मंत्रगणेश

ॐ गं गणपतये नमः

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 1 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
मंदिर में संध्या आरती: पुजारी के हाथ में पाँच बत्ती वाला पीतल का दीपक, पीछे सजी प्रतिमाएँ और हाथ जोड़े भक्त
चित्र: AI से बनाया गया
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  1. मंत्र

    ॐ गं गणपतये नमः॥

    शब्दार्थ: ॐ = प्रणव, पवित्र अक्षर; गं = गणेश का बीज अक्षर; गणपतये = गणपति को, जो गणों के स्वामी हैं; नमः = नमस्कार। भावार्थ: ॐ, ‘गं’ बीज से जिनकी उपासना होती है, उन गणपति को नमस्कार है।

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/om-gam-ganapataye-namah/

संक्षेप में

“ॐ गं गणपतये नमः” भगवान गणेश का प्रसिद्ध मंत्र है, जिसमें ‘गं’ गणेश का बीज अक्षर है। यह मंत्र गणपति अथर्वशीर्ष में आता है, जहाँ बताया गया है कि ‘ग’, ‘अ’ और अनुस्वार मिलकर यह बीज बनता है। परंपरा में किसी भी काम या पूजा के आरंभ में, बुधवार को और गणेश चतुर्थी पर इसका जप किया जाता है।

स्रोत के बारे में: गणपति अथर्वशीर्ष के जिस अंश को ‘गणेशविद्या’ कहा गया है, उसमें मंत्र बनाने की विधि है: पहले ‘गण’ का पहला अक्षर (ग), फिर वर्णों में पहला (अ), फिर अनुस्वार; इस तरह ‘गं’ बनता है। उसी अंश के अंत में इस विद्या के ऋषि गणक, छंद निचृद् गायत्री और देवता गणपति बताए गए हैं, और “ॐ गं गणपतये नमः” आता है। अलग-अलग संस्करणों में इस अंश की क्रम-संख्या अलग है (कहीं 7, कहीं 9), इसलिए यहाँ संख्या नहीं दी गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

‘गं’ का क्या अर्थ है?

‘गं’ गणेश का बीज अक्षर है। गणपति अथर्वशीर्ष के अनुसार यह ‘ग’, ‘अ’ और अनुस्वार से मिलकर बनता है।

यह मंत्र किस ग्रंथ में है?

गणपति अथर्वशीर्ष (गणपति उपनिषद्) में, ‘गणेशविद्या’ वाले अंश के अंत में। वहाँ इसके ऋषि गणक, छंद निचृद् गायत्री और देवता गणपति बताए गए हैं।

इसका जप कब किया जाता है?

परंपरा में किसी नए काम, यात्रा या पूजा के आरंभ में, बुधवार को, संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी पर। बहुत से लोग 108 बार जप करते हैं; यह संख्या परंपरा की है।

स्रोत

  1. गणपति अथर्वशीर्ष, ‘गणेशविद्या’ अंश (sanskritdocuments.org और greenmesg.org के पाठ)

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पाठ का मिलान: sanskritdocuments.org, greenmesg.org