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कर्पूरगौरं करुणावतारं PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/karpur-gauram/
“कर्पूरगौरं करुणावतारं” भगवान शिव की स्तुति का संस्कृत श्लोक है, जिसमें शिव को भवानी (पार्वती) के साथ प्रणाम किया गया है। उत्तर भारत के बहुत से घरों और मंदिरों में आरती के तुरंत बाद यह श्लोक पढ़ा जाता है, चाहे आरती किसी भी देवता की हो। शिव पूजा में, सोमवार को और सावन के महीने में भी इसका पाठ होता है।
स्रोत के बारे में: लोकप्रिय वेबसाइटों और पुस्तकों में यह श्लोक अक्सर यजुर्वेद का बताया जाता है या ‘शिव यजुर्मंत्र’ कहा जाता है, पर इनमें किसी संहिता, अध्याय या मंत्र-संख्या का उल्लेख नहीं होता। शुक्ल यजुर्वेद (वाजसनेयि माध्यन्दिन संहिता) के चालीसों अध्यायों में यह श्लोक नहीं मिलता। इसका छंद उपजाति है (पहले दो चरण इंद्रवज्रा के, अंतिम दो उपेंद्रवज्रा के), जो शास्त्रीय संस्कृत काव्य का छंद है। यह श्लोक बाद के पूजा-ग्रंथों में शिव के ध्यान-श्लोक के रूप में मिलता है, जैसे जीवनाथ शर्मा के तांत्रिक पूजा-ग्रंथ ‘दीक्षाप्रकाश’ में, जहाँ तीसरे चरण का पाठ ‘सदा रमन्तं’ है। इसके मूल ग्रंथ और रचयिता का पता प्रामाणिक रूप से नहीं चलता। प्रचलित पाठ ‘सदा वसन्तं’ है; कहीं ‘सदा बसन्तं’ भी लिखा मिलता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
“कर्पूरगौरं करुणावतारं” किस ग्रंथ से है?
इसका मूल ग्रंथ प्रामाणिक रूप से ज्ञात नहीं है। इसे अक्सर यजुर्वेद का बताया जाता है, पर कोई संहिता, अध्याय या मंत्र-संख्या नहीं दी जाती, और शुक्ल यजुर्वेद की वाजसनेयि संहिता में यह नहीं मिलता। यह बाद के पूजा-ग्रंथों में शिव के ध्यान-श्लोक के रूप में मिलता है, जैसे ‘दीक्षाप्रकाश’ में।
इस श्लोक में शिव का वर्णन कैसे है?
कपूर जैसे उजले, करुणा के अवतार, संसार के सार, नागराज का हार पहनने वाले और हृदय-कमल में बसने वाले। अंत में उन्हें भवानी (पार्वती) के साथ प्रणाम किया गया है।
यह श्लोक कब पढ़ा जाता है?
उत्तर भारत में बहुत से लोग किसी भी देवता की आरती के बाद इसे पढ़ते हैं। शिव पूजा में, सोमवार को, सावन के महीने में और महाशिवरात्रि पर भी इसका पाठ होता है।
यह श्लोक किस छंद में है?
उपजाति छंद में। इसके पहले दो चरण इंद्रवज्रा के और अंतिम दो उपेंद्रवज्रा के हैं; हर चरण में ग्यारह अक्षर हैं। यह शास्त्रीय संस्कृत काव्य का छंद है।
स्रोत
- परंपरागत पाठ
- उद्धरण: दीक्षाप्रकाश (जीवनाथ शर्मा), संस्कृत विकिस्रोत
- जाँचा गया: शुक्ल यजुर्वेद, वाजसनेयि माध्यन्दिन संहिता, अध्याय 1 से 40 (संस्कृत विकिस्रोत)
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पाठ का मिलान: bhaktibharat.com, kavitakosh.org, sa.wikisource.org, sa.wikisource.org
