ऋषि और संत

कश्यप ऋषि

संक्षेप में

कश्यप ब्रह्मा के मानस पुत्र मरीचि के पुत्र और वर्तमान मन्वंतर के सप्तर्षियों में एक हैं (विष्णु पुराण 1.15, 3.1)। दक्ष ने अपनी तेरह पुत्रियाँ उन्हें ब्याहीं, और उन्हीं से आदित्य (देवता), दैत्य, दानव, गरुड़, नाग और बहुत-से जीव जन्मे, इसलिए पुराण उन्हें सृष्टि के प्रजापतियों में गिनते हैं। अदिति से उनके पुत्र के रूप में विष्णु ने वामन अवतार लिया, और परशुराम ने यज्ञ के अंत में पृथ्वी उन्हें दान में दी।

पिता
मरीचि, ब्रह्मा के मानस पुत्र (विष्णु पुराण 1.15; भागवत 8.17.18; वाल्मीकि रामायण, बालकांड 29)
पत्नियाँ
दक्ष की तेरह पुत्रियाँ, जिनमें अदिति, दिति, दनु, विनता और कद्रू (विष्णु पुराण 1.15; भागवत 6.6.21-26)
संतान
अदिति से बारह आदित्य (इंद्र, विवस्वान, वरुण आदि), दिति से दैत्य (हिरण्यकशिपु, हिरण्याक्ष), दनु से दानव, विनता से गरुड़ और अरुण, कद्रू से नाग (विष्णु पुराण 1.15, 1.21)
अवतार से संबंध
अदिति के साथ वामन के पिता (विष्णु पुराण 3.1; भागवत 8.13.6, 8.17.18-19)
ऋग्वेद में
सूक्त 1.99 (ग्रिफ़िथ: मरीचि-पुत्र कश्यप का) और 9.114, जिसके दूसरे मंत्र में ऋषि स्वयं को ‘कश्यप’ कहकर पुकारते हैं
सप्तर्षि
वर्तमान वैवस्वत मन्वंतर के सात ऋषियों में (विष्णु पुराण 3.1; भागवत 8.13.5)

दक्ष की पुत्रियाँ और उनकी संतान

विष्णु पुराण (1.15) के अनुसार दक्ष ने अपनी साठ पुत्रियों में से दस धर्म को, तेरह कश्यप को और सत्ताईस सोम को दीं। कश्यप की तेरह पत्नियाँ थीं: अदिति, दिति, दनु, अरिष्टा, सुरसा, सुरभि, विनता, ताम्रा, क्रोधवशा, इरा, खसा, कद्रू और मुनि। चाक्षुष मन्वंतर के तुषित देवता अदिति के गर्भ से कश्यप के पुत्र बनकर जन्मे और बारह आदित्य कहलाए: विष्णु, शक्र (इंद्र), अर्यमा, धाता, त्वष्टा, पूषा, विवस्वान, सविता, मित्र, वरुण, अंशु और भग।

विष्णु पुराण (1.21) आगे बताता है कि दनु से दानव जन्मे; विनता से गरुड़ और अरुण, जिनमें गरुड़ पक्षियों के राजा हैं; कद्रू से हज़ारों नाग, जिनमें शेष, वासुकि और तक्षक मुख्य हैं; सुरभि से गाय-भैंस, इरा से पेड़-पौधे और घास, और मुनि से अप्सराएँ। दिति के पुत्र हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष थे (1.21; भागवत 3.17.18 में इन जुड़वाँ भाइयों के नाम स्वयं कश्यप रखते हैं)। इस तरह देवता और दैत्य दोनों कश्यप के पुत्र, यानी आपस में भाई हैं; भागवत (8.9.7) में अमृत के बँटवारे पर असुर मोहिनी से कहते हैं कि कश्यप के पुत्र होने से हम सब भाई हैं।

वामन के पिता

वाल्मीकि रामायण (बालकांड, सर्ग 29) में विश्वामित्र राम को सिद्धाश्रम दिखाते हुए बताते हैं कि यहीं मरीचि-पुत्र कश्यप ने अदिति के साथ हज़ार वर्ष तप करके विष्णु की स्तुति की और वर माँगा कि वे उनके पुत्र और इंद्र के छोटे भाई बनें; तब विष्णु अदिति के गर्भ से वामन बनकर जन्मे और बलि के पास गए। भागवत (8.16-17) में दैत्यों से हारे देवताओं की माता अदिति दुखी होती हैं, कश्यप उन्हें पयोव्रत की विधि बताते हैं (8.16.24-25), और भगवान कहते हैं कि वे कश्यप के तप में स्थित होकर अदिति के पुत्र बनेंगे (8.17.18-19)। विष्णु पुराण (3.1) भी कहता है कि इस मन्वंतर में विष्णु कश्यप और अदिति के पुत्र वामन होकर जन्मे और तीन पगों में लोक जीतकर इंद्र को दिए।

परशुराम का दान, और पृथ्वी ‘उर्वी’

भागवत (9.16.19-22) के अनुसार इक्कीस बार क्षत्रियों का संहार करने के बाद परशुराम ने यज्ञ किया और दक्षिणा में दिशाएँ ऋत्विजों को और पृथ्वी का मध्य भाग कश्यप को दिया। वाल्मीकि रामायण (बालकांड, सर्ग 75-76) में परशुराम स्वयं राम से कहते हैं कि उन्होंने यज्ञ के अंत में पृथ्वी कश्यप को दे दी, और कश्यप के कहने पर वे रात को पृथ्वी पर नहीं रहते, महेंद्र पर्वत पर लौट जाते हैं। महाभारत (द्रोण पर्व 70) में भी अश्वमेध के अंत में कश्यप पृथ्वी स्वीकार करते हैं और परशुराम को उससे बाहर जाने को कहते हैं।

महाभारत के शांति पर्व (राजधर्मानुशासन पर्व) में कृष्ण यही कथा युधिष्ठिर को सुनाते हुए आगे कहते हैं कि राजा न रहने पर पृथ्वी डूबने लगी, तो कश्यप ने उसे अपनी जाँघ (ऊरु) पर थाम लिया, इसलिए पृथ्वी ‘उर्वी’ कहलाई; फिर पृथ्वी के माँगने पर बचे हुए क्षत्रिय वंशों से राजा खोजे गए। वाल्मीकि रामायण (बालकांड 70, अयोध्याकांड 110) की वंशावली में कश्यप के पुत्र विवस्वान (सूर्य), उनके पुत्र मनु और मनु के पुत्र इक्ष्वाकु हैं, यानी कश्यप राम के कुल के पूर्वज हैं।

स्रोतों में अंतर

  • पत्नियों के नाम और गिनती: विष्णु पुराण (1.15) तेरह गिनाता है। भागवत (6.6.25-26) की तेरह की सूची अलग है (उसमें विनता और कद्रू नहीं, काष्ठा, सरमा और तिमि हैं), और विनता, कद्रू, पतंगी और यामिनी को वह ‘तार्क्ष्य’ की पत्नियाँ कहता है, जो कश्यप का ही दूसरा नाम है (6.6.21-22)। वाल्मीकि रामायण (अरण्यकांड, सर्ग 14) में जटायु बताते हैं कि कश्यप ने दक्ष की साठ में से आठ पुत्रियों से विवाह किया।
  • कश्मीर का नाम: परंपरा में कहा जाता है कि कश्मीर घाटी पहले सतीसर नाम की झील थी और कश्यप के प्रयत्न से उसका जल निकला। विकिपीडिया के अनुसार यह कथा नीलमत पुराण में है (जहाँ झील का पानी विष्णु के कहने पर अनंत पर्वत तोड़कर निकालते हैं और कश्यप घाटी बसाते हैं), और कुछ विद्वान ‘कश्मीर’ नाम को ‘कश्यप-मीर’ (कश्यप की झील) से जोड़ते हैं, जबकि दूसरे इसका अर्थ ‘जल सुखाना’ बताते हैं। हमने यह नीलमत पुराण के पाठ में नहीं जाँचा है।
  • एक नाम, कई व्यक्ति: विकिपीडिया के अनुसार ग्रंथों में ‘कश्यप’ नाम के कई व्यक्ति मिलते हैं, और उनकी कथाएँ आपस में मेल नहीं खातीं; ऋष्यशृंग के पिता विभांडक को रामायण कश्यप-कुल का बताती है। विल्सन की विष्णु पुराण (3.6) की टिप्पणी वायु पुराण के हवाले से कश्यप को ब्राह्मण गोत्रों के पाँच मूल ऋषियों में गिनती है।
संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 6 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कश्यप ऋषि की कितनी पत्नियाँ थीं?

विष्णु पुराण (1.15) के अनुसार दक्ष की तेरह पुत्रियाँ: अदिति, दिति, दनु, अरिष्टा, सुरसा, सुरभि, विनता, ताम्रा, क्रोधवशा, इरा, खसा, कद्रू और मुनि। भागवत की सूची कुछ अलग है, और वाल्मीकि रामायण आठ पत्नियाँ बताती है।

कश्यप ऋषि के पिता कौन थे?

मरीचि, जो ब्रह्मा के मानस पुत्र हैं (विष्णु पुराण 1.7, 1.15; भागवत 8.17.18; वाल्मीकि रामायण, बालकांड 29)।

देवता और दैत्य दोनों कश्यप के पुत्र कैसे हैं?

वे अलग-अलग माताओं से हैं: अदिति से आदित्य (देवता), दिति से दैत्य और दनु से दानव (विष्णु पुराण 1.15, 1.21)। इसलिए पुराण उन्हें सौतेले भाई बताते हैं।

क्या कश्मीर का नाम कश्यप ऋषि से पड़ा?

परंपरा ऐसा मानती है, और कुछ विद्वान नाम को ‘कश्यप-मीर’ (कश्यप की झील) से जोड़ते हैं; दूसरे विद्वान इसकी और व्याख्याएँ देते हैं। झील सुखाकर घाटी बसाने की कथा नीलमत पुराण की बताई जाती है।

स्रोत

  1. विष्णु पुराण 1.7, 1.15, 1.21, 3.1 और 3.6 पर टिप्पणी (एच. एच. विल्सन का अनुवाद और टिप्पणियाँ, archive.org: thevishnupuranacomplete6bookssethoracehaymanwilson)
  2. भागवत पुराण 6.6.21-39, 3.17.18, 8.8.31, 8.9.7, 8.13.5-6, 8.16.24-25, 8.17.18-19, 9.16.19-22 (जी. वी. तगारे का अंग्रेज़ी अनुवाद, मोतीलाल बनारसीदास, archive.org: bhagavata-purana-motilal-english-full)
  3. वाल्मीकि रामायण, बालकांड सर्ग 29, 70, 75-76; अयोध्याकांड सर्ग 110; अरण्यकांड सर्ग 14 (हरि प्रसाद शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, दक्षिणी पाठ, शांति सदन, archive.org: the-ramayana-of-valmiki-3-trans-hari-prasad-shastri)
  4. महाभारत, द्रोण पर्व खंड 70 और शांति पर्व (राजधर्मानुशासन पर्व) में परशुराम की कथा, जो इस प्रति में खंड 50 है (के. एम. गांगुली का अनुवाद, archive.org: the-mahabharata-of-krishna-dwaipayana-vyasa-complete-18-volumes-kisari-mohan-ganguli_202008)
  5. ऋग्वेद 1.99 और 9.114 (आर. टी. एच. ग्रिफ़िथ का अनुवाद, सूक्तों के ऋषियों पर टिप्पणियों सहित, archive.org: rigvedacomplete)
  6. विकिपीडिया: “Kashyapa” और “Nilamata Purana” (मंडल 9 के सूक्त, कश्मीर के नाम पर विद्वानों के मत, नीलमत पुराण की कथा, एक नाम के कई व्यक्ति)

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