
आज का पंचांग: बेंगलुरु
तिथि, नक्षत्र, योग, चौघड़िया और राहु काल, शहर के सूर्योदय के अनुसार।
बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में सूर्योदय 6:09 AM और सूर्यास्त 6:06 PM पर है। सूर्योदय के समय आश्विन कृष्ण द्वादशी तिथि है। राहु काल 12:07 PM से 1:37 PM तक और अभिजित मुहूर्त 11:44 AM से 12:31 PM तक है।
बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 · बेंगलुरु
आश्विन कृष्ण द्वादशी
द्वादशी 11:18 PM तक, फिर त्रयोदशी
- सूर्योदय
- 6:09 AM
- सूर्यास्त
- 6:06 PM
- दिनमान
- 11 घंटे 56 मिनट
- चंद्रोदय
- 3:07 AM
- चंद्रास्त
- 3:44 PM
- वार
- बुधवार
- नक्षत्र
- मघा 9:41 PM तक
- योग
- शुभ 2:53 AM तक
- करण (सूर्योदय पर)
- कौलव
- मास (पूर्णिमांत / अमांत)
- आश्विन / भाद्रपद
- सूर्य राशि
- कन्या
- चंद्र राशि
- सिंह
शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त
- 4:33 AM–5:21 AM
- अभिजित मुहूर्त
- 11:44 AM–12:31 PM
- विजय मुहूर्त
- 2:07 PM–2:55 PM
अशुभ समय
- राहु काल
- 12:07 PM–1:37 PM
- यमगण्ड
- 7:39 AM–9:08 AM
- गुलिक काल
- 10:38 AM–12:07 PM
दिन का चौघड़िया
- लाभलाभदायक6:09 AM–7:39 AM
- अमृतसर्वश्रेष्ठ7:39 AM–9:08 AM
- कालअशुभ9:08 AM–10:38 AM
- शुभशुभ10:38 AM–12:07 PM
- रोगअशुभ12:07 PM–1:37 PM
- उद्वेगअशुभ1:37 PM–3:07 PM
- चरसामान्य, यात्रा के लिए अच्छा3:07 PM–4:36 PM
- लाभलाभदायक4:36 PM–6:06 PM
रात का चौघड़िया
- उद्वेगअशुभ6:06 PM–7:36 PM
- शुभशुभ7:36 PM–9:07 PM
- अमृतसर्वश्रेष्ठ9:07 PM–10:37 PM
- चरसामान्य, यात्रा के लिए अच्छा10:37 PM–12:07 AM (8 अक्टू॰)
- रोगअशुभ12:07–1:38 AM (8 अक्टू॰)
- कालअशुभ1:38–3:08 AM (8 अक्टू॰)
- लाभलाभदायक3:08–4:39 AM (8 अक्टू॰)
- उद्वेगअशुभ4:39–6:09 AM (8 अक्टू॰)
गणना: सूर्य-चंद्र की स्थिति (astronomy-engine) और लाहिड़ी अयनांश से, Drik Panchang से मिलान। समय भारतीय मानक समय में। स्थानीय पंचांगों से एक-दो मिनट का अंतर संभव है। गणना कैसे होती है · आज की तिथि और अगले 15 दिन · आज का चौघड़िया बेंगलुरु · आज बेंगलुरु में चाँद कितने बजे निकलेगा · आज का राहु काल बेंगलुरु
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पंचांग को समझें
आज बेंगलुरु में राहु काल कब है?
इस पन्ने पर ऊपर दिया राहु काल बेंगलुरु के आज के सूर्योदय-सूर्यास्त से निकाला गया है। बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को यह 12:07 PM से 1:37 PM तक है।
चौघड़िया क्या है?
चौघड़िया में दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। अमृत, शुभ, लाभ और चर को काम शुरू करने या यात्रा के लिए अच्छा माना जाता है; उद्वेग, काल और रोग से बचा जाता है।
तिथि क्या होती है?
चंद्रमा और सूर्य के बीच हर 12 अंश की दूरी एक तिथि है। एक चांद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं: शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा से अमावस्या।
पंचांग में दिन की तिथि कैसे तय होती है?
सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, वही उस दिन की तिथि मानी जाती है। इसे उदय तिथि कहते हैं। इसलिए अलग शहरों में तिथि का समय थोड़ा अलग होता है।
पूर्णिमांत और अमांत मास में क्या अंतर है?
पूर्णिमांत में मास पूर्णिमा पर समाप्त होता है (उत्तर भारत), अमांत में अमावस्या पर (दक्षिण और पश्चिम भारत)। शुक्ल पक्ष का नाम दोनों में एक है, कृष्ण पक्ष में मास का नाम एक आगे होता है।
राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल कैसे निकलते हैं?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। सप्ताह के हर दिन एक तय भाग राहु काल होता है, जैसे सोमवार को दूसरा और शनिवार को तीसरा, और इसी तरह यमगण्ड और गुलिक काल के भाग तय हैं।
शहर के अनुसार आज का पंचांग
- नई दिल्ली
- वाराणसी
- मुंबई
- कोलकाता
- चेन्नई
- बेंगलुरु
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