रंगोली दिवाली की तैयारी का हिस्सा है: घर की सफ़ाई के बाद द्वार और पूजा-स्थान पर लक्ष्मी के स्वागत के लिए बनाई जाती है। सबसे सरल तरीका है पहले बिंदुओं का जाल रखना और फिर उन्हें जोड़ना। नीचे 17 डिज़ाइन हैं, हर एक के चरण चित्रों में: स्वस्तिक, आठ और सोलह पंखुड़ियों का कमल, दीया, लक्ष्मी के चरण, कलश, कोलम और तुलसी चौरा। दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।
रंगोली के शुभ चिह्न और उनके अर्थ
स्वस्तिक ग्रंथ / पूजा-पुस्तक
‘स्वस्ति’ शब्द ‘सु’ (अच्छा) और ‘अस्ति’ (है) से बना है: कल्याण हो। स्वस्तिक इसी शुभकामना का चिह्न है। गीता प्रेस की दीपावली पूजा में बही, थैली और तिजोरी पर रोली या केसर-चंदन से स्वस्तिक बनाकर पूजा होती है। रंगोली में इसकी चारों भुजाएँ दाहिनी ओर (घड़ी की दिशा में) मुड़ती हैं, और चारों खानों में एक-एक बिंदु रखा जाता है (बिंदु रखना परंपरा है)।
स्रोत: Wikipedia: Swastika (शब्द ‘स्वस्ति’ = सु + अस्ति; मोनियर-विलियम्स, संस्कृत-अंग्रेज़ी कोश, पृ. 1283); गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश: दीपावली पूजन (बही, थैली और तिजोरी पर स्वस्तिक)
कमल ग्रंथ / पूजा-पुस्तक
लक्ष्मी कमल पर बैठी और हाथ में कमल लिए कही गई हैं: दिवाली पूजा के अंत में पढ़ा जाने वाला श्लोक उन्हें ‘सरसिजनिलये सरोजहस्ते’ (कमल में रहने वाली, हाथ में कमल लिए) कहकर पुकारता है। इसलिए दिवाली की रंगोली के बीच में अक्सर आठ या सोलह पंखुड़ियों का कमल बनता है। बंगाल की लक्ष्मी पूजा की अल्पना में भी कमल प्रमुख चिह्न है।
स्रोत: ‘सरसिजनिलये सरोजहस्ते…’ (श्रीसूक्त के साथ पढ़ा जाने वाला श्लोक; कनकधारा स्तोत्र, श्लोक 15), इस साइट के दिवाली श्लोक पन्ने पर जाँचा गया; Wikipedia: Alpana (बंगाल की अल्पना; लक्ष्मी पूजा के चिह्न)
लक्ष्मी के चरण परंपरा
दिवाली और कोजागरी लक्ष्मी पूजा पर द्वार से पूजा-स्थान तक छोटे-छोटे पैरों के निशान बनाए जाते हैं, जिनकी उँगलियाँ घर के भीतर की ओर होती हैं: लक्ष्मी के घर में आने का संकेत। यह लोक परंपरा है, किसी ग्रंथ की विधि नहीं। Drik Panchang इन्हें ‘लक्ष्मी पद’ रंगोली कहता है (कोलम, मुग्गु और अल्पना में भी)।
स्रोत: Drik Panchang: Diwali Puja Vidhi और Lakshmi Puja Vidhi पन्नों पर रंगोली, लक्ष्मी पद और हृदय कमल डिज़ाइन; Wikipedia: Alpana (बंगाल की अल्पना; लक्ष्मी पूजा के चिह्न)
दीपक ग्रंथ / पूजा-पुस्तक
कार्तिक में दीपदान का विधान पद्म पुराण में है: सूर्यास्त के बाद घर, गोशाला, मंदिर और जलाशयों के किनारे दीपक, और धनतेरस से भाई दूज के पाँच दिन विशेष। रंगोली में दीये का चित्र बनाना, या रंगोली के चारों कोनों पर असली दीये रखना, परंपरा है।
स्रोत: पद्म पुराण, उत्तर खंड, कार्तिक माहात्म्य 95.1–9 (उद्यापन में तुलसी के मूल में चार रंगों का मंडल) और 121.26–37 (कार्तिक में दीपदान), देशपांडे अनुवाद, मोतीलाल बनारसीदास; गीता प्रेस संक्षिप्त पद्म पुराण; Wikipedia: Rangoli (क्षेत्रीय नाम, सामग्री, दिवाली और लक्ष्मी के स्वागत की परंपरा)
कलश परंपरा
आम के पत्तों और नारियल वाला कलश पूजा में स्थापित होता है, और रंगोली में भी बनाया जाता है। Wikipedia रंगोली के प्रमुख चिह्नों में कलश, आम, मछली, मोर और तोते जैसे पक्षी गिनाता है। चिह्न के रूप में रंगोली में बनाना परंपरा है।
स्रोत: Wikipedia: Rangoli (क्षेत्रीय नाम, सामग्री, दिवाली और लक्ष्मी के स्वागत की परंपरा)
चौक और मंडल ग्रंथ / पूजा-पुस्तक
पूजा के स्थान पर रंगों से चौक पूरना पुरानी रीति है। पद्म पुराण कार्तिक व्रत के उद्यापन में तुलसी के मूल में चार रंगों से सजा मंडल बनाने को कहता है। उत्तर भारत में चौकोर जाल और दक्षिण में बिंदुओं के जाल (कोलम) पर रेखाएँ अधिक चलती हैं।
स्रोत: पद्म पुराण, उत्तर खंड, कार्तिक माहात्म्य 95.1–9 (उद्यापन में तुलसी के मूल में चार रंगों का मंडल) और 121.26–37 (कार्तिक में दीपदान), देशपांडे अनुवाद, मोतीलाल बनारसीदास; गीता प्रेस संक्षिप्त पद्म पुराण; Wikipedia: Rangoli (क्षेत्रीय नाम, सामग्री, दिवाली और लक्ष्मी के स्वागत की परंपरा); Wikipedia: Kolam (बिंदुओं के जाल पर रेखाएँ, पुल्ली कोलम)
बनाने से पहले
- जगह झाड़-पोंछकर सुखा लें; पुरानी रीति में ज़मीन गोबर या मिट्टी से लीपी जाती थी।
- सामग्री: सफ़ेद के लिए चावल का आटा या खड़िया, लाल के लिए गेरू या कुमकुम, पीले के लिए हल्दी, और फूलों की पंखुड़ियाँ।
- पहले चॉक से बराबर दूरी पर बिंदु रखें; रेखाएँ बीच से बाहर की ओर जोड़ें, रंग सबसे अंत में।
- रंग चुटकी में लेकर अँगूठे और तर्जनी के बीच से धीरे-धीरे गिराएँ; ऊपर से भरने के लिए छोटी छलनी काम आती है।
17 आसान रंगोली डिज़ाइन, चरण दर चरण
हर डिज़ाइन का पहला चित्र उसके बिंदु दिखाता है; हर अगला चित्र एक चरण आगे। ये डिज़ाइन SanatanBodh ने कोड में बनाए हैं।
1. स्वस्तिक
द्वार, पूजा की चौकी, बही-खाते का पहला पन्ना
1. 25 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. बीच के बिंदु से ऊपर-नीचे और दाएँ-बाएँ, एक धन (+) का चिह्न खींचें।
3. हर भुजा के सिरे से घड़ी की दिशा में मुड़ती रेखा: ऊपर से दाएँ, दाएँ से नीचे, नीचे से बाएँ, बाएँ से ऊपर।
4. चारों खानों में पीले बिंदु रखें।
2. अष्टदल कमल (आठ पंखुड़ी)
रंगोली का बीच, कलश या दीये के नीचे
1. 17 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. बीच के बिंदु के चारों ओर छोटा घेरा बनाएँ।
3. घेरे से बाहर के आठ बिंदुओं तक आठ पंखुड़ियाँ खींचें।
4. पंखुड़ियों में गुलाबी, बीच में पीला रंग भरें।
3. षोडशदल कमल (सोलह पंखुड़ी)
बड़ी रंगोली का बीच, लक्ष्मी पूजा का स्थान
1. 25 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. भीतर के आठ बिंदुओं तक आठ पंखुड़ियाँ।
3. बाहर के सोलह बिंदुओं तक, भीतर की पंखुड़ियों के बीच से, सोलह पतली पंखुड़ियाँ।
4. बीच में पीला घेरा और उसमें सफ़ेद बिंदु।
4. दीया
द्वार के दोनों ओर, धनतेरस और दिवाली
1. 25 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. नीचे की दो पंक्तियों के बीच, बाएँ से दाएँ, कटोरी जैसा अर्धचंद्र बनाएँ।
3. ऊपर बीच के बिंदु से कटोरी तक लौ की बूँद जैसी आकृति।
4. कटोरी नारंगी, लौ पीली, बीच में लाल; चारों ओर बिंदु।
5. लक्ष्मी के चरण
द्वार से पूजा-स्थान तक, उँगलियाँ भीतर की ओर
1. 4 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. बिंदुओं के बीच दो तलवे: एड़ी नीचे, पंजा ऊपर (घर के भीतर की ओर)।
3. हर पंजे पर पाँच गोल उँगलियाँ; बीच में लाल (कुमकुम या गेरू) भरें।
6. चौक
पूजा की चौकी के नीचे, कलश स्थापना
1. 25 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. बाहरी कोनों के बिंदु जोड़कर वर्ग।
3. चारों भुजाओं के बीच के बिंदु जोड़कर हीरा (तिरछा वर्ग)।
4. भीतर के चार बिंदुओं से छोटा वर्ग; खानों में बारी-बारी लाल और हरा।
7. अष्टकोण तारा
आँगन या बरामदे का बीच
1. 17 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. हर दूसरे बाहरी बिंदु को जोड़कर एक वर्ग।
3. बचे चार बिंदुओं से दूसरा, तिरछा वर्ग: आठ कोनों वाला तारा बनता है।
4. तारे में नीला, भीतर के बिंदुओं पर अष्टकोण में पीला, बीच में लाल।
8. बिंदु-जाल कोलम
रोज़ की देहरी, दक्षिण भारत की रीति
1. 9 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. हर बिंदु के चारों ओर तिरछा वर्ग (हीरा), इतना बड़ा कि पड़ोसी हीरों के कोने मिलें।
3. हीरों में बारी-बारी पीला और नारंगी।
4. कोनों पर छोटे घेरे जोड़ें ताकि रेखा बिना रुके घूमती लगे।
9. नौ फूलों का जाल
देहरी के आगे की पट्टी, बच्चों के लिए आसान
1. 9 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. हर बिंदु के चारों ओर चार पंखुड़ियाँ: ऊपर, नीचे, दाएँ, बाएँ।
3. पंखुड़ियों के बीच चार छोटी पत्तियाँ (तिरछी)।
4. फूलों में लाल और गुलाबी बारी-बारी, बीच में पीला बिंदु।
10. कलश
पूजा-स्थान, गृह प्रवेश, नवरात्रि
1. 25 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. नीचे की तीन पंक्तियों में गोल घड़ा, ऊपर पतली गर्दन।
3. गर्दन से पाँच आम के पत्ते और बीच में नारियल।
4. घड़ा लाल, उस पर पीली पट्टी और स्वस्तिक-सा धन चिह्न।
11. सूर्य चक्र
छठ, मकर संक्रांति, रविवार
1. 25 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. भीतर के बारह बिंदुओं से गोल घेरा।
3. घेरे से बाहर के बारह बिंदुओं तक त्रिकोण वाली किरणें।
4. किरणें नारंगी, घेरा पीला, बीच में लाल बिंदु।
12. बूँदों का मंडल
बड़ी गोल रंगोली, दिवाली की रात
1. 19 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. बीच से दो गोल घेरे: एक भीतर के बिंदुओं पर, एक बाहर के।
3. दोनों घेरों के बीच बारह बूँदें, हर बाहरी बिंदु की ओर।
4. भीतर छह पंखुड़ियों का फूल और बूँदों के बीच सफ़ेद बिंदु।
13. कमल और चार दीये
लक्ष्मी पूजा का स्थान, दिवाली
1. 13 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. भीतर के आठ बिंदुओं तक आठ पंखुड़ियों का कमल।
3. चारों कोनों के बिंदुओं पर एक-एक दीया, लौ बाहर की ओर।
4. कमल और दीयों के बीच हरी पत्तियाँ।
14. छह पंखुड़ियों का फूल
छोटी जगह, पूजा की थाली के नीचे
1. 7 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. बीच के बिंदु से छह बाहरी बिंदुओं तक सीधी रेखाएँ।
3. हर रेखा पर दोनों ओर झुकी, नाव जैसी पंखुड़ी।
4. पंखुड़ियाँ बारी-बारी पीली और नारंगी, बाहर के बिंदुओं पर हरे घेरे।
15. कोने की बेल
कमरे या आँगन के कोने, बड़ी रंगोली के चारों कोने
1. 6 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. कोने के बिंदु से दोनों दीवारों के साथ दो रेखाएँ।
3. कोने पर चौथाई कमल: भीतर के बिंदु तक तीन पंखुड़ियाँ।
4. दोनों रेखाओं के साथ पत्तियाँ और बिंदुओं पर छोटे फूल।
16. तुलसी चौरा
कार्तिक मास, देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह
1. 25 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. नीचे की दो पंक्तियों पर चौड़ा, ऊपर सँकरा चबूतरा (समलंब)।
3. बीच से ऊपर तना और दोनों ओर छोटी-छोटी पत्तियाँ।
4. चबूतरा लाल, उस पर सफ़ेद धन चिह्न, आगे दीया।
17. बेल के घेरे में स्वस्तिक
मुख्य द्वार, धनतेरस और दिवाली
1. 41 बिंदु रखें, जैसे चित्र में।
2. बीच के छोटे जाल पर स्वस्तिक, जैसे पहले डिज़ाइन में।
3. बाहर के बिंदुओं से होकर चारों ओर लहरदार बेल।
4. बेल के मोड़ों पर पीले बिंदु और कोनों पर छोटे फूल।
चिह्नों के अर्थ और स्रोत: sanatanbodh.in/tyohar/diwali/rangoli/
अलग-अलग राज्यों में रंगोली के नाम
- रंगोली (महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर भारत)
- कोलम (तमिलनाडु)
- मुग्गु (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना)
- अल्पना (बंगाल)
- माँडना (राजस्थान)
- ऐपण (उत्तराखंड)
- अरिपन (बिहार, मिथिला)
- चौक पूरना (उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़)
- साथिया (गुजरात)
- पूक्कलम (केरल, ओणम पर फूलों से)
दिवाली की तैयारी
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रंगोली में बिंदुओं से डिज़ाइन कैसे बनाएँ?
ज़मीन साफ़ करके पहले चॉक या चावल के आटे से बराबर दूरी पर बिंदु रखें (जैसे 5 × 5)। फिर बीच से बाहर की ओर रेखाएँ जोड़ें, और अंत में रंग भरें। इस पन्ने पर हर डिज़ाइन के बिंदु पहले चित्र में हैं, और हर अगला चित्र एक चरण आगे।
दिवाली पर रंगोली क्यों बनाते हैं?
परंपरा के अनुसार साफ़ घर के द्वार पर रंगोली लक्ष्मी के स्वागत के लिए बनाई जाती है; Drik Panchang भी यही लिखता है। यह लोक परंपरा है, किसी ग्रंथ का नियम नहीं। पद्म पुराण कार्तिक व्रत के उद्यापन में तुलसी के मूल में चार रंगों का मंडल बनाने को कहता है।
लक्ष्मी के चरण किस दिशा में बनाएँ?
परंपरा से उँगलियाँ घर के भीतर की ओर, द्वार से पूजा-स्थान तक, जैसे लक्ष्मी घर में आ रही हों। यह लोक प्रथा है; अपने परिवार की रीति से बनाएँ।
रंगोली किस चीज़ से बनती है?
परंपरा से चावल का आटा, खड़िया या चूना, गेरू, हल्दी, कुमकुम और फूलों की पंखुड़ियाँ; आज रंगीन पाउडर भी। दक्षिण भारत में कोलम चावल के आटे से बनता है, केरल में ओणम का पूक्कलम फूलों से।
स्वस्तिक की भुजाएँ किस ओर मुड़ती हैं?
पूजा के स्वस्तिक की भुजाएँ दाहिनी ओर, घड़ी की दिशा में मुड़ती हैं: ऊपर वाली दाएँ, दाएँ वाली नीचे, नीचे वाली बाएँ, बाएँ वाली ऊपर। चारों खानों में एक-एक बिंदु रखा जाता है।
स्रोत
- Wikipedia: Swastika (शब्द ‘स्वस्ति’ = सु + अस्ति; मोनियर-विलियम्स, संस्कृत-अंग्रेज़ी कोश, पृ. 1283)
- गीता प्रेस, नित्यकर्म-पूजाप्रकाश: दीपावली पूजन (बही, थैली और तिजोरी पर स्वस्तिक)
- ‘सरसिजनिलये सरोजहस्ते…’ (श्रीसूक्त के साथ पढ़ा जाने वाला श्लोक; कनकधारा स्तोत्र, श्लोक 15), इस साइट के दिवाली श्लोक पन्ने पर जाँचा गया
- Wikipedia: Alpana (बंगाल की अल्पना; लक्ष्मी पूजा के चिह्न)
- Drik Panchang: Diwali Puja Vidhi और Lakshmi Puja Vidhi पन्नों पर रंगोली, लक्ष्मी पद और हृदय कमल डिज़ाइन
- पद्म पुराण, उत्तर खंड, कार्तिक माहात्म्य 95.1–9 (उद्यापन में तुलसी के मूल में चार रंगों का मंडल) और 121.26–37 (कार्तिक में दीपदान), देशपांडे अनुवाद, मोतीलाल बनारसीदास; गीता प्रेस संक्षिप्त पद्म पुराण
- Wikipedia: Rangoli (क्षेत्रीय नाम, सामग्री, दिवाली और लक्ष्मी के स्वागत की परंपरा)
- Wikipedia: Kolam (बिंदुओं के जाल पर रेखाएँ, पुल्ली कोलम)
- Wikipedia: Lakshmi Puja (कोजागरी पूजा पर अल्पना, द्वार पर रंगोली)
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ