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गणेश जी की आरती: जय गणेश जय गणेश देवा PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/ganesh-aarti/
“जय गणेश जय गणेश देवा” भगवान गणेश की सबसे प्रचलित हिंदी आरती है। इसमें गणेश जी के माता-पिता, उनके एकदंत और चार भुजाओं वाले रूप, मूषक वाहन और लड्डुओं के भोग का सरल वर्णन है। यह गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव में, दीपावली के लक्ष्मी-गणेश पूजन में, और प्रतिदिन की पूजा में गाई जाती है।
कुछ संस्करणों में शब्द थोड़े अलग मिलते हैं, जैसे ‘पान चढ़े फूल चढ़े’ या ‘हार चढ़े फूल चढ़े’, ‘माथे पर तिलक सोहे’ और ‘अँधे को आँख देत’। कई प्रचलित संस्करणों में एक पद और गाया जाता है: ‘दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी। कामना को पूर्ण करो, जाऊँ बलिहारी॥’ गाते समय पहली दो पंक्तियाँ (टेक) हर पद के बाद दोहराई जाती हैं। अंतिम पद में ‘सूर’ नाम आने से कुछ लोग इसे सूरदास से जोड़ते हैं, पर रचयिता निश्चित रूप से स्थापित नहीं है।
आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश जी की यह आरती किसने लिखी?
रचयिता निश्चित नहीं है। अंतिम पद में ‘सूर’ श्याम नाम आता है, इसलिए कई लोग इसे सूरदास से जोड़ते हैं, पर यह स्थापित नहीं है।
यह आरती कब गाई जाती है?
गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक गणेशोत्सव में, दीपावली के लक्ष्मी-गणेश पूजन में, संकष्टी चतुर्थी पर, और प्रतिदिन की पूजा में।
क्या यह आरती ‘सुखकर्ता दुखहर्ता’ से अलग है?
हाँ। ‘सुखकर्ता दुखहर्ता’ मराठी में एक अलग आरती है, जिसे संत समर्थ रामदास से जोड़ा जाता है। ‘जय गणेश देवा’ हिंदी में गाई जाने वाली आरती है।
क्या इस आरती में और पद भी हैं?
कई संस्करणों में ‘दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी’ से शुरू होने वाला एक पद और गाया जाता है। यहाँ प्रचलित मूल पाँच पद दिए गए हैं।
स्रोत
- परंपरागत आरती पाठ
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पाठ का मिलान: drikpanchang.com, bhaktibharat.com, prabhatkhabar.com
