अवतार

परशुराम

संक्षेप में

परशुराम दशावतार में विष्णु के छठे अवतार हैं: भृगुवंशी ऋषि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र, फरसा (परशु) धारण करने वाले ब्राह्मण योद्धा। हैहय राजा कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्रार्जुन) उनके पिता की कामधेनु गाय छीन ले गया तो उन्होंने उसे मारा; बदले में उसके पुत्रों ने जमदग्नि को मार डाला, और तब परशुराम ने इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रियों से खाली किया (भागवत 9.15-16; विष्णु पुराण 4.7, 4.11)। भागवत (9.16.26) के अनुसार वे आज भी महेंद्र पर्वत पर रहते हैं।

दशावतार में
छठा अवतार; भागवत की 22 अवतारों की सूची में सोलहवाँ (1.3.20)
अन्य नाम
भार्गव राम, जामदग्न्य, भृगुपति
माता-पिता
ऋषि जमदग्नि (ऋचीक और सत्यवती के पुत्र) और रेणुका
युग (परंपरा से)
त्रेता युग; महाभारत में भी भीष्म और कर्ण के गुरु के रूप में
कथा के ग्रंथ
भागवत पुराण 9.15-16; विष्णु पुराण 4.7, 4.11; महाभारत
जयंती
परशुराम जयंती: वैशाख शुक्ल तृतीया; 2027 में 8 मई (द्रिक पंचांग; अक्षय तृतीया 9 मई)

सहस्रार्जुन और कामधेनु

हैहय वंश के राजा अर्जुन (कार्तवीर्य, सहस्रार्जुन) ने दत्तात्रेय की सेवा करके हज़ार भुजाएँ और अपार बल पाया था (भागवत 9.15.17-19)। एक बार शिकार करते हुए वह जमदग्नि के आश्रम पहुँचा। ऋषि ने अपनी कामधेनु की कृपा से राजा, उसके मंत्रियों और पूरी सेना का सत्कार किया (9.15.23-24)।

ऋषि का वैभव देखकर राजा के मन में लोभ आया; उसने सत्कार का आदर नहीं किया और अपने लोगों से रोती हुई गाय और बछड़े को माहिष्मती ले जाने को कहा (9.15.25-26)। परशुराम लौटे तो यह सुनकर क्रोधित हुए, फरसा और धनुष लेकर गए और युद्ध में सहस्रार्जुन की भुजाएँ काटकर उसे मार डाला (9.15.27 से आगे)।

जमदग्नि की हत्या और इक्कीस बार

भागवत (9.16.1-8) में आगे की कथा है कि पिता की आज्ञा से परशुराम ने माता रेणुका और भाइयों का वध किया, और प्रसन्न पिता से वर में उन्हें फिर जीवित माँग लिया; वे सब जैसे नींद से उठ खड़े हुए। बाद में, जब परशुराम भाइयों के साथ वन गए थे, सहस्रार्जुन के पुत्रों ने बदला लेने के लिए आश्रम में ध्यान में बैठे जमदग्नि को मार डाला और उनका सिर ले गए (9.16.9-13)।

पिता की हत्या को कारण बनाकर परशुराम ने इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रियों से खाली किया और समंतपंचक (कुरुक्षेत्र) में रक्त के कुंड बनाए (9.16.19)। फिर उन्होंने पिता का सिर धड़ से जोड़ा, यज्ञ किया और दक्षिणा में दिशाएँ ऋत्विजों को और मध्य भाग कश्यप ऋषि को दे दिया (9.16.20-22)। जमदग्नि सप्तर्षि मंडल में सातवें तारे बने (9.16.24)।

राम से भेंट और आज

भागवत (9.10.7) के अनुसार सीता से विवाह के बाद अयोध्या लौटते हुए श्रीराम ने इक्कीस बार क्षत्रियों का नाश करने वाले परशुराम का गर्व शांत किया। भागवत (9.16.25-26) कहता है कि परशुराम आगे के मन्वंतर में सप्तर्षियों में होंगे, और आज भी दंड त्यागकर शांत मन से महेंद्र पर्वत पर रहते हैं; इसी से परंपरा उन्हें चिरंजीवी गिनती है।

परशुराम जयंती वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। 2027 में द्रिक पंचांग इसे 8 मई को देता है, क्योंकि तृतीया उस दिन प्रदोष काल में है; अक्षय तृतीया अगले दिन 9 मई को है। केरल और कोंकण की परंपरा में यह कथा प्रचलित है कि परशुराम ने समुद्र में फरसा फेंककर यह भूमि समुद्र से निकाली।

स्रोतों में अंतर

  • माता के वध की कथा: भागवत (9.16) और महाभारत (विष्णु पुराण 4.7 की टिप्पणी में विल्सन द्वारा उद्धृत) दोनों में है; विष्णु पुराण का अपना पाठ परशुराम की कथा विस्तार से नहीं कहता।
  • इक्कीस बार का कारण: भागवत की टीका में श्रीधर स्वामी (तगारे की टिप्पणी के अनुसार) परंपरा बताते हैं कि रेणुका ने इक्कीस बार छाती पीटी थी, इसलिए इक्कीस बार।
संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 4 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परशुराम के माता-पिता कौन थे?

भृगुवंशी ऋषि जमदग्नि और रेणुका (भागवत 9.15-16; विष्णु पुराण 4.7)।

परशुराम ने 21 बार क्षत्रियों का संहार क्यों किया?

सहस्रार्जुन के पुत्रों ने उनके पिता जमदग्नि को मार डाला था। भागवत (9.16.19) कहता है कि पिता की हत्या को कारण बनाकर, उस समय अधर्म पर चल रहे क्षत्रियों का उन्होंने इक्कीस बार नाश किया।

परशुराम जयंती 2027 में कब है?

8 मई 2027 (शनिवार), वैशाख शुक्ल तृतीया, द्रिक पंचांग के अनुसार। अक्षय तृतीया अगले दिन, 9 मई को है।

क्या परशुराम आज भी जीवित हैं?

भागवत (9.16.26) कहता है कि वे आज भी महेंद्र पर्वत पर शांत मन से रहते हैं, और परंपरा उन्हें चिरंजीवियों में गिनती है।

स्रोत

  1. भागवत पुराण 1.3.20, 9.10.7, 9.15.14-41, 9.16.1-26 (जी. वी. तगारे का अंग्रेज़ी अनुवाद, मोतीलाल बनारसीदास, archive.org)
  2. विष्णु पुराण 4.7 (और उस पर विल्सन की टिप्पणी में महाभारत की परशुराम कथा), 4.11 (एच. एच. विल्सन का अनुवाद, archive.org)
  3. द्रिक पंचांग: परशुराम जयंती 2027 (हमारी जाँच: docs/checks/drik-festivals-2027.md)
  4. विकिपीडिया: “Parashurama” (भीष्म, द्रोण और कर्ण के गुरु, केरल और कोंकण की कथा)

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