विज्ञापन
श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली: 108 नाम PDF डाउनलोड करें
विज्ञापन
अर्थ, स्रोत और दूसरी आरती-चालीसा: sanatanbodh.in/stotra/lakshmi-108-naam/
इस नामावली में माँ लक्ष्मी के 108 नाम हैं, हर नाम “ॐ … नमः” के रूप में। यह “ॐ प्रकृत्यै नमः” से शुरू होने वाली प्रचलित सूची है, जो लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र (“प्रकृतिं विकृतिं विद्यां…”) के नामों से बनी है। परंपरा में अर्चना के समय हर नाम पर कुमकुम, अक्षत या फूल (मिले तो कमल) चढ़ाते हैं। शुक्रवार, दीपावली की लक्ष्मी पूजा और शरद पूर्णिमा पर इसका पाठ प्रचलित है।
यह “श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावलिः” है। इसका पद्य रूप “प्रकृतिं विकृतिं विद्यां…” से शुरू होने वाला लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र है, जिसमें देवी के पूछने पर ईश्वर (शिव) ये नाम बताते हैं। इसी शीर्षक से लक्ष्मी की दूसरी सूचियाँ भी छपती हैं, जैसे “ब्रह्मजा, ब्रह्मसुखदा, ब्रह्मण्या…” वाली और “शुद्धलक्ष्मी, बुद्धिलक्ष्मी, वरलक्ष्मी…” वाली; अष्टलक्ष्मी की नामावलियाँ भी अलग हैं। स्रोतों के मुख्य पाठभेद: नाम 29 कुछ स्रोतों में “क्षीरोदसम्भवा” (क्षीरसागर से प्रकट) है। नाम 30 कई प्रचलित सूचियों में “अनुग्रहप्रदा” (कृपा देने वाली) है; स्तोत्र के अधिकतर पाठ और एक छपी नामावली “अनुग्रहपदा” पढ़ते हैं। स्तोत्र के कई पाठों में नाम 87 “सदा सौम्या” और नाम 103 “सर्वोपद्रवहारिणी” है। Drik Panchang की नामावली में नाम 23 “दीपा” और 68 “सत्या” है, और एक छपे स्तोत्र में नाम 28 “कामाक्षी” की जगह “क्षमा” है। “दीप्ता” (23, 36) और “देवी” (50, 102) स्तोत्र में ही दो बार आते हैं। स्तोत्र के “मङ्गलां देवीं” को सब नामावलियाँ एक नाम (96) गिनती हैं; इसी से 108 पूरे होते हैं।
हर सुबह तिथि, राहु काल और आने वाले व्रत-त्योहार, WhatsApp पर एक छोटे संदेश में।चैनल फ़ॉलो करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली में कितने नाम हैं और ये कहाँ से हैं?
इसमें 108 नाम हैं। ये लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र (“प्रकृतिं विकृतिं विद्यां…”) के श्लोकों से लिए गए हैं, जिसमें देवी के पूछने पर ईश्वर (शिव) ये नाम बताते हैं। जिन स्रोतों की पुष्पिका हमने पढ़ी, उनमें किसी पुराण या तन्त्र का नाम नहीं है।
नामावली से अर्चना कैसे की जाती है?
परंपरा में हर नाम “ॐ … नमः” बोलकर देवी को थोड़ा कुमकुम, कुछ अक्षत या एक फूल (मिले तो कमल) अर्पित करते हैं। इस तरह 108 नामों पर 108 बार अर्पण होता है।
नामावली और स्तोत्र में क्या अंतर है?
स्तोत्र में यही नाम श्लोकों में पिरोए गए हैं, साथ में आरंभ का संवाद, ध्यान और अंत में फलश्रुति है। नामावली में हर नाम अलग से “ॐ … नमः” के साथ बोला जाता है, ताकि हर नाम पर कुछ अर्पित किया जा सके।
इसका पाठ कब किया जाता है?
परंपरा में शुक्रवार, दीपावली की लक्ष्मी पूजा और शरद पूर्णिमा पर इसका पाठ प्रचलित है। स्तोत्र की फलश्रुति में भी भृगुवार (शुक्रवार) को एक वर्ष तक पाठ करने की बात आती है; यह ग्रंथ का अपना कथन है।
अलग-अलग किताबों में कुछ नाम अलग क्यों मिलते हैं?
इस स्तोत्र की छपी और ऑनलाइन प्रतियों में कुछ शब्दों के पाठ अलग हैं, जैसे 29वें नाम में “क्रोधसम्भवा” और “क्षीरोदसम्भवा”। इस पृष्ठ पर वह पाठ है जो देखे गए अधिकतर स्रोतों में मिला; मुख्य भेद ऊपर टिप्पणी में दिए हैं।
स्रोत
- श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावलिः १, sanskritdocuments.org (Shri Devi Kumar, Sunder Hattangadi, Easwaran और Tanvir Chowdhury द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ)
- श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (“प्रकृतिं विकृतिं विद्यां…”), sanskritdocuments.org (Ravin Bhalekar द्वारा प्रूफ़ पढ़ा गया पाठ), पुष्पिका सहित
- देवी लक्ष्मी की अष्टोत्तर शतनामावली, drikpanchang.com
- लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्, drikpanchang.com
- बृहत्स्तोत्ररत्नाकर, भाग 2, सं. नारायण राम आचार्य, निर्णयसागर प्रेस, चौथा संस्करण 1956: श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (archive.org पर स्कैन, OCR पाठ)
- देवी स्तोत्राणि, गिरि ट्रेडिंग एजेंसी: श्री महालक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, पुष्पिका सहित (archive.org पर स्कैन, OCR पाठ)
- पूजाविधिः (शिवपञ्चायतन-पूजा-पद्धतिः) में लक्ष्मी की अष्टोत्तरशतनामावली (archive.org पर स्कैन, OCR पाठ)
- स्तुति सञ्चय, कृष्णानन्द गिरि, मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट, दिल्ली: इसी स्तोत्र के कुछ श्लोक (archive.org पर स्कैन, OCR पाठ)
- श्री लक्ष्मी के 108 नाम, bhaktibharat.com (मिलान के लिए)
- लक्ष्मी की दूसरी 108-नाम सूचियाँ (“ब्रह्मजा …” और “शुद्धलक्ष्मी …”), sanskritdocuments.org
कुछ गलत लगा? गलती बताएँ
पाठ का मिलान: sanskritdocuments.org, sanskritdocuments.org, drikpanchang.com, drikpanchang.com, archive.org, archive.org, archive.org, archive.org, bhaktibharat.com, sanskritdocuments.org, sanskritdocuments.org, sanskritdocuments.org
