दिवाली पर सबसे अधिक साहूकार की बेटी की लोक कथा पढ़ी जाती है: वह रोज़ पीपल को जल चढ़ाती है, पेड़ में रहने वाली लक्ष्मी जी उसे अपनी सहेली बनाती हैं, और जब लक्ष्मी जी उसके घर आती हैं तो घर धन-धान्य से भर जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार इसी अमावस्या को लक्ष्मी जी राजा बलि की कैद से मुक्त हुई थीं, और बलि को मिले वरदान से दीप जलाने वालों के घर लक्ष्मी का वास माना जाता है।
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दीपावली कार्तिक अमावस्या (पूर्णिमांत गणना) को मनाई जाती है। इस रात लक्ष्मी और गणेश की पूजा होती है, घर-आँगन में दीपक जलाए जाते हैं, और लक्ष्मी जी की कथा पढ़ी या सुनी जाती है। सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली कथा साहूकार की बेटी और पीपल में रहने वाली लक्ष्मी जी की है। यह लोक कथा है; किसी पुराण में यह हमें नहीं मिली।
ग्रंथ दीपावली की रात के बारे में क्या कहते हैं, यह स्कंद पुराण (वैष्णव खंड, कार्तिक मास माहात्म्य, अध्याय 9) में मिलता है: राजा बलि का वरदान कि दीप जलाने वालों के घर लक्ष्मी रहें, अमावस्या को लक्ष्मी जी का बलि की कैद से छूटना, और आधी रात के बाद अलक्ष्मी को घर से निकालना। यह प्रसंग नीचे दूसरी कथा में है। (स्कंद पुराण अमांत गणना से इस अमावस्या को आश्विन की कहता है; उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में यही कार्तिक अमावस्या है।)
दो और बातें अक्सर दीपावली का कारण बताई जाती हैं। लोक-मान्यता है कि श्रीराम के अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने दीप जलाए थे; पर वाल्मीकि रामायण (युद्ध कांड, सर्ग 127–128) में अयोध्या को ध्वजाओं, फूलों और बाजों से सजाने का वर्णन है, दीपों का नहीं, और वह इस लौटने को कार्तिक अमावस्या से नहीं जोड़ती। इसी तरह समुद्र मंथन से लक्ष्मी जी के प्रकट होने की कथा भागवत पुराण (8.8) और विष्णु पुराण (1.9) में है, पर कोई ग्रंथ उसकी तिथि नहीं बताता; लोक में इसे कार्तिक अमावस्या से जोड़ा जाता है।
व्रत और कथा की विधि
- दीपावली की रात प्रदोष काल में, स्थिर लग्न रहते, लक्ष्मी पूजा होती है (Drik Panchang); लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की भी पूजा होती है, और इसी रात यह कथा पढ़ी या सुनी जाती है।
- कथा में पिता बेटी को जो सलाह देते हैं, घर साफ़ करना, चौक पूरना और चौमुखा दीपक जलाना, वही दीपावली की तैयारी में किया जाता है।
- स्कंद पुराण के अनुसार अमावस्या की सुबह स्नान करके देवताओं और पितरों की पूजा और पार्वण श्राद्ध किया जाता है, और रात होने पर सजे हुए मंडप में लक्ष्मी जी की पूजा होती है।
- व्यापारी परिवारों में इस रात नए बही-खातों (चोपड़ा) की पूजा होती है (Drik Panchang)।
साहूकार की बेटी और पीपल वाली लक्ष्मी जी
प्रचलित लोक कथा; किसी ग्रंथ में नहीं मिलती। यह रूप टाइम्स नाउ नवभारत, इंडिया टीवी, न्यूज़24, रिपब्लिक भारत, भारतकोश और कई भक्ति वेबसाइटों में छपा है; इनकी भाषा इतनी मिलती-जुलती है कि ये एक ही परंपरा के कई छपे रूप लगते हैं।
प्रचलित कथा के अनुसार, एक गाँव में एक साहूकार रहता था, जिसका घर साधारण था। उसकी बेटी हर सुबह पीपल के एक पेड़ की जड़ में जल चढ़ाती थी। उसी पीपल में लक्ष्मी जी का वास था।
एक दिन लक्ष्मी जी उसके सामने प्रकट हुईं और बोलीं, "क्या तुम मेरी सहेली बनोगी?" लड़की ने विनम्रता से कहा, "मैं अपने पिता जी से पूछकर बताऊँगी।" घर आकर उसने पिता को सारी बात बताई, और पिता ने हाँ कर दी। अगले दिन उसने लक्ष्मी जी से कहा कि वह उनकी सहेली बनेगी।
कुछ दिन बाद लक्ष्मी जी ने अपनी सहेली को अपने घर बुलाया और उसका बड़ा सत्कार किया। उन्होंने उसे सोने की चौकी पर बिठाया, सोने-चाँदी के बर्तनों में तरह-तरह के पकवान परोसे, और विदा करते समय शाल-दुशाला ओढ़ाया।
जब लड़की लौटने लगी, तो लक्ष्मी जी ने पूछा, "सखी, अब तुम मुझे अपने घर कब बुलाओगी?" यह सुनकर लड़की का मन उदास हो गया। घर आकर वह सोचने लगी कि जिसने मेरा ऐसा सत्कार किया, उसे मैं अपने साधारण घर में कहाँ बिठाऊँगी और क्या खिलाऊँगी।
पिता ने बेटी को उदास देखा तो कारण पूछा। बेटी ने सब बता दिया। पिता ने समझाया, "बेटी, चिंता मत कर। घर को अच्छी तरह साफ़ कर, आँगन में चौक पूर, चौमुखा दीपक जला और मन से लक्ष्मी जी का स्मरण कर।"
बेटी ने वैसा ही किया। वह घर साफ़ कर रही थी कि ऊपर उड़ती एक चील ने किसी रानी का कीमती हार उसके आँगन में गिरा दिया। बेटी ने उस हार को बेचकर सोने की चौकी, सोने की थाली, शाल-दुशाला और भोजन की सामग्री जुटाई, और सहेली के स्वागत की पूरी तैयारी कर ली।
फिर लक्ष्मी जी, भगवान गणेश के साथ, सहेली के घर आईं। बेटी ने दोनों का प्रेम से स्वागत किया, उन्हें आदर से बिठाया और अपने हाथों से भोजन कराया। कुछ रूपों में लक्ष्मी जी सोने की चौकी पर बैठने से मना कर देती हैं, यह कहकर कि वे राजसी आसन पर नहीं बैठतीं, और ज़मीन पर ही बैठ जाती हैं।
बेटी का सच्चा प्रेम देखकर लक्ष्मी जी बहुत प्रसन्न हुईं। उनकी कृपा से साहूकार का घर धन-धान्य से भर गया, और उस परिवार को फिर कभी गरीबी का मुँह नहीं देखना पड़ा।
कथा के अंत में यह मान्यता कही जाती है कि जो दीपावली की रात यह कथा पढ़ता या सुनता है, उसके घर लक्ष्मी जी का वास रहता है।
स्कंद पुराण में दीपावली की रात: बलि का वरदान और लक्ष्मी जी की मुक्ति
स्कंद पुराण, वैष्णव खंड, कार्तिक मास माहात्म्य, अध्याय 9, श्लोक 49–55 और 72–100 के अनुसार (जी. वी. तगारे के अंग्रेज़ी अनुवाद में जाँचा)।
स्कंद पुराण के अनुसार वामन रूप में भगवान ने राजा बलि से तीन पगों में पृथ्वी ले ली थी। बलि के दान से प्रसन्न होकर भगवान ने कहा, "तुम्हारा कल्याण हो, जो मन में हो वह वर माँगो।" बलि ने कहा, "अपने लिए मुझे क्या माँगना, मैं तो सब दे चुका। मैं लोगों के लिए माँगता हूँ।"
बलि ने माँगा कि जैसे भगवान ने तीन पगों में पृथ्वी ली, वैसे ही तीन दिन, चतुर्दशी, अमावस्या और प्रतिपदा, पृथ्वी पर उसका राज्य माना जाए; और उसके इस राज्य में जो लोग दीपक जलाएँ, उनके घर लक्ष्मी जी सदा वास करें। भगवान ने यह वर दिया। इसीलिए ग्रंथ कहता है कि ये तीन दिन दीपों का उत्सव हैं।
अमावस्या के बारे में स्कंद पुराण कहता है कि इसी दिन देवता बलि की कैद से छूटे थे, और लक्ष्मी जी भी मुक्त हुई थीं। मुक्त होकर देवता लक्ष्मी जी के साथ क्षीरसागर गए और बहुत समय तक सुख से सोए। दैत्यों के भय से छूटकर लक्ष्मी जी कमल के भीतर निश्चिंत होकर सोईं।
इसीलिए ग्रंथ कहता है कि अमावस्या की रात सजे हुए मंडप में लक्ष्मी जी की पूजा हो और उनके सुख से सोने के लिए कोमल शय्या सजाई जाए; जो कमलों की शय्या बनाता है, लक्ष्मी जी उसका घर छोड़कर कहीं नहीं जातीं। गाय के दूध में जायफल, लौंग, इलायची, कपूर और चीनी डालकर बने लड्डुओं का भोग लगता है। भगवान विष्णु के जागने से पहले स्त्रियाँ लक्ष्मी जी को जगाती हैं, और ग्रंथ के अनुसार तब लक्ष्मी जी वर्ष भर उस घर को नहीं छोड़तीं।
ग्रंथ में दैत्य भी सोई हुई लक्ष्मी जी की स्तुति करते हैं: सूर्य, चंद्रमा, अग्नि और तारों में जो तेज है, वह तुम्हीं हो; दीपक की लौ में बसी देवी, तुम्हें नमस्कार। रात के पहले पहर में दीपक जलाए जाते हैं, और मंदिरों, चौराहों, नदियों के किनारे, गोशालाओं और घरों में दीपों के वृक्ष सजाए जाते हैं।
आधी रात बीतने पर, जब लोग नींद में होते हैं, नगर की स्त्रियाँ सूप और डिंडिम (छोटे ढोल) से अपने आँगन से अलक्ष्मी, यानी दरिद्रता और दुर्भाग्य, को बाहर निकालती हैं। पद्म पुराण (उत्तर खंड, अध्याय 122) में भी लक्ष्मी जी को जगाने, उनकी यही स्तुति और बाजों-ढोल से अलक्ष्मी को भगाने की बात है।
कथा के अलग-अलग रूप
- पिता की सलाह दो तरह से मिलती है: घर साफ़ करके चौक या चौकी बनाना और चौमुखा दीपक जलाकर लक्ष्मी जी का स्मरण करना (टाइम्स नाउ नवभारत 2022, धर्मयात्रा, एस्ट्रोबिक्स, श्री मंदिर); या यह समझाना कि लक्ष्मी जी वैभव से अधिक श्रद्धा और प्रेम देखती हैं (टाइम्स नाउ नवभारत 2024, रिपब्लिक भारत, भक्तवत्सल)।
- हार गिराने वाला पक्षी अधिकतर रूपों में चील है; कुछ में केवल "एक पक्षी"। हार कहीं "नौलखा हार" है, कहीं "रानी का हार"।
- अधिकतर रूपों में बेटी हार बेचकर सोने की चौकी, थाली, शाल-दुशाला और भोजन जुटाती है; भक्तवत्सल के रूप में वह हार को थाली में रखकर कपड़े से ढक देती है, और बेचने की बात नहीं है।
- टाइम्स नाउ नवभारत, धर्मयात्रा, भक्तवत्सल और एस्ट्रोबिक्स में लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी भी आते हैं; इंडिया टीवी, न्यूज़24 और रिपब्लिक भारत में गणेश जी का उल्लेख नहीं है।
- इंडिया टीवी, न्यूज़24 और रिपब्लिक भारत में लक्ष्मी जी सोने की चौकी पर बैठने से मना करके ज़मीन पर बैठती हैं; दूसरे रूपों में बेटी उन्हें आदर से बिठाकर भोजन कराती है।
- अधिकतर रूपों में साहूकार साधारण या गरीब है; इंडिया टीवी और न्यूज़24 उसे धनी बताते हैं।
- archive.org पर उपलब्ध एक छपी "व्रत कथा" पुस्तिका दीपावली की कथा के रूप में राजा बलि की कथा देती है, युधिष्ठिर और श्रीकृष्ण के संवाद में: वामन से वर पाकर बलि माँगता है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से अमावस्या तक पृथ्वी पर उसका राज्य रहे, लोग दीपदान करके लक्ष्मी पूजा करें और उनके घर लक्ष्मी का वास हो। स्कंद पुराण में ये तीन दिन चतुर्दशी से प्रतिपदा तक हैं।
- वेबदुनिया ("दीपावली: महालक्ष्मी की पौराणिक कथा") बलि की कैद से लक्ष्मी और देवताओं के छूटने की कथा सनत्कुमार के कहे रूप में देती है, पर पुराण का नाम नहीं लेती; स्कंद पुराण के इस अध्याय में ये वचन वालखिल्य ऋषियों के हैं।
- वेबदुनिया एक और लोक कथा भी देती है: कार्तिक अमावस्या की अँधेरी रात में राह भटकी लक्ष्मी जी को एक ही घर में दीपक जलता दिखा, जहाँ एक बुढ़िया चरखा कात रही थी; बुढ़िया ने उन्हें आश्रय दिया, और सुबह उसकी झोपड़ी महल बन गई। यह कथा हमें केवल इसी एक स्रोत में मिली।
कथा के बाद
कथा के बाद लक्ष्मी जी की आरती गाई जाती है और पूरे घर, आँगन और द्वार पर दीपक जलाए जाते हैं। अपने शहर का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त दीपावली के पन्ने पर है।
लक्ष्मी जी की आरती: ॐ जय लक्ष्मी माताअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिवाली पर कौन सी कथा पढ़ी जाती है?
सबसे अधिक साहूकार की बेटी और पीपल में रहने वाली लक्ष्मी जी की लोक कथा पढ़ी जाती है। कुछ छपी व्रत-कथा पुस्तिकाएँ दीपावली की कथा के रूप में राजा बलि और वामन की कथा देती हैं, जिसका आधार स्कंद पुराण में बलि का वरदान है।
क्या साहूकार की बेटी की कथा किसी पुराण में है?
नहीं, यह लोक कथा है। समाचार-पत्रों और भक्ति वेबसाइटों में यह लगभग एक जैसे शब्दों में छपती है, पर कोई किसी ग्रंथ का नाम नहीं लेता। दीपावली की रात का शास्त्रीय वर्णन स्कंद पुराण (कार्तिक मास माहात्म्य, अध्याय 9) और पद्म पुराण (उत्तर खंड, अध्याय 122) में है।
क्या वाल्मीकि रामायण में श्रीराम के लौटने पर दीप जलाने का वर्णन है?
नहीं। वाल्मीकि रामायण (युद्ध कांड, सर्ग 127–128) में भरत और शत्रुघ्न अयोध्या को ध्वजाओं, फूलों और बाजों से सजवाते हैं, पर दीपों की रोशनी का वर्णन नहीं है, और लौटने को कार्तिक अमावस्या से नहीं जोड़ा गया है। श्रीराम के स्वागत में दीप जलाने की बात लोक-मान्यता है।
लक्ष्मी जी समुद्र मंथन से किस दिन प्रकट हुई थीं?
भागवत पुराण (8.8) और विष्णु पुराण (1.9) में समुद्र मंथन से लक्ष्मी जी के प्रकट होने की कथा है, पर तिथि नहीं दी गई। लोक में इसे कार्तिक अमावस्या से जोड़ा जाता है; Drik Panchang इसे धनतेरस पर बताता है, और लक्ष्मी जयंती, जो मुख्यतः दक्षिण भारत में मनाई जाती है, फाल्गुन पूर्णिमा को है।
स्रोत
- स्कंद पुराण, वैष्णव खंड, कार्तिक मास माहात्म्य, अध्याय 9, श्लोक 49–55 और 72–100 (जी. वी. तगारे का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org पर जाँचा)
- पद्म पुराण, उत्तर खंड, अध्याय 122 (एन. ए. देशपांडे का अंग्रेज़ी अनुवाद, wisdomlib.org)
- भागवत पुराण 8.8 (vedabase.io); विष्णु पुराण 1.9 (एच. एच. विल्सन का अनुवाद, wisdomlib.org)
- वाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड, सर्ग 124, 127 और 128 (valmikiramayan.net)
- टाइम्स नाउ नवभारत: दिवाली व्रत कथा (24 अक्टूबर 2022; 1 नवंबर 2024)
- इंडिया टीवी हिंदी (19 अक्टूबर 2025), न्यूज़24 हिंदी (20 अक्टूबर 2025) और रिपब्लिक भारत (18 अक्टूबर 2025): दिवाली की कथा
- धर्मयात्रा (dharmyaatra.in), भक्तवत्सल (bhaktvatsal.com), एस्ट्रोबिक्स (astrobix.com) और श्री मंदिर (srimandir.com): साहूकार की बेटी की कथा
- वेबदुनिया: दीपावली: महालक्ष्मी की पौराणिक कथा; दीपावली पर प्रचलित लक्ष्मी जी की कथा
- भारतकोश (bharatdiscovery.org): दीपावली
- Drik Panchang: दिवाली की कथाएँ; लक्ष्मी जयंती
- "व्रत कथा" पुस्तिका (archive.org, 20240806_20240806_0450): राजा बलि की कथा
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