नामावलीलक्ष्मी

श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली: 108 नाम

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 10 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ
मंदिर में संध्या आरती: पुजारी के हाथ में पाँच बत्ती वाला पीतल का दीपक, पीछे सजी प्रतिमाएँ और हाथ जोड़े भक्त
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  1. 1

    ॐ प्रकृत्यै नमः।

    मूल प्रकृति, जिससे सारी सृष्टि बनती है, उस रूप वाली देवी को नमस्कार।

  2. 2

    ॐ विकृत्यै नमः।

    प्रकृति से बने अनेक रूपों (विकृति) में प्रकट देवी को नमस्कार।

  3. 3

    ॐ विद्यायै नमः।

    विद्या (ज्ञान) स्वरूपा देवी को नमस्कार।

  4. 4

    ॐ सर्वभूतहितप्रदायै नमः।

    सभी प्राणियों का हित करने वाली को नमस्कार।

  5. 5

    ॐ श्रद्धायै नमः।

    श्रद्धा (आस्था) रूपा देवी को नमस्कार।

  6. 6

    ॐ विभूत्यै नमः।

    ऐश्वर्य और समृद्धि (विभूति) रूपा को नमस्कार।

  7. 7

    ॐ सुरभ्यै नमः।

    सुगंधमयी सुरभि (यह कामधेनु गौ का भी नाम है) को नमस्कार।

  8. 8

    ॐ परमात्मिकायै नमः।

    परमात्मा-स्वरूपा, सबकी अंतरात्मा को नमस्कार।

  9. 9

    ॐ वाचे नमः।

    वाणी (वाक्) स्वरूपा देवी को नमस्कार।

  10. 10

    ॐ पद्मालयायै नमः।

    कमल में निवास करने वाली को नमस्कार।

  11. 11

    ॐ पद्मायै नमः।

    कमल जैसी सुंदर पद्मा को नमस्कार।

  12. 12

    ॐ शुचये नमः।

    पवित्र और निर्मल (शुचि) देवी को नमस्कार।

  13. 13

    ॐ स्वाहायै नमः।

    देवताओं को आहुति देते समय बोले जाने वाले शब्द स्वाहा के रूप वाली को नमस्कार।

  14. 14

    ॐ स्वधायै नमः।

    पितरों को अर्पण के समय बोले जाने वाले शब्द स्वधा के रूप वाली को नमस्कार।

  15. 15

    ॐ सुधायै नमः।

    अमृत (सुधा) रूपा को नमस्कार।

  16. 16

    ॐ धन्यायै नमः।

    धन्य, सौभाग्य से भरी देवी को नमस्कार।

  17. 17

    ॐ हिरण्मय्यै नमः।

    सोने जैसी आभा वाली (हिरण्मयी) को नमस्कार।

  18. 18

    ॐ लक्ष्म्यै नमः।

    सौभाग्य और समृद्धि की देवी लक्ष्मी को नमस्कार।

  19. 19

    ॐ नित्यपुष्टायै नमः।

    सदा पुष्ट और भरी-पूरी रहने वाली को नमस्कार।

  20. 20

    ॐ विभावर्यै नमः।

    रात्रि-रूपा या दीप्तिमयी विभावरी को नमस्कार।

  21. 21

    ॐ अदित्यै नमः।

    देवताओं की माता अदिति के रूप वाली को नमस्कार।

  22. 22

    ॐ दित्यै नमः।

    दैत्यों की माता दिति के रूप वाली को नमस्कार।

  23. 23

    ॐ दीप्तायै नमः।

    प्रकाश से चमकती (दीप्ता) देवी को नमस्कार।

  24. 24

    ॐ वसुधायै नमः।

    धन देने वाली, पृथ्वी (वसुधा) रूपा को नमस्कार।

  25. 25

    ॐ वसुधारिण्यै नमः।

    धन (वसु) को धारण करने वाली को नमस्कार।

  26. 26

    ॐ कमलायै नमः।

    कमल से जुड़ी देवी कमला को नमस्कार।

  27. 27

    ॐ कान्तायै नमः।

    मनोहर, प्रिय (कान्ता) देवी को नमस्कार।

  28. 28

    ॐ कामाक्ष्यै नमः।

    मनोहर नेत्रों वाली कामाक्षी को नमस्कार।

  29. 29

    ॐ क्रोधसम्भवायै नमः।

    शब्दार्थ के अनुसार, क्रोध से प्रकट होने वाली को नमस्कार।

  30. 30

    ॐ अनुग्रहपदायै नमः।

    कृपा (अनुग्रह) की आश्रय-स्थली को नमस्कार।

  31. 31

    ॐ बुद्धये नमः।

    बुद्धि (समझ) रूपा को नमस्कार।

  32. 32

    ॐ अनघायै नमः।

    निष्पाप और दोषरहित (अनघा) को नमस्कार।

  33. 33

    ॐ हरिवल्लभायै नमः।

    हरि (विष्णु) की प्रिया को नमस्कार।

  34. 34

    ॐ अशोकायै नमः।

    शोक से रहित (अशोका) देवी को नमस्कार।

  35. 35

    ॐ अमृतायै नमः।

    अमृत-रूपा, अमर (अमृता) को नमस्कार।

  36. 36

    ॐ दीप्तायै नमः।

    तेज से दीप्त (तेजस्विनी) देवी को नमस्कार।

  37. 37

    ॐ लोकशोकविनाशिन्यै नमः।

    संसार के शोक का नाश करने वाली को नमस्कार।

  38. 38

    ॐ धर्मनिलयायै नमः।

    धर्म की निवास-स्थली (धर्मनिलया) को नमस्कार।

  39. 39

    ॐ करुणायै नमः।

    करुणा (दया) रूपा को नमस्कार।

  40. 40

    ॐ लोकमात्रे नमः।

    संसार की माता को नमस्कार।

  41. 41

    ॐ पद्मप्रियायै नमः।

    जिन्हें कमल प्रिय है, उन पद्मप्रिया को नमस्कार।

  42. 42

    ॐ पद्महस्तायै नमः।

    हाथ में कमल धारण करने वाली को नमस्कार।

  43. 43

    ॐ पद्माक्ष्यै नमः।

    कमल जैसे नेत्रों वाली को नमस्कार।

  44. 44

    ॐ पद्मसुन्दर्यै नमः।

    कमल जैसी सुंदर देवी को नमस्कार।

  45. 45

    ॐ पद्मोद्भवायै नमः।

    कमल से प्रकट होने वाली को नमस्कार।

  46. 46

    ॐ पद्ममुख्यै नमः।

    कमल जैसे मुख वाली को नमस्कार।

  47. 47

    ॐ पद्मनाभप्रियायै नमः।

    पद्मनाभ (जिनकी नाभि में कमल है, भगवान विष्णु) की प्रिया को नमस्कार।

  48. 48

    ॐ रमायै नमः।

    आनंद देने वाली रमा (लक्ष्मी का नाम) को नमस्कार।

  49. 49

    ॐ पद्ममालाधरायै नमः।

    कमलों की माला धारण करने वाली को नमस्कार।

  50. 50

    ॐ देव्यै नमः।

    दिव्य और प्रकाशमयी देवी को नमस्कार।

  51. 51

    ॐ पद्मिन्यै नमः।

    कमलों से भरी (पद्मिनी) देवी को नमस्कार।

  52. 52

    ॐ पद्मगन्धिन्यै नमः।

    कमल जैसी सुगंध वाली को नमस्कार।

  53. 53

    ॐ पुण्यगन्धायै नमः।

    पवित्र सुगंध वाली को नमस्कार।

  54. 54

    ॐ सुप्रसन्नायै नमः।

    सदा अत्यंत प्रसन्न रहने वाली को नमस्कार।

  55. 55

    ॐ प्रसादाभिमुख्यै नमः।

    कृपा (प्रसाद) करने को सदा तत्पर रहने वाली को नमस्कार।

  56. 56

    ॐ प्रभायै नमः।

    प्रभा (प्रकाश) रूपा को नमस्कार।

  57. 57

    ॐ चन्द्रवदनायै नमः।

    चंद्रमा जैसे मुख वाली को नमस्कार।

  58. 58

    ॐ चन्द्रायै नमः।

    चंद्रमा जैसी उज्ज्वल और शीतल (चन्द्रा) को नमस्कार।

  59. 59

    ॐ चन्द्रसहोदर्यै नमः।

    चंद्रमा की बहन (परंपरा के अनुसार दोनों समुद्र-मंथन से प्रकट हुए) को नमस्कार।

  60. 60

    ॐ चतुर्भुजायै नमः।

    चार भुजाओं वाली को नमस्कार।

  61. 61

    ॐ चन्द्ररूपायै नमः।

    चंद्रमा जैसे रूप वाली को नमस्कार।

  62. 62

    ॐ इन्दिरायै नमः।

    ऐश्वर्य और शोभा से भरी इन्दिरा (लक्ष्मी का नाम) को नमस्कार।

  63. 63

    ॐ इन्दुशीतलायै नमः।

    चंद्रमा (इन्दु) जैसी शीतल को नमस्कार।

  64. 64

    ॐ आह्लादजनन्यै नमः।

    आनंद (आह्लाद) उत्पन्न करने वाली को नमस्कार।

  65. 65

    ॐ पुष्ट्यै नमः।

    पोषण और बल (पुष्टि) रूपा को नमस्कार।

  66. 66

    ॐ शिवायै नमः।

    मंगलमयी (शिवा) देवी को नमस्कार।

  67. 67

    ॐ शिवकर्यै नमः।

    कल्याण करने वाली को नमस्कार।

  68. 68

    ॐ सत्यै नमः।

    पवित्र और सत्यनिष्ठ (सती) देवी को नमस्कार।

  69. 69

    ॐ विमलायै नमः।

    निर्मल और बेदाग (विमला) देवी को नमस्कार।

  70. 70

    ॐ विश्वजनन्यै नमः।

    विश्व को जन्म देने वाली माता को नमस्कार।

  71. 71

    ॐ तुष्ट्यै नमः।

    संतोष (तुष्टि) रूपा को नमस्कार।

  72. 72

    ॐ दारिद्र्यनाशिन्यै नमः।

    दरिद्रता का नाश करने वाली को नमस्कार।

  73. 73

    ॐ प्रीतिपुष्करिण्यै नमः।

    प्रेम (प्रीति) के कमल-सरोवर जैसी देवी को नमस्कार।

  74. 74

    ॐ शान्तायै नमः।

    शांत स्वभाव वाली को नमस्कार।

  75. 75

    ॐ शुक्लमाल्याम्बरायै नमः।

    सफेद माला और सफेद वस्त्र धारण करने वाली को नमस्कार।

  76. 76

    ॐ श्रियै नमः।

    शोभा और संपदा (श्री) रूपा को नमस्कार।

  77. 77

    ॐ भास्कर्यै नमः।

    सूर्य (भास्कर) जैसी तेजस्वी को नमस्कार।

  78. 78

    ॐ बिल्वनिलयायै नमः।

    बिल्व (बेल) वृक्ष में निवास करने वाली को नमस्कार।

  79. 79

    ॐ वरारोहायै नमः।

    सुंदर और सुडौल देह वाली (वरारोहा) को नमस्कार।

  80. 80

    ॐ यशस्विन्यै नमः।

    यश वाली, कीर्तिमयी को नमस्कार।

  81. 81

    ॐ वसुन्धरायै नमः।

    धन (वसु) धारण करने वाली पृथ्वी (वसुन्धरा) रूपा को नमस्कार।

  82. 82

    ॐ उदाराङ्गायै नमः।

    श्रेष्ठ और सुंदर अंगों वाली को नमस्कार।

  83. 83

    ॐ हरिण्यै नमः।

    हिरनी जैसी कोमल, या सुनहरी आभा वाली हरिणी को नमस्कार।

  84. 84

    ॐ हेममालिन्यै नमः।

    सोने की माला धारण करने वाली को नमस्कार।

  85. 85

    ॐ धनधान्यकर्यै नमः।

    धन और अन्न देने वाली को नमस्कार।

  86. 86

    ॐ सिद्धये नमः।

    सफलता और पूर्णता (सिद्धि) रूपा को नमस्कार।

  87. 87

    ॐ स्त्रैणसौम्यायै नमः।

    नारी-सुलभ कोमलता से भरी सौम्य देवी को नमस्कार।

  88. 88

    ॐ शुभप्रदायै नमः।

    शुभ (मंगल) देने वाली को नमस्कार।

  89. 89

    ॐ नृपवेश्मगतानन्दायै नमः।

    राजाओं के महलों में आनंद से निवास करने वाली को नमस्कार।

  90. 90

    ॐ वरलक्ष्म्यै नमः।

    वर देने वाली, श्रेष्ठ लक्ष्मी (वरलक्ष्मी) को नमस्कार।

  91. 91

    ॐ वसुप्रदायै नमः।

    धन (वसु) देने वाली को नमस्कार।

  92. 92

    ॐ शुभायै नमः।

    शुभ और सुंदर (शुभा) देवी को नमस्कार।

  93. 93

    ॐ हिरण्यप्राकारायै नमः।

    जिनका धाम सोने के परकोटे (प्राकार) से घिरा है, उन हिरण्यप्राकारा को नमस्कार।

  94. 94

    ॐ समुद्रतनयायै नमः।

    समुद्र की पुत्री (परंपरा के अनुसार समुद्र-मंथन से प्रकट) को नमस्कार।

  95. 95

    ॐ जयायै नमः।

    विजय (जया) रूपा को नमस्कार।

  96. 96

    ॐ मङ्गलादेव्यै नमः।

    मंगल करने वाली देवी (मङ्गला देवी) को नमस्कार।

  97. 97

    ॐ विष्णुवक्षस्स्थलस्थितायै नमः।

    भगवान विष्णु के वक्षःस्थल (छाती) पर निवास करने वाली को नमस्कार।

  98. 98

    ॐ विष्णुपत्न्यै नमः।

    भगवान विष्णु की पत्नी को नमस्कार।

  99. 99

    ॐ प्रसन्नाक्ष्यै नमः।

    प्रसन्न और कृपालु नेत्रों वाली को नमस्कार।

  100. 100

    ॐ नारायणसमाश्रितायै नमः।

    नारायण के साथ, उनके आश्रय में रहने वाली को नमस्कार।

  101. 101

    ॐ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः।

    दरिद्रता को मिटा देने वाली को नमस्कार।

  102. 102

    ॐ देव्यै नमः।

    दिव्य स्वरूप वाली देवी को नमस्कार।

  103. 103

    ॐ सर्वोपद्रववारिण्यै नमः।

    सब विपत्तियों (उपद्रवों) को रोकने वाली को नमस्कार।

  104. 104

    ॐ नवदुर्गायै नमः।

    दुर्गा के नौ रूपों वाली नवदुर्गा को नमस्कार।

  105. 105

    ॐ महाकाल्यै नमः।

    महान काली, यानी महाकाली रूपा को नमस्कार।

  106. 106

    ॐ ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकायै नमः।

    ब्रह्मा, विष्णु और शिव जिनके ही स्वरूप हैं, उन देवी को नमस्कार।

  107. 107

    ॐ त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमः।

    भूत, वर्तमान और भविष्य, तीनों कालों का ज्ञान रखने वाली को नमस्कार।

  108. 108

    ॐ भुवनेश्वर्यै नमः।

    सारे लोकों (भुवनों) की स्वामिनी को नमस्कार।

श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली: 108 नाम PDF डाउनलोड करें

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अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/lakshmi-108-naam/

संक्षेप में

इस नामावली में माँ लक्ष्मी के 108 नाम हैं, हर नाम “ॐ … नमः” के रूप में। यह “ॐ प्रकृत्यै नमः” से शुरू होने वाली प्रचलित सूची है, जो लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र (“प्रकृतिं विकृतिं विद्यां…”) के नामों से बनी है। परंपरा में अर्चना के समय हर नाम पर कुमकुम, अक्षत या फूल (मिले तो कमल) चढ़ाते हैं। शुक्रवार, दीपावली की लक्ष्मी पूजा और शरद पूर्णिमा पर इसका पाठ प्रचलित है।

यह “श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावलिः” है। इसका पद्य रूप “प्रकृतिं विकृतिं विद्यां…” से शुरू होने वाला लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र है, जिसमें देवी के पूछने पर ईश्वर (शिव) ये नाम बताते हैं। इसी शीर्षक से लक्ष्मी की दूसरी सूचियाँ भी छपती हैं, जैसे “ब्रह्मजा, ब्रह्मसुखदा, ब्रह्मण्या…” वाली और “शुद्धलक्ष्मी, बुद्धिलक्ष्मी, वरलक्ष्मी…” वाली; अष्टलक्ष्मी की नामावलियाँ भी अलग हैं। स्रोतों के मुख्य पाठभेद: नाम 29 कुछ स्रोतों में “क्षीरोदसम्भवा” (क्षीरसागर से प्रकट) है। नाम 30 कई प्रचलित सूचियों में “अनुग्रहप्रदा” (कृपा देने वाली) है; स्तोत्र के अधिकतर पाठ और एक छपी नामावली “अनुग्रहपदा” पढ़ते हैं। स्तोत्र के कई पाठों में नाम 87 “सदा सौम्या” और नाम 103 “सर्वोपद्रवहारिणी” है। Drik Panchang की नामावली में नाम 23 “दीपा” और 68 “सत्या” है, और एक छपे स्तोत्र में नाम 28 “कामाक्षी” की जगह “क्षमा” है। “दीप्ता” (23, 36) और “देवी” (50, 102) स्तोत्र में ही दो बार आते हैं। स्तोत्र के “मङ्गलां देवीं” को सब नामावलियाँ एक नाम (96) गिनती हैं; इसी से 108 पूरे होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली में कितने नाम हैं और ये कहाँ से हैं?

इसमें 108 नाम हैं। ये लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र (“प्रकृतिं विकृतिं विद्यां…”) के श्लोकों से लिए गए हैं, जिसमें देवी के पूछने पर ईश्वर (शिव) ये नाम बताते हैं। जिन स्रोतों की पुष्पिका हमने पढ़ी, उनमें किसी पुराण या तन्त्र का नाम नहीं है।

नामावली से अर्चना कैसे की जाती है?

परंपरा में हर नाम “ॐ … नमः” बोलकर देवी को थोड़ा कुमकुम, कुछ अक्षत या एक फूल (मिले तो कमल) अर्पित करते हैं। इस तरह 108 नामों पर 108 बार अर्पण होता है।

नामावली और स्तोत्र में क्या अंतर है?

स्तोत्र में यही नाम श्लोकों में पिरोए गए हैं, साथ में आरंभ का संवाद, ध्यान और अंत में फलश्रुति है। नामावली में हर नाम अलग से “ॐ … नमः” के साथ बोला जाता है, ताकि हर नाम पर कुछ अर्पित किया जा सके।

इसका पाठ कब किया जाता है?

परंपरा में शुक्रवार, दीपावली की लक्ष्मी पूजा और शरद पूर्णिमा पर इसका पाठ प्रचलित है। स्तोत्र की फलश्रुति में भी भृगुवार (शुक्रवार) को एक वर्ष तक पाठ करने की बात आती है; यह ग्रंथ का अपना कथन है।

अलग-अलग किताबों में कुछ नाम अलग क्यों मिलते हैं?

इस स्तोत्र की छपी और ऑनलाइन प्रतियों में कुछ शब्दों के पाठ अलग हैं, जैसे 29वें नाम में “क्रोधसम्भवा” और “क्षीरोदसम्भवा”। इस पृष्ठ पर वह पाठ है जो देखे गए अधिकतर स्रोतों में मिला; मुख्य भेद ऊपर टिप्पणी में दिए हैं।

स्रोत

  1. श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावलिः १, sanskritdocuments.org (Shri Devi Kumar, Sunder Hattangadi, Easwaran और Tanvir Chowdhury द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ)
  2. श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (“प्रकृतिं विकृतिं विद्यां…”), sanskritdocuments.org (Ravin Bhalekar द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ), पुष्पिका सहित
  3. देवी लक्ष्मी की अष्टोत्तर शतनामावली, drikpanchang.com
  4. लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्, drikpanchang.com
  5. बृहत्स्तोत्ररत्नाकर, भाग 2, सं. नारायण राम आचार्य, निर्णयसागर प्रेस, चौथा संस्करण 1956: श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (archive.org पर स्कैन, OCR पाठ)
  6. देवी स्तोत्राणि, गिरि ट्रेडिंग एजेंसी: श्री महालक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, पुष्पिका सहित (archive.org पर स्कैन, OCR पाठ)
  7. पूजाविधिः (शिवपञ्चायतन-पूजा-पद्धतिः) में लक्ष्मी की अष्टोत्तरशतनामावली (archive.org पर स्कैन, OCR पाठ)
  8. स्तुति सञ्चय, कृष्णानन्द गिरि, मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट, दिल्ली: इसी स्तोत्र के कुछ श्लोक (archive.org पर स्कैन, OCR पाठ)
  9. श्री लक्ष्मी के 108 नाम, bhaktibharat.com (मिलान के लिए)
  10. लक्ष्मी की दूसरी 108-नाम सूचियाँ (“ब्रह्मजा …” और “शुद्धलक्ष्मी …”), sanskritdocuments.org

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पाठ का मिलान: sanskritdocuments.org, sanskritdocuments.org, drikpanchang.com, drikpanchang.com, archive.org, archive.org, archive.org, archive.org, bhaktibharat.com, sanskritdocuments.org, sanskritdocuments.org, sanskritdocuments.org