त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग

शिव (त्र्यंबकेश्वर)त्र्यंबक, महाराष्ट्र

अन्य नाम: त्र्यम्बकेश्वर, त्र्यंबक, त्र्यंबकराज

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 7 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग: द्वादश ज्योतिर्लिंग 10/12, शिव (त्र्यंबकेश्वर), त्र्यंबक, महाराष्ट्र
संक्षेप में

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में त्र्यंबक में, ब्रह्मगिरि पर्वत के पास है, जहाँ से गोदावरी नदी निकलती है; द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में यह दसवाँ है ("त्र्यम्बकं गौतमीतटे")। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार यहाँ का लिंग तीन मुखों वाला है, जो ब्रह्मा, विष्णु और शिव का रूप माना जाता है।

देवता
शिव (त्र्यंबकेश्वर)
परंपरा
शैव
तीर्थ-सूची
द्वादश ज्योतिर्लिंग 10/12
स्थान
त्र्यंबक, नासिक ज़िला
राज्य
महाराष्ट्र
देश
भारत
आधिकारिक वेबसाइट
श्री त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट (trimbakeshwartrust.com)
नक्शा
OpenStreetMap (19.9322, 73.5307)

दर्शन और आरती का समय

दर्शनसुबह 5:30 से रात 9:00 तक
सुबह की पूजा (ब्रह्मा की पूजा)सुबह 7:00–8:30
मध्याह्न पूजा (महादेव की पूजा)सुबह 10:45–दोपहर 12:30
सोमवार की पालकी (कुशावर्त तक)शाम लगभग 4:00

दर्शन का समय ट्रस्ट के मुखपृष्ठ से, पूजा का समय "दैनिक कार्यक्रम" पन्ने से और पालकी का समय ट्रस्ट की ख़बरों से है। उस पन्ने पर शाम की विष्णु पूजा का समय भूल से सुबह वाला ही छपा है, इसलिए वह यहाँ नहीं दिया। ट्रस्ट के अनुसार त्योहारों पर समय बदल सकता है।

स्रोत: trimbakeshwartrust.comजाँचा: समय बदल सकते हैं; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें।

त्र्यंबकेश्वर की कथा: गौतम ऋषि और गंगा

शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 24–27) के अनुसार ब्रह्मगिरि पर गौतम ऋषि और अहल्या तप करते थे। सौ वर्ष के सूखे में वरुण ने गौतम को कभी न सूखने वाले जल का एक कुंड दिया, जिससे वहाँ अन्न उगा और ऋषि बस गए। पानी पर हुए झगड़े के बाद कुछ ऋषियों ने गणेश को प्रसन्न किया, और गणेश एक दुर्बल गाय बनकर खेत में आए; गौतम ने तिनकों से उसे हटाया तो वह मर गई, और ऋषियों ने गौतम को निकाल दिया।

प्रायश्चित में गौतम ने गंगा को लाने के लिए शिव की आराधना की। शिव ने उन्हें निर्दोष बताया; गंगा इस शर्त पर रुकीं कि शिव भी वहीं रहें, और शिव त्र्यंबक नाम से वहीं रह गए। गंगा ब्रह्मगिरि से निकलकर गौतमी (गोदावरी) कहलाईं, और गौतम ने नीचे कुशावर्त बनाया। पुराण यह भी कहता है कि जब बृहस्पति सिंह राशि में आते हैं, सब तीर्थ गौतमी पर आते हैं; यही सिंहस्थ की परंपरा है।

मंदिर और सिंहस्थ

श्री त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट के अनुसार आज का मंदिर तीसरे पेशवा बालाजी बाजीराव (नानासाहेब) ने पुराने मंदिर की जगह बनवाया, और महाशिवरात्रि, 16 फ़रवरी 1756 को इसका उद्घाटन हुआ। संत निवृत्तिनाथ ने त्र्यंबकेश्वर में समाधि ली।

सिंहस्थ कुंभ में मुख्य स्नान कुशावर्त में होता है (ट्रस्ट)। नासिक ज़िले के अनुसार शैव और उदासीन अखाड़े त्र्यंबकेश्वर में और वैष्णव अखाड़े नासिक में स्नान करते हैं; पिछला सिंहस्थ 2015-16 में हुआ था, और अगले (2027) के लिए महाराष्ट्र सरकार ने नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण बनाया है।

त्र्यंबकेश्वर कैसे पहुँचें

  • सड़क: नासिक शहर से लगभग 28–30 किमी (ट्रस्ट, नासिक ज़िला)।
  • रेल: नासिक रोड स्टेशन, लगभग 40 किमी (नासिक ज़िला)।
  • हवाई अड्डा: नासिक (ओझर), लगभग 42 किमी; मुंबई 118 किमी (महाराष्ट्र पर्यटन ज्योतिर्लिंग पत्रक)।

प्रमुख त्योहार

मत-भेद: स्रोतों में अंतर

  • गोदावरी का उद्गम: शिव पुराण के अनुसार गंगा ब्रह्मगिरि से (गंगाद्वार पर) निकलीं और कुशावर्त नीचे बना; महाराष्ट्र पर्यटन का पन्ना कुशावर्त कुंड को ही गोदावरी का उद्गम कहता है और गंगाद्वार को पहला दिखने वाला स्थान।
  • गाय की कथा: शिव पुराण में ऋषियों के कहने पर गणेश गाय बने; नासिक ज़िले का पन्ना लिखता है कि पार्वती ने गाय भेजी।
  • क्रम: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में त्र्यंबकेश्वर 10वाँ है (इस साइट की सूची इसी क्रम में है); शिव पुराण की सूची (कोटिरुद्र संहिता 1.21–23) में क्रम अलग है और वहाँ यह 8वाँ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्र्यंबकेश्वर का लिंग किस तरह का है?

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार यह तीन मुखों वाला लिंग है, जो ब्रह्मा, विष्णु और शिव, तीनों देवों का रूप माना जाता है; ट्रस्ट इसे स्वयंभू बताता है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग कहाँ है?

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग त्र्यंबक, नासिक ज़िला, महाराष्ट्र में है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन का समय क्या है?

दर्शन: सुबह 5:30 से रात 9:00 तक; सुबह की पूजा (ब्रह्मा की पूजा): सुबह 7:00–8:30; मध्याह्न पूजा (महादेव की पूजा): सुबह 10:45–दोपहर 12:30; सोमवार की पालकी (कुशावर्त तक): शाम लगभग 4:00। स्रोत: trimbakeshwartrust.com, जाँचा 5 अक्टूबर 2026; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत पर देख लें।

त्र्यंबकेश्वर किन तीर्थ-सूचियों में है?

द्वादश ज्योतिर्लिंग (सूची में 12 में से 10वाँ)।

त्र्यंबकेश्वर कैसे पहुँचें?

सड़क: नासिक शहर से लगभग 28–30 किमी (ट्रस्ट, नासिक ज़िला)। रेल: नासिक रोड स्टेशन, लगभग 40 किमी (नासिक ज़िला)।

स्रोत

  1. श्री त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट (आधिकारिक साइट): मुखपृष्ठ, trimbakeshwartrust.com; दैनिक कार्यक्रम, /daily_programme; त्योहार, /festivals; इतिहास, /history; परिचय, /about; ख़बरें, /news_feed_grid
  2. नासिक ज़िला (महाराष्ट्र सरकार): त्र्यंबकेश्वर, nashik.gov.in/en/tourist-place/trimbakeshwar; संस्कृति और विरासत, nashik.gov.in/en/tourism/culture-heritage; नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण, divcomnashik.maharashtra.gov.in
  3. महाराष्ट्र पर्यटन: त्र्यंबकेश्वर, maharashtratourism.gov.in/temple/trimbakeshwar; ज्योतिर्लिंग पत्रक (2024)
  4. शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 24 से 27 (जे. एल. शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org/hinduism/book/shiva-purana-english/d/doc226525.html; अध्याय-संख्या sa.wikisource के संस्कृत पाठ जैसी, गीता प्रेस के "संक्षिप्त शिवपुराण" में अलग)
  5. शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता 1.21–23 (बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची), संस्कृत पाठ: sa.wikisource.org (शिवपुराणम्, संहिता ४, अध्यायः १)
  6. द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र ("सौराष्ट्रे सोमनाथं च …"), पाठ: sanskritdocuments.org/doc_shiva/jyotirling.html
  7. Wikidata Q2426825 (निर्देशांक, CC0)

कुछ गलत लगा? गलती बताएँ