ऋषि और संत

गौतम ऋषि

संक्षेप में

गौतम वर्तमान मन्वंतर के सप्तर्षियों में एक हैं (विष्णु पुराण 3.1; भागवत 8.13.5)। उनकी पत्नी अहल्या थीं; वाल्मीकि रामायण के अनुसार इंद्र ने गौतम का रूप धरकर अहल्या को छला, गौतम ने दोनों को श्राप दिया, और बहुत समय बाद राम के आने पर अहल्या श्राप से मुक्त हुईं। उनके पुत्र शतानंद राजा जनक के पुरोहित थे। शिव पुराण के अनुसार ब्रह्मगिरि पर गौतम के तप से गंगा गौतमी (गोदावरी) बनकर उतरीं और शिव वहाँ त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थित हुए।

पत्नी
अहल्या (वाल्मीकि रामायण, बालकांड 48-49; विष्णु पुराण 4.19; भागवत 9.21.34)
संतान
शतानंद, जनक के पुरोहित (वाल्मीकि रामायण, बालकांड 50-51; विष्णु पुराण 4.19; भागवत 9.21.34)
प्रसिद्ध कथा
अहल्या पर गौतम का श्राप और राम द्वारा उनका उद्धार, मिथिला के पास गौतम के आश्रम में
तीर्थ
ब्रह्मगिरि (त्र्यंबक, नासिक): गौतम का तप-स्थल, गोदावरी का उद्गम और त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता 24-27)
ऋग्वेद में
ग्रिफ़िथ के अनुसार सूक्त 1.74-93 गोतम राहूगण के, और चौथे मंडल के अधिकतर सूक्त उनके पुत्र वामदेव के
सप्तर्षि
वर्तमान वैवस्वत मन्वंतर के सात ऋषियों में (विष्णु पुराण 3.1; भागवत 8.13.5)

अहल्या, इंद्र और गौतम का श्राप

वाल्मीकि रामायण (बालकांड, सर्ग 48) में मिथिला के पास एक सूने, सुंदर आश्रम को देखकर राम पूछते हैं कि यह किसका है। विश्वामित्र बताते हैं कि यह गौतम ऋषि का आश्रम था, जहाँ वे अहल्या के साथ तप करते थे। एक दिन गौतम बाहर गए थे, तब इंद्र उनका रूप धरकर आए। ग्रंथ कहता है कि अहल्या ने उन्हें पहचानकर भी उनकी बात मान ली, और फिर उन्हें गौतम से बचकर जल्दी जाने को कहा।

उसी समय गौतम स्नान करके, समिधा और कुश लिए लौटे और इंद्र को अपने रूप में निकलते देख लिया। उन्होंने इंद्र को पौरुष खोने का श्राप दिया, और अहल्या को यह कि वह हज़ारों वर्ष तक केवल वायु पर जीती, धूल में पड़ी, सब प्राणियों से अदृश्य रहकर इसी आश्रम में रहेगी, और जब दशरथ के पुत्र राम यहाँ आएँगे, उनका सत्कार करके वह शुद्ध होकर फिर अपने रूप में गौतम के पास लौटेगी। फिर गौतम आश्रम छोड़कर हिमालय पर तप करने चले गए।

राम द्वारा अहल्या का उद्धार, और शतानंद

सर्ग 49 में विश्वामित्र के कहने पर राम और लक्ष्मण आश्रम में गए। उन्होंने अहल्या के चरण छुए, और अहल्या ने गौतम के वचन याद करके उनका विधि से सत्कार किया; ग्रंथ कहता है कि देवताओं ने फूल बरसाए। गौतम अपने तप-बल से यह जानकर लौट आए, अहल्या को पहले जैसा पाकर प्रसन्न हुए, और दोनों ने राम का पूजन करके फिर साथ तप आरंभ किया। विष्णु पुराण (4.4) भी संक्षेप में कहता है कि राम ने अहल्या का दोष केवल देखकर दूर कर दिया।

मिथिला पहुँचने पर राजा जनक अपने पुरोहित शतानंद के साथ विश्वामित्र का स्वागत करते हैं (सर्ग 50)। शतानंद गौतम के ज्येष्ठ पुत्र हैं; वे विश्वामित्र से पूछते हैं कि क्या राम ने उनकी माता को देखा और क्या उनके पिता ने माता को फिर अपना लिया, और यह सुनकर राम का आभार मानते हैं (सर्ग 51)। विष्णु पुराण (4.19) और भागवत (9.21.34) भी शतानंद को गौतम और अहल्या का पुत्र बताते हैं; भागवत अहल्या को मुद्गल की पुत्री कहता है, और विल्सन के विष्णु पुराण में उनके पिता का नाम बह्वश्व है।

गौतमी गंगा और त्र्यंबकेश्वर

शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 24-27) के अनुसार गौतम और अहल्या ब्रह्मगिरि पर तप करते थे। सौ वर्ष के सूखे में वरुण ने गौतम को कभी न सूखने वाले जल का कुंड दिया, जिससे वहाँ अन्न उगा और ऋषि बस गए। पानी पर हुए झगड़े के बाद कुछ ऋषियों के कहने पर गणेश एक दुर्बल गाय बनकर खेत में आए; गौतम ने तिनकों से उसे हटाया तो वह मर गई, और ऋषियों ने उन्हें गोहत्या का दोषी कहकर निकाल दिया।

प्रायश्चित के लिए गौतम ने गंगा को लाने को शिव की आराधना की। शिव ने उन्हें निर्दोष बताया; गंगा इस शर्त पर रुकीं कि शिव भी वहीं रहें, और शिव त्र्यंबक नाम से वहीं स्थित हुए। गंगा ब्रह्मगिरि से निकलकर गौतमी (गोदावरी) कहलाईं, और गौतम ने नीचे कुशावर्त बनाया। यह मंदिर आज नासिक ज़िले में त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग है।

स्रोतों में अंतर

  • क्या अहल्या पत्थर बनी थीं: वाल्मीकि रामायण में अहल्या पत्थर नहीं बनतीं; वे वायु पर जीती, अदृश्य रहकर तप करती हैं और राम का सत्कार करके शुद्ध होती हैं। विकिपीडिया के अनुसार पत्थर (शिला) बनने और राम के चरण छूने से मुक्त होने की कथा बाद के ग्रंथों, जैसे स्कंद पुराण, और लोक में प्रचलित कथाओं में है।
  • महाभारत की कथा अलग है: शांति पर्व (मोक्षधर्म पर्व) में भीष्म चिरकारी की कथा कहते हैं। वहाँ गौतम (मेधातिथि गौतम) क्रोध में अपने पुत्र चिरकारी को माता को मारने की आज्ञा देकर वन चले जाते हैं; चिरकारी देर तक सोचता रहता है, और लौटकर गौतम स्वयं मानते हैं कि इंद्र के छल में अहल्या का दोष नहीं था, और पुत्र के देर करने से प्रसन्न होते हैं।
  • एक नाम, कई व्यक्ति: ऋग्वेद के गोतम राहूगण (मंडल 1) और वामदेव गौतम (मंडल 4) अहल्या के पति गौतम ही हैं या नहीं, यह ग्रंथ स्पष्ट नहीं करते। न्याय सूत्र परंपरा में अक्षपाद गौतम के और गौतम धर्मसूत्र गौतम के नाम से हैं; विकिपीडिया के अनुसार विद्वान उनके काल और लेखक के बारे में निश्चित नहीं हैं और ‘गौतम’ को एक आम नाम या कुल-नाम मानते हैं। गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ गौतम) एक अलग व्यक्ति हैं।
संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 7 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौतम ऋषि की पत्नी कौन थीं?

अहल्या (वाल्मीकि रामायण, बालकांड 48-49)। उनके पुत्र शतानंद राजा जनक के पुरोहित थे (बालकांड 50-51)।

गौतम ऋषि ने अहल्या को श्राप क्यों दिया?

वाल्मीकि रामायण (बालकांड 48) के अनुसार इंद्र गौतम का रूप धरकर आए और अहल्या ने उनकी बात मान ली। गौतम ने इंद्र और अहल्या दोनों को श्राप दिया, और अहल्या के श्राप का अंत भी बताया: राम के आने पर उनका सत्कार करके वे शुद्ध होंगी।

गोदावरी को गौतमी क्यों कहते हैं?

शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता 24-27) के अनुसार गौतम ऋषि के तप से गंगा ब्रह्मगिरि पर उतरीं, इसलिए यह नदी गौतमी कहलाई। वहीं त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग है।

क्या गौतम ऋषि और गौतम बुद्ध एक ही हैं?

नहीं। गौतम बुद्ध, यानी सिद्धार्थ गौतम, एक अलग व्यक्ति हैं। ‘गौतम’ एक कुल-नाम भी है, इसलिए ग्रंथों में इस नाम के कई व्यक्ति मिलते हैं।

स्रोत

  1. वाल्मीकि रामायण, बालकांड सर्ग 48-51 (हरि प्रसाद शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, दक्षिणी पाठ, शांति सदन 1952, archive.org: the-ramayana-of-valmiki-3-trans-hari-prasad-shastri; समीक्षित संस्करण में अहल्या की कथा सर्ग 47-48 में है)
  2. विष्णु पुराण 3.1, 4.4, 4.19 (एच. एच. विल्सन का अनुवाद, archive.org: thevishnupuranacomplete6bookssethoracehaymanwilson)
  3. भागवत पुराण 8.13.5, 9.21.34 (जी. वी. तगारे का अंग्रेज़ी अनुवाद, मोतीलाल बनारसीदास, archive.org: bhagavata-purana-motilal-english-full)
  4. शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 24 से 27 (जे. एल. शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org/hinduism/book/shiva-purana-english/d/doc226525.html; अध्याय-संख्या sa.wikisource के संस्कृत पाठ जैसी, गीता प्रेस के "संक्षिप्त शिवपुराण" में अलग)
  5. महाभारत, शांति पर्व (मोक्षधर्म पर्व), चिरकारी की कथा, इस प्रति में खंड 266 (के. एम. गांगुली का अनुवाद, archive.org: the-mahabharata-of-krishna-dwaipayana-vyasa-complete-18-volumes-kisari-mohan-ganguli_202008)
  6. ऋग्वेद 1.74-93, 4.1-41, 4.4.11, 4.45-58 (आर. टी. एच. ग्रिफ़िथ का अनुवाद, सूक्तों के ऋषियों पर टिप्पणियों सहित, archive.org: rigvedacomplete)
  7. विकिपीडिया: “Ahalya”, “Nyāya Sūtras” और “Gautama Dharmasutra” (पत्थर बनने की बाद की कथाएँ, न्याय सूत्र और धर्मसूत्र के लेखक और काल पर विद्वानों के मत)

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