उज्जैन मध्य प्रदेश में क्षिप्रा नदी के तट पर बसा नगर है, जिसे गरुड पुराण का सप्तपुरी श्लोक "अवंतिका" कहता है; श्लोक में यह छठा नाम है। परंपरा इसे महाकाल (शिव) की नगरी मानती है, और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग यहीं है। यहाँ हर बारह वर्ष पर सिंहस्थ (कुंभ) लगता है।
हर सुबह तिथि, राहु काल और आने वाले व्रत-त्योहार, WhatsApp पर एक छोटे संदेश में।चैनल फ़ॉलो करें
- तीर्थ-सूची
- सप्त पुरी 6/7
- स्थान
- उज्जैन, क्षिप्रा नदी के तट पर, उज्जैन ज़िला
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- देश
- भारत
- आधिकारिक वेबसाइट
- ज़िला प्रशासन, उज्जैन (ujjain.nic.in)
- नक्शा
- OpenStreetMap (23.1828, 75.7772)
सप्तपुरी में क्यों
गरुड पुराण का श्लोक "अयोध्या मथुरा माया काशी काञ्ची अवन्तिका। पुरी द्वारावती ज्ञेया सप्तैता मोक्षदायिकाः॥" सात नगरियों को मोक्ष देने वाली कहता है। अर्थ: अयोध्या, मथुरा, माया, काशी, कांची, अवंतिका और द्वारावती पुरी, इन सात को मोक्ष देने वाली जानो। इस सूची में अवंतिका (आज का उज्जैन) छठा नाम है।
हमने यह श्लोक गरुड पुराण के उत्तरखंड (प्रेतकल्प) में दो जगह पढ़ा: अध्याय 38 (श्लोक 5-6) और अध्याय 49 (श्लोक 114), वेंकटेश्वर प्रेस संस्करण के पाठ में। दोनों जगह प्रसंग यह है कि किन तीर्थों में देह छूटने से मोक्ष मिलता है। स्कंद पुराण के काशीखंड (पूर्वार्ध, अध्याय 7) में मथुरा का ब्राह्मण शिवशर्मा सात पुरियों की यात्रा का निश्चय करता है (श्लोक 42-43) और बाकी छह पुरियों में जाता है।
नाम और शास्त्र
स्कंद पुराण के काशीखंड (पूर्वार्ध 7.90-92) में शिवशर्मा महाकाल की नगरी पहुँचता है; वहाँ कहा गया है कि संसार को पाप से बचाने वाली यह नगरी अवंती कहलाती है, हर युग में इसका नाम अलग होता है, और कलियुग में यह उज्जयिनी कहलाती है। उज्जैन ज़िला इसके और नाम भी गिनाता है: प्रतिकल्पा, पद्मावती, भोगवती, अमरावती, कुमुद्वती, विशाला और कुशस्थली; अवंती जनपद की राजधानी होने से यह अवंतिकापुरी कहलाई।
मुख्य मंदिर और घाट
महाकालेश्वर बारह ज्योतिर्लिंगों में है; उज्जैन ज़िले के अनुसार लिंग स्वयंभू माना जाता है और दक्षिणमुखी (दक्षिणामूर्ति) है, और मंदिर का नागचंद्रेश्वर स्थान केवल नागपंचमी को खुलता है। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार यहाँ रोज़ भस्म आरती होती है। हरसिद्धि मंदिर को ज़िला शक्तिपीठ बताता है, जहाँ शिव पुराण के अनुसार सती की कोहनी गिरी; गढ़कालिका भी ज़िले के अनुसार शक्तिपीठ है।
उज्जैन ज़िले के अनुसार क्षिप्रा के किनारे काल भैरव का मंदिर है, जहाँ प्रसाद में मदिरा चढ़ती है, और मंगलनाथ, जिसे मत्स्य पुराण के अनुसार मंगल का जन्मस्थान बताया जाता है। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार राम घाट नगर का सबसे पुराना स्नान-घाट है; ज़िले के अनुसार सिंहस्थ का शाही स्नान यहीं होता है, और परंपरा कहती है कि श्रीराम ने यहाँ अपने पिता का श्राद्ध किया। मंगलनाथ मार्ग पर सांदीपनि आश्रम है, जहाँ मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने शिक्षा पाई (मध्य प्रदेश पर्यटन)।
उज्जैन कैसे पहुँचें
- हवाई: इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा, 53 किमी (उज्जैन ज़िला)।
- रेल: उज्जैन जंक्शन (UJN), पश्चिम रेलवे (उज्जैन ज़िला)।
- सड़क: इंदौर 53 किमी, भोपाल 183 किमी, दिल्ली 774 किमी (उज्जैन ज़िला)।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- श्लोक का दूसरा चरण लोक में "पुरी द्वारावती चैव" के रूप में भी बोला जाता है। गरुड पुराण के जिस पाठ में हमने इसे देखा, उसमें "पुरी द्वारावती ज्ञेया" है। श्लोक "सप्तैता" (ये सात) कहता है, इसलिए "पुरी द्वारावती" एक ही नगर, द्वारका पुरी, है, जगन्नाथ पुरी नहीं।
- उज्जैन ज़िले की वेबसाइट (गरुड पुराण के नाम से) इस नगर को सात पुरियों में सबसे पहला या श्रेष्ठ बताता है। गरुड पुराण का श्लोक केवल सात नाम गिनाता है, कोई क्रम-श्रेष्ठता नहीं देता; दूसरी पुरियों के अपने स्रोत भी अपने नगर को पहला कहते हैं।
- हरसिद्धि के दीप-स्तंभ: ज़िला और मध्य प्रदेश पर्यटन का एक पृष्ठ 726 दीप लिखते हैं, मध्य प्रदेश पर्यटन का दूसरा पृष्ठ हर स्तंभ पर 1,008 दीप। हवाई अड्डे की दूरी: ज़िला 53 किमी, मध्य प्रदेश पर्यटन 55 किमी।
- डी. सी. सरकार (द शाक्त पीठाज़, 1948) के अनुसार पीठनिर्णय का "उज्जयिनी" पीठ आज के उज्जैन से भी जोड़ा गया है और बंगाल के उजानी (बर्दवान) से भी; यह सूची-पृष्ठ /kosh/shakti-peeth/ पर विस्तार से है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अवंतिका आज कहाँ है?
अवंतिका (अवंती, उज्जयिनी) आज का उज्जैन (मध्य प्रदेश) है, जहाँ महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग है।
उज्जैन में कुंभ कब लगता है?
उज्जैन का कुंभ सिंहस्थ कहलाता है; मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार यह बृहस्पति के सिंह राशि में आने पर, हर बारह वर्ष पर, क्षिप्रा के तट पर लगता है।
उज्जैन किन तीर्थ-सूचियों में है?
सप्त पुरी (सूची में 7 में से 6वाँ)।
उज्जैन कैसे पहुँचें?
हवाई: इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा, 53 किमी (उज्जैन ज़िला)। रेल: उज्जैन जंक्शन (UJN), पश्चिम रेलवे (उज्जैन ज़िला)।
स्रोत
- गरुड पुराण, उत्तरखंड (धर्मकांड, प्रेतकल्प) 38.5-6 और 49.114, वेंकटेश्वर प्रेस संस्करण का पाठ, GRETIL: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/1_sanskr/3_purana/garup2_u.htm
- स्कंद पुराण, काशीखंड पूर्वार्ध, अध्याय 7 (सात पुरियाँ), मोतीलाल बनारसीदास का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org: https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/the-skanda-purana/d/doc423744.html
- ज़िला उज्जैन: कैसे पहुँचें; इतिहास; संस्कृति और विरासत; दर्शनीय स्थल; महाकाल की सवारी; पंचक्रोशी यात्रा: https://ujjain.nic.in/how-to-reach/ ; https://ujjain.nic.in/en/history/ ; https://ujjain.nic.in/en/culture-heritage/ ; https://ujjain.nic.in/en/places-of-interest/ ; https://ujjain.nic.in/en/festival/shree-mahakaleshwar-savari/ ; https://ujjain.nic.in/en/festival/panch-kroshi-yatra/
- मध्य प्रदेश पर्यटन: उज्जैन; सिंहस्थ की कथा; सांदीपनि आश्रम; हरसिद्धि मंदिर: https://www.mptourism.com/destination-ujjain.php ; https://www.mptourism.com/the-legend-of-simhastha.html ; https://www.mptourism.com/sandipani-ashram-in-ujjain.html ; https://www.mptourism.com/harsiddhi-temple-shakti-peetha-in-Ujjain.html
- डी. सी. सरकार, द शाक्त पीठाज़, 1948 (archive.org), पृ. 46: https://archive.org/details/TheSaktaPithasDCSirkar
- स्थान के निर्देशांक: Wikidata (Q200119), CC0
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ
