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गोवर्धन जी की आरती: श्री गोवर्धन महाराज PDF डाउनलोड करें
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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/govardhan-aarti/
“श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ” ब्रज में गाई जाने वाली गोवर्धन जी (गिरिराज) की लोक आरती है। इसमें गोवर्धन पर्वत पर चढ़ाए जाने वाले पान, फूल और दूध की धार, उनके श्रृंगार और सात कोस की परिक्रमा का वर्णन है। यह गोवर्धन पूजा और अन्नकूट के दिन, और गोवर्धन की परिक्रमा के समय गाई जाती है। इसके रचयिता का नाम ज्ञात नहीं है।
यह ब्रज की लोक आरती है, इसलिए पदों का क्रम और कुछ शब्द अलग-अलग पाठों में बदलते हैं। कई संस्करणों में ‘सात कोस की परिकम्मा’ वाला पद ‘कानन कुण्डल’ वाले पद के बाद आता है; कहीं ‘परिक्रमा’, ‘और चकलेश्वर विश्राम’, ‘कण्ठा सज रहेओ’ और ‘गिरिराज धारण’ मिलता है, और ‘रहेओ’ को ब्रज वर्तनी में ‘रह्यो’ भी लिखा जाता है। गाते समय हर पद के बाद ‘तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ’ और फिर पहली पंक्तियाँ (टेक) दोहराई जाती हैं।
आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोवर्धन जी की आरती कब गाई जाती है?
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट पर, गोबर से बने गोवर्धन की पूजा के बाद, और गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के समय।
गोवर्धन पर्वत की पूजा क्यों होती है?
भागवत पुराण (10.24) में कृष्ण ब्रजवासियों से इंद्र के यज्ञ की जगह गोवर्धन पर्वत, गायों और ब्राह्मणों की पूजा करवाते हैं, और स्वयं एक विशाल रूप धरकर ‘मैं पर्वत हूँ’ कहते हुए भेंट ग्रहण करते हैं। अगले अध्याय (10.25) में वे इंद्र की वर्षा से ब्रज को बचाने के लिए इसी पर्वत को उठाते हैं।
सात कोस की परिक्रमा क्या है?
गोवर्धन पर्वत के चारों ओर लगभग 21 किलोमीटर का परिक्रमा मार्ग, जिसे भक्त पैदल पूरा करते हैं। आरती चकलेश्वर को इसका विश्राम-स्थल कहती है; चकलेश्वर महादेव का मंदिर मानसी गंगा के पास है।
‘तोपे’ और ‘विराज रहेओ’ का क्या अर्थ है?
‘तोपे’ ब्रज भाषा में ‘तुम पर’ है, और ‘विराज रहेओ’ का अर्थ है ‘विराज रहा है’ यानी शोभित है। कई जगह इसे ‘रह्यो’ भी लिखा जाता है।
स्रोत
- परंपरागत (ब्रज) आरती पाठ
- गोवर्धन पूजा और गोवर्धन धारण: भागवत पुराण 10.24 और 10.25
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पाठ का मिलान: drikpanchang.com, bhaktibharat.com, aajtak.in, srimandir.com
