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शिव जी की आरती: ॐ जय शिव ओंकारा PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/shiv-aarti/
“ॐ जय शिव ओंकारा” भगवान शिव की सबसे प्रचलित आरती है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और शिव के मुख, वाहन, वस्त्र और आभूषणों का साथ-साथ वर्णन करके बताया गया है कि ॐकार (प्रणव) में ये तीनों एक हैं। यह सोमवार, सावन के महीने, प्रदोष, महाशिवरात्रि और प्रतिदिन की शिव पूजा में गाई जाती है।
यहाँ आरती के मूल आठ पद दिए गए हैं। कई प्रचलित संस्करणों में चार पद और गाए जाते हैं, जो इन पंक्तियों से शुरू होते हैं: ‘लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा’, ‘पर्वत सोहैं पार्वती’, ‘जटा में गंगा बहत है’ और ‘काशी में विराजे विश्वनाथ’। कहीं पद 4 की दूसरी पंक्ति ‘त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी’, पद 6 की दूसरी पंक्ति ‘जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता’, और अंतिम पंक्ति ‘सुख संपति पावे’ भी मिलती है। गाते समय पहली पंक्ति (टेक) हर पद के बाद दोहराई जाती है।
आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
“ॐ जय शिव ओंकारा” आरती किसने लिखी?
अंतिम पद में ‘कहत शिवानन्द स्वामी’ आता है। रचयिता के बारे में इससे अधिक प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती।
इस आरती में ब्रह्मा और विष्णु का वर्णन क्यों है?
आरती का मूल भाव यह है कि ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव ॐकार में एक ही हैं, और केवल अविवेकी उन्हें अलग मानते हैं। इसलिए पदों में तीनों के मुख, वाहन, वस्त्र और आयुध साथ-साथ गिनाए गए हैं।
यह आरती कब गाई जाती है?
सोमवार को, सावन के महीने में, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि पर, और प्रतिदिन की शिव पूजा के अंत में।
इस आरती में कितने पद हैं?
मूल पाठ में आठ पद हैं। कई संस्करणों में चार पद अधिक गाए जाते हैं, जिनका उल्लेख ऊपर टिप्पणी में है।
स्रोत
- परंपरागत आरती पाठ
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पाठ का मिलान: drikpanchang.com, bhaktibharat.com, hindi.webdunia.com
