अत्रि ब्रह्मा के मानस पुत्र और वर्तमान मन्वंतर के सप्तर्षियों में एक हैं (विष्णु पुराण 1.7, 3.1)। उनकी पत्नी अनसूया हैं, और उनके तीन पुत्र सोम (चंद्र), दुर्वासा और दत्तात्रेय हैं (विष्णु पुराण 1.10)। भागवत (4.1.15-33) के अनुसार ये तीनों पुत्र ब्रह्मा, शिव और विष्णु के अंश से जन्मे। ऋग्वेद का पाँचवाँ मंडल अत्रि-कुल के ऋषियों का माना जाता है, और वाल्मीकि रामायण में वनवास के समय राम, सीता और लक्ष्मण उनके आश्रम आए।
- जन्म
- ब्रह्मा के मानस पुत्र (विष्णु पुराण 1.7); भागवत (3.12.24) के अनुसार ब्रह्मा के नेत्रों से
- पत्नी
- अनसूया (विष्णु पुराण 1.10; भागवत 3.24.22, 4.1.15)
- संतान
- सोम (चंद्र), दुर्वासा और दत्तात्रेय (विष्णु पुराण 1.10; भागवत 4.1.15, 33)
त्रिदेव का वर और तीन पुत्र
भागवत (4.1.17-20) के अनुसार ब्रह्मा ने अत्रि को सृष्टि बढ़ाने को कहा, तो वे पत्नी अनसूया के साथ ऋक्ष पर्वत पर गए, जहाँ निर्विंध्या नदी बहती है। वहाँ उन्होंने प्राणायाम से मन को साधकर सौ वर्ष तक एक पैर पर खड़े होकर, केवल वायु पर रहकर तप किया, और मन में यह माँगा कि जगत के स्वामी उन्हें अपने जैसी संतान दें।
ग्रंथ कहता है कि उनके तप की अग्नि से तीनों लोक तपने लगे, तब ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों हंस, गरुड़ और बैल पर बैठकर उनके आश्रम आए (4.1.21-24)। अत्रि ने पूछा कि उन्होंने तो एक ही स्वामी का ध्यान किया था, फिर तीनों क्यों आए। देवों ने उत्तर दिया कि वे तीनों वही एक तत्त्व हैं, और उनके अंश से अत्रि के यशस्वी पुत्र होंगे (4.1.27-31)। इसी से ब्रह्मा के अंश से सोम, विष्णु के अंश से योगी दत्तात्रेय और शिव के अंश से दुर्वासा जन्मे (4.1.33)।
विष्णु पुराण (1.10) भी अनसूया के यही तीन पुत्र गिनाता है: सोम, दुर्वासा और तपस्वी दत्तात्रेय। चंद्र के जन्म पर भागवत (9.14.2-3) कहता है कि सोम अत्रि के आनंद के आँसुओं से जन्मे, और ब्रह्मा ने उन्हें ब्राह्मणों, औषधियों और नक्षत्रों का स्वामी बनाया; विष्णु पुराण (4.6) भी अत्रि को सोम का पिता और चंद्रवंश का आरंभ बताता है।
ऋग्वेद में अत्रि
ऋग्वेद का पाँचवाँ मंडल अत्रि-कुल के ऋषियों का माना जाता है। ग्रिफ़िथ के अनुवाद की टिप्पणियाँ इस मंडल के कई सूक्त अत्रि वंश के ऋषियों के बताती हैं, जैसे 5.15 धरुण का और 5.28 विश्ववारा का, जो अत्रि-कुल की एक स्त्री ऋषि हैं।
सूक्त 5.40 में स्वर्भानु नाम का असुर सूर्य को अंधकार से बींध देता है, और सब प्राणी भटके हुए-से दिखते हैं (5.40.5)। अत्रि अपनी ‘चौथी प्रार्थना’ से अंधकार में छिपे सूर्य को खोज लेते हैं और आकाश में सूर्य की आँख फिर स्थापित करते हैं (5.40.6, 8)। अंतिम मंत्र कहता है कि अत्रियों ने सूर्य को फिर पाया, जो कोई और नहीं कर सका (5.40.9)। ग्रिफ़िथ इसे सूर्यग्रहण की कथा मानते हैं, और स्वर्भानु को बाद के समय का राहु। ऋग्वेद (1.112.7, 1.116.8) यह भी कहता है कि अश्विनों ने अग्नि-कुंड में डाले गए अत्रि को बचाया।
रामायण में: राम और सीता अत्रि के आश्रम में
भरत के लौट जाने के बाद राम ने चित्रकूट छोड़ा और सीता और लक्ष्मण के साथ अत्रि के आश्रम पहुँचे; ऋषि ने उनका पिता की तरह स्नेह से सत्कार किया (वाल्मीकि रामायण, अयोध्याकांड, सर्ग 117)। अत्रि ने अपनी वृद्ध पत्नी अनसूया को बुलाकर सीता का आतिथ्य करने को कहा, और राम को बताया कि दस वर्ष के सूखे में अनसूया ने अपने तप से ऋषियों के लिए फल-मूल उपजाए और स्नान के लिए गंगा को बहाया था; ग्रंथ कहता है कि उन्होंने एक बार ऋषियों के हित में दस रातों को एक रात कर दिया था।
अनसूया ने सीता को पति के साथ वन आने के लिए सराहा और पत्नी-धर्म पर उपदेश दिया। सीता के उत्तर से प्रसन्न होकर उन्होंने वर देना चाहा, और सीता के कुछ न माँगने पर भी उन्हें दिव्य माला, वस्त्र, आभूषण और अंगराग दिए, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि ये कभी मलिन नहीं होंगे (सर्ग 118)। अनसूया के कहने पर सीता ने अपने स्वयंवर की कथा सुनाई, और अगली सुबह ऋषियों का आशीर्वाद लेकर तीनों दंडक वन में गए (सर्ग 118-119)। परंपरा अत्रि-अनसूया का आश्रम चित्रकूट के पास मानती है, जहाँ आज सती अनसूया आश्रम है।
स्रोतों में अंतर
- अनसूया किसकी पुत्री: विष्णु पुराण (1.7) उन्हें दक्ष और प्रसूति की पुत्री कहता है, और भागवत (3.24.21-22) कर्दम और देवहूति की, जिन्होंने अपनी पुत्रियाँ ऋषियों को ब्याहीं।
- त्रिदेव के पुत्र बनने की कथा: भागवत (4.1) में त्रिदेव अत्रि के तप से प्रसन्न होकर आते हैं। लोक में यह कथा भी बहुत प्रचलित है कि त्रिदेव साधु बनकर अनसूया के सतीत्व की परीक्षा लेने आए और अनसूया ने उन्हें शिशु बना दिया; विकिपीडिया के अनुसार यह कथा मुख्य पुराणों में नहीं मिलती, और मार्कंडेय पुराण के रूप में अनसूया सूर्योदय लौटाने के बदले यह वर माँगती हैं। हमने इन दोनों रूपों को किसी पुराण के पाठ में नहीं जाँचा है।
- जन्म का वर्णन: विष्णु पुराण (1.7) अत्रि को केवल ब्रह्मा का मानस पुत्र कहता है; भागवत (3.12.24) उन्हें ब्रह्मा के नेत्रों से जन्मा बताता है। विल्सन की टिप्पणी के अनुसार लिंग पुराण उन्हें कानों से जन्मा कहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अत्रि ऋषि की पत्नी कौन थीं?
अनसूया, जो पतिव्रता और तपस्विनी के रूप में पूजी जाती हैं (विष्णु पुराण 1.10; भागवत 4.1.15)। वाल्मीकि रामायण (अयोध्याकांड 117-118) में उन्होंने सीता को उपदेश और उपहार दिए।
अत्रि और अनसूया के पुत्र कौन हैं?
सोम (चंद्र), दत्तात्रेय और दुर्वासा। भागवत (4.1.33) के अनुसार सोम ब्रह्मा के, दत्तात्रेय विष्णु के और दुर्वासा शिव के अंश से जन्मे।
राम अत्रि ऋषि से कहाँ मिले?
वनवास में, भरत के लौटने के बाद चित्रकूट छोड़कर दंडक वन की ओर जाते हुए (वाल्मीकि रामायण, अयोध्याकांड, सर्ग 117-119)। परंपरा यह आश्रम चित्रकूट के पास मानती है।
ऋग्वेद का कौन सा मंडल अत्रि का है?
पाँचवाँ मंडल, जिसके सूक्त अत्रि और उनके वंश (आत्रेय) के ऋषियों के माने जाते हैं। इसी में सूक्त 5.40 है, जिसमें अत्रि स्वर्भानु के अंधकार से सूर्य को छुड़ाते हैं।
स्रोत
- विष्णु पुराण 1.7, 1.10, 3.1, 4.6 (एच. एच. विल्सन का अनुवाद और टिप्पणियाँ, archive.org: thevishnupuranacomplete6bookssethoracehaymanwilson)
- भागवत पुराण 3.12.22-24, 3.24.21-22, 4.1.15-33, 8.13.5, 9.14.2-3 (जी. वी. तगारे का अंग्रेज़ी अनुवाद, मोतीलाल बनारसीदास, archive.org: bhagavata-purana-motilal-english-full)
- ऋग्वेद 1.112.7, 1.116.8, 5.15, 5.28, 5.40 (आर. टी. एच. ग्रिफ़िथ का अनुवाद, सूक्तों के ऋषियों पर टिप्पणियों सहित, archive.org: rigvedacomplete)
- वाल्मीकि रामायण, अयोध्याकांड, सर्ग 117-119 (हरि प्रसाद शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, दक्षिणी पाठ, शांति सदन 1952, archive.org: the-ramayana-of-valmiki-3-trans-hari-prasad-shastri)
- विकिपीडिया: “Atri” और “Anasuya” (पाँचवाँ मंडल, त्रिदेव की परीक्षा वाली लोककथा, मार्कंडेय पुराण का रूप, चित्रकूट का सती अनसूया आश्रम)
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