हिंदू धर्म में आज चार प्रमुख सम्प्रदाय गिने जाते हैं: शैव (शिव के उपासक), वैष्णव (विष्णु और उनके अवतारों के उपासक), शाक्त (देवी के उपासक) और स्मार्त (जो पंचायतन पूजा में शिव, विष्णु, देवी, सूर्य और गणेश, पाँचों की पूजा करते हैं)। स्मार्त परंपरा “षण्मत” यानी छह उपासना-मार्ग भी गिनती है: शैव, वैष्णव, शाक्त, गाणपत्य (गणेश), सौर (सूर्य) और कौमार (स्कंद), जिनकी व्यवस्था परंपरा आदि शंकराचार्य से जोड़ती है। यह गिनती किसी ग्रंथ का एक श्लोक नहीं, जीवित परंपराओं का वर्गीकरण है, और हर सम्प्रदाय के भीतर कई शाखाएँ हैं।
| नाम | प्रमुख देवता | दर्शन और ग्रंथ | शाखाएँ और केंद्र |
|---|---|---|---|
| शैवशैव सम्प्रदाय | शिव | शैव सिद्धांत, काश्मीर शैव आदि मत; श्वेताश्वतर उपनिषद्, शैव आगम, शिव पुराण | पाशुपत, शैव सिद्धांत, काश्मीर शैव, लिंगायत; 12 ज्योतिर्लिंग |
| वैष्णववैष्णव सम्प्रदाय | विष्णु और उनके अवतार, विशेषकर राम और कृष्ण | विशिष्टाद्वैत, द्वैत, शुद्धाद्वैत आदि; भगवद्गीता, भागवत पुराण | श्री, माध्व, निम्बार्क, पुष्टिमार्ग, गौड़ीय, रामानंदी, वारकरी |
| शाक्तशाक्त सम्प्रदाय | देवी (शक्ति): दुर्गा, काली, पार्वती आदि रूप | शक्ति ही सृष्टिकर्ता और सृष्टि; देवी माहात्म्य, शाक्त तंत्र | बंगाल और असम; कामाख्या, शक्तिपीठ |
| स्मार्तस्मार्त सम्प्रदाय | पंचायतन: शिव, विष्णु, देवी, सूर्य, गणेश | अद्वैत वेदांत (आदि शंकराचार्य); वेद, स्मृति, पुराण | शंकराचार्य के चार मठ, विशेषकर शृंगेरी |
| गाणपत्यगणेश के उपासक | गणेश (गणपति) | गणेश को परम देवता मानने वाली परंपरा; लगभग 10वीं सदी में उत्कर्ष | उच्ची पिल्लैयार मंदिर, तिरुचिरापल्ली (पंथ का सबसे बड़ा मंदिर) |
| सौरसूर्य के उपासक | सूर्य | उदय, मध्याह्न और अस्त के सूर्य की उपासना से मोक्ष की मान्यता | गुप्त काल और मध्यकाल में पूरे भारत में; मुल्तान का सूर्य मंदिर (7वीं सदी) |
| कौमारस्कंद के उपासक | स्कंद (कार्तिकेय, सुब्रह्मण्य, मुरुगन) | षण्मत का छठा मार्ग; स्कंद को तमिलों के प्राचीन देवता मुरुगन से एक माना गया | दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु |
चार या छह: यह गिनती कहाँ से आती है
“सम्प्रदाय” का अर्थ है गुरु से शिष्य तक चली आई परंपरा और उसमें सिखाया जाने वाला सिद्धांत (मोनियर-विलियम्स संस्कृत कोश)। हिंदू सम्प्रदायों की कोई एक शास्त्रीय सूची नहीं है; विद्वान और संस्थाएँ इन्हें अलग-अलग ढंग से गिनते हैं।
एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका शैव, वैष्णव और शाक्त को आज के हिंदू धर्म के तीन मुख्य रूप कहता है, और स्मार्त को एक अलग सम्प्रदाय के रूप में बताता है जिसके अनुयायी सभी देवताओं को मानते हैं। हिमालयन अकादमी (हवाई का एक हिंदू मठ) इन्हीं चारों को हिंदू धर्म के “चार सम्प्रदाय” कहती है।
षण्मत (छह मत) की गिनती स्मार्त परंपरा की है। कांची कामकोटि पीठ इसमें गाणपत्य, शैव, शाक्त, वैष्णव, कौमार और सौर गिनता है और इनकी स्थापना आदि शंकराचार्य से मानता है। इसमें हर मार्ग अपने देवता को केंद्र में रखता है, पर सबको एक ही परम सत्य के रूप माना जाता है।
एक घर, कई मार्ग
ये सम्प्रदाय एक-दूसरे से कटे हुए नहीं हैं। स्मार्त पंचायतन पूजा में पाँचों देवता एक साथ पूजे जाते हैं। ब्रिटानिका के अनुसार अधिकांश वैष्णव भी कई परंपराओं से लेते हैं और विष्णु-पूजा को स्थानीय रीतियों के साथ मिलाते हैं, और शैव धर्म में दार्शनिक मतों के साथ अनगिनत लोक-रूप भी शामिल हैं।
शाक्त परंपरा शैव से गहराई से जुड़ी है: देवी को कहीं स्वयं परम देवता माना जाता है और कहीं शिव की शक्ति। गाणपत्य और सौर आज अलग सम्प्रदाय के रूप में कम दिखते हैं, पर उनके देवता लगभग हर परंपरा में पूजे जाते हैं: ब्रिटानिका के अनुसार गाणपत्यों ने ही गणेश को हर शुभ काम की शुरुआत में पूजे जाने वाले देवता के रूप में स्थापित करने में मदद की, और बहुत से हिंदू हर सुबह सूर्य की प्रार्थना, गायत्री मंत्र, का जप करते हैं।
हर सम्प्रदाय के भीतर शाखाएँ
वैष्णवों में परंपरा चार सम्प्रदाय गिनती है (श्री, ब्रह्म, रुद्र और सनकादि), और उनके बाद गौड़ीय, रामानंदी, वारकरी और स्वामीनारायण जैसी परंपराएँ बनीं। शैवों में पाशुपत, शैव सिद्धांत, काश्मीर शैव और लिंगायत प्रमुख हैं। स्मार्तों के केंद्र शंकराचार्य के चार आम्नाय मठ हैं। इन सबके अलग पन्ने इस कोश में हैं।
स्रोतों में अंतर
- गिनती: ब्रिटानिका शैव, वैष्णव और शाक्त को तीन मुख्य रूप कहता है और स्मार्त को अलग सम्प्रदाय; हिमालयन अकादमी चारों को बराबर “चार सम्प्रदाय” गिनती है।
- षण्मत के देवता: कांची कामकोटि पीठ और हिमालयन अकादमी छह देवता गिनते हैं (शिव, विष्णु, शक्ति, गणेश, सूर्य, स्कंद); ब्रिटानिका स्मार्तों की पंचायतन पूजा में पाँच देवता बताता है, स्कंद के बिना।
- लिंगायत: ब्रिटानिका के अनुसार 21वीं सदी की शुरुआत से कुछ लिंगायत हिंदू धर्म से अलग धर्म के रूप में, या उसके भीतर एक जाति के रूप में, कानूनी मान्यता की माँग करते रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हिंदू धर्म के कितने सम्प्रदाय हैं?
आम तौर पर चार प्रमुख सम्प्रदाय गिने जाते हैं: शैव, वैष्णव, शाक्त और स्मार्त। स्मार्त परंपरा षण्मत के छह मार्ग गिनती है: शैव, वैष्णव, शाक्त, गाणपत्य, सौर और कौमार। हर सम्प्रदाय के भीतर कई उप-सम्प्रदाय भी हैं, इसलिए कोई एक अंतिम संख्या नहीं है।
हिंदू धर्म के 4 सम्प्रदाय कौन से हैं?
शैव (शिव को परम मानने वाले), वैष्णव (विष्णु और उनके अवतार राम और कृष्ण के भक्त), शाक्त (देवी के उपासक) और स्मार्त (पंचायतन के पाँच देवताओं की एक साथ पूजा करने वाले, आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत से जुड़े)।
षण्मत क्या है?
षण्मत यानी छह उपासना-मार्ग: शैव, वैष्णव, शाक्त, गाणपत्य, सौर और कौमार, जिनके देवता क्रमशः शिव, विष्णु, देवी, गणेश, सूर्य और स्कंद हैं। कांची कामकोटि पीठ की परंपरा इन्हें आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित मानती है।
क्या स्मार्त एक साथ कई देवताओं की पूजा करते हैं?
हाँ। स्मार्त पंचायतन पूजा में शिव, विष्णु, देवी, सूर्य और गणेश, पाँचों की पूजा करते हैं। किसी परिवार को इनमें से एक देवता अधिक प्रिय हो सकता है; ब्रिटानिका के अनुसार आज स्मार्तों में शिव विशेष रूप से प्रिय हैं।
वैष्णव के कितने सम्प्रदाय हैं?
परंपरा चार गिनती है: श्री (रामानुज), ब्रह्म (मध्व), रुद्र (विष्णुस्वामी, वल्लभ) और सनकादि (निम्बार्क)। इनका पूरा विवरण “वैष्णव के चार सम्प्रदाय” पन्ने पर है।
स्रोत
- एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: “Shaivism”, “Vaishnavism”, “Shaktism”, “Smarta sect”
- एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: “Gāṇapatya”, “Saura sect”, “Skanda”, “Murugan”, “Lingayat”
- एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: “Hinduism: Vaishnavism and Shaivism”, “Hinduism: Tantric traditions and Shaktism”
- हिमालयन अकादमी (कौआई हिंदू मठ): “The Four Denominations of Hinduism”
- श्री कांची कामकोटि पीठ (kamakoti.org): “Our Heritage: Ganapatyam”, षण्मत की सूची
- मोनियर-विलियम्स संस्कृत-अंग्रेज़ी कोश: “सम्प्रदाय”
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