वामन दशावतार में विष्णु का पाँचवाँ अवतार है, अदिति और कश्यप के पुत्र, एक बौने ब्राह्मण बालक के रूप में। दैत्यराज बलि ने स्वर्ग जीत लिया था; वामन ने उसके यज्ञ में तीन पग भूमि माँगी, फिर विराट रूप में दो पगों में सारा जगत नाप लिया, और तीसरे पग के लिए बलि ने अपना सिर आगे कर दिया (भागवत 8.18-22)। भगवान ने बलि को सुतल लोक का राज्य दिया और तीनों लोक इंद्र को लौटाए (भागवत 8.22-23; विष्णु पुराण 3.1)।
- दशावतार में
- पाँचवाँ अवतार
- रूप
- बौना ब्राह्मण ब्रह्मचारी; फिर त्रिविक्रम (तीन पग वाला) विराट रूप
- माता-पिता
- अदिति और कश्यप ऋषि; इंद्र के छोटे भाई होने से उपेंद्र
- जन्म
- भाद्रपद शुक्ल द्वादशी, श्रवण नक्षत्र, अभिजित मुहूर्त; यह द्वादशी ‘विजया’ कहलाती है (भागवत 8.18.5-6)
- युग (परंपरा से)
- त्रेता युग
- मुख्य पात्र
- दैत्यराज बलि (प्रह्लाद के पौत्र), शुक्राचार्य, अदिति, इंद्र
भागवत की कथा
प्रह्लाद के पौत्र और विरोचन के पुत्र दैत्यराज बलि ने भृगुवंशी ब्राह्मणों (शुक्राचार्य आदि) की सहायता से स्वर्ग जीत लिया, और देवता छिप गए (भागवत 8.15)। पुत्रों के दुख से दुखी अदिति ने कश्यप के बताए पयोव्रत से भगवान की आराधना की (8.16-17), और भगवान उनके पुत्र बनकर जन्मे: भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को, श्रवण नक्षत्र और अभिजित मुहूर्त में, जब सूर्य आकाश के बीच में था (8.18.5-6)।
बौने ब्रह्मचारी के रूप में वामन बलि के यज्ञ में पहुँचे। बलि ने उनसे मनचाहा दान माँगने को कहा, तो उन्होंने अपने पैरों से नापी तीन पग भूमि माँगी (8.19)। शुक्राचार्य ने बलि को चेताया कि यह स्वयं विष्णु हैं और सब कुछ ले लेंगे, पर बलि ने कहा कि वचन देकर पीछे हटना सबसे बड़ा अधर्म है, और जल छोड़कर दान का संकल्प कर दिया (8.19.29 से 8.20)।
तब वामन का रूप बढ़कर पृथ्वी, आकाश, दिशाएँ, लोक और समुद्र, सब में फैल गया (8.20.21)। दो पगों में उन्होंने सारा जगत नाप लिया और बलि से तीसरे पग का स्थान माँगा (8.21)। वरुण-पाश में बँधे बलि ने शांत मन से कहा कि तीसरा पग मेरे सिर पर रखिए (8.22.2)। प्रह्लाद भी वहाँ आए (8.22.13-15)। भगवान ने बलि को सुतल लोक का राज्य दिया, जो स्वर्ग वालों के लिए भी चाहने योग्य बताया गया है (8.22.32), और बलि सुतल चले गए (8.23)।
वेद और विष्णु पुराण में
विष्णु के तीन पगों का उल्लेख ऋग्वेद में ही है (जैसे 1.22.16-18 और 1.154); विकिपीडिया के अनुसार ऋग्वेद विष्णु को बौना नहीं कहता। शतपथ ब्राह्मण (1.2.5.5) कहता है, “विष्णु वामन थे”, और देवता उन्हीं को आगे करके असुरों से उतनी भूमि माँगते हैं जितनी में विष्णु लेट सकें।
विष्णु पुराण (3.1) के अनुसार इस मन्वंतर में विष्णु कश्यप और अदिति के पुत्र वामन होकर जन्मे और तीन पगों से लोकों को जीतकर इंद्र (पुरंदर) को लौटा दिए। विष्णु पुराण (3.2) यह भी कहता है कि आठवें (सावर्णि) मन्वंतर में विरोचन-पुत्र बलि इंद्र होंगे।
पर्व
भाद्रपद शुक्ल द्वादशी वामन द्वादशी (वामन जयंती) के रूप में मानी जाती है, क्योंकि भागवत (8.18.5-6) इसी दिन वामन का जन्म बताता है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को महाराष्ट्र और कर्नाटक में राजा बलि की स्मृति में बलि प्रतिपदा (पाड़वा) मनाई जाती है। केरल का ओणम राजा महाबलि के लौटने से जोड़ा जाता है; विकिपीडिया में उद्धृत विद्वानों के अनुसार ओणम पुराना फसल-पर्व है जो अब महाबलि की कथा से जुड़ गया है।
स्रोतों में अंतर
- बलि कहाँ गए: भागवत (8.22-23) में सुतल लोक; अन्य वर्णनों में सामान्य रूप से पाताल। भागवत और विष्णु पुराण (3.2) दोनों उन्हें आगे के सावर्णि मन्वंतर का इंद्र बताते हैं।
- युग: दशावतार की परंपरा वामन को त्रेता युग में रखती है; विष्णु पुराण (3.1) उन्हें इस (वैवस्वत) मन्वंतर का अवतार कहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वामन अवतार क्यों हुआ?
दैत्यराज बलि ने स्वर्ग जीत लिया था। देवताओं की माता अदिति की प्रार्थना पर भगवान उनके पुत्र वामन बनकर जन्मे, बलि से तीन पग भूमि माँगकर तीनों लोक नापे और इंद्र को लौटाए (भागवत 8.15-23)।
वामन जयंती कब होती है?
भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को। भागवत (8.18.5-6) इसी दिन, श्रवण नक्षत्र और अभिजित मुहूर्त में, वामन का जन्म बताता है।
तीसरा पग कहाँ रखा गया?
राजा बलि के सिर पर; बलि ने स्वयं कहा कि तीसरा पग मेरे सिर पर रखिए (भागवत 8.22.2)।
क्या ओणम वामन अवतार से जुड़ा है?
केरल में ओणम राजा महाबलि के अपनी प्रजा से मिलने आने का पर्व माना जाता है। विकिपीडिया में उद्धृत विद्वानों के अनुसार ओणम मूल रूप से फसल-पर्व है जो बाद में महाबलि की कथा से जुड़ा।
स्रोत
- भागवत पुराण 8.15-23, विशेषकर 8.18.5-6, 8.20.21, 8.22.2, 8.22.32 (जी. वी. तगारे का अंग्रेज़ी अनुवाद, मोतीलाल बनारसीदास, archive.org)
- विष्णु पुराण 1.21 (बलि की वंशावली), 3.1, 3.2 (एच. एच. विल्सन का अनुवाद, archive.org)
- शतपथ ब्राह्मण 1.2.5.5 (जूलियस एगलिंग का अनुवाद, सेक्रेड बुक्स ऑफ़ द ईस्ट, खंड 12, archive.org)
- विकिपीडिया: “Vamana” (ऋग्वेद के तीन पग, ओणम पर विद्वानों का मत)
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ