अहोई अष्टमी 2026 में 1 नवंबर, रविवार को है। यह कार्तिक कृष्ण अष्टमी (पूर्णिमांत) को, करवा चौथ के बाद और दीपावली से लगभग एक सप्ताह पहले आती है। माताएँ संतान के कल्याण के लिए दिन भर व्रत रखती हैं, शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं और तारे देखकर व्रत खोलती हैं। अपने शहर का समय नीचे देखें।
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शहर-वार समय: तारे दिखने का समय
अपने शहर पर क्लिक करके उसका पूरा मुहूर्त, पास के शहर और प्रश्न देखें।
- नई दिल्ली5:36–6:54 PM
- वाराणसी5:17–6:34 PM
- मुंबई6:05–7:21 PM
- कोलकाता4:59–6:15 PM
- चेन्नई5:42–6:56 PM
- बेंगलुरु5:53–7:07 PM
- हैदराबाद5:45–7:00 PM
- अहमदाबाद6:02–7:18 PM
- जयपुर5:44–7:01 PM
- लखनऊ5:24–6:41 PM
- भोपाल5:42–6:59 PM
- उज्जैन5:49–7:05 PM
- हरिद्वार5:31–6:49 PM
- पुणे6:02–7:17 PM
- नोएडा5:36–6:53 PM
- गुरुग्राम5:37–6:55 PM
- गाज़ियाबाद5:35–6:53 PM
- फरीदाबाद5:36–6:54 PM
- चंडीगढ़5:35–6:53 PM
- लुधियाना5:39–6:57 PM
- अमृतसर5:41–7:00 PM
- जम्मू5:40–6:59 PM
- देहरादून5:31–6:49 PM
- ऋषिकेश5:30–6:48 PM
- शिमला5:33–6:51 PM
- आगरा5:35–6:52 PM
- मथुरा5:36–6:53 PM
- प्रयागराज5:22–6:39 PM
- कानपुर5:27–6:44 PM
- अयोध्या5:19–6:36 PM
- गोरखपुर5:14–6:31 PM
- मेरठ5:34–6:52 PM
- बरेली5:28–6:45 PM
- जोधपुर5:56–7:13 PM
- उदयपुर5:55–7:12 PM
- कोटा5:46–7:03 PM
- अजमेर5:49–7:06 PM
- इंदौर5:49–7:05 PM
- ग्वालियर5:35–6:53 PM
- जबलपुर5:32–6:48 PM
- सूरत6:03–7:19 PM
एक नज़र में
- तिथि
- कार्तिक कृष्ण अष्टमी (पूर्णिमांत)
- अन्य नाम
- अहोई आठें
- आराध्य
- अहोई माता (लोक परंपरा में पार्वती का रूप)
- व्रत
- माताएँ संतान के कल्याण और लंबी आयु के लिए रखती हैं
- व्रत का समय
- सूर्योदय से तारे दिखने तक, परंपरा से निर्जल
- पारण
- तारों को अर्घ्य देकर; कुछ परिवारों में चंद्रोदय के बाद
- मथुरा
- राधाकुंड में मध्यरात्रि का स्नान
- विशेष रूप से
- उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान
अहोई अष्टमी का व्रत
यह व्रत किसी पुराण से नहीं, लोक-परंपरा और व्रत-कथा से चला आ रहा है, इसलिए इसकी विधि क्षेत्र और परिवार के अनुसार थोड़ी बदलती है।
किसके लिए
माताएँ संतान की लंबी आयु और कल्याण के लिए व्रत रखती हैं। परंपरा से यह पुत्रों के लिए रखा जाता था; आज बहुत से परिवार बेटे और बेटी, दोनों के लिए रखते हैं।
लोक परंपराअहोई माता का चित्र
पूजा के लिए दीवार पर गेरू से या कागज़ पर अहोई माता का चित्र बनाया जाता है। उसमें प्रायः स्याहु (साही) और उसके बच्चे भी बनाए जाते हैं, जो व्रत-कथा से जुड़े हैं। आजकल छपे हुए चित्र भी प्रचलित हैं।
लोक परंपरातारे देखकर व्रत खोलना
कृष्ण अष्टमी को चंद्रमा आधी रात के आसपास उगता है, इसलिए अधिकतर परिवार शाम को तारे दिखने पर उन्हें अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं। कुछ परिवार चंद्रोदय तक प्रतीक्षा करते हैं।
लोक परंपराराधाकुंड स्नान
मथुरा ज़िले में गोवर्धन के पास स्थित राधाकुंड में अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि को स्नान की परंपरा है। ब्रज की मान्यता में राधाकुंड श्रीराधा का कुंड है, और संतान की कामना रखने वाले दंपती इस रात यहाँ स्नान करते हैं। यह ब्रज की स्थानीय परंपरा है।
पूजा विधि
- चरण 1
संकल्प
सुबह स्नान के बाद संतान के कल्याण के लिए व्रत का संकल्प लें।
- चरण 2
दिन भर व्रत
परंपरा से निर्जल; गर्भावस्था, बीमारी या दवा चलने पर स्वास्थ्य के अनुसार निर्णय लें।
- चरण 3
अहोई माता का चित्र
दीवार पर गेरू से या कागज़ पर अहोई माता और स्याहु का चित्र बनाएँ, या छपा हुआ चित्र लगाएँ। सामने जल से भरा कलश रखें।
- चरण 4
शाम की पूजा और कथा
पूजा मुहूर्त में रोली, अक्षत, फूल और दीपक से अहोई माता की पूजा करें, भोग लगाएँ और अहोई अष्टमी की कथा सुनें।
- चरण 5
अर्घ्य और पारण
तारे दिखने पर उन्हें जल से अर्घ्य दें और व्रत खोलें; कुछ परिवारों में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
साहूकारनी और स्याहु की कथा
प्रचलित व्रत-कथा के अनुसार एक साहूकारनी के सात पुत्र थे। दीपावली से पहले घर लीपने के लिए वह जंगल से मिट्टी लेने गई। मिट्टी खोदते समय अनजाने में उसकी कुदाल से स्याहु (साही) का एक बच्चा मर गया। कुछ ही समय में उसके सातों पुत्र एक-एक करके चल बसे। दुखी साहूकारनी ने गाँव की बड़ी-बूढ़ी स्त्रियों को सब बताया। उन्होंने कहा कि कार्तिक कृष्ण अष्टमी को स्याहु और उसके बच्चों का चित्र बनाकर अहोई माता की पूजा करो और अपनी भूल के लिए क्षमा माँगो। उसने वैसा ही किया, और माता की कृपा से उसे फिर संतान का सुख मिला। कथा के कई रूप प्रचलित हैं।
लोक व्रत-कथापूरी कथा पढ़ेंअहोई अष्टमी के रिश्ते
ज्ञान-ग्राफ़ में देखेंअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अहोई अष्टमी 2026 कब है?
1 नवंबर, रविवार को।
अहोई अष्टमी 1 नवंबर को है या 2 नवंबर को?
1 नवंबर (रविवार) को। अष्टमी तिथि 1 नवंबर 2:53 PM से 2 नवंबर 1:12 PM तक है। अहोई माता की पूजा शाम को होती है और व्रत तारे दिखने पर खुलता है, इसलिए वह दिन लिया जाता है जिसकी शाम अष्टमी हो; ऐसी शाम 1 नवंबर की है।
1 नवंबर को अहोई अष्टमी पर तारे कितने बजे दिखेंगे?
रविवार, 1 नवंबर 2026 को तारे दिखने का समय: नई दिल्ली 6:01 PM, लखनऊ 5:47 PM, जयपुर 6:08 PM, चंडीगढ़ 6:00 PM, इंदौर 6:12 PM, मुंबई 6:28 PM, कोलकाता 5:22 PM, बेंगलुरु 6:15 PM। पूजा मुहूर्त नई दिल्ली में 5:36–6:54 PM। तारे आकाश साफ़ होने पर ही दिखते हैं। बाकी शहर ऊपर की सूची में।
अहोई अष्टमी का व्रत कब खोलते हैं?
शाम को तारे दिखने पर उन्हें अर्घ्य देकर। कुछ परिवार चंद्रोदय के बाद खोलते हैं, जो इस दिन देर रात होता है। ऊपर अपने शहर का समय देखें।
अहोई माता कौन हैं?
लोक परंपरा में संतान की रक्षा करने वाली देवी, जिन्हें पार्वती का रूप माना जाता है। उनके चित्र के साथ स्याहु (साही) और उसके बच्चों का चित्र भी बनाया जाता है।
क्या अहोई अष्टमी का व्रत केवल पुत्रों के लिए है?
परंपरा से यह पुत्रों के लिए रखा जाता था, पर आज बहुत से परिवार बेटे और बेटी, दोनों के लिए यह व्रत रखते हैं।
राधाकुंड स्नान क्या है?
मथुरा ज़िले में गोवर्धन के पास राधाकुंड में अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि को स्नान की परंपरा, जो संतान की कामना से किया जाता है। यह ब्रज की स्थानीय परंपरा है।
स्रोत
- लोक परंपरा और अहोई अष्टमी की व्रत-कथा
- ब्रज परंपरा (राधाकुंड स्नान)
- मुहूर्त और चंद्रोदय: SanatanBodh पंचांग गणना, Drik Panchang (नई दिल्ली, 2026–27) से मिलान
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