ऋषि और संत

वसिष्ठ ऋषि

संक्षेप में

वसिष्ठ वर्तमान (वैवस्वत) मन्वंतर के सप्तर्षियों में से एक हैं (विष्णु पुराण 3.1)। विष्णु पुराण (1.7) उन्हें ब्रह्मा के मानस पुत्रों में गिनता है। ऋग्वेद का सातवाँ मंडल उन्हें और उनके वंशजों को समर्पित माना जाता है। विष्णु पुराण (4.2) और वाल्मीकि रामायण दोनों उन्हें इक्ष्वाकु वंश का कुलपुरोहित बताते हैं, इसलिए वे राजा दशरथ और श्रीराम के गुरु थे। उनकी पत्नी अरुंधती हैं (भागवत 3.24.23)।

जन्म
ब्रह्मा के मानस पुत्र (विष्णु पुराण 1.7); ऋग्वेद (7.33.11) में मित्र और वरुण के पुत्र, उर्वशी से जन्मे
पत्नी
अरुंधती, कर्दम और देवहूति की पुत्री (भागवत 3.24.23); विष्णु पुराण में दक्ष की पुत्री ऊर्जा (1.7)
संतान और वंश
ऊर्जा से सात पुत्र (विष्णु पुराण 1.10); पुत्र शक्ति, पौत्र पराशर, और पराशर के पुत्र वेदव्यास (विष्णु पुराण 1.1, 3.3; महाभारत, आदि पर्व)
ऋग्वेद में
सातवें मंडल के ऋषि; राजा सुदास के पुरोहित, दस राजाओं के युद्ध के समय (7.18, 7.33)
कुलपुरोहित
इक्ष्वाकु वंश के (विष्णु पुराण 4.2; रामायण, बालकांड, सर्ग 70); दशरथ और राम के गुरु
प्रसिद्ध कथा
कामधेनु शबला (नंदिनी) को लेकर राजा विश्वामित्र से संघर्ष (रामायण, बालकांड, सर्ग 52-56; महाभारत, आदि पर्व)
सप्तर्षि
वर्तमान मन्वंतर के सात ऋषियों में पहला नाम (विष्णु पुराण 3.1)

ऋग्वेद में वसिष्ठ

ऋग्वेद के सातवें मंडल के सूक्त वसिष्ठ के माने जाते हैं, और दो सूक्तों के कुछ भागों में उनके पुत्र भी ऋषि हैं (ग्रिफ़िथ के अनुवाद की टिप्पणी)। सूक्त 7.18 में इंद्र की स्तुति है, जिन्होंने त्रित्सु जाति के राजा सुदास की परुष्णी (आज की रावी) नदी के पास शत्रुओं पर विजय में सहायता की; ग्रिफ़िथ की टिप्पणी के अनुसार वसिष्ठ इस सूक्त के ऋषि और उस अभियान में साथ रहे मुख्य पुरोहित हैं।

सूक्त 7.33 वसिष्ठ और उनके कुल की महिमा का गीत है। उसमें कहा गया है कि दस राजाओं के युद्ध में वसिष्ठों की प्रार्थना से इंद्र ने सुदास की रक्षा की (7.33.3, 5)। इसी सूक्त के आगे के मंत्र (7.33.10-13) उनके जन्म की बात करते हैं: वे मित्र और वरुण के पुत्र हैं, जो उर्वशी के प्रति उनके प्रेम से जन्मे।

इक्ष्वाकु वंश के गुरु

विष्णु पुराण (4.2) वसिष्ठ को इक्ष्वाकु वंश का कुलपुरोहित कहता है। वाल्मीकि रामायण में राजा दशरथ जनक से कहते हैं कि इक्ष्वाकु कुल के मुख्य पुरोहित वसिष्ठ हैं, और फिर वसिष्ठ ही विवाह के समय राम के वंश की परंपरा सुनाते हैं (बालकांड, सर्ग 70)। जब विश्वामित्र यज्ञ-रक्षा के लिए राम को माँगने आए और दशरथ हिचके, तो वसिष्ठ ने ही उन्हें वचन निभाने और राम को भेजने की सलाह दी (बालकांड, सर्ग 21)। राज्याभिषेक से पहले की रात राम और सीता को उपवास कराने भी दशरथ ने उन्हीं को भेजा (अयोध्याकांड, सर्ग 5)।

नंदिनी गाय और विश्वामित्र

वाल्मीकि रामायण (बालकांड, सर्ग 51-56) में शतानंद यह कथा राम को सुनाते हैं। राजा विश्वामित्र सेना के साथ वसिष्ठ के आश्रम पहुँचे। वसिष्ठ की कामधेनु गाय शबला ने पूरी सेना का भोजन से सत्कार किया। राजा ने एक लाख गायों के बदले शबला माँगी; वसिष्ठ ने मना किया, तो राजा उसे बलपूर्वक ले जाने लगे। शबला की उत्पन्न की हुई सेना ने राजा की सेना को हरा दिया, और वसिष्ठ ने अपने ब्रह्मदंड से विश्वामित्र के सारे अस्त्र, ब्रह्मास्त्र तक, शांत कर दिए। तब विश्वामित्र ने कहा कि क्षत्रिय का बल व्यर्थ है, सच्चा बल तप का है, और वे ब्राह्मणत्व पाने के लिए तप करने चले गए।

महाभारत (आदि पर्व, चैत्ररथ उपपर्व) में यही कथा है; वहाँ गाय का नाम नंदिनी है। महाभारत (आदि पर्व 99) के अनुसार नंदिनी दक्ष की पुत्री सुरभि और कश्यप की बेटी थी; आठ वसुओं ने उसे चुराया तो वसिष्ठ (जिन्हें वहाँ आपव भी कहा गया है) ने उन्हें मनुष्य बनकर जन्म लेने का शाप दिया, और उनमें से द्यु वसु गंगा और शांतनु के पुत्र देवव्रत (भीष्म) हुए।

वैर आगे भी चला: महाभारत (आदि पर्व, चैत्ररथ उपपर्व) के अनुसार वसिष्ठ के ज्येष्ठ पुत्र शक्ति के शाप से इक्ष्वाकु राजा कल्माषपाद राक्षस-भाव में आ गए; विश्वामित्र की आज्ञा से एक राक्षस उनमें प्रवेश कर गया, और उन्होंने शक्ति को मार डाला। विष्णु पुराण (1.1) में भी पराशर कहते हैं कि उनके पिता को विश्वामित्र के भेजे राक्षस ने मारा। जब पराशर ने क्रोध में राक्षसों के नाश का यज्ञ शुरू किया, तो दादा वसिष्ठ ने उन्हें रोका: क्रोध मूर्खों का भाव है, और क्षमा ही धर्मात्माओं का बल है (विष्णु पुराण 1.1)। रामायण (बालकांड, सर्ग 65) के अनुसार अंत में वसिष्ठ ने स्वयं विश्वामित्र को ब्रह्मर्षि माना और उनसे मित्रता की।

स्रोतों में अंतर

  • जन्म: विष्णु पुराण (1.7) उन्हें ब्रह्मा का मानस पुत्र कहता है; ऋग्वेद (7.33.11-13) और भागवत (6.18.5-6) उन्हें मित्र और वरुण से, उर्वशी के कारण जन्मा बताते हैं। विष्णु पुराण (4.5) और भागवत (9.13.1-6) दोनों को जोड़ते हैं: राजा निमि से परस्पर शाप के बाद वसिष्ठ का देह छूटा और वे मित्र-वरुण से उर्वशी के कारण फिर जन्मे। महाभारत (आदि पर्व 99) उन्हें वरुण का पुत्र कहता है।
  • पत्नी: विष्णु पुराण (1.7) में दक्ष की पुत्री ऊर्जा, जिनसे रजस, गात्र, ऊर्ध्वबाहु आदि सात पुत्र हुए (1.10); भागवत (3.24.23) में कर्दम की पुत्री अरुंधती। भागवत (4.1.40-41, तगारे का अनुवाद) पत्नी को ‘ऊर्जा (अरुंधती)’ लिखता है और सात पुत्रों के नाम चित्रकेतु आदि अलग देता है।
  • गाय का नाम: वाल्मीकि रामायण में शबला, महाभारत में नंदिनी। विद्वानों में मिशेल विट्ज़ेल का मत है कि ऋग्वेद में सुदास के पुरोहित पहले विश्वामित्र थे और बाद में वसिष्ठ हुए; स्टेफ़नी जेमिसन ऋग्वेद में दोनों के वैर का कोई प्रमाण नहीं मानतीं (विकिपीडिया)।
संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 6 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वसिष्ठ ऋषि की पत्नी का नाम क्या है?

अरुंधती, जो भागवत (3.24.23) के अनुसार कर्दम और देवहूति की पुत्री थीं। विष्णु पुराण (1.7) उनकी पत्नी का नाम ऊर्जा देता है। परंपरा में सप्तर्षि-मंडल में वसिष्ठ के तारे के पास का मंद तारा अरुंधती कहलाता है।

वसिष्ठ किसके गुरु थे?

वे इक्ष्वाकु (रघु) वंश के कुलपुरोहित थे (विष्णु पुराण 4.2), इसलिए राजा दशरथ और श्रीराम के गुरु। वाल्मीकि रामायण (बालकांड, सर्ग 70; अयोध्याकांड, सर्ग 5) में वे इसी रूप में आते हैं।

वसिष्ठ और विश्वामित्र में झगड़ा क्यों हुआ?

रामायण (बालकांड, सर्ग 52-56) और महाभारत (आदि पर्व) के अनुसार राजा विश्वामित्र ने वसिष्ठ की कामधेनु गाय माँगी और न मिलने पर बलपूर्वक ले जानी चाही। हार के बाद उन्होंने ब्राह्मणत्व के लिए तप किया, और अंत में वसिष्ठ ने ही उन्हें ब्रह्मर्षि माना (रामायण, सर्ग 65)।

योग वासिष्ठ किसने लिखा?

योग वासिष्ठ वसिष्ठ और श्रीराम का संवाद है, जिसका नाम वसिष्ठ पर है। परंपरा इसे वाल्मीकि की रचना मानती है; विद्वान (विकिपीडिया के अनुसार) इसका रचनाकार अज्ञात मानते हैं और वर्तमान रूप को लगभग 10वीं से 14वीं सदी के बीच का बताते हैं।

स्रोत

  1. ऋग्वेद 7.18, 7.33 (आर. टी. एच. ग्रिफ़िथ का अनुवाद और टिप्पणियाँ, archive.org: rigvedacomplete)
  2. विष्णु पुराण 1.1, 1.7, 1.10, 3.1, 3.3, 4.2, 4.5 (एच. एच. विल्सन का अनुवाद, archive.org)
  3. भागवत पुराण 3.24.23, 4.1.40-41, 6.18.5-6, 9.13.1-6 (जी. वी. तगारे का अंग्रेज़ी अनुवाद, मोतीलाल बनारसीदास, archive.org)
  4. वाल्मीकि रामायण, बालकांड, सर्ग 7, 21, 51-56, 65, 70; अयोध्याकांड, सर्ग 5 (दक्षिणी पाठ, हरि प्रसाद शास्त्री का अनुवाद, archive.org)
  5. महाभारत, आदि पर्व 99 और चैत्ररथ उपपर्व (किसरी मोहन गांगुली का अनुवाद, archive.org)
  6. विकिपीडिया: “Yoga Vasishtha”, “Battle of the Ten Kings”, “Mizar” (योग वासिष्ठ का काल, विद्वानों के मत, अरुंधती तारा)

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