ से पहला घूँट जल पीकर व्रत खोलती है। यह लोक प्रथा है; ग्रंथों में इसका विधान नहीं मिलता।
बायना: सास को करवा और भेंट परंपरा
पूजा के बाद बायना दिया जाता है। ‘व्रत-परिचय’ के अनुसार नैवेद्य के 13 करवे या लड्डू, एक लोटा, एक वस्त्र और एक विशेष करवा पति के माता-पिता को दिए जाते हैं; विकिपीडिया इसमें हलवा, पूरी और मठरी का नाम लेता है, जो सास या ननद को दिए जाते हैं।
स्रोत: गीता प्रेस, व्रत-परिचय (पं. हनूमान शर्मा), पृ. 152–153 (करकचतुर्थी); Wikipedia (अंग्रेज़ी): Karva Chauth
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
करवा चौथ 2026 पर चाँद कितने बजे निकलेगा और पूजा कब है?
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में चंद्रोदय 8:17 PM पर है और पूजा का मुहूर्त 5:39–6:56 PM। व्रत सूर्योदय 6:31 AM से चंद्रोदय तक है। दूसरे शहरों का समय करवा चौथ के पन्ने पर है।
सरगी में क्या खाना चाहिए?
परंपरा से सरगी में फेनी, फल, सूखे मेवे और नारियल होते हैं, और यह सूर्योदय से पहले खाई जाती है। सरगी सास देती है; यह लोक प्रथा है, किसी ग्रंथ का नियम नहीं।
क्या करवा चौथ का व्रत पानी पीकर रख सकते हैं?
प्रचलित रीति निर्जल व्रत की है, और Drik Panchang के संकल्प में भी अन्न-जल न लेने की बात है। नारद पुराण में ‘निर्जल’ शब्द नहीं है। स्वास्थ्य ठीक न हो, गर्भावस्था हो या दवा चल रही हो, तो डॉक्टर और परिवार के बड़ों से पूछकर निर्णय लें।
करवा चौथ का व्रत कब और कैसे खोलें?
चाँद निकलने पर चंद्रमा की पूजा करके करवे से अर्घ्य दें, फिर भोजन करें। परंपरा से स्त्री छलनी से चाँद और पति को देखती है और पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलती है।
बादल हों और चाँद न दिखे तो?
ग्रंथ चंद्रोदय पर अर्घ्य की बात कहते हैं, बादलों के बारे में कुछ नहीं कहते। ऐसे में परिवारों की रीति अलग-अलग है; अपने घर के बड़ों या पुरोहित से पूछें। चाँद हर शहर में अलग समय पर उगता है, इसलिए अपने शहर का चंद्रोदय देखें।
करवा चौथ का व्रत कौन रखता है?
नारद पुराण इस व्रत का अधिकार स्त्रियों को देता है। विशेषकर सुहागिन स्त्रियाँ इसे पति की लंबी आयु और परिवार के सुख के लिए रखती हैं; गीता प्रेस की ‘व्रत-परिचय’ उसी वर्ष ब्याही लड़कियों का भी नाम लेती है।
स्रोत
- नारद पुराण, पूर्वभाग 113.43–50 (करक व्रत), संस्कृत विकिस्रोत
- नारदीय महापुराण (संस्कृत), नाग पब्लिशर्स संस्करण
- The Narada Purana, भाग 4 (अंग्रेज़ी अनुवाद), मोतीलाल बनारसीदास
- गीता प्रेस, व्रत-परिचय (पं. हनूमान शर्मा), पृ. 152–153 (करकचतुर्थी)
- Drik Panchang: करवा चौथ 2026, नई दिल्ली
- Drik Panchang: करवा चौथ पूजा विधि
- Wikipedia (अंग्रेज़ी): Karva Chauth
- वेबदुनिया, करवा चौथ की सरगी और करवा, 6 अक्टूबर 2025
- वेबदुनिया, करवा क्या होता है, किसे कहते हैं सरगी, 4 नवंबर 2020
- तारीखें और समय: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang से मिलान (नई दिल्ली)
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