काशी

शिव, विश्वनाथ रूप में (वाराणसी ज़िला उन्हें नगर का अधिष्ठाता देवता लिखता है)वाराणसी, उत्तर प्रदेश

अन्य नाम: वाराणसी, बनारस, अविमुक्त

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काशी: सप्त पुरी 4/7, शिव, विश्वनाथ रूप में (वाराणसी ज़िला उन्हें नगर का अधिष्ठाता देवता लिखता है), वाराणसी, उत्तर प्रदेश
संक्षेप में

काशी (वाराणसी) उत्तर प्रदेश में गंगा के तट पर बसा नगर है, जिसे परंपरा शिव की नगरी मानती है; वाराणसी ज़िला विश्वनाथ को नगर का अधिष्ठाता देवता लिखता है। गरुड पुराण के सप्तपुरी श्लोक में इसका चौथा नाम है। काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग और दशाश्वमेध और मणिकर्णिका घाट यहाँ के मुख्य तीर्थ हैं।

देवता
शिव, विश्वनाथ रूप में (वाराणसी ज़िला उन्हें नगर का अधिष्ठाता देवता लिखता है)
तीर्थ-सूची
सप्त पुरी 4/7
स्थान
वाराणसी, गंगा के तट पर, वाराणसी ज़िला
राज्य
उत्तर प्रदेश
देश
भारत
आधिकारिक वेबसाइट
ज़िला प्रशासन, वाराणसी (varanasi.nic.in)
नक्शा
OpenStreetMap (25.3189, 83.0128)

सप्तपुरी में क्यों

गरुड पुराण का श्लोक "अयोध्या मथुरा माया काशी काञ्ची अवन्तिका। पुरी द्वारावती ज्ञेया सप्तैता मोक्षदायिकाः॥" सात नगरियों को मोक्ष देने वाली कहता है। अर्थ: अयोध्या, मथुरा, माया, काशी, कांची, अवंतिका और द्वारावती पुरी, इन सात को मोक्ष देने वाली जानो। इस सूची में काशी चौथा नाम है।

हमने यह श्लोक गरुड पुराण के उत्तरखंड (प्रेतकल्प) में दो जगह पढ़ा: अध्याय 38 (श्लोक 5-6) और अध्याय 49 (श्लोक 114), वेंकटेश्वर प्रेस संस्करण के पाठ में। दोनों जगह प्रसंग यह है कि किन तीर्थों में देह छूटने से मोक्ष मिलता है। स्कंद पुराण के काशीखंड (पूर्वार्ध, अध्याय 7) में मथुरा का ब्राह्मण शिवशर्मा सात पुरियों की यात्रा का निश्चय करता है (श्लोक 42-43) और बाकी छह पुरियों में जाता है।

काशी का महत्त्व

स्कंद पुराण के काशीखंड (पूर्वार्ध 7.84-85) में तीर्थयात्री शिवशर्मा कहता है कि वह जानता है कि उत्तम मोक्ष देने में काशी सातों पुरियों में प्रमुख है; फिर भी बाकी पुरियाँ देखने आगे जाता है। उत्तर प्रदेश पर्यटन के अनुसार काशी को "अविमुक्त" इसलिए कहते हैं कि शिव इसे कभी नहीं छोड़ते; वाराणसी नाम वरुणा और असि नदियों के बीच बसे होने से है। वाराणसी ज़िला लिखता है कि वाराणसी में देह छूटने को जन्म-मरण से मुक्ति माना जाता है।

मुख्य मंदिर और घाट

काशी विश्वनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में है (वाराणसी ज़िला)। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के अनुसार आज का मंदिर 1780 में महारानी अहिल्याबाई होलकर ने बनवाया, 1839 में महाराजा रणजीत सिंह के दिए सोने से दो शिखर मढ़े गए, और 28 जनवरी 1983 को उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर का प्रबंध संभाला। पास ही अन्नपूर्णा मंदिर है, जिसे उत्तर प्रदेश पर्यटन 1725 में पेशवा बाजीराव प्रथम का बनवाया बताता है; काल भैरव मंदिर को ज़िला "काशी का कोतवाल" कहता है; और संकटमोचन मंदिर की हनुमान-मूर्ति उत्तर प्रदेश पर्यटन के अनुसार सोलहवीं सदी के अंत में तुलसीदास ने स्थापित की।

वाराणसी ज़िले के अनुसार नगर में 88 घाट हैं। उत्तर प्रदेश पर्यटन के अनुसार दशाश्वमेध घाट का पौराणिक नाम रुद्रसर है, परंपरा कहती है कि यहाँ ब्रह्मा ने दस अश्वमेध यज्ञ किए, और पक्का घाट 1735 में पेशवा बाजीराव ने बनवाया; यहाँ हर शाम गंगा आरती होती है (Incredible India)। मणिकर्णिका घाट काशी के पाँच प्रमुख और सबसे पुराने तीर्थों में है और श्मशान-घाट है (उत्तर प्रदेश पर्यटन)।

काशी कैसे पहुँचें

  • हवाई: बाबतपुर का लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी से 22 किमी (वाराणसी ज़िला)।
  • रेल: वाराणसी जंक्शन (कैंट); पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन 16 किमी (वाराणसी ज़िला)। Incredible India बनारस और काशी स्टेशन भी गिनाता है।
  • सड़क: प्रयागराज 128 किमी, लखनऊ 286 किमी, सारनाथ 10 किमी (वाराणसी ज़िला)।

प्रमुख त्योहार

मत-भेद: स्रोतों में अंतर

  • श्लोक का दूसरा चरण लोक में "पुरी द्वारावती चैव" के रूप में भी बोला जाता है। गरुड पुराण के जिस पाठ में हमने इसे देखा, उसमें "पुरी द्वारावती ज्ञेया" है। श्लोक "सप्तैता" (ये सात) कहता है, इसलिए "पुरी द्वारावती" एक ही नगर, द्वारका पुरी, है, जगन्नाथ पुरी नहीं।
  • काशीखंड में काशी को सात पुरियों में प्रमुख कहने वाला वाक्य यात्री शिवशर्मा का है, उस प्रसंग में; गरुड पुराण का श्लोक सातों को केवल गिनाता है।
  • विश्वनाथ मंदिर का वर्ष: मंदिर ट्रस्ट 1780 लिखता है, उत्तर प्रदेश पर्यटन का एक लेख 1776। हवाई अड्डे की दूरी: ज़िला और उत्तर प्रदेश पर्यटन 22 किमी, Incredible India लगभग 25 किमी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काशी, वाराणसी और बनारस एक ही नगर हैं?

हाँ, ये एक ही नगर के नाम हैं। सप्तपुरी श्लोक में इसे काशी कहा गया है।

काशी को अविमुक्त क्यों कहते हैं?

उत्तर प्रदेश पर्यटन के अनुसार इसलिए कि परंपरा में शिव काशी को कभी नहीं छोड़ते।

काशी कहाँ है?

काशी वाराणसी, गंगा के तट पर, वाराणसी ज़िला, उत्तर प्रदेश में है।

काशी किन तीर्थ-सूचियों में है?

सप्त पुरी (सूची में 7 में से 4वाँ)।

काशी कैसे पहुँचें?

हवाई: बाबतपुर का लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी से 22 किमी (वाराणसी ज़िला)। रेल: वाराणसी जंक्शन (कैंट); पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन 16 किमी (वाराणसी ज़िला)। Incredible India बनारस और काशी स्टेशन भी गिनाता है।

स्रोत

  1. गरुड पुराण, उत्तरखंड (धर्मकांड, प्रेतकल्प) 38.5-6 और 49.114, वेंकटेश्वर प्रेस संस्करण का पाठ, GRETIL: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/1_sanskr/3_purana/garup2_u.htm
  2. स्कंद पुराण, काशीखंड पूर्वार्ध, अध्याय 7 (सात पुरियाँ), मोतीलाल बनारसीदास का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org: https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/the-skanda-purana/d/doc423744.html
  3. ज़िला वाराणसी: कैसे पहुँचें; पर्यटन; प्रमुख मंदिर; गंगा घाट; श्री काशी विश्वनाथ मंदिर: https://varanasi.nic.in/how-to-reach/ ; https://varanasi.nic.in/tourism/ ; https://varanasi.nic.in/temples-of-importance/ ; https://varanasi.nic.in/tourist-place/ganga-ghat/ ; https://varanasi.nic.in/tourist-place/shri-kashi-vishwanath-temple/
  4. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट: इतिहास और कथा: https://shrikashivishwanath.org/mythology
  5. उत्तर प्रदेश पर्यटन: वाराणसी-सारनाथ; दशाश्वमेध घाट; मणिकर्णिका घाट; अन्नपूर्णा मंदिर; काल भैरव मंदिर; संकटमोचन मंदिर: https://www.uptourism.gov.in/en/page/varanasi-sarnath ; https://www.uptourism.gov.in/en/article/dashashwamedh-ghat ; https://www.uptourism.gov.in/en/article/manikarnika-ghat ; https://www.uptourism.gov.in/en/article/goddess-annapurna-temple ; https://www.uptourism.gov.in/en/article/lord-kal-bhairav-temple ; https://www.uptourism.gov.in/en/article/sankat-mochan-temple
  6. Incredible India: वाराणसी: https://www.incredibleindia.gov.in/en/uttar-pradesh/varanasi
  7. स्थान के निर्देशांक: Wikidata (Q79980), CC0

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