खाटू श्याम जी की आरती: ॐ जय श्री श्याम हरे

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राजस्थान में मोरपंख वाले निशान लेकर खाटू श्याम मंदिर की ओर जाते पदयात्री
चित्र: AI से बनाया गया
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  1. पद 1

    ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे। खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥

    हे श्री श्याम, हे बाबा श्याम, आपकी जय हो। आप अनुपम रूप धारण करके खाटू धाम में विराजते हैं।

  2. पद 2

    रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे। तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े॥

    आप रत्नों से जड़े सिंहासन पर विराजते हैं और सिर पर चँवर डुलाया जा रहा है (ढुरे)। शरीर पर केसरिया बागा (लंबा राजस्थानी जामा) है और कानों में कुंडल हैं।

  3. पद 3

    गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे। खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले॥

    गले में फूलों की माला है और सिर पर मुकुट है। अग्नि पर धूप खेई जा रही है (जलाई जा रही है) और दीपक की ज्योति जल रही है।

  4. पद 4

    मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे। सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे॥

    सोने के थाल मोदक (लड्डू), खीर और चूरमे से भरे हैं। सेवक इनका भोग लगाते हैं और नित्य सेवा करते हैं (चूरमा राजस्थान की मिठाई है, जो रोटी या बाटी को चूरकर घी और शक्कर मिलाकर बनती है)।

  5. पद 5

    झांझ कटोरा और घड़ियावल, शंख मृदंग घुरे। भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे॥

    झाँझ, कटोरा (बजाया जाने वाला धातु का पात्र) और घड़ियाल बजते हैं, शंख और मृदंग गूँजते हैं (घुरे)। भक्त आरती गाते हैं और जय-जयकार करते हैं।

  6. पद 6

    जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे। सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे॥

    जो आपका ध्यान करता है, वह फल पाता है और सब दुखों से उबर जाता है। सेवक अपने मुख से ‘श्री श्याम, श्याम’ का उच्चारण करते हैं।

  7. पद 7

    श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत भक्त-जन, मनवांछित फल पावे॥

    भक्तजन कहते हैं कि जो कोई श्री श्याम बिहारी जी की यह आरती गाता है, वह मनचाहा फल पाता है।

  8. पद 8

    जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे। निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे॥

    हे बाबा श्री श्याम, आपकी जय हो। आपने अपने भक्तों के सब काम पूरे किए हैं।

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/khatu-shyam-aarti/

संक्षेप में

“ॐ जय श्री श्याम हरे” राजस्थान के सीकर ज़िले में स्थित खाटू धाम के श्याम बाबा की आरती है। परंपरा खाटू श्याम को बर्बरीक मानती है, जिनकी पूजा श्रीकृष्ण के नाम ‘श्याम’ से होती है। आरती में उनके श्रृंगार, भोग और आरती के वाद्यों का वर्णन है। यह कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) पर उनके जन्मोत्सव, हर एकादशी और फाल्गुन मेले में गाई जाती है।

यहाँ वह पाठ दिया गया है जो देखे गए सभी स्रोतों में लगभग एक जैसा मिलता है। कुछ स्रोतों में पद 5 में ‘शंख मृदंग धुरे’ मिलता है। कुछ संस्करणों में अंत में यह पद भी गाया जाता है: ‘तन मन धन सब कुछ है तेरा, हो बाबा सब कुछ है तेरा। तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥’ जिस स्थान पर कई आरतियों में कवि का नाम (छाप) आता है, वहाँ इस आरती में ‘कहत भक्त-जन’ है, इसलिए इससे रचयिता का पता नहीं चलता। गाते समय पहली पंक्ति (टेक) हर पद के बाद दोहराई जाती है।

आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खाटू श्याम कौन हैं?

परंपरा खाटू श्याम को भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक मानती है। स्कंद पुराण (माहेश्वर खंड, कौमारिका खंड, अध्याय 59 से 66) में बर्बरीक की कथा है: वहाँ श्रीकृष्ण युद्ध के आरंभ में उनका सिर काटते हैं, और देवी द्वारा अमर किया गया वह सिर एक पहाड़ी से युद्ध देखता है। शीश का दान, कृष्ण से ‘श्याम’ नाम से पूजे जाने का वरदान और खाटू में सिर मिलने की बातें लोक परंपरा की हैं; वे पुराण की इस कथा में नहीं मिलतीं।

खाटू श्याम का जन्मोत्सव कब मनाया जाता है?

खाटू की परंपरा में कार्तिक शुक्ल एकादशी, यानी देवउठनी एकादशी को श्याम बाबा का जन्मोत्सव मनाया जाता है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष में खाटू में बड़ा मेला लगता है, जिसका मुख्य दिन फाल्गुन शुक्ल एकादशी माना जाता है।

आरती उन्हें ‘श्याम बिहारी’ क्यों कहती है?

श्याम और बिहारी श्रीकृष्ण के नाम हैं। लोक परंपरा के अनुसार बर्बरीक को श्रीकृष्ण के नाम ‘श्याम’ से पूजे जाने का वरदान मिला, इसलिए खाटू में उन्हें श्याम बाबा कहा जाता है और आरती उन्हें कृष्ण के नामों से पुकारती है।

‘बागो’, ‘ढुरे’ और ‘चूरमा’ का क्या अर्थ है?

‘बागो’ (बागा) राजस्थानी में लंबा जामा या अंगरखा है, ‘चंवर ढुरे’ यानी चँवर डुलाया जा रहा है, और चूरमा रोटी या बाटी को चूरकर घी और शक्कर मिलाकर बनने वाली राजस्थानी मिठाई है, जिसे खाटू में श्याम बाबा का प्रिय भोग माना जाता है।

स्रोत

  1. परंपरागत आरती पाठ (खाटू)
  2. बर्बरीक की कथा: स्कंद पुराण, माहेश्वर खंड, कौमारिका खंड, अध्याय 59 से 66
  3. खाटू श्याम के रूप में पूजा और जन्मोत्सव: खाटू की लोक परंपरा

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