गोवर्धन पूजा 2026 में 10 नवंबर, मंगलवार को है। यह कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को, दीपावली के बाद मनाई जाती है। भागवत पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण ने इंद्र की वर्षा से ब्रज को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। इस दिन गोबर से गोवर्धन बनाकर उसकी पूजा और परिक्रमा होती है, और भगवान को अन्नकूट का भोग लगता है।
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दीपोत्सव 2026: धनतेरस 6 नवंबर से भाई दूज 11 नवंबर तक
| तारीख | पर्व | समय (नई दिल्ली) |
|---|---|---|
| 6 नवंबर शुक्रवार | धनतेरस | 6:03–7:58 PM पूजा मुहूर्त |
| 7 नवंबर शनिवार, रात | काली चौदस | 11:39 PM–12:31 AM निशीथ काल |
| 8 नवंबर रविवार, भोर | नरक चतुर्दशी | 5:41–6:38 AM अभ्यंग स्नान |
| 8 नवंबर रविवार, शाम | दीपावली | 5:55–7:51 PM लक्ष्मी पूजा |
| 10 नवंबर मंगलवार | गोवर्धन पूजा | 6:40–8:50 AM प्रातःकाल |
| 11 नवंबर बुधवार | भाई दूज | 1:10–3:20 PM तिलक (अपराह्न) |
समय नई दिल्ली के, हमारी गणना से (Drik Panchang से मिलान); अपने शहर का समय हर पर्व के पन्ने पर। 9 नवंबर को 12:33 PM तक अमावस्या है, इसलिए गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को।
एक नज़र में
- तिथि
- कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा
- अन्य नाम
- अन्नकूट; महाराष्ट्र और कर्नाटक में बलि प्रतिपदा
- आराध्य
- श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत (गिरिराज) और गौएँ
- मुख्य कर्म
- गोवर्धन की पूजा और परिक्रमा, अन्नकूट का भोग
- कथा
- श्रीकृष्ण का गोवर्धन उठाना (भागवत पुराण 10.24–10.25)
- गुजरात
- नया वर्ष (बेसतु वरस)
- दीपोत्सव
- पाँच दिन के पर्व का चौथा दिन
इंद्र-यज्ञ की जगह गोवर्धन पूजा
श्रीकृष्ण का प्रस्ताव
ब्रजवासी वर्षा के लिए हर वर्ष इंद्र का यज्ञ करते थे। श्रीकृष्ण ने कहा कि ब्रज की जीविका गौओं, वन और पर्वत से चलती है, इसलिए इंद्र-यज्ञ के लिए जुटाई सामग्री से गौओं, ब्राह्मणों और गोवर्धन पर्वत का यज्ञ हो।
भागवत पुराण 10.24अन्नकूट का आधार
इसी प्रसंग में श्रीकृष्ण कहते हैं कि खीर से लेकर दाल तक अनेक पकवान बनाए जाएँ और सारा दूध-दही इकट्ठा किया जाए। अन्नकूट में भगवान को अनेक व्यंजनों का भोग इसी प्रसंग से जोड़ा जाता है।
भागवत पुराण 10.24.26"मैं पर्वत हूँ"
पूजा के समय श्रीकृष्ण ने एक विशाल रूप धारण किया और "मैं पर्वत हूँ" कहकर अर्पित भोग ग्रहण किया। ब्रज में गोवर्धन (गिरिराज) को श्रीकृष्ण का ही स्वरूप माना जाता है।
भागवत पुराण 10.24; ब्रज परंपराघर और मंदिर में
उत्तर भारत में आँगन में गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाई जाती है, कई क्षेत्रों में लेटे हुए पुरुष के रूप में। उसे फूलों और दीयों से सजाकर पूजा और परिक्रमा की जाती है। मंदिरों में भगवान को अनेक प्रकार के पकवानों का भोग (अन्नकूट) लगता है। ब्रज में लोग गोवर्धन पर्वत की लगभग 21 किलोमीटर की परिक्रमा करते हैं, और राजस्थान में नाथद्वारा का अन्नकूट प्रसिद्ध है।
बलि प्रतिपदा और नया वर्ष
बलि प्रतिपदा
महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह दिन राजा बलि की स्मृति में बलि प्रतिपदा (पाडवा) के रूप में मनाया जाता है। भागवत पुराण के अनुसार विष्णु के वामन अवतार ने बलि से तीन पग भूमि माँगी और उन्हें सुतल लोक भेजा। महाराष्ट्र में दिवाली पाडवा पति-पत्नी का पर्व भी है।
भागवत पुराण, स्कंध 8; परंपरागुजरात का नया वर्ष
गुजरात में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से विक्रम संवत का नया वर्ष शुरू होता है, जिसे बेसतु वरस कहते हैं; लोग एक-दूसरे को "साल मुबारक" कहते हैं।
परंपरापूजा विधि
- चरण 1
सुबह की तैयारी
स्नान के बाद आँगन या पूजा का स्थान साफ़ करें।
- चरण 2
गोवर्धन बनाना
गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएँ और फूलों व दीयों से सजाएँ (लोक परंपरा)।
- चरण 3
पूजा
मुहूर्त में गोवर्धन, श्रीकृष्ण और गौओं की पूजा करें; जल, दूध, फूल, रोली, अक्षत और दीपक अर्पित करें।
- चरण 4
अन्नकूट का भोग
अनेक प्रकार के पकवान बनाकर भगवान को भोग लगाएँ, फिर प्रसाद बाँटें।
- चरण 5
परिक्रमा
गोवर्धन की आकृति की परिक्रमा करें; ब्रज में लोग स्वयं गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं।
गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण
भागवत पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण के कहने पर जब ब्रजवासियों ने इंद्र के बदले गोवर्धन पर्वत, गौओं और ब्राह्मणों की पूजा की, तो इंद्र क्रोधित हो गए। उन्होंने प्रलय करने वाले सांवर्तक मेघों को ब्रज पर भेजा, और मूसलाधार वर्षा, ओलों और आँधी से ब्रज डूबने लगा। तब श्रीकृष्ण ने एक हाथ से गोवर्धन पर्वत को ऐसे उठा लिया जैसे कोई बालक कुकुरमुत्ता उठा लेता है, और सब ब्रजवासी अपनी गौओं के साथ उसके नीचे आ गए। सात दिन तक श्रीकृष्ण पर्वत थामे खड़े रहे। इंद्र का अभिमान टूटा, उन्होंने मेघ लौटा लिए, और बाद में आकर श्रीकृष्ण से क्षमा माँगी; सुरभि गाय और इंद्र ने श्रीकृष्ण का अभिषेक करके उन्हें "गोविंद" नाम दिया।
भागवत पुराण 10.24–10.27पूरी कथा पढ़ेंश्लोक
तस्माद् गवां ब्राह्मणानामद्रेश्चारभ्यतां मखः।य इन्द्रयागसम्भारास्तैरयं साध्यतां मखः॥इत्युक्त्वैकेन हस्तेन कृत्वा गोवर्धनाचलम्।दधार लीलया विष्णुश्छत्राकमिव बालकः॥गोवर्धन पूजा के रिश्ते
ज्ञान-ग्राफ़ में देखेंदेवता, पात्र और ऋषि 2
ग्रंथ और मंत्र 1
- भागवत पुराण · कथा-स्रोत (गोवर्धन लीला)भागवत पुराण 10.24–10.27
तीर्थ और स्थान 1
- गोवर्धन पर्वत · पूज्य पर्वतभागवत पुराण 10.24
पर्व 1
- दीपावली · मुख्य पर्वपरंपरा
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोवर्धन पूजा 2026 कब है?
10 नवंबर, मंगलवार को।
गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को है या 10 नवंबर को?
10 नवंबर (मंगलवार) को। प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर 12:33 PM से 10 नवंबर 2:01 PM तक है। गोवर्धन पूजा परंपरा से सुबह (प्रातःकाल) प्रतिपदा में होती है; 9 नवंबर की सुबह अमावस्या है, इसलिए पूजा 10 नवंबर की सुबह (नई दिल्ली 6:40–8:50 AM)।
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट में क्या अंतर है?
कोई अंतर नहीं; एक ही दिन के दो नाम हैं। इस दिन भगवान को अनेक पकवानों का भोग लगाया जाता है, जिसे अन्नकूट (अन्न का पर्वत) कहते हैं।
दीपावली और गोवर्धन पूजा के बीच कभी-कभी एक दिन का अंतर क्यों होता है?
गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को सुबह की जाती है। जब दीपावली की अमावस्या अगले दिन सुबह तक चलती रहती है, तो प्रतिपदा की पूजा उसके अगले दिन होती है।
10 नवंबर को गोवर्धन पूजा किस समय करें?
परंपरा से सुबह (प्रातःकाल) में, जब प्रतिपदा तिथि हो; कई जगह शाम को भी पूजा होती है। मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को प्रातःकाल मुहूर्त: नई दिल्ली 6:40–8:50 AM, लखनऊ 6:22–8:33 AM, जयपुर 6:43–8:54 AM, पटना 6:03–8:15 AM, चंडीगढ़ 6:45–8:54 AM, इंदौर 6:36–8:50 AM, मुंबई 6:43–8:59 AM, कोलकाता 5:46–8:00 AM, बेंगलुरु 6:16–8:35 AM। अपने शहर का समय ऊपर के बॉक्स में शहर चुनकर देखें।
श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत कितने दिन उठाए रखा?
भागवत पुराण (10.25) के अनुसार सात दिन, बिना हिले और बिना भूख-प्यास की परवाह किए।
दिवाली 2026 के पाँचों दिन कब हैं?
धनतेरस 6 नवंबर (शुक्रवार), नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की भोर और दीपावली 8 नवंबर (रविवार) की शाम, गोवर्धन पूजा 10 नवंबर (मंगलवार) और भाई दूज 11 नवंबर (बुधवार)। काली चौदस की रात्रि पूजा 7 नवंबर को है (Drik Panchang)।
स्रोत
- भागवत पुराण 10.24–10.27 (गोवर्धन लीला)
- भागवत पुराण, स्कंध 8 (वामन अवतार और बलि)
- लोक परंपरा
- मुहूर्त और चंद्रोदय: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang (नई दिल्ली, 2026–27) से मिलान
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