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श्री सत्यनारायण जी की आरती: जय लक्ष्मी रमणा PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/satyanarayan-aarti/
“जय लक्ष्मी रमणा” भगवान सत्यनारायण (विष्णु) की आरती है, जो सत्यनारायण व्रत-कथा के बाद गाई जाती है। इसमें कथा के पात्रों को याद किया गया है: निर्धन ब्राह्मण, लकड़हारा, वैश्य और ग्वालों के साथ पूजा करने वाला राजा। पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, गृह-प्रवेश और दूसरे शुभ अवसरों पर होने वाली सत्यनारायण पूजा इसी आरती से पूरी होती है।
इस आरती के शब्दों में संस्करणों के बीच थोड़ा अंतर मिलता है: पहली पंक्ति में ‘स्वामी जय लक्ष्मी रमणा’ की जगह ‘श्री जय लक्ष्मी रमणा’, कई जगह आरंभ में ‘ॐ’, पद 4 में ‘जिन पर कृपा करी’ और ‘तिनकी विपत्ति हरी’, और पद 8 में ‘सवायो’ की जगह ‘सवाया’। कुछ संस्करणों में अंतिम पंक्ति ‘कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे’ की जगह ‘ऋद्धि-सिद्धि सुख-संपत्ति, सहज रूप पावे’ है। ‘शिवानन्द स्वामी’ की छाप “ॐ जय शिव ओंकारा” और “जय अम्बे गौरी” में भी मिलती है, पर रचयिता के बारे में पक्की जानकारी नहीं है। गाते समय पहला पद (टेक) हर पद के बाद दोहराया जाता है।
आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सत्यनारायण जी की आरती कब गाई जाती है?
सत्यनारायण व्रत-कथा पूरी होने पर, पूजा के अंत में। यह पूजा हर पूर्णिमा पर, विशेष रूप से शरद पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा पर, और गृह-प्रवेश, विवाह जैसे शुभ अवसरों पर होती है।
आरती में किन कथाओं का उल्लेख है?
सत्यनारायण व्रत-कथा के प्रसंगों का: निर्धन ब्राह्मण, लकड़हारा, वैश्य (साधु व्यापारी) और ग्वालों के साथ पूजा करने वाला राजा तुंगध्वज। परंपरा इस कथा को स्कंद पुराण के रेवा खंड से जोड़ती है।
इस आरती के रचयिता कौन हैं?
प्रचलित पाठ के अंतिम पद में ‘कहत शिवानन्द स्वामी’ आता है, पर कुछ संस्करणों में यह नाम नहीं आता। रचयिता के बारे में प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती।
क्या यह आरती “ॐ जय जगदीश हरे” से अलग है?
हाँ। दोनों विष्णु की आरतियाँ हैं और सत्यनारायण पूजा में अक्सर दोनों गाई जाती हैं, पर “जय लक्ष्मी रमणा” विशेष रूप से सत्यनारायण कथा की आरती है और उसी के प्रसंगों को याद करती है।
स्रोत
- परंपरागत आरती पाठ
- कथा के प्रसंग: सत्यनारायण व्रत-कथा (परंपरा अनुसार स्कंद पुराण, रेवा खंड)
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