व्रत और पर्व

वैकुंठ एकादशी 2026 कब है: 20 दिसंबर

रविवार, 20 दिसंबर 2026

मार्गळि (धनु) माह की शुक्ल एकादशी; इस वर्ष मोक्षदा एकादशी के दिन

60 दिन बाद
कोड से बना चित्र: भोर से पहले के तारों भरे आकाश में मंदिर का पत्थर का द्वार, जिसके ऊँचे लकड़ी के किवाड़ खुले हैं और भीतर से सुनहरी रोशनी आ रही है, दोनों ओर गोपुरम, रास्ते के किनारे दीयों की कतारें और ज़मीन पर कोलम

व्रत और पारण का समय

पारण (व्रत खोलना)द्वादशी को, हरि वासर के बाद
7:09–9:13 AM (21 दिस॰)
हरि वासर समाप्त
1:36 AM (21 दिस॰)
एकादशी तिथि
10:10 PM (19 दिस॰) से 8:16 PM तक
द्वादशी समाप्त
5:37 PM (21 दिस॰)

पारण अगले दिन (द्वादशी) का है; तारीख़ कोष्ठक में दी गई है। तिरुमला के वैकुंठ द्वार दर्शन और श्रीरंगम के परमपद वासल खुलने का समय मंदिर घोषित करते हैं।

रविवार, 20 दिसंबर 2026 के लिए, भारतीय मानक समय में, चुने हुए शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रह-स्थिति से। अलग-अलग पंचांगों में 1–2 मिनट का अंतर सामान्य है। गणना कैसे होती है

संक्षेप में

वैकुंठ एकादशी 2026 में 20 दिसंबर, रविवार को है। यह तमिल सौर माह मार्गळि (धनु माह, 16 दिसंबर से) की शुक्ल एकादशी है, और 2026 में यही दिन उत्तर भारत के पंचांग की मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती भी है। एकादशी तिथि 19 दिसंबर की रात 10:10 बजे से 20 दिसंबर की रात 8:16 बजे तक है, इसलिए स्मार्त और वैष्णव दोनों का व्रत 20 दिसंबर को है, और पारण 21 दिसंबर की सुबह है: चेन्नई में 6:26 से 8:42 बजे तक। तिरुमला में वैकुंठ द्वार दर्शन और श्रीरंगम में परमपद वासल (स्वर्ग वासल) खुलने की तारीख और समय मंदिर घोषित करते हैं; 18 अक्टूबर 2026 तक 2026 की घोषणा नहीं आई थी।

संपादन: SanatanBodh संपादकीय टीमअंतिम अपडेट: 11 स्रोतAI की सहायता से तैयार, स्रोतों से जाँचा गयागलती बताएँ

शहर-वार समय

एकादशी तिथि हर शहर में एक ही है; 21 दिसंबर का पारण शहर के सूर्योदय से बदलता है। दूसरे शहर के लिए ऊपर के बॉक्स में शहर चुनें।

शहरपारण (व्रत खोलना)
चेन्नई6:26–8:42 AM (21 दिस॰)
तिरुपति6:31–8:46 AM (21 दिस॰)
हैदराबाद6:41–8:54 AM (21 दिस॰)
बेंगलुरु6:37–8:53 AM (21 दिस॰)
मदुरै6:29–8:48 AM (21 दिस॰)

एक नज़र में

तारीख
20 दिसंबर 2026, रविवार (तमिल माह मार्गळि का 5वाँ दिन)
एकादशी तिथि
19 दिसंबर रात 10:10 से 20 दिसंबर रात 8:16 बजे तक (Drik Panchang: 10:09 PM से 8:14 PM)
पारण, 21 दिसंबर
चेन्नई 6:26–8:42, हैदराबाद 6:41–8:54, बेंगलुरु 6:37–8:53 बजे सुबह
स्मार्त और वैष्णव
दोनों का व्रत 20 दिसंबर को
उत्तर भारत में इसी दिन
मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती
तेलुगु नाम
मुक्कोटि एकादशी
तिरुमला
वैकुंठ द्वार दर्शन; 2025-26 में 10 दिन (30 दिसंबर से 8 जनवरी); 2026 की तारीखें TTD घोषित करेगा
श्रीरंगम
मार्गळि का 20 दिन का उत्सव: पगल पत्तु, फिर रा पत्तु; रा पत्तु के पहले दिन परमपद वासल
आराध्य
विष्णु: तिरुमला में वेंकटेश्वर, श्रीरंगम में रंगनाथ

वैकुंठ एकादशी और मोक्षदा एकादशी: इस वर्ष एक ही दिन

दक्षिण भारत में वैकुंठ एकादशी सौर माह से तय होती है: सौर माह धनु (तमिल में मार्गळि; इस महीने को धनुर्मास भी कहते हैं) की शुक्ल एकादशी। उत्तर भारत के पंचांग चंद्र माह से चलते हैं, और मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहते हैं। 2026 में धनु संक्रांति 16 दिसंबर की सुबह 10:31 बजे है, इसलिए मार्गळि 16 दिसंबर से है, और 20 दिसंबर की शुक्ल एकादशी दोनों गिनतियों में आती है। Drik Panchang का चेन्नई का तमिल पंचांग भी 20 दिसंबर को "Vaikuntha Ekadashi" और "Mokshada Ekadashi" दोनों लिखता है। हर वर्ष ऐसा नहीं होता: सौर और चंद्र माह के इस मेल से वैकुंठ एकादशी कभी मोक्षदा एकादशी के दिन पड़ती है और कभी अगले चंद्र माह की, पौष शुक्ल (पुत्रदा) एकादशी के दिन। जैसे 2025 में वैकुंठ एकादशी 30 दिसंबर को थी (PTI), मोक्षदा एकादशी के लगभग एक महीने बाद।

व्रत, पारण और कथा

इस वर्ष वैकुंठ एकादशी का व्रत वही है जो मोक्षदा एकादशी का: 20 दिसंबर को व्रत और 21 दिसंबर की सुबह, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग, रात 1:36 बजे तक) के बाद, पारण। एकादशी 20 दिसंबर के सूर्योदय से पहले, 19 दिसंबर की रात से लगी है, और 21 दिसंबर के सूर्योदय से पहले खत्म हो जाती है, इसलिए दशमी-वेध या दूसरे दिन की वैष्णव एकादशी का प्रश्न नहीं है: स्मार्त और वैष्णव दोनों 20 दिसंबर को व्रत रखते हैं। व्रत के नियम, पूजा और राजा वैखानस की कथा मोक्षदा एकादशी के पन्ने पर हैं; उन्हें यहाँ दोहराया नहीं गया। अपने शहर का पारण ऊपर के बॉक्स में और नीचे की तालिका में देखें।

तिरुमला: वैकुंठ द्वार दर्शन

तिरुमला के श्री वेंकटेश्वर मंदिर में वैकुंठ एकादशी पर मंदिर का वैकुंठ द्वार खोला जाता है, जो इस अवधि के अलावा पूरे वर्ष बंद रहता है (PTI)। परंपरा से माना जाता है कि इस द्वार से होकर जाना भक्त को जन्म-मृत्यु के चक्र से छुड़ाता है (Deccan Chronicle, 3 जनवरी 2023)। 2025-26 में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) ने द्वार 10 दिन खुला रखा।

2025-26 में

वैकुंठ द्वार दर्शन 30 दिसंबर 2025 (वैकुंठ एकादशी) से 8 जनवरी 2026 तक, 10 दिन, रहा। पहले तीन दिनों के टोकन TTD ने ऑनलाइन पंजीकरण के बाद ड्रॉ (e-dip) से दिए, और काउंटर पर ऑफ़लाइन टोकन नहीं दिए गए।

PTI (The Week), 30 दिसंबर 2025; The Federal, 18 नवंबर 2025

2026 में

18 अक्टूबर 2026 तक TTD ने 2026 के वैकुंठ द्वार दर्शन की तारीखें और टोकन की व्यवस्था घोषित नहीं की थी। टोकन के नियम हर वर्ष बदल सकते हैं; यात्रा से पहले TTD की आधिकारिक वेबसाइट ttdevasthanams.ap.gov.in देखें।

श्रीरंगम: पगल पत्तु, रा पत्तु और परमपद वासल

श्रीरंगम (तिरुचिरापल्ली) का रंगनाथस्वामी मंदिर 108 दिव्य देशों में पहला गिना जाता है, और श्रीवैष्णव परंपरा इसे "भूलोक वैकुंठ" कहती है। यहाँ मार्गळि में बीस दिन का उत्सव होता है।

पगल पत्तु और रा पत्तु

पहले दस दिन "पगल पत्तु" (दिन के दस) और अगले दस "रा पत्तु" (रात के दस) कहलाते हैं। रा पत्तु का पहला दिन वैकुंठ एकादशी है। इन दिनों अरैयर सेवै होती है, जिसमें अरैयर नालायिर दिव्य प्रबंधम् के पद गाकर और अभिनय से प्रस्तुत करते हैं; यह परंपरा 10वीं सदी के नाथमुनि से मानी जाती है।

Wikipedia: Ranganathaswamy Temple, Srirangam (Madras District Gazetteers, 1907; Cutler, 1987)

परमपद वासल

वैकुंठ एकादशी की सुबह उत्सव-मूर्ति (नम्पेरुमाळ) परमपद वासल, जिसे स्वर्ग वासल भी कहते हैं, से होकर सहस्र-स्तंभ मंडप में लाई जाती है। यह द्वार रा पत्तु के दस दिनों में ही खुलता है, और यात्रियों की मान्यता है कि इससे होकर जाने वाला वैकुंठ पाता है। 2025 में पगल पत्तु 20 दिसंबर को शुरू हुआ और परमपद वासल 30 दिसंबर की सुबह 5:45 बजे खुलना था (ANI)।

Wikipedia (Cole, 1882); ANI, 20 दिसंबर 2025

2026 में

2025 में पगल पत्तु एकादशी से दस दिन पहले शुरू हुआ था। 2026 के उत्सव की तारीखें और परमपद वासल का समय मंदिर (अरुळ्मिगु श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, HR&CE) घोषित करेगा; 18 अक्टूबर 2026 तक घोषणा नहीं मिली।

Drik Panchang से मिलान

इस पन्ने के समय हमारी पंचांग गणना से हैं (भारतीय मानक समय, लाहिड़ी अयनांश)। Drik Panchang की एकादशी सूची (नई दिल्ली) में मोक्षदा एकादशी की तिथि 19 दिसंबर 10:09 PM से 20 दिसंबर 8:14 PM तक और पारण 21 दिसंबर 7:10 से 9:13 बजे तक है; हमारी गणना तिथि 10:10 PM से 8:16 PM और नई दिल्ली का पारण 7:09 से 9:13 देती है। तारीख 20 दिसंबर Drik के चेन्नई के तमिल पंचांग में भी है। Drik का वैकुंठ एकादशी का अपना पन्ना 18 अक्टूबर को reCAPTCHA के कारण नहीं खुला, इसलिए दक्षिण के शहरों का पारण हमारी गणना से है, उसी नियम से जो नई दिल्ली में Drik से मिलता है: पारण द्वादशी की सुबह, हरि वासर के बाद, दिन के पहले पाँचवें भाग में।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैकुंठ एकादशी 2026 कब है?

20 दिसंबर, रविवार को। एकादशी तिथि 19 दिसंबर की रात 10:10 बजे से 20 दिसंबर की रात 8:16 बजे तक है, और Drik Panchang का तमिल पंचांग (चेन्नई) भी वैकुंठ एकादशी 20 दिसंबर को देता है।

वैकुंठ एकादशी 2026 का पारण कब है?

21 दिसंबर, सोमवार की सुबह, हरि वासर के बाद: चेन्नई में 6:26 से 8:42, हैदराबाद में 6:41 से 8:54, बेंगलुरु में 6:37 से 8:53 और तिरुपति में 6:31 से 8:46 बजे तक। अपने शहर का समय ऊपर के बॉक्स में देखें।

क्या वैकुंठ एकादशी और मोक्षदा एकादशी एक ही हैं?

2026 में दोनों 20 दिसंबर को हैं। पर नियम अलग हैं: वैकुंठ एकादशी सौर माह धनु (तमिल मार्गळि) की शुक्ल एकादशी है, और मोक्षदा एकादशी चंद्र माह मार्गशीर्ष की शुक्ल एकादशी। इसलिए कुछ वर्षों में वैकुंठ एकादशी अगले चंद्र माह की पौष शुक्ल एकादशी को पड़ती है, जैसे 2025 में 30 दिसंबर को।

क्या स्मार्त और वैष्णव व्रत अलग-अलग दिन हैं?

2026 में नहीं। एकादशी 19 दिसंबर की रात 10:10 बजे लगती है, यानी 20 दिसंबर के अरुणोदय में दशमी नहीं है, और 21 दिसंबर के सूर्योदय से पहले खत्म हो जाती है। इसलिए दोनों संप्रदायों का व्रत 20 दिसंबर को है।

तिरुमला में वैकुंठ द्वार दर्शन 2026 कब से है?

18 अक्टूबर 2026 तक TTD ने 2026 की तारीखें घोषित नहीं की थीं। 2025-26 में दर्शन वैकुंठ एकादशी (30 दिसंबर 2025) से 10 दिन, 8 जनवरी 2026 तक, रहा (PTI)। 2026 की तारीखें और टोकन के नियम TTD की वेबसाइट ttdevasthanams.ap.gov.in पर देखें।

श्रीरंगम में परमपद वासल (स्वर्ग वासल) कब खुलेगा?

परंपरा से वैकुंठ एकादशी की सुबह, यानी 2026 में 20 दिसंबर की सुबह, रा पत्तु के पहले दिन। 2025 में यह 30 दिसंबर की सुबह 5:45 बजे खुलना था (ANI)। 2026 का समय श्री रंगनाथस्वामी मंदिर घोषित करेगा।

मुक्कोटि एकादशी क्या है?

तेलुगु भाषी क्षेत्रों (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना) में वैकुंठ एकादशी को मुक्कोटि एकादशी कहते हैं (Wikipedia: Vaikuntha Ekadashi)। 2026 में यह 20 दिसंबर को है।

वैकुंठ एकादशी 2027 में कब है?

दिसंबर 2027 में नहीं। 2027 में मार्गळि माह 16 दिसंबर से है, और उससे पहले की शुक्ल एकादशी (मोक्षदा, 9 दिसंबर) मार्गळि में नहीं आती; Drik Panchang के तमिल पंचांग में भी दिसंबर 2027 में वैकुंठ एकादशी नहीं है। अगली वैकुंठ एकादशी जनवरी 2028 में मार्गळि की शुक्ल एकादशी को होगी।

स्रोत

  1. Drik Panchang: तमिल पंचांग, चेन्नई, दिसंबर 2026 और दिसंबर 2027 (20 दिसंबर 2026: Vaikuntha Ekadashi, Mokshada Ekadashi), 18 अक्टूबर 2026 को पढ़ा
  2. Drik Panchang: एकादशी सूची 2026, नई दिल्ली (मोक्षदा एकादशी: तिथि 19 दिसंबर 10:09 PM से 20 दिसंबर 8:14 PM, पारण 21 दिसंबर 7:10–9:13)
  3. PTI (The Week), 30 दिसंबर 2025: तिरुमला में वैकुंठ द्वार दर्शन 30 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026; "Vaikunta Dwaram will not be opened in the whole year except during this auspicious period"
  4. The Federal, 18 नवंबर 2025: TTD बोर्ड का निर्णय, 10 दिन का वैकुंठ द्वार दर्शन, केवल ऑनलाइन टोकन (e-dip)
  5. ANI (Devdiscourse), 20 दिसंबर 2025: श्रीरंगम में पगल पत्तु आरंभ; परमपद वासल 30 दिसंबर 2025, सुबह 5:45
  6. Deccan Chronicle, 3 जनवरी 2023: तिरुमला में वैकुंठ द्वार से होकर जाना, "considered to relieve devotees from the cycle of rebirth"
  7. Wikipedia: Ranganathaswamy Temple, Srirangam (Madras District Gazetteers 1907; Cole 1882; Cutler 1987; Mittal & Thursby 2005) और Vaikuntha Ekadashi (सौर माह धनु, मोक्षदा या पुत्रदा एकादशी से मेल, मुक्कोटि एकादशी)
  8. TTD: ttdevasthanams.ap.gov.in (2026 की घोषणा के लिए)
  9. व्रत के नियम और मोक्षदा एकादशी की कथा: इस साइट का मोक्षदा एकादशी पन्ना
  10. वैकुंठ द्वार की मान्यता: श्रीवैष्णव परंपरा
  11. नक्षत्र, तिथि, सूर्यास्त और पारण: SanatanBodh पंचांग गणना (astronomy-engine, लाहिड़ी अयनांश); Drik Panchang के तमिल पंचांग (चेन्नई) और एकादशी सूची (नई दिल्ली) से मिलान (18 अक्टूबर 2026)

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