घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) ज़िले में वेरूल (एलोरा) में है, और द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र व शिव पुराण, दोनों में बारह ज्योतिर्लिंगों में अंतिम है। शिव पुराण के अनुसार शिव यहाँ अपनी भक्त घुश्मा के नाम पर घुश्मेश कहलाए।
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- देवता
- शिव (घृष्णेश्वर)
- परंपरा
- शैव
- तीर्थ-सूची
- द्वादश ज्योतिर्लिंग 12/12
- स्थान
- वेरूल (एलोरा), छत्रपति संभाजीनगर ज़िला
- राज्य
- महाराष्ट्र
- देश
- भारत
- नक्शा
- OpenStreetMap (20.0248, 75.1699)
घृष्णेश्वर की कथा: घुश्मा की भक्ति
शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 32–33) के अनुसार दक्षिण के देव पर्वत के पास (अनुवादक इसे देवगिरि, यानी दौलताबाद, मानते हैं) सुधर्मा नाम के ब्राह्मण और उनकी पत्नी सुदेहा रहते थे। संतान न होने से दुखी सुदेहा ने पति का विवाह अपनी छोटी बहन घुश्मा से करा दिया। घुश्मा रोज़ 101 पार्थिव लिंग बनाकर उनकी पूजा करती और उन्हें एक सरोवर में विसर्जित करती थी; उसे पुत्र हुआ।
ईर्ष्या में सुदेहा ने रात को उस पुत्र को मारकर सरोवर में फेंक दिया। घुश्मा ने अपनी पूजा नहीं छोड़ी, और पूजा के बाद पुत्र सरोवर के किनारे जीवित खड़ा मिला। शिव प्रकट हुए और सुदेहा को दंड देना चाहा, पर घुश्मा ने बहन को क्षमा करने की विनती की और शिव से वहीं रहने का वर माँगा। शिव घुश्मेश नाम से वहीं रहे, और सरोवर का नाम शिवालय पड़ा; पुराण यहीं बारह ज्योतिर्लिंगों का वर्णन पूरा करता है।
मंदिर के बारे में
महाराष्ट्र पर्यटन के अनुसार तेरहवीं-चौदहवीं सदी में दिल्ली सल्तनत के समय मंदिर नष्ट हुआ; सोलहवीं सदी में छत्रपति शिवाजी के दादा मालोजी भोसले ने इसे फिर बनवाया, और आज का रूप अठारहवीं सदी में अहिल्याबाई होल्कर के जीर्णोद्धार से है। मंदिर लाल ज्वालामुखीय पत्थर का, हेमाडपंती शैली का है, पाँच तल का शिखर और 24 खंभों का मंडप है; गर्भगृह में पुरुष भक्त बिना ऊपरी वस्त्र के जाते हैं। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से संरक्षित स्मारक है।
हमें मंदिर ट्रस्ट की अपनी वेबसाइट नहीं मिली (कई निजी साइटें स्वयं को आधिकारिक कहती हैं), और राज्य सरकार का कोई पन्ना दर्शन का समय नहीं देता, इसलिए यहाँ समय नहीं दिया गया।
घृष्णेश्वर कैसे पहुँचें
- हवाई अड्डा: छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), लगभग 36–40 किमी (महाराष्ट्र पर्यटन)।
- रेल: औरंगाबाद रेलवे स्टेशन, लगभग 29 किमी; सड़क से औरंगाबाद लगभग 31 किमी (महाराष्ट्र पर्यटन ज्योतिर्लिंग पत्रक)।
प्रमुख त्योहार
मत-भेद: स्रोतों में अंतर
- दूसरी कथा: भारत सरकार की Incredible India साइट एक अलग कथा देती है (कुसुमा नाम की भक्त, इमली के पेड़ के नीचे लिंग, और भोसले नाम के राजा का शिवालय सरोवर में कुष्ठ से छुटकारा), जो शिव पुराण से मेल नहीं खाती। उसी पन्ने के छठी सदी के राष्ट्रकूट काल वाले दावे का कोई दूसरा स्रोत हमें नहीं मिला।
- नाम: शिव पुराण में घुश्मेश/घुश्मेश्वर; स्तोत्र के पाठों में घुश्मेशं के साथ घृष्णेशं और घृसृणेशं भी मिलते हैं; सरकारी स्रोत Ghrishneshwar और Grishneshwar, दोनों वर्तनी लिखते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बारहवाँ ज्योतिर्लिंग कौन सा है?
घृष्णेश्वर (घुश्मेश्वर), महाराष्ट्र में एलोरा के पास। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र और शिव पुराण की सूची, दोनों इसका नाम अंत में लेते हैं।
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग कहाँ है?
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग वेरूल (एलोरा), छत्रपति संभाजीनगर ज़िला, महाराष्ट्र में है।
घृष्णेश्वर किन तीर्थ-सूचियों में है?
द्वादश ज्योतिर्लिंग (सूची में 12 में से 12वाँ)।
घृष्णेश्वर कैसे पहुँचें?
हवाई अड्डा: छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), लगभग 36–40 किमी (महाराष्ट्र पर्यटन)। रेल: औरंगाबाद रेलवे स्टेशन, लगभग 29 किमी; सड़क से औरंगाबाद लगभग 31 किमी (महाराष्ट्र पर्यटन ज्योतिर्लिंग पत्रक)।
स्रोत
- महाराष्ट्र पर्यटन: घृष्णेश्वर, maharashtratourism.gov.in/temple/ghrishneshwar; ज्योतिर्लिंग पत्रक (2024), maharashtratourism.gov.in/wp-content/uploads/2024/07/MH-Leaflet-Jyotirlinga-Slides.pdf
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण: केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की सूची, औरंगाबाद मंडल ("Ghrishneshwar Temple, Chatries and other ancient sites, Verul"), asi.nic.in/pdf/CPM_List.pdf
- Incredible India (भारत सरकार): घृष्णेश्वर मंदिर, incredibleindia.gov.in/en/maharashtra/chhatrapati-sambhaji-nagar/grishneshwar-temple
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 32 और 33 (जे. एल. शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org/hinduism/book/shiva-purana-english/d/doc226533.html; अध्याय-संख्या sa.wikisource के संस्कृत पाठ जैसी, गीता प्रेस के "संक्षिप्त शिवपुराण" में अलग)
- शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता 1.21–23 (बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची), संस्कृत पाठ: sa.wikisource.org (शिवपुराणम्, संहिता ४, अध्यायः १)
- द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र ("सौराष्ट्रे सोमनाथं च …"), पाठ: sanskritdocuments.org/doc_shiva/jyotirling.html
- Wikidata Q1092799 (निर्देशांक, CC0)
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