व्रत कथा

भाई दूज की कथा (यम द्वितीया कथा)

भाई दूज: बुधवार, 11 नवंबर 2026

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 12 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
सुबह यमुना के किनारे नीली साड़ी में यमुना देवी अपने भाई यमराज के माथे पर तिलक लगा रही हैं; यमराज साँवले, गरिमामय राजा हैं, सिर पर सोने का मुकुट, लाल वस्त्र और पास में दंड; उनके सामने पत्तलों पर भोजन सजा है और पास में उनका काला भैंसा बैठा है
चित्र: AI से बनाया गया
संक्षेप में

स्कंद पुराण के अनुसार यमुना रोज़ अपने भाई यमराज को अपने घर भोजन पर बुलाती थीं, और कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज नरक के सब जीवों को मुक्त करके उनके घर पहुँचे। यमुना ने प्रेम से उनका सत्कार करके भोजन कराया, और वर माँगा कि इस दिन बहन के हाथ से भोजन करने वाले सुखी रहें। इसी से यह दिन यम द्वितीया और भाई दूज कहलाता है।

भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को, पाँच दिन के दीपोत्सव के अंतिम दिन मनाया जाता है; इसे यम द्वितीया और भ्रातृ द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन भाई बहन के घर जाकर उसके हाथ से भोजन करता है, बहन उसे तिलक लगाती है, और भाई उसे उपहार देता है।

यमराज और यमुना की यह कथा स्कंद पुराण (वैष्णव खंड, कार्तिक मास माहात्म्य, अध्याय 11) में पूरी मिलती है; पद्म पुराण (उत्तर खंड, अध्याय 122) इसे संक्षेप में कहता है। नीचे कथा स्कंद पुराण के क्रम से है। आजकल की कथाओं में यमुना का तिलक लगाना और आरती उतारना भी आता है; ये बातें स्कंद पुराण के वर्णन में नहीं हैं, पर परंपरा में इस दिन का मुख्य कर्म हैं।

व्रत और कथा की विधि

  • भाई बहन के घर जाकर उसके हाथ से भोजन करता है; जहाँ भाई नहीं पहुँच पाते, वहाँ कई जगह बहनें भाई के घर जाकर तिलक लगाती हैं और मिठाई खिलाती हैं (छपी व्रत-कथा पुस्तिका)।
  • बहन रोली और अक्षत से तिलक करती है, आरती उतारती है और मिठाई खिलाती है; भाई बहन को उपहार या दक्षिणा देता है। स्कंद और पद्म पुराण भाई से बहन को वस्त्र और गहने देने को कहते हैं, और स्कंद पुराण बड़ी बहन के पैर छूकर आशीर्वाद लेने को।
  • तिलक और भोजन का समय परंपरा से अपराह्न काल है (Drik Panchang); स्कंद पुराण भी कहता है कि भाई को भोजन कराते समय द्वितीया अपराह्न तक रहनी चाहिए।
  • इस दिन, विशेषकर मथुरा में, भाई-बहन यमुना में स्नान करते हैं; स्कंद पुराण में यमराज यमुना-स्नान को इस दिन का पुण्य बताते हैं।
  • कायस्थ समाज में इसी दिन चित्रगुप्त पूजा होती है (हिंदी विकिपीडिया)।
  • बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में इस दिन गोधन की परंपरा है: बहनें गोबर से यम, यमी, साँप और बिच्छू की आकृतियाँ बनाकर मूसल से कूटती हैं, रस्म के तौर पर भाइयों को "श्राप" देती हैं, फिर प्रायश्चित के रूप में अपनी जीभ में रेंगनी का काँटा चुभाती हैं और तिलक करती हैं (इनखबर, भक्तवत्सल)। यह क्षेत्रीय परंपरा है।

यमराज और यमुना

स्कंद पुराण, वैष्णव खंड, कार्तिक मास माहात्म्य, अध्याय 11, श्लोक 30–66 (जी. वी. तगारे का अंग्रेज़ी अनुवाद) के अनुसार; माता का नाम विष्णु पुराण 3.2 से।

विष्णु पुराण के अनुसार सूर्य देव की पत्नी संज्ञा, जो विश्वकर्मा की पुत्री थीं, की तीन संतानें हुईं: वैवस्वत मनु, यम और यमी। यमी ही यमुना नदी हैं। इस तरह यमराज और यमुना सगे भाई-बहन हैं।

यमुना अपने भाई से बहुत स्नेह करती थीं। वे रोज़ यमराज के पास जातीं और कहतीं, "भैया, अपने साथियों के साथ मेरे घर भोजन करने आओ।" पर यमराज हर दिन यही उत्तर देते, "आज आऊँगा... कल आऊँगा... परसों आऊँगा।" स्कंद पुराण कहता है कि जिनका मन अपने कर्तव्य में डूबा हो, उन्हें फ़ुर्सत नहीं मिलती।

एक बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना ने बहुत आग्रह करके उन्हें बुलाया, और इस बार यमराज चल पड़े। बहन के घर जाने से पहले उन्होंने नरक में रहने वाले सब जीवों को मुक्त कर दिया, और फिर अपने सेवकों के साथ यमुना के घर पहुँचे।

यमुना ने भाई का बड़े प्रेम से सत्कार किया। उन्होंने यमराज के शरीर पर तेल और सुगंधित उबटन लगाया और उन्हें स्नान कराया। फिर उन्हें गहने, तरह-तरह के वस्त्र, चंदन और मालाएँ भेंट कीं, और आदर से पलंग पर बिठाया। उन्होंने सोने के बर्तनों में मीठे चावल के कई व्यंजन बनाए और प्रसन्न मन से भाई को भोजन कराया।

भोजन के बाद यमराज ने भी बहन को गहने और वस्त्र देकर उसका मान किया और कहा, "यमुना, कोई वर माँगो।"

यमुना ने कहा, "हर वर्ष इसी दिन भोजन करने मेरे घर आना। आज के दिन नरक के सब जीव छोड़ दिए जाएँ। और जो आज अपनी बहन के हाथ से भोजन करें, वे सुखी रहें। मैं बस यही माँगती हूँ।"

यमराज ने कहा, "यमुना, जो आज तुम्हारे जल में स्नान करके पितरों और देवताओं को जल अर्पित करे, और बहन के घर भोजन करके उसका आदर करे, उसे मेरे लोक का द्वार नहीं देखना पड़ेगा।" फिर यमराज अपनी नगरी संयमनी लौट गए।

स्कंद पुराण के अनुसार उस दिन मुक्त हुए जीवों को भी भोजन मिला, और उन्होंने यमलोक में बड़ा उत्सव मनाया। इसी से यह दिन तीनों लोकों में यम द्वितीया के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसी अध्याय में यमराज का ध्यान भैंसे पर बैठे, हाथ में दंड और मुद्गर लिए, प्रसन्न सेवकों से घिरे रूप में किया गया है।

कथा के अलग-अलग रूप

  • माता का नाम: विष्णु पुराण (3.2) संज्ञा बताता है, और धर्मसार भी। अमर उजाला और वेबदुनिया यम और यमुना को सूर्य और छाया की संतान कहते हैं; पर विष्णु पुराण में छाया की संतानें शनि, सावर्णि मनु और तपती हैं। धर्मसार के रूप में संज्ञा अपनी छाया को बच्चों की देखभाल के लिए छोड़कर चली जाती हैं, जो विष्णु पुराण की कथा से मेल खाता है।
  • आजकल की कथाओं (अमर उजाला, वेबदुनिया, टाइम्स नाउ नवभारत, धर्मसार, छपी पुस्तिका) में यमुना भाई को तिलक लगाती हैं और आरती उतारती हैं; स्कंद पुराण तेल, उबटन, स्नान, वस्त्र, गहने, माला और भोजन की बात करता है, तिलक की नहीं।
  • नरक के जीवों के मुक्त होने की बात स्कंद पुराण और हिंदी विकिपीडिया में है; समाचार-पत्रों की कथाएँ इसे छोड़ देती हैं, और टाइम्स नाउ नवभारत में यमराज अचानक बहन के घर पहुँच जाते हैं।
  • वरदान के शब्द अलग-अलग हैं: समाचार-पत्रों में, इस दिन जिस भाई को बहन तिलक लगाए उसे मृत्यु का भय न हो या उसकी आयु लंबी हो; Drik Panchang में, बहन के घर भोजन करने वाले भाई यमलोक से मुक्त हों; छपी पुस्तिका में, इस दिन यमुना में साथ स्नान करने वाले भाई-बहन को यम-यातना न भोगनी पड़े।
  • Drik Panchang के अंग्रेज़ी पन्ने पर यम की बहन का नाम "वर्णी" लिखा है; स्कंद और पद्म पुराण यमुना कहते हैं।
  • Drik Panchang एक और कथा देता है: नरकासुर को मारने के बाद श्रीकृष्ण बहन सुभद्रा के पास गए, जिन्होंने मिठाई और तिलक से उनका स्वागत किया। यह कथा हमें किसी ग्रंथ में नहीं मिली।
  • भाई दूज से जुड़ी दो लोक कथाएँ भी सुनाई जाती हैं। एक में भाई बहन से मिलने निकलता है और रास्ते में पेड़, नदी, साँप और शेर उसके प्राण माँगते हैं; बहन पीछे जाकर हर संकट से उसे बचाती है (हिंदवी, ए. के. रामानुजन की "भारत की लोक कथाएँ" से; श्री मंदिर इसे होली के बाद की भाई दूज पर कहता है)। दूसरी में एक विधवा के छह बेटे विवाह के समय साँप के डसने से मर चुके हैं, और सातवें के विवाह में बहन साँप से उसकी रक्षा करती है (धर्मसार, भक्ति भारत)। ये पुराणों में नहीं हैं, और किसी छपी व्रत-कथा पुस्तिका में हमें अभी नहीं मिलीं, इसलिए यहाँ पूरी नहीं दी गईं।

कथा के बाद

कथा के बाद बहन भाई को तिलक करके भोजन कराती है। अपने शहर में तिलक का अपराह्न समय भाई दूज के पन्ने पर है। कायस्थ परिवारों में इसी दिन चित्रगुप्त पूजा होती है और चित्रगुप्त जी की आरती गाई जाती है।

चित्रगुप्त जी की आरती: ॐ जय चित्रगुप्त हरे

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाई दूज की कथा क्या है?

स्कंद पुराण के अनुसार यमुना रोज़ अपने भाई यमराज को भोजन पर बुलाती थीं, और कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज उनके घर गए। यमुना ने उनका सत्कार करके भोजन कराया, और वर माँगा कि इस दिन बहन के हाथ से भोजन करने वाले सुखी रहें। यमराज ने कहा कि जो इस दिन यमुना में स्नान करके बहन के घर भोजन करे और उसका आदर करे, उसे यमलोक का द्वार नहीं देखना पड़ेगा।

यमराज और यमुना की माता कौन थीं?

विष्णु पुराण (3.2) के अनुसार संज्ञा, जो विश्वकर्मा की पुत्री और सूर्य की पत्नी थीं। कुछ समाचार-पत्रों की कथाओं में छाया का नाम आता है, पर विष्णु पुराण में छाया की संतानें शनि, सावर्णि मनु और तपती हैं।

भाई दूज की कथा किस पुराण में है?

स्कंद पुराण के वैष्णव खंड (कार्तिक मास माहात्म्य, अध्याय 11) में पूरी कथा है, और पद्म पुराण (उत्तर खंड, अध्याय 122) में संक्षेप में। हिंदी विकिपीडिया भविष्य पुराण का नाम भी लेता है; वह हमने नहीं जाँचा।

जिसकी बहन न हो, वह भाई दूज पर क्या करे?

स्कंद पुराण के अनुसार सगी बहन न हो तो वह बुआ, चाचा की बेटी, मौसी या मामा की बेटी के घर भोजन करे; वे भी न हों तो किसी स्त्री को बहन मानकर, और वह भी न हो तो गाय या नदी को बहन मानकर। जो परदेश में हो, बीमार हो या किसी कारण बहन के पास न जा सके, उसके लिए ग्रंथ कहता है कि यह कथा सुनने से वही पुण्य मिलता है। अपने परिवार की परंपरा के अनुसार करें।

स्रोत

  1. स्कंद पुराण, वैष्णव खंड, कार्तिक मास माहात्म्य, अध्याय 11, श्लोक 1–73 (जी. वी. तगारे का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org पर जाँचा)
  2. पद्म पुराण, उत्तर खंड, अध्याय 122, श्लोक 89–103 (एन. ए. देशपांडे का अनुवाद, wisdomlib.org)
  3. विष्णु पुराण 3.2 (एच. एच. विल्सन का अनुवाद, wisdomlib.org)
  4. Drik Panchang: भाई दूज; दिवाली की कथाएँ
  5. अमर उजाला: भाई दूज की कथा (21 अक्टूबर 2025)
  6. वेबदुनिया: यम द्वितीया की पौराणिक कथा
  7. टाइम्स नाउ नवभारत: भाई दूज व्रत कथा (3 नवंबर 2024)
  8. धर्मसार (dharmsaar.com): भाई दूज की व्रत कथा; भक्ति भारत (bhaktibharat.com): भैया दूज लोक कथा
  9. हिंदवी (hindwi.org): भाई दूज लोककथा, "भारत की लोक कथाएँ", सं. ए. के. रामानुजन (नेशनल बुक ट्रस्ट, 2001) से; श्री मंदिर (srimandir.com): भाई दूज कथा
  10. इनखबर (21 अक्टूबर 2025) और भक्तवत्सल (bhaktvatsal.com): गोधन की परंपरा
  11. हिंदी विकिपीडिया: भाई दूज
  12. "व्रत कथा" पुस्तिका (archive.org, 20240806_20240806_0450): भैया दूज कथा

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