चालीसाश्रीकृष्ण

खाटू श्याम चालीसा

रचना: परंपरागत

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 4 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
मंदिर में संध्या आरती: पुजारी के हाथ में पाँच बत्ती वाला पीतल का दीपक, पीछे सजी प्रतिमाएँ और हाथ जोड़े भक्त
चित्र: AI से बनाया गया
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  1. दोहा

    श्री गुरु चरण ध्यान धर, सुमिरि सच्चिदानन्द। श्याम चालीसा भणत हूँ, रच चौपाई छंद॥

    श्री गुरु के चरणों का ध्यान करके और सच्चिदानंद (परमात्मा) का स्मरण करके, मैं चौपाई छंद में रचकर श्याम चालीसा कहता हूँ।

  2. चौपाई 1

    श्याम श्याम भजि बारम्बारा। सहज ही हो भवसागर पारा॥

    चालीसा कहती है कि बार-बार ‘श्याम श्याम’ भजने से संसार-सागर सहज ही पार हो जाता है।

  3. चौपाई 2

    इन सम देव न दूजा कोई। दीन दयालु न दाता होई॥

    इनके समान दूसरा कोई देव नहीं, न इनके जैसा दीनों पर दया करने वाला कोई दाता है।

  4. चौपाई 3

    भीमसुपुत्र अहिलवती जाया। कहीं भीम का पौत्र कहाया॥

    चालीसा कहती है कि वे भीम के पुत्र हैं और अहिलवती से जन्मे हैं; कहीं उन्हें भीम का पौत्र कहा गया है।

  5. चौपाई 4

    यह सब कथा सही कल्पान्तर। तनिक न मानों इसमें अन्तर॥

    ये सब कथाएँ अलग-अलग कल्पों के अनुसार सही हैं; इनमें ज़रा भी विरोध मत मानो।

  6. चौपाई 5

    बर्बरीक विष्णु अवतारा। भक्तन हेतु मनुज तनु धारा॥

    चालीसा के अनुसार बर्बरीक विष्णु के अवतार हैं, जिन्होंने भक्तों के लिए मनुष्य का शरीर धारण किया।

  7. चौपाई 6

    वसुदेव देवकी प्यारे। यशुमति मैया नन्द दुलारे॥

    श्याम के रूप में आप वसुदेव-देवकी के प्यारे और यशोदा मैया तथा नंद के दुलारे हैं।

  8. चौपाई 7

    मधुसूदन गोपाल मुरारी। बृजकिशोर गोवर्धन धारी॥

    आप मधुसूदन, गोपाल, मुरारी, ब्रजकिशोर और गोवर्धनधारी हैं।

  9. चौपाई 8

    सियाराम श्री हरि गोविन्दा। दीनपाल श्री बाल मुकन्दा॥

    आप सियाराम, श्री हरि, गोविंद, दीनों के पालक और श्री बाल मुकुंद हैं।

  10. चौपाई 9

    दामोदर रणछोड़ बिहारी। नाथ द्वारिकाधीश खरारी॥

    आप दामोदर, रणछोड़ और बिहारी हैं; द्वारका के स्वामी और खर के शत्रु (राम) हैं।

  11. चौपाई 10

    नरहरि रूप प्रहलाद प्यारा। खम्भ फारि हिरनाकुश मारा॥

    नरसिंह रूप में आपको प्रह्लाद प्यारे थे; आपने खंभा फाड़कर हिरण्यकशिपु को मारा।

  12. चौपाई 11

    राधा वल्लभ रुक्मिणी कंता। गोपी वल्लभ कंस हनंता॥

    आप राधा के प्रिय, रुक्मिणी के पति, गोपियों के प्रिय और कंस का वध करने वाले हैं।

  13. चौपाई 12

    मनमोहन चित्तचोर कहाये। माखन चोरि चोरि कर खाये॥

    आप मनमोहन और चितचोर कहलाए, और माखन चुरा-चुराकर खाया।

  14. चौपाई 13

    मुरलीधर यदुपति घनश्याम। कृष्ण पतितपावन अभिरामा॥

    आप मुरलीधर, यदुपति, घनश्याम, कृष्ण, पतितों को पावन करने वाले और मनोहर हैं।

  15. चौपाई 14

    मायापति लक्ष्मीपति ईसा। पुरुषोत्तम केशव जगदीशा॥

    आप माया के स्वामी, लक्ष्मीपति, ईश्वर, पुरुषोत्तम, केशव और जगदीश हैं।

  16. चौपाई 15

    विश्वपति त्रिभुवन उजियारा। दीन बन्धु भक्तन रखवारा॥

    आप विश्व के स्वामी, तीनों लोकों को प्रकाश देने वाले, दीनों के बंधु और भक्तों के रक्षक हैं।

  17. चौपाई 16

    प्रभु का भेद कोई न पाया। शेष महेश थके मुनिराया॥

    प्रभु का रहस्य कोई नहीं पा सका; शेषनाग, महेश और बड़े-बड़े मुनि भी थक गए।

  18. चौपाई 17

    नारद शारद ऋषि योगिन्दर। श्याम श्याम सब रटत निरन्तर॥

    नारद, शारदा, ऋषि और बड़े योगी सब निरंतर ‘श्याम श्याम’ रटते हैं।

  19. चौपाई 18

    कवि कोविद करि सके न गिनन्ता। नाम अपार अथाह अनन्ता॥

    कवि और विद्वान भी आपके नाम गिन नहीं सके; आपके नाम अपार, अथाह और अनंत हैं।

  20. चौपाई 19

    हर सृष्टि हर युग में भाई। ले अवतार भक्त सुखदाई॥

    हे भाई, हर सृष्टि और हर युग में वे भक्तों को सुख देने के लिए अवतार लेते हैं।

  21. चौपाई 20

    हृदय माँहि करि देखु विचारा। श्याम भजे तो हो निस्तारा॥

    हृदय में विचार करके देखो: श्याम को भजने से ही उद्धार होता है।

  22. चौपाई 21

    कीर पढ़ावत गणिका तारी। भीलनी की भक्ति बलिहारी॥

    तोते को भगवान का नाम पढ़ाते-पढ़ाते गणिका तर गई; भीलनी (शबरी) की भक्ति धन्य है।

  23. चौपाई 22

    सती अहिल्या गौतम नारी। भई श्राप वश शिला दुखारी॥

    गौतम ऋषि की पत्नी सती अहल्या शाप के कारण दुखी होकर शिला बन गई थीं।

  24. चौपाई 23

    श्याम चरण रज नित लाई। पहुँची पतिलोक में जाई॥

    श्याम (राम रूप) के चरणों की धूल पाकर वे पतिलोक पहुँच गईं।

  25. चौपाई 24

    अजामिल अरु सदन कसाई। नाम प्रताप परम गति पाई॥

    अजामिल और सदन कसाई ने भी नाम के प्रताप से परम गति पाई।

  26. चौपाई 25

    जाके श्याम नाम अधारा। सुख लहहि दुःख दूर हो सारा॥

    चालीसा कहती है कि जिसके जीवन का आधार श्याम का नाम है, वह सुख पाता है और उसके सारे दुख दूर होते हैं।

  27. चौपाई 26

    श्याम सुलोचन है अति सुन्दर। मोर मुकुट सिर तन पीताम्बर॥

    सुंदर नेत्रों वाले श्याम अत्यंत सुंदर हैं; सिर पर मोर-मुकुट और शरीर पर पीतांबर है।

  28. चौपाई 27

    गल वैजयन्तिमाल सुहाई। छवि अनूप भक्तन मन भाई॥

    गले में वैजयंती माला सुहाती है; यह अनुपम छवि भक्तों के मन को भाती है।

  29. चौपाई 28

    श्याम श्याम सुमिरहु दिनराती। शाम दुपहरि अरु परभाती॥

    दिन-रात, शाम, दोपहर और सुबह ‘श्याम श्याम’ का स्मरण करो।

  30. चौपाई 29

    श्याम सारथी जिसके रथ के। रोड़े दूर होय उस पथ के॥

    श्याम जिसके रथ के सारथी हों, उसके रास्ते के रोड़े दूर हो जाते हैं।

  31. चौपाई 30

    श्याम भक्त न कहीं पर हारा। भीर परि तब श्याम पुकारा॥

    श्याम का भक्त कहीं नहीं हारा; संकट पड़ने पर उसने श्याम को पुकारा।

  32. चौपाई 31

    रसना श्याम नाम रस पी ले। जी ले श्याम नाम के हाले॥

    हे जीभ, श्याम-नाम का रस पी ले, और श्याम-नाम की मस्ती में जी ले।

  33. चौपाई 32

    संसारी सुख भोग मिलेगा। अन्त श्याम सुख योग मिलेगा॥

    चालीसा कहती है कि संसार के सुख-भोग मिलेंगे, और अंत में श्याम से मिलन का सुख मिलेगा।

  34. चौपाई 33

    श्याम प्रभु हैं तन के काले। मन के गोरे भोले भाले॥

    प्रभु श्याम तन के काले हैं, पर मन के उजले और भोले-भाले हैं।

  35. चौपाई 34

    श्याम संत भक्तन हितकारी। रोग दोष अघ नाशै भारी॥

    श्याम संतों और भक्तों का भला करने वाले हैं; चालीसा के अनुसार वे रोग, दोष और भारी पाप नष्ट करते हैं।

  36. चौपाई 35

    प्रेम सहित जे नाम पुकारा। भक्त लगत श्याम को प्यारा॥

    जिसने प्रेम से नाम पुकारा, वह भक्त श्याम को प्यारा लगता है।

  37. चौपाई 36

    खाटू में है मथुरा वासी। पार ब्रह्म पूरण अविनासी॥

    मथुरा में रहने वाले (श्रीकृष्ण) खाटू में विराजते हैं; वे पूर्ण, अविनाशी परब्रह्म हैं।

  38. चौपाई 37

    सुधा तान भरि मुरली बजाई। चहुं दिशि नाना जहाँ सुनि पाई॥

    उन्होंने अमृत जैसी तान भरकर मुरली बजाई, जो चारों दिशाओं में, अनेक स्थानों पर सुनाई दी।

  39. चौपाई 38

    वृद्ध बाल जेते नारी नर। मुग्ध भये सुनि वंशी के स्वर॥

    जितने बूढ़े, बच्चे, स्त्री और पुरुष थे, सब वंशी के स्वर सुनकर मुग्ध हो गए।

  40. चौपाई 39

    दौड़ दौड़ पहुँचे सब जाई। खाटू में जहां श्याम कन्हाई॥

    सब दौड़-दौड़कर वहाँ पहुँचे, खाटू में जहाँ श्याम कन्हाई हैं।

  41. चौपाई 40

    जिसने श्याम स्वरूप निहारा। भव भय से पाया छुटकारा॥

    चालीसा कहती है कि जिसने श्याम का स्वरूप निहारा, उसने संसार के भय से छुटकारा पाया।

  42. समापन दोहा

    श्याम सलोने साँवरे, बर्बरीक तनु धार। इच्छा पूर्ण भक्त की, करो न लाओ बार॥

    हे सलोने साँवरे श्याम, जिन्होंने बर्बरीक का शरीर धारण किया, भक्त की इच्छा पूरी कीजिए, देर मत लगाइए।

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/khatu-shyam-chalisa/

संक्षेप में

खाटू श्याम चालीसा राजस्थान के सीकर ज़िले में खाटू धाम के श्याम बाबा की स्तुति है, जिन्हें परंपरा बर्बरीक मानती है। चालीसा उन्हें श्रीकृष्ण के नामों से पुकारती है और नाम-स्मरण की महिमा गाती है। परंपरा में इसका पाठ हर एकादशी, देवउठनी एकादशी पर उनके जन्मोत्सव और फाल्गुन के मेले में होता है। इसके रचयिता का नाम ज्ञात नहीं है।

यहाँ रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार की पुस्तक ‘51 चालीसा संग्रह’ (2004, पृष्ठ 152 से 155) में ‘श्री श्याम (खाटू) चालीसा’ नाम से छपा पाठ दिया गया है, और उसे खाटू श्याम को समर्पित वेबसाइट khatu-shyam.in और श्रीमंदिर के पाठ से शब्दशः मिलाया गया है। इन दोनों वेब पाठों में एक जैसी छपाई की भूलें हैं, इसलिए इन्हें एक ही स्रोत गिना गया। पाठभेद: आरंभिक दोहे में ‘भणत’ (कहता हूँ) की जगह वेब पाठ ‘भजत’ पढ़ते हैं; चौपाई 4 में ‘इसमें’ की जगह ‘इनमें’; चौपाई 14 के अंत में पुस्तक ‘जगदीश’ छापती है और वेब पाठ ‘जगदीशा’; चौपाई 18 में पुस्तक ‘करि कोविद’ छापती है, जबकि वेब पाठ ‘कवि कोविद’ (कवि और विद्वान) पढ़ते हैं, जो अर्थ के अनुसार सही है और यहाँ वही रखा गया है; चौपाई 31 में वेब पाठ ‘रस’ छोड़ देते हैं। अंतिम दोहे का पहला शब्द पुस्तक में ‘श्याय’ छपा है; यहाँ ‘श्याम’ लिखा गया है। चौपाई 3 और 4 में चालीसा स्वयं बताती है कि बर्बरीक के माता-पिता के बारे में अलग-अलग कथाएँ हैं। चालीसा में किसी कवि का नाम नहीं आता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खाटू श्याम कौन हैं?

परंपरा खाटू श्याम को भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक मानती है, जिनकी पूजा श्रीकृष्ण के नाम ‘श्याम’ से होती है। चालीसा चौपाई 3 में उन्हें भीम और अहिलवती का पुत्र कहती है और यह भी मानती है कि कहीं उन्हें भीम का पौत्र कहा गया है।

खाटू श्याम चालीसा का पाठ कब किया जाता है?

इसे किसी भी दिन पढ़ा जा सकता है। खाटू की परंपरा में हर एकादशी, कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) को श्याम बाबा के जन्मोत्सव और फाल्गुन शुक्ल पक्ष के मेले में इसका पाठ होता है।

खाटू श्याम चालीसा में कितनी चौपाइयाँ हैं?

इसमें आरंभ में एक दोहा, 40 चौपाइयाँ और अंत में एक दोहा है।

चालीसा में श्रीकृष्ण और श्रीराम के नाम क्यों हैं?

खाटू में बर्बरीक की पूजा श्रीकृष्ण के नाम ‘श्याम’ से होती है, इसलिए चालीसा चौपाई 6 से 14 में उन्हें कृष्ण के नामों से और विष्णु के दूसरे अवतारों (राम, नरसिंह) के नामों से पुकारती है। चौपाई 36 कहती है कि मथुरा के वासी ही खाटू में विराजते हैं।

स्रोत

  1. रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार: ‘51 चालीसा संग्रह’, आरतियों सहित (2004), पृष्ठ 152 से 155 (‘श्री श्याम (खाटू) चालीसा’)
  2. khatu-shyam.in: श्री खाटू श्याम चालीसा
  3. श्रीमंदिर: खाटू श्याम चालीसा
  4. खाटू श्याम की पूजा और जन्मोत्सव: खाटू की लोक परंपरा

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पाठ का मिलान: archive.org, khatu-shyam.in, srimandir.com