काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

शिव (विश्वनाथ, विश्वेश्वर)वाराणसी, उत्तर प्रदेश

अन्य नाम: विश्वेश्वर, विश्वनाथ, अविमुक्तेश्वर; श्री काशी विश्वनाथ धाम

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 7 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग: द्वादश ज्योतिर्लिंग 9/12, शिव (विश्वनाथ, विश्वेश्वर), वाराणसी, उत्तर प्रदेश
संक्षेप में

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) में है और द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में नौवाँ है। शिव पुराण काशी को शिव की "अविमुक्त" नगरी कहता है, जिसे शिव कभी नहीं छोड़ते और जहाँ देह छोड़ने वाले को मुक्ति मिलती है। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार आज का मंदिर 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने बनवाया।

देवता
शिव (विश्वनाथ, विश्वेश्वर)
परंपरा
शैव
तीर्थ-सूची
द्वादश ज्योतिर्लिंग 9/12
स्थान
वाराणसी (काशी), वाराणसी ज़िला
राज्य
उत्तर प्रदेश
देश
भारत
आधिकारिक वेबसाइट
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास (shrikashivishwanath.org)
नक्शा
OpenStreetMap (25.3108, 83.0106)

दर्शन और आरती का समय

मंदिर खुलासुबह 3:00 से रात 11:00 तक
मंगला आरतीसुबह 3:00–4:00 (2:30 बजे तक गेट नं. 1 पर पहुँचें)
दर्शनसुबह 4:00–11:00, दोपहर 12:20–शाम 7:00, रात 8:30–9:00
भोग आरती (मध्याह्न)सुबह 11:15–दोपहर 12:20
सप्तर्षि आरतीशाम 7:00–8:15
श्रृंगार (रात्रि) आरतीरात 9:00–10:15

यह ट्रस्ट की वेबसाइट पर दिए "अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न" (PDF, बिना तारीख) से है। भारत सरकार की Incredible India साइट मंदिर खुलने का समय सुबह 2:30 बताती है।

स्रोत: shrikashivishwanath.orgजाँचा: समय बदल सकते हैं; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत देख लें।

शिव पुराण में काशी और विश्वेश्वर

शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 22) के अनुसार निर्गुण शिव ने पाँच कोस की एक नगरी रची। वहाँ विष्णु ने तप किया; उनके कान से एक मणि गिरी और वह स्थान मणिकर्णिका कहलाया। शिव इस नगरी को प्रलय में भी अपने त्रिशूल पर धारण किए रहते हैं, इसलिए इसका नाश नहीं होता। शिव ने यहाँ अविमुक्त लिंग स्थापित किया, और अविमुक्त की प्रार्थना पर वे उमा के साथ सदा यहीं रहने लगे।

अगले अध्याय (23) में शिव पार्वती से कहते हैं कि काशी में देह छोड़ने वाले सभी प्राणी मुक्त होते हैं। मंदिर ट्रस्ट परंपरा से यह भी बताता है कि काशी विश्वनाथ के एक दर्शन से बाकी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का पुण्य मिलता है।

आज का मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अनुसार आज का मंदिर 1780 में अहिल्याबाई होल्कर ने बनवाया; 1839 में महाराजा रणजीत सिंह के दिए सोने से इसके दो शिखर मढ़े गए। 28 जनवरी 1983 को उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर का प्रबंध अपने हाथ में लिया, और तब से एक न्यास इसे चलाता है।

पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के अनुसार 13 दिसंबर 2021 को श्री काशी विश्वनाथ धाम का उद्घाटन हुआ, जिससे मंदिर परिसर लगभग 3,000 वर्ग फ़ुट से बढ़कर लगभग 5 लाख वर्ग फ़ुट हो गया।

काशी विश्वनाथ कैसे पहुँचें

  • रेल: वाराणसी जंक्शन (कैंट), मंदिर से लगभग 4 किमी; बस: चौधरी चरण सिंह बस अड्डा (मंदिर ट्रस्ट, भारत सरकार का उत्सव पोर्टल)।
  • हवाई अड्डा: लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, लगभग 25 किमी (उत्सव पोर्टल)।

प्रमुख त्योहार

रंगभरी एकादशी (शिव-पार्वती का गौना)महाशिवरात्रिमासिक शिवरात्रिदीपावलीकार्तिक मास

मत-भेद: स्रोतों में अंतर

  • आज के मंदिर का वर्ष: मंदिर ट्रस्ट 1780 बताता है, उत्तर प्रदेश पर्यटन 1776; Incredible India मंदिर की जड़ें ग्यारहवीं सदी तक बताकर 1780 को "जीर्णोद्धार" कहता है।
  • उत्तर प्रदेश पर्यटन वाराणसी को वह स्थान कहता है जहाँ "पहला ज्योतिर्लिंग" प्रकट हुआ; स्तोत्र में काशी नौवें और शिव पुराण की सूची में सातवें स्थान पर है, और पहला नाम सोमनाथ का है।
  • क्रम: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में काशी विश्वनाथ 9वाँ है (इस साइट की सूची इसी क्रम में है); शिव पुराण की सूची (कोटिरुद्र संहिता 1.21–23) में क्रम अलग है और वहाँ यह 7वाँ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काशी विश्वनाथ की मंगला आरती कब होती है?

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार सुबह 3 से 4 बजे; भक्तों को 2:30 बजे तक गेट नंबर 1 पर पहुँचना होता है।

काशी विश्वनाथ धाम का उद्घाटन कब हुआ?

13 दिसंबर 2021 को (पत्र सूचना कार्यालय)।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग कहाँ है?

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग वाराणसी (काशी), वाराणसी ज़िला, उत्तर प्रदेश में है।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग में दर्शन का समय क्या है?

मंदिर खुला: सुबह 3:00 से रात 11:00 तक; मंगला आरती: सुबह 3:00–4:00 (2:30 बजे तक गेट नं. 1 पर पहुँचें); दर्शन: सुबह 4:00–11:00, दोपहर 12:20–शाम 7:00, रात 8:30–9:00; भोग आरती (मध्याह्न): सुबह 11:15–दोपहर 12:20; सप्तर्षि आरती: शाम 7:00–8:15; श्रृंगार (रात्रि) आरती: रात 9:00–10:15। स्रोत: shrikashivishwanath.org, जाँचा 5 अक्टूबर 2026; जाने से पहले आधिकारिक स्रोत पर देख लें।

काशी विश्वनाथ किन तीर्थ-सूचियों में है?

द्वादश ज्योतिर्लिंग (सूची में 12 में से 9वाँ)।

काशी विश्वनाथ कैसे पहुँचें?

रेल: वाराणसी जंक्शन (कैंट), मंदिर से लगभग 4 किमी; बस: चौधरी चरण सिंह बस अड्डा (मंदिर ट्रस्ट, भारत सरकार का उत्सव पोर्टल)। हवाई अड्डा: लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, लगभग 25 किमी (उत्सव पोर्टल)।

स्रोत

  1. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास (आधिकारिक साइट): अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (PDF), shrikashivishwanath.org/pdffile/FAQ_SHRI_KASHI_VISHWANTH_TEMPLE_2_0_pdf.pdf; इतिहास, shrikashivishwanath.org/mythology
  2. पत्र सूचना कार्यालय, 12 और 13 दिसंबर 2021: श्री काशी विश्वनाथ धाम, pib.gov.in (PRID 1780658, 1780884)
  3. भारत सरकार, पर्यटन मंत्रालय: उत्सव पोर्टल, रंगभरी एकादशी (utsav.gov.in); Incredible India: काशी विश्वनाथ मंदिर; उत्तर प्रदेश पर्यटन: uptourism.gov.in; वाराणसी ज़िला: varanasi.nic.in
  4. शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 22 और 23 (जे. एल. शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org/hinduism/book/shiva-purana-english/d/doc226523.html; अध्याय-संख्या sa.wikisource के संस्कृत पाठ जैसी, गीता प्रेस के "संक्षिप्त शिवपुराण" में अलग)
  5. शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता 1.21–23 (बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची), संस्कृत पाठ: sa.wikisource.org (शिवपुराणम्, संहिता ४, अध्यायः १)
  6. द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र ("सौराष्ट्रे सोमनाथं च …"), पाठ: sanskritdocuments.org/doc_shiva/jyotirling.html
  7. Wikidata Q3675 (निर्देशांक, CC0)

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