नागेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में आठवाँ ज्योतिर्लिंग है ("नागेशं दारुकावने"), पर दारुकावन कहाँ है, इस पर तीन मत हैं: गुजरात में द्वारका के पास का नागेश्वर, महाराष्ट्र के हिंगोली ज़िले का औंढा नागनाथ, और उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले का जागेश्वर। शिव पुराण की कथा दारुकावन को पश्चिमी समुद्र के तट पर रखती है; तीनों पक्ष नीचे हैं।
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- देवता
- शिव (नागेश्वर)
- परंपरा
- शैव
- तीर्थ-सूची
- द्वादश ज्योतिर्लिंग 8/12
- स्थान
- मत भिन्न हैं: नागेश्वर, द्वारका के पास, देवभूमि द्वारका ज़िला या औंढा नागनाथ, हिंगोली ज़िला या जागेश्वर, अल्मोड़ा ज़िला
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कहाँ है: 3 स्थान माने जाते हैं
स्रोत एक स्थान पर सहमत नहीं हैं। नीचे हर स्थान अलग है; किस स्रोत में कौन-सा मत है, यह "मत-भेद" भाग में लिखा है।
नागेश्वर, द्वारका के पास, देवभूमि द्वारका ज़िला
गुजरात
द्वारका शहर और रेलवे स्टेशन से लगभग 16–18 किमी। ज़िला और गुजरात पर्यटन इसे बारह ज्योतिर्लिंगों में गिनते हैं और लिखते हैं कि यही स्थान दारुकावन माना जाता है। दर्शन का समय किसी सरकारी पन्ने पर नहीं मिला।
औंढा नागनाथ, हिंगोली ज़िला
महाराष्ट्र
हिंगोली ज़िला इसे बारह ज्योतिर्लिंगों में "आठवाँ (आद्य)" कहता है। महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार परंपरा इसे युधिष्ठिर का बनाया मानती है और आज का हेमाडपंती मंदिर यादव (सेउण) राजाओं के समय का है। मंदिर के नाम से चलने वाली दो वेबसाइटें अलग-अलग समय देती हैं, इसलिए समय नहीं दिया।
जागेश्वर, अल्मोड़ा ज़िला
उत्तराखंड
मंदिर समिति (उत्तराखंड सरकार की साइट, 5 अक्टूबर 2026 को बंद थी; सितंबर 2024 की संग्रहीत प्रति देखी) इसे "नागेशं दारुकावने" वाला आठवाँ ज्योतिर्लिंग बताती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मुख्य मंदिर को लगभग आठवीं सदी का बताता है, पर ज्योतिर्लिंग का दावा नहीं करता।
नागेश्वर की कथा: दारुका और सुप्रिय
शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 29–30) के अनुसार पश्चिमी समुद्र के तट पर दारुका नाम की राक्षसी और उसका पति दारुक एक वन में लोगों को सताते थे; दारुका को पार्वती का वर मिला था। ऋषि और्व के शाप के बाद वे समुद्र के बीच एक नगर में जा बसे और नावों से जाने वालों को पकड़ने लगे।
कैदियों में सुप्रिय नाम का शिवभक्त वैश्य था, जो कैद में भी सबको शिव की पूजा कराता रहा। जब दारुक ने उसे मारने का आदेश दिया, शिव एक दरार से चार द्वारों वाले मंदिर के साथ प्रकट हुए, सुप्रिय को पाशुपत अस्त्र दिया और राक्षसों का नाश हुआ। पार्वती ने दारुका के वंश को बचाया, और शिव व पार्वती वहीं नागेश्वर और नागेश्वरी नाम से रहे।
नागेश्वर कैसे पहुँचें
- द्वारका का नागेश्वर: द्वारका रेलवे स्टेशन से सड़क से लगभग 16–18 किमी; हवाई अड्डे जामनगर और पोरबंदर (देवभूमि द्वारका ज़िला, गुजरात पर्यटन)।
- औंढा नागनाथ: हिंगोली से 24 किमी, नांदेड़ से 70 किमी; हवाई अड्डा नांदेड़, रेलवे स्टेशन हिंगोली (हिंगोली ज़िला)।
- जागेश्वर: अल्मोड़ा से 35 किमी; रेलवे स्टेशन काठगोदाम (लगभग 125 किमी), हवाई अड्डा पंतनगर (उत्तराखंड पर्यटन, मंदिर समिति)।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- शास्त्र: शिव पुराण की कथा दारुका के वन को "पश्चिमी समुद्र के तट पर" और उसके नगर को समुद्र में रखती है, जो तटीय स्थान (द्वारका) से मेल खाता है। उसी अध्याय की अनुवादक-टिप्पणी लिखती है कि निज़ाम राज्य की पुरातत्व सूचियाँ दारुकावन को औंढा मानती हैं, और इस नाम के दो और वन बताए जाते हैं, एक बद्रीनाथ के पास; शतरुद्र संहिता 42 की टिप्पणी दारुकावन को गढ़वाल में केदार के पास रखती है। गीता प्रेस के संक्षिप्त शिवपुराण की टिप्पणी लिखती है कि कुछ लोग "दारुकावने" के स्थान पर "द्वारकावने" पाठ मानते हैं।
- सरकारी स्रोत भी बँटे हैं: गुजरात के स्रोत द्वारका को; हिंगोली ज़िला और महाराष्ट्र पर्यटन का पन्ना औंढा को; और जागेश्वर मंदिर समिति (स्कंद और लिंग पुराण का हवाला देकर) जागेश्वर को ज्योतिर्लिंग कहते हैं। महाराष्ट्र पर्यटन का अपना ज्योतिर्लिंग पत्रक "नागेश्वर (द्वारका, गुजरात)" लिखता है। उत्तराखंड पर्यटन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण जागेश्वर को ज्योतिर्लिंग नहीं कहते।
- कथा: देवभूमि द्वारका ज़िले का पन्ना दारुका-सुप्रिय की नहीं, दारुकावन के बालखिल्य ऋषियों की कथा देता है (वामन पुराण का हवाला देकर, जिसे हमने नहीं जाँचा)।
- क्रम: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में नागेश्वर 8वाँ है (इस साइट की सूची इसी क्रम में है); शिव पुराण की सूची (कोटिरुद्र संहिता 1.21–23) में क्रम अलग है और वहाँ यह 10वाँ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
असली नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कहाँ है?
इस पर तीन मत हैं: द्वारका (गुजरात) के पास का नागेश्वर, औंढा नागनाथ (महाराष्ट्र) और जागेश्वर (उत्तराखंड)। शिव पुराण की कथा पश्चिमी समुद्र के तट की बात करती है, जो द्वारका के पक्ष में जाती है; पर अनुवादकों और राज्य सरकारों के स्रोत भी अलग-अलग स्थान बताते हैं। अपनी परंपरा के अनुसार मानें।
नागेश्वर किन तीर्थ-सूचियों में है?
द्वादश ज्योतिर्लिंग (सूची में 12 में से 8वाँ)।
नागेश्वर कैसे पहुँचें?
द्वारका का नागेश्वर: द्वारका रेलवे स्टेशन से सड़क से लगभग 16–18 किमी; हवाई अड्डे जामनगर और पोरबंदर (देवभूमि द्वारका ज़िला, गुजरात पर्यटन)। औंढा नागनाथ: हिंगोली से 24 किमी, नांदेड़ से 70 किमी; हवाई अड्डा नांदेड़, रेलवे स्टेशन हिंगोली (हिंगोली ज़िला)।
स्रोत
- देवभूमि द्वारका ज़िला (गुजरात सरकार): नागेश्वर मंदिर, devbhumidwarka.nic.in/tourist-place/nageshwar-temple; गुजरात पर्यटन: नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, gujarattourism.com/saurashtra/devbhoomi-dwarka/nageshwar-jyotirlinga.html
- हिंगोली ज़िला (महाराष्ट्र सरकार): औंढा नागनाथ, hingoli.nic.in/en/tourist-place/aundha-nagnath; महाराष्ट्र पर्यटन: औंढा नागनाथ, maharashtratourism.gov.in/temple/aundha-nagnath; ज्योतिर्लिंग पत्रक (2024)
- जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति: jageshwar-jyotirlinga.uk.gov.in (13 सितंबर 2024 की web.archive.org प्रति); उत्तराखंड पर्यटन: जागेश्वर, uttarakhandtourism.gov.in/destination/jageshwar; भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, देहरादून मंडल: अल्मोड़ा, asidehraduncircle.in/almora.html
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 29 और 30 (जे. एल. शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org/hinduism/book/shiva-purana-english/d/doc226530.html; अध्याय-संख्या sa.wikisource के संस्कृत पाठ जैसी, गीता प्रेस के "संक्षिप्त शिवपुराण" में अलग)
- शिव पुराण, शतरुद्र संहिता 42 की टिप्पणी (दारुकावन गढ़वाल में), wisdomlib.org/hinduism/book/shiva-purana-english/d/doc226438.html; गीता प्रेस, संक्षिप्त शिवपुराण, पृ. 498 की टिप्पणी
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता 1.21–23 (बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची), संस्कृत पाठ: sa.wikisource.org (शिवपुराणम्, संहिता ४, अध्यायः १)
- द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र ("सौराष्ट्रे सोमनाथं च …"), पाठ: sanskritdocuments.org/doc_shiva/jyotirling.html
- Wikidata Q1089275, Q15194007, Q116311650 (निर्देशांक, CC0)
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