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गंगा माता की आरती: ॐ जय गंगे माता PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/ganga-aarti/
“ॐ जय गंगे माता” देवी गंगा की सबसे प्रचलित हिंदी आरती है। इसमें गंगा के निर्मल जल, राजा सगर के पुत्रों के उद्धार और शरण में आए लोगों को यम के भय से मुक्त करने की महिमा गाई गई है। यह कार्तिक पूर्णिमा, गंगा दशहरा और गंगा सप्तमी पर, गंगा स्नान के बाद और गंगा तट की आरतियों में गाई जाती है। इसके रचयिता का नाम ज्ञात नहीं है।
कुछ संस्करणों में शब्द थोड़े अलग मिलते हैं, जैसे टेक में ‘श्री जय गंगे माता’, पद 2 में ‘चंद्र सी जोत तुम्हारी’, पद 3 में ‘कृपा दृष्टि तुम्हारी’, पद 4 में ‘एक ही बार जो तेरी, शरणागति आता’, और पद 5 में ‘आरती मात तुम्हारी, जो जन नित्य गाता। दास वही सहज में, मुक्ति को पाता’। कुछ स्थानों पर आरती ‘हर हर गंगे, जय माँ गंगे’ के जयकारे से शुरू की जाती है। गाते समय पहली पंक्ति (टेक) हर पद के बाद दोहराई जाती है।
आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गंगा आरती कब गाई जाती है?
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान और दीपदान के समय, ज्येष्ठ शुक्ल दशमी (गंगा दशहरा) और वैशाख शुक्ल सप्तमी (गंगा सप्तमी) पर, और गंगा तट की संध्या आरतियों में।
“पुत्र सगर के तारे” का क्या प्रसंग है?
वाल्मीकि रामायण (बालकाण्ड) के अनुसार राजा सगर के साठ हज़ार पुत्र कपिल मुनि के क्रोध से भस्म हो गए थे। उनके वंशज भगीरथ की तपस्या से गंगा पृथ्वी पर आईं और उनके जल से उन पुत्रों का उद्धार हुआ।
क्या ‘जय जय भगीरथनन्दिनि’ भी गंगा की आरती है?
‘जय जय भगीरथनन्दिनि’ गोस्वामी तुलसीदास की विनय पत्रिका का गंगा-स्तुति पद है, जिसे कई जगह आरती के रूप में गाया जाता है। ‘ॐ जय गंगे माता’ उससे अलग, सरल हिंदी आरती है।
यह आरती किसने लिखी?
रचयिता का नाम ज्ञात नहीं है। इसके किसी पद में किसी कवि का नाम (छाप) नहीं आता।
स्रोत
- परंपरागत आरती पाठ
- सगर-पुत्रों और गंगावतरण की कथा: वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड
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पाठ का मिलान: drikpanchang.com, hindi.webdunia.com, bhaktibharat.com
