पापांकुशा एकादशी 2026 गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को है। यह आश्विन शुक्ल पक्ष (पूर्णिमांत; अमांत पंचांग में आश्विन) की एकादशी है। नई दिल्ली में एकादशी तिथि 2:13 PM (21 अक्टूबर) से 2:49 PM तक है, और व्रत का पारण शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026, 6:27–8:42 AM के बीच करें।
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पापांकुशा एकादशी आश्विन शुक्ल पक्ष में, दशहरे के दो दिन बाद आती है। परंपरा में इसे पापों पर अंकुश लगाने वाली एकादशी कहा गया है, और इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है।
शहर के अनुसार पारण का समय
पारण शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को, भारतीय मानक समय में।
- नई दिल्ली6:27–8:42 AM
- मुंबई6:35–8:54 AM
- कोलकाता5:36–7:54 AM
- चेन्नई6:01–8:22 AM
- बेंगलुरु6:11–8:32 AM
- हैदराबाद6:11–8:31 AM
- अहमदाबाद6:40–8:58 AM
- पुणे6:31–8:50 AM
- जयपुर6:31–8:47 AM
- लखनऊ6:10–8:26 AM
- वाराणसी6:01–8:17 AM
- पटना5:52–8:09 AM
- भोपाल6:21–8:38 AM
- इंदौर6:27–8:44 AM
- चंडीगढ़6:31–8:45 AM
- देहरादून6:25–8:40 AM
अक्टूबर 2026 की दोनों एकादशी और 66 शहरों का पारण समय: एकादशी अक्टूबर 2026
व्रत और पारण के नियम
- व्रत एकादशी के सूर्योदय से शुरू होता है; भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी दल और दीपक के साथ।
- परंपरा में चावल और अन्न नहीं खाया जाता; निर्जल या फलाहार, अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार।
- पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में होता है, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) बीतने के बाद; सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है।
- बीमारी, गर्भावस्था या दवा चलने पर व्रत का रूप स्वास्थ्य के अनुसार चुनें।
नाम का अर्थ
“पाप” और “अंकुश” से बना नाम बताता है कि यह व्रत पापों पर अंकुश लगाकर उन्हें नष्ट करने वाला माना गया है। परंपरा के अनुसार हर एकादशी की तरह इसका महत्व भी श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था।
पूरी कथा पढ़ेंअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पापांकुशा एकादशी 2026 कब है?
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को, आश्विन शुक्ल पक्ष में।
पापांकुशा एकादशी 21 अक्टूबर को है या 22 अक्टूबर को?
व्रत गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को है (Drik Panchang की स्मार्त तारीख), और पारण शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026, 6:27–8:42 AM (नई दिल्ली)। नई दिल्ली में एकादशी तिथि 21 अक्टूबर 2:13 PM से 22 अक्टूबर 2:49 PM तक है; व्रत एकादशी के सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रखा जाता है।
पापांकुशा एकादशी का पारण कब करें?
नई दिल्ली में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026, 6:27–8:42 AM। पारण द्वादशी तिथि में और हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) बीतने के बाद किया जाता है; दूसरे शहरों का समय ऊपर की तालिका में है।
एकादशी व्रत में क्या नहीं खाते?
परंपरा में एकादशी पर चावल और अन्न नहीं खाया जाता। कुछ लोग निर्जल व्रत रखते हैं, कुछ फलाहार करते हैं; अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार चुनें।
एकादशी का व्रत कब से कब तक होता है?
एकादशी के दिन सूर्योदय से अगले दिन (द्वादशी) के पारण तक। कई परिवार दशमी की शाम से ही सात्विक भोजन करते हैं।
स्रोत
- Drik Panchang: Papankusha Ekadashi 2026, नई दिल्ली (तारीख और पारण का मिलान)
- Drik Panchang: एकादशी व्रत की कथाएँ पद्म पुराण की परंपरा से
- तिथि और पारण: SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश)
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