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दुर्गा जी की आरती: जय अम्बे गौरी PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/durga-aarti/
“जय अम्बे गौरी” देवी दुर्गा (अम्बे माँ) की सबसे प्रचलित आरतियों में से एक है। इसमें देवी के रूप, श्रृंगार और सिंह वाहन का वर्णन है, और दुर्गा सप्तशती में वर्णित असुरों पर उनकी विजय को याद किया गया है। यह नवरात्रि, दुर्गा पूजा, माता की चौकी और जागरण में, और प्रतिदिन की देवी पूजा के अंत में गाई जाती है।
इस आरती के शब्दों में क्षेत्र और परंपरा के अनुसार थोड़ा अंतर मिलता है, जैसे ‘निशिदिन/निशदिन’, ‘भैरों/भैरूँ’ और पद 11 में ‘वर मुद्रा धारी’ की जगह ‘खड्ग खप्पर धारी’। गाते समय पहली पंक्ति (टेक) हर पद के बाद दोहराई जाती है। अंतिम पद में ‘शिवानन्द स्वामी’ का नाम (छाप) आता है, पर रचयिता के बारे में पक्की ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
“जय अम्बे गौरी” आरती किसने लिखी?
अंतिम पद में ‘कहत शिवानन्द स्वामी’ आता है, इसलिए इसे शिवानन्द स्वामी से जोड़ा जाता है। उनके जीवन और समय के बारे में प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती।
इस आरती में कितने पद हैं?
प्रचलित पाठ में पहली टेक समेत 13 पद हैं।
यह आरती कब गाई जाती है?
नवरात्रि के नौ दिनों में, दुर्गा पूजा और दुर्गा अष्टमी पर, माता की चौकी और जागरण में, और प्रतिदिन की देवी पूजा के अंत में।
आरती में किन असुरों का उल्लेख है?
शुंभ-निशुंभ, महिषासुर, धूम्रलोचन, चंड-मुंड, रक्तबीज और मधु-कैटभ। इनकी कथाएँ दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण के देवी माहात्म्य) में हैं।
स्रोत
- परंपरागत आरती पाठ
- असुर-वध के प्रसंग: दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य)
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पाठ का मिलान: drikpanchang.com, bhaktibharat.com
