द्वारका गुजरात के पश्चिमी समुद्र-तट पर बसा नगर है, जिसे भागवत पुराण श्रीकृष्ण की राजधानी बताता है। गरुड पुराण के सप्तपुरी श्लोक में "द्वारावती पुरी" सातवाँ नाम है, और द्वारका भारत के चार धामों में पश्चिम का धाम भी है। नगर का मुख्य मंदिर द्वारकाधीश (जगत मंदिर) है, गोमती घाट के पास।
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- तीर्थ-सूची
- सप्त पुरी 7/7
- स्थान
- द्वारका, गोमती के समुद्र-संगम पर, देवभूमि द्वारका ज़िला
- राज्य
- गुजरात
- देश
- भारत
- आधिकारिक वेबसाइट
- ज़िला प्रशासन, देवभूमि द्वारका (devbhumidwarka.nic.in)
- नक्शा
- OpenStreetMap (22.2403, 68.9686)
सप्तपुरी में क्यों
गरुड पुराण का श्लोक "अयोध्या मथुरा माया काशी काञ्ची अवन्तिका। पुरी द्वारावती ज्ञेया सप्तैता मोक्षदायिकाः॥" सात नगरियों को मोक्ष देने वाली कहता है। अर्थ: अयोध्या, मथुरा, माया, काशी, कांची, अवंतिका और द्वारावती पुरी, इन सात को मोक्ष देने वाली जानो। इस सूची में द्वारावती पुरी (आज की द्वारका) सातवाँ नाम है।
हमने यह श्लोक गरुड पुराण के उत्तरखंड (प्रेतकल्प) में दो जगह पढ़ा: अध्याय 38 (श्लोक 5-6) और अध्याय 49 (श्लोक 114), वेंकटेश्वर प्रेस संस्करण के पाठ में। दोनों जगह प्रसंग यह है कि किन तीर्थों में देह छूटने से मोक्ष मिलता है। स्कंद पुराण के काशीखंड (पूर्वार्ध, अध्याय 7) में मथुरा का ब्राह्मण शिवशर्मा सात पुरियों की यात्रा का निश्चय करता है (श्लोक 42-43) और बाकी छह पुरियों में जाता है।
शास्त्रों में द्वारका
भागवत पुराण (10.50.49-53) के अनुसार श्रीकृष्ण ने बलराम से विचार करके समुद्र के भीतर बारह योजन घेरे का दुर्ग-नगर बनवाया, जिसमें विश्वकर्मा का सारा कौशल दिखता था। स्कंद पुराण के काशीखंड (पूर्वार्ध 7.103-110) में शिवशर्मा द्वारावती पहुँचता है; वहाँ कहा गया है कि यहाँ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों के द्वार (प्रवेश) हैं, इसलिए ज्ञानी इसे द्वारावती कहते हैं (7.104), और यहाँ के गोपीचंदन की महिमा गाई गई है (7.107)।
देवभूमि द्वारका ज़िले के अनुसार कंस-वध के बाद श्रीकृष्ण यहाँ आकर बसे, नगर विश्वकर्मा ने उनकी आज्ञा से बनाया, और इसके पुराने नाम मोक्षपुरी, द्वारकामती और द्वारकावती हैं। गुजरात पवित्र यात्राधाम विकास बोर्ड के अनुसार परंपरा कहती है कि श्रीकृष्ण के देह छोड़ने के बाद पुरानी द्वारका समुद्र में डूब गई।
मुख्य मंदिर और घाट
द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर) पाँच मंज़िला, चालुक्य शैली का मुख्य मंदिर है; यात्री पहले गोमती घाट पर, जहाँ गोमती समुद्र से मिलती है, स्नान करते हैं और स्वर्ग द्वार से मंदिर में आते हैं (देवभूमि द्वारका ज़िला)। मंदिर से लगा हुआ आदि शंकराचार्य का शारदा पीठ है। रुक्मिणी देवी मंदिर की दीवारों पर बारहवीं सदी के चित्र हैं (ज़िला); गुजरात पर्यटन इसके साथ दुर्वासा के शाप की कथा जोड़ता है।
बेट द्वारका (शंखोद्धार) लगभग 30 किमी दूर एक द्वीप है, जहाँ ओखा से नाव से, और फ़रवरी 2024 से सुदर्शन सेतु से, पहुँचते हैं (ज़िला, गुजरात पर्यटन)। लगभग 18 किमी पर नागेश्वर मंदिर है, जिसे गुजरात पर्यटन और ज़िला बारह ज्योतिर्लिंगों में गिनते हैं, और लगभग 20 किमी पर गोपी तालाब (ज़िला)।
द्वारका कैसे पहुँचें
- रेल: द्वारका रेलवे स्टेशन (DWK) (देवभूमि द्वारका ज़िला)।
- हवाई: पोरबंदर हवाई अड्डा 95 किमी और जामनगर हवाई अड्डा 110 किमी (देवभूमि द्वारका ज़िला)।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- श्लोक का दूसरा चरण लोक में "पुरी द्वारावती चैव" के रूप में भी बोला जाता है। गरुड पुराण के जिस पाठ में हमने इसे देखा, उसमें "पुरी द्वारावती ज्ञेया" है। श्लोक "सप्तैता" (ये सात) कहता है, इसलिए "पुरी द्वारावती" एक ही नगर, द्वारका पुरी, है, जगन्नाथ पुरी नहीं।
- गुजरात पवित्र यात्राधाम विकास बोर्ड इस नगर को सात पुरियों में सबसे पहला या श्रेष्ठ बताता है। गरुड पुराण का श्लोक केवल सात नाम गिनाता है, कोई क्रम-श्रेष्ठता नहीं देता; दूसरी पुरियों के अपने स्रोत भी अपने नगर को पहला कहते हैं।
- नागेश्वर ज्योतिर्लिंग: गुजरात पर्यटन, Incredible India और ज़िला द्वारका के नागेश्वर को ज्योतिर्लिंग मानते हैं, जबकि महाराष्ट्र पर्यटन औंढा नागनाथ (हिंगोली) को; स्तोत्र केवल "नागेशं दारुकावने" कहता है।
- जामनगर की दूरी: ज़िला 110 किमी देता है, गुजरात पर्यटन के अलग-अलग पृष्ठ 110, 126 और 145 किमी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या सप्तपुरी श्लोक का "पुरी" जगन्नाथ पुरी है?
नहीं। "पुरी द्वारावती" का अर्थ द्वारावती नगरी, यानी द्वारका, है; श्लोक "सप्तैता" (ये सात) कहता है, और नाम ठीक सात तभी बनते हैं। जगन्नाथ पुरी चार धामों में है, सप्तपुरी में नहीं।
द्वारका सप्तपुरी में भी है और चार धाम में भी?
हाँ। नगर सप्तपुरी में है, और उसका द्वारकाधीश मंदिर चार धामों में पश्चिम का धाम है।
द्वारका कहाँ है?
द्वारका द्वारका, गोमती के समुद्र-संगम पर, देवभूमि द्वारका ज़िला, गुजरात में है।
द्वारका किन तीर्थ-सूचियों में है?
सप्त पुरी (सूची में 7 में से 7वाँ)।
द्वारका कैसे पहुँचें?
रेल: द्वारका रेलवे स्टेशन (DWK) (देवभूमि द्वारका ज़िला)। हवाई: पोरबंदर हवाई अड्डा 95 किमी और जामनगर हवाई अड्डा 110 किमी (देवभूमि द्वारका ज़िला)।
स्रोत
- गरुड पुराण, उत्तरखंड (धर्मकांड, प्रेतकल्प) 38.5-6 और 49.114, वेंकटेश्वर प्रेस संस्करण का पाठ, GRETIL: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/1_sanskr/3_purana/garup2_u.htm
- स्कंद पुराण, काशीखंड पूर्वार्ध, अध्याय 7 (सात पुरियाँ), मोतीलाल बनारसीदास का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org: https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/the-skanda-purana/d/doc423744.html
- भागवत पुराण 10.50.49-53 (vedabase.io): https://vedabase.io/en/library/sb/10/50/
- ज़िला देवभूमि द्वारका: इतिहास; ज़िले के बारे में; दर्शनीय स्थल; कैसे पहुँचें: https://devbhumidwarka.nic.in/history/ ; https://devbhumidwarka.nic.in/about-district/ ; https://devbhumidwarka.nic.in/places-of-interest/ ; https://devbhumidwarka.nic.in/how-to-reach/
- गुजरात पर्यटन: देवभूमि द्वारका; रुक्मिणी मंदिर; बेट द्वारका; नागेश्वर ज्योतिर्लिंग: https://www.gujarattourism.com/saurashtra/devbhoomi-dwarka.html ; https://www.gujarattourism.com/saurashtra/devbhoomi-dwarka/rukmini-temple.html ; https://www.gujarattourism.com/saurashtra/devbhoomi-dwarka/bet-dwarka.html ; https://www.gujarattourism.com/saurashtra/devbhoomi-dwarka/nageshwar-jyotirlinga.html
- गुजरात पवित्र यात्राधाम विकास बोर्ड: https://yatradham.gujarat.gov.in/ ; द्वारका: https://yatradham.gujarat.gov.in/TempleDetails?templename=rfym4HMfY0WJFzVFFU1tvg==
- महाराष्ट्र पर्यटन: औंढा नागनाथ: https://maharashtratourism.gov.in/temple/aundha-nagnath/
- स्थान के निर्देशांक: Wikidata (Q817247), CC0
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