विज्ञापन
श्री कृष्ण की आरती: आरती कुंजबिहारी की PDF डाउनलोड करें
विज्ञापन
अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/kunj-bihari-aarti/
“आरती कुंजबिहारी की” श्रीकृष्ण की सबसे प्रचलित आरतियों में से एक है। ब्रज भाषा की इस आरती में वृंदावन के कुंजों में विहार करने वाले और गोवर्धन धारण करने वाले (गिरिधर) कृष्ण के रूप, मुरली, राधा और गोपियों का वर्णन है। यह जन्माष्टमी, गोवर्धन पूजा, कार्तिक मास और कृष्ण मंदिरों की प्रतिदिन की आरती में गाई जाती है। इसके रचयिता का नाम ज्ञात नहीं है।
कुछ संस्करणों में शब्द थोड़े अलग मिलते हैं, जैसे पद 2 में ‘नंद के आनंद नंदलाला की’ और ‘झलकाता’, पद 3 में ‘गगन से सुमन राशि बरसैं’, पद 4 में ‘कलुष कलि हारिणि’ की जगह ‘सकल मन हारिणि’, और पद 5 में ‘दीन भिखारी’ की जगह ‘दीन दुखारी’। गाते समय हर पद के अंत में ‘श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की’ जोड़ा जाता है और फिर पहली दो पंक्तियाँ (टेक) दोहराई जाती हैं। इसके किसी पद में कवि का नाम (छाप) नहीं आता।
आरती के बाद प्रायः यह श्लोक बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
हर सुबह तिथि, राहु काल और आने वाले व्रत-त्योहार, WhatsApp पर एक छोटे संदेश में।चैनल फ़ॉलो करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
‘कुंजबिहारी’ का क्या अर्थ है?
कुंज यानी लताओं से घिरा उपवन और बिहारी यानी विहार करने वाला। वृंदावन के कुंजों में लीला करने वाले श्रीकृष्ण को कुंजबिहारी कहा जाता है।
‘गिरिधर’ और ‘मुरारी’ का क्या अर्थ है?
गिरिधर यानी पर्वत को धारण करने वाले: भागवत पुराण (10.25) के अनुसार कृष्ण ने इंद्र की वर्षा से ब्रज को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया। मुरारी यानी मुर असुर के शत्रु; भागवत पुराण (10.59) में कृष्ण मुर का वध करते हैं।
यह आरती कब गाई जाती है?
जन्माष्टमी पर, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट पर, कार्तिक मास में, और कृष्ण मंदिरों तथा घरों में प्रतिदिन की आरती में।
कृष्ण की आरती में गंगा का उल्लेख क्यों है?
पद 4 कृष्ण के चरणों की महिमा गाता है। भागवत पुराण (5.17) के अनुसार गंगा भगवान विष्णु के चरण से निकलीं, और कृष्ण विष्णु के अवतार माने जाते हैं; इसलिए आरती कहती है कि जिन चरणों से गंगा प्रकट हुईं, वे बनवारी के चरण हैं।
यह आरती किसने लिखी?
रचयिता का नाम ज्ञात नहीं है। इसके किसी पद में किसी कवि का नाम (छाप) नहीं आता।
स्रोत
- परंपरागत आरती पाठ
- गोवर्धन धारण: भागवत पुराण 10.25
- गंगा का विष्णु के चरण से निकलना: भागवत पुराण 5.17
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ
पाठ का मिलान: drikpanchang.com, bhaktibharat.com, hindi.webdunia.com
