ऋषि और संत

जमदग्नि ऋषि

संक्षेप में

जमदग्नि भृगु वंश के ऋषि हैं: ऋचीक और राजा गाधि की पुत्री सत्यवती के पुत्र, रेणुका के पति और विष्णु के छठे अवतार परशुराम के पिता (भागवत 9.15.5-13; विष्णु पुराण 4.7)। विष्णु पुराण (3.1) और भागवत (8.13.5) उन्हें वर्तमान, वैवस्वत मन्वंतर के सात ऋषियों में गिनते हैं। हैहय राजा कार्तवीर्य अर्जुन के पुत्रों ने उन्हें उनके आश्रम में मार डाला; भागवत (9.16.24) कहता है कि इसके बाद वे सप्तर्षि-मंडल के सातवें तारे बने।

जन्म
पिता ऋचीक (भृगु वंश), माता सत्यवती, राजा गाधि की पुत्री; उसी समय सत्यवती की माता से विश्वामित्र जन्मे, जो इस नाते जमदग्नि के मामा हुए (विष्णु पुराण 4.7)
पत्नी
रेणुका, राजा रेणु की पुत्री (भागवत 9.15.12; विष्णु पुराण 4.7); महाभारत में राजा प्रसेनजित की पुत्री
संतान
पाँच पुत्र, जिनमें सबसे छोटे परशुराम; बड़े चार के नाम महाभारत (वनपर्व) में रुमण्वान, सुषेण, वसु और विश्वावसु
ऋग्वेद में
ग्रिफ़िथ की टिप्पणी के अनुसार 10.167 के ऋषि विश्वामित्र और जमदग्नि; उनका नाम 3.62.18, 8.101.8, 9.65.25 और 9.97.51 में भी आता है
प्रसिद्ध कथाएँ
कामधेनु और सहस्रार्जुन; रेणुका और परशुराम का वर; सूर्य से छाता और जूते मिलना (महाभारत, अनुशासन पर्व)
सप्तर्षि
वर्तमान मन्वंतर के सात ऋषियों में एक (विष्णु पुराण 3.1; भागवत 8.13.5); भागवत 9.16.24 में सप्तर्षि-मंडल का सातवाँ तारा

जन्म: बदला हुआ चरु

भृगुवंशी ब्राह्मण ऋचीक ने कान्यकुब्ज के राजा गाधि से उनकी पुत्री सत्यवती माँगी। राजा ने शुल्क में चंद्रमा जैसे सफ़ेद, पर एक काले कान वाले हज़ार घोड़े माँगे, और ऋचीक ने वरुण से ऐसे घोड़े लाकर विवाह किया (भागवत 9.15.5-7; विष्णु पुराण 4.7)। सत्यवती और उनकी माता, दोनों पुत्र चाहती थीं। ऋचीक ने दो चरु (दूध-घी में पका अन्न) बनाए: पत्नी के लिए ब्राह्मण-गुणों वाले मंत्रों से, और सास के लिए क्षत्रिय-गुणों वाले मंत्रों से (9.15.8)।

माता के कहने पर सत्यवती ने चरु बदल लिए। ऋचीक ने जाना तो कहा कि अब सत्यवती का पुत्र कठोर दंड देने वाला होगा और उनका भाई ब्रह्मज्ञानी। सत्यवती की विनती पर उन्होंने इतना बदला कि यह स्वभाव पुत्र में नहीं, पौत्र में आएगा; तब जमदग्नि जन्मे (भागवत 9.15.9-11)। विष्णु पुराण (4.7) जोड़ता है कि सत्यवती की माता से विश्वामित्र जन्मे। यही पौत्र आगे परशुराम हुए। सत्यवती बाद में कौशिकी नदी बनीं; यह भागवत (9.15.12), विष्णु पुराण (4.7) और वाल्मीकि रामायण (बालकांड, सर्ग 34) तीनों कहते हैं।

कामधेनु, रेणुका और जमदग्नि की मृत्यु

जमदग्नि ने रेणुका से विवाह किया, और उनके कई पुत्रों में सबसे छोटे राम (परशुराम) थे (भागवत 9.15.12-13)। एक बार हैहय राजा कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्रार्जुन) शिकार करते हुए उनके आश्रम पहुँचा। ऋषि ने अपनी कामधेनु के बल पर राजा और उसकी पूरी सेना का सत्कार किया, पर राजा ने लोभ में आकर गाय और बछड़ा छिनवा लिया (9.15.23-26)। परशुराम ने लौटकर राजा को युद्ध में मारा और गाय लौटा लाए; इसकी कथा परशुराम वाले पृष्ठ पर है।

भागवत (9.15.37-41) में जमदग्नि ने इस पर पुत्र की प्रशंसा नहीं की, उलटे कहा कि राजा को मारना पाप हुआ: ब्राह्मण क्षमा से ही पूजनीय होते हैं, और क्षमा करने वालों पर हरि शीघ्र प्रसन्न होते हैं। उन्होंने परशुराम को प्रायश्चित्त में तीर्थों पर भेजा, और वे एक वर्ष बाद लौटे (9.16.1)।

भागवत (9.16.2-8) आगे कहता है कि एक दिन रेणुका गंगा पर जल लेने गईं, गंधर्वराज चित्ररथ को देखती रह गईं और होम का समय निकल गया। जमदग्नि ने उनके मन का दोष जानकर क्रोध में पुत्रों से उन्हें मारने को कहा। बाकी पुत्रों ने आज्ञा नहीं मानी; परशुराम ने पिता के तप की शक्ति जानते हुए आज्ञा का पालन किया, और माता व भाइयों के प्राण गए। प्रसन्न पिता ने वर माँगने को कहा तो परशुराम ने सबका फिर से जीवित होना माँगा, इस तरह कि उन्हें यह घटना याद न रहे; और वे सब जैसे नींद से उठ खड़े हुए।

बाद में जब परशुराम भाइयों के साथ वन गए थे, सहस्रार्जुन के पुत्र बदला लेने आश्रम में आए। जमदग्नि यज्ञशाला में भगवान के ध्यान में बैठे थे; रेणुका की विनती अनसुनी करके उन्होंने ऋषि को मार डाला और उनका सिर ले गए (भागवत 9.16.9-12)। महाभारत (वनपर्व, अध्याय 116) कहता है कि बलवान होते हुए भी ऋषि ने तप में लगे होने के कारण युद्ध नहीं किया और बार-बार राम को पुकारते रहे। परशुराम ने बाद में पिता का सिर धड़ से जोड़कर यज्ञ किया (भागवत 9.16.20), और भागवत (9.16.24) के अनुसार जमदग्नि शुद्ध चेतना वाला शरीर पाकर सप्तर्षि-मंडल के सातवें तारे बने।

क्रोध और क्षमा

परंपरा जमदग्नि को तेज़ स्वभाव का ऋषि मानती है, और ग्रंथ दोनों पक्ष दिखाते हैं। महाभारत (अनुशासन पर्व, अध्याय 95-96) में वे धनुष चलाने का अभ्यास कर रहे थे और रेणुका तीर बटोरकर ला रही थीं। ज्येष्ठ की दोपहर की धूप से उनका सिर और पैर जलने लगे और वे देर से लौटीं, तो जमदग्नि सूर्य को ही तीरों से गिराने चले। सूर्य ब्राह्मण के वेश में आकर शरण माँगने लगे; ऋषि ने शरणागत को क्षमा किया और धूप से बचने का उपाय माँगा, तब सूर्य ने उन्हें छाता और जूते दिए। ग्रंथ कहता है कि तभी से छाते और जूतों का दान पुण्य माना गया।

महाभारत के आश्वमेधिक पर्व (अध्याय 92) में धर्म ने ‘क्रोध’ का रूप लेकर जमदग्नि के श्राद्ध के लिए रखा दूध बिगाड़ दिया, पर ऋषि क्रोधित नहीं हुए। तब क्रोध ने स्वयं कहा कि लोगों में कहावत है कि भृगुवंशी बहुत क्रोधी होते हैं, पर आज वह झूठी निकली, क्योंकि जमदग्नि ने उसे जीत लिया।

स्रोतों में अंतर

  • चरु किसने दिया: भागवत (9.15.8-11) और विष्णु पुराण (4.7) में ऋचीक ने; महाभारत (वनपर्व, अध्याय 115) में ऋचीक के पिता भृगु ने, और वहाँ चरु के साथ दो पेड़ों (पीपल और गूलर) को आलिंगन करने की बात भी बदली जाती है।
  • रेणुका और पुत्र: भागवत और विष्णु पुराण रेणुका को राजा रेणु की पुत्री कहते हैं (विष्णु पुराण उन्हें इक्ष्वाकु कुल का बताता है), महाभारत (वनपर्व, अध्याय 116) राजा प्रसेनजित की। भागवत (9.15.13) ‘वसुमान आदि’ कई पुत्र कहता है; महाभारत के आदिपर्व (अध्याय 66) में चार पुत्र हैं जिनमें सबसे छोटे राम, और वनपर्व (अध्याय 116) में चार के बाद पाँचवें राम।
  • मृत्यु: भागवत (9.16.9-12) और महाभारत (वनपर्व, अध्याय 116) में कार्तवीर्य के पुत्र जमदग्नि को मारते हैं (महाभारत में बाणों से)। वाल्मीकि रामायण (बालकांड, सर्ग 75) में परशुराम स्वयं कहते हैं कि शस्त्र त्यागकर तप कर रहे उनके पिता को राजा सहस्रबाहु (शास्त्री के अनुवाद में ‘Sahasravaku’) ने मारा। वहीं वे बताते हैं कि विष्णु का धनुष ऋचीक से जमदग्नि को और फिर उन्हें मिला।
संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 5 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जमदग्नि ऋषि कौन थे?

भृगु वंश के ऋषि, ऋचीक और सत्यवती के पुत्र, रेणुका के पति और परशुराम के पिता। वे वर्तमान मन्वंतर के सप्तर्षियों में एक हैं (विष्णु पुराण 3.1, 4.7; भागवत 8.13.5, 9.15)।

जमदग्नि और विश्वामित्र का क्या रिश्ता था?

विश्वामित्र राजा गाधि के पुत्र और सत्यवती के भाई थे, यानी जमदग्नि के मामा। विष्णु पुराण (4.7) के अनुसार दोनों का जन्म बदले हुए चरु की उसी घटना के बाद हुआ: सत्यवती से जमदग्नि और उनकी माता से विश्वामित्र।

जमदग्नि की मृत्यु कैसे हुई?

परशुराम ने कार्तवीर्य अर्जुन को मारा था; बदले में उसके पुत्रों ने, जब परशुराम आश्रम में नहीं थे, ध्यान में बैठे जमदग्नि को मार डाला (भागवत 9.16.9-12)। इसी के बाद परशुराम ने इक्कीस बार क्षत्रियों का नाश किया।

जमदग्नि ने रेणुका के वध की आज्ञा क्यों दी?

भागवत (9.16.2-8) के अनुसार रेणुका गंधर्वराज चित्ररथ को देखते हुए होम का समय भूल गईं, और ऋषि ने इसे उनके मन का दोष मानकर क्रोध में आज्ञा दी। परशुराम ने आज्ञा मानी और फिर वर में माता और भाइयों का जीवन लौटवा लिया। महाभारत (वनपर्व, अध्याय 116) में भी यही कथा है।

स्रोत

  1. भागवत पुराण 8.13.5, 9.15.5-41, 9.16.1-24 (जी. वी. तगारे का अंग्रेज़ी अनुवाद, मोतीलाल बनारसीदास, archive.org: bhagavata-purana-motilal-english-full)
  2. विष्णु पुराण 3.1, 4.7, और 4.7 पर विल्सन की टिप्पणी में महाभारत की परशुराम कथा (एच. एच. विल्सन का अनुवाद, archive.org: thevishnupuranacomplete6bookssethoracehaymanwilson)
  3. महाभारत, आदिपर्व अध्याय 66; वनपर्व अध्याय 115-117; शांतिपर्व अध्याय 208; अनुशासन पर्व अध्याय 95-96; आश्वमेधिक पर्व अध्याय 92 (के. एम. गांगुली का अंग्रेज़ी अनुवाद, उसी की अध्याय-संख्या, archive.org)
  4. वाल्मीकि रामायण, बालकांड सर्ग 34 और 75 (हरि प्रसाद शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, दक्षिणी पाठ, archive.org: the-ramayana-of-valmiki-3-trans-hari-prasad-shastri)
  5. ऋग्वेद 3.62.18, 8.101.8 (ग्रिफ़िथ के क्रम में 8.90.8), 9.65.25, 9.97.51, 10.167 और उस पर टिप्पणी (आर. टी. एच. ग्रिफ़िथ का अनुवाद, archive.org: rigvedacomplete)

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