करवा चौथ की आरती: ॐ जय करवा मैया

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करवा चौथ की शाम घेरे में बैठी सुहागिनें पूजा की थालियाँ फेरती हुईं, पास में कथा सुनाती बुज़ुर्ग
चित्र: AI से बनाया गया
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  1. पद 1

    ॐ जय करवा मैया, माता जय करवा मैया। जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया॥

    हे करवा माता, आपकी जय हो। जो आपका व्रत करता है, उसकी जीवन रूपी नैया आप पार लगाती हैं।

  2. पद 2

    सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी। यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी॥

    आप सारे संसार की माता हैं, आप ही रुद्राणी (रुद्र यानी शिव की पत्नी पार्वती) हैं। संसार के सब प्राणी आपका यश गाते हैं।

  3. पद 3

    कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती। दीर्घायु पति होवे, दुख सारे हरती॥

    आरती कहती है कि जो स्त्री कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को यह व्रत करती है, उसका पति दीर्घायु होता है और माता उसके सारे दुख हर लेती हैं।

  4. पद 4

    होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे। गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे॥

    आरती के अनुसार व्रत करने वाली स्त्री सुहागिन बनी रहती है और सुख-संपत्ति पाती है। गणपति जी बड़े दयालु हैं, वे सब विघ्न नष्ट करते हैं। करवा चौथ की पूजा में गणेश जी की भी पूजा होती है।

  5. पद 5

    करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे। व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे॥

    आरती कहती है कि जो व्रत रखकर करवा मैया की यह आरती गाता है, उसका व्रत पूरा हो जाता है और वह हर तरह से सुख पाता है।

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/karva-chauth-aarti/

संक्षेप में

“ॐ जय करवा मैया” करवा चौथ पर गाई जाने वाली लोक आरती है। इसमें करवा माता को सारे जगत की माता और रुद्राणी कहा गया है और कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के व्रत की महिमा गाई गई है। शाम की पूजा में करवा चौथ की कथा सुनने के बाद यह आरती गाई जाती है। लोक आरती होने के कारण इसके शब्द क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं।

यह एक लोक आरती है, जिसके शब्द क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदलते हैं। यहाँ सबसे अधिक छपा रूप दिया गया है; कई जगह ‘ॐ’ की जगह ‘ओम’ छपा मिलता है। कुछ जगह इसी भाव की एक दूसरी आरती “ॐ जय करवा माता, मैया जय करवा माता” गाई जाती है, जिसकी अधिकतर पंक्तियाँ अलग हैं और जिसके अंतिम पद में ‘कहत भक्त आशारानी’ आता है। गाते समय पहला पद (टेक) हर पद के बाद दोहराया जाता है।

आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करवा चौथ की आरती कब गाई जाती है?

करवा चौथ की शाम की पूजा में, करवा चौथ की कथा सुनने के बाद। परिवार की परंपरा के अनुसार कुछ घरों में रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद भी आरती की जाती है।

करवा माता कौन हैं?

लोक परंपरा में करवा माता को देवी पार्वती का रूप माना जाता है; यह आरती भी उन्हें ‘रुद्राणी’ कहती है। ‘करवा’ मिट्टी या धातु का वह टोंटीदार पात्र भी है जिससे व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।

इस आरती को किसने लिखा?

रचयिता ज्ञात नहीं है। यह लोक आरती है, किसी पुराण या शास्त्र का अंश नहीं, और इसके अंतिम पद में किसी कवि का नाम नहीं आता।

क्या करवा चौथ की कोई और आरती भी है?

हाँ। कुछ जगह “ॐ जय करवा माता, मैया जय करवा माता” गाई जाती है, जिसका भाव यही है पर शब्द अलग हैं। कई परिवार करवा चौथ पर शिव, पार्वती और गणेश जी की आरती भी गाते हैं।

स्रोत

  1. परंपरागत लोक आरती (शब्द क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं)

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