विज्ञापन
शनिदेव की आरती: जय जय श्री शनिदेव PDF डाउनलोड करें
विज्ञापन
अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/shani-aarti/
“जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी” शनिदेव की सबसे प्रचलित आरती है। इसमें शनिदेव को सूर्य और छाया का पुत्र बताया गया है और उनके श्याम वर्ण, चार भुजाओं, नीले वस्त्रों और हाथी की सवारी का वर्णन है। यह विशेष रूप से शनिवार को और शनि जयंती पर, शनिदेव की पूजा के अंत में गाई जाती है।
यहाँ वह पाठ दिया गया है जिस पर अधिकतर स्रोत सहमत हैं। कुछ संस्करणों में शब्द थोड़े अलग मिलते हैं, जैसे ‘सूरज के पुत्र’ की जगह ‘सूर्य पुत्र’, ‘श्याम अंग’ की जगह ‘श्याम अंक’, ‘शीश राजित’ की जगह ‘शीश सहज’, ‘माला’ की जगह ‘माल’ और ‘सुमिरत’ की जगह ‘सुमरिन’। एक संस्करण में पद 4 इस रूप में मिलता है: ‘मोदक और मिष्ठान चढ़े, चढ़ती पान सुपारी। लोहा, तिल, तेल, उड़द महिषी है अति प्यारी॥’ और अंतिम पंक्ति ‘विश्वनाथ धरत ध्यान हम हैं शरण तुम्हारी’। अंतिम पद में ‘विश्वनाथ’ नाम आता है; यह शिव का नाम है और आरती के कवि की छाप भी हो सकता है। रचयिता के बारे में कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती। गाते समय पहली पंक्ति (टेक) हर पद के बाद दोहराई जाती है।
आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
हर सुबह तिथि, राहु काल और आने वाले व्रत-त्योहार, WhatsApp पर एक छोटे संदेश में।चैनल फ़ॉलो करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शनिदेव की यह आरती कब गाई जाती है?
विशेष रूप से शनिवार को, शनि जयंती (ज्येष्ठ अमावस्या) पर, और शनिदेव की पूजा या शनि मंदिर में दर्शन के समय पूजा के अंत में।
शनिदेव के माता-पिता कौन हैं?
आरती उन्हें सूर्य का पुत्र और छाया को उनकी माता बताती है। विष्णु पुराण (3.2.4) में भी यही है: छाया से सूर्य के तीन संतानें हुईं, शनैश्चर, सावर्णि मनु और तपती। यमराज सूर्य की पत्नी संज्ञा के पुत्र हैं, इसलिए शनि उनके सौतेले भाई हैं।
आरती में किन वस्तुओं का उल्लेख है?
मोदक, मिठाई, पान और सुपारी चढ़ाने का, और लोहा, तिल, तेल, उड़द और महिषी (भैंस) के प्रिय होने का। परंपरा में ये वस्तुएँ शनि के दान में गिनी जाती हैं।
यह आरती किसने लिखी?
रचयिता ज्ञात नहीं है। अंतिम पद में ‘विश्वनाथ’ नाम आता है, जो शिव का नाम है और कवि की छाप भी हो सकता है, पर इस बारे में कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती।
स्रोत
- परंपरागत आरती पाठ
- शनि के माता-पिता: विष्णु पुराण 3.2.4
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ
पाठ का मिलान: drikpanchang.com, bhaktibharat.com, hindi.webdunia.com, sa.wikisource.org
